
इस कहानी की शुरुआत आज से चार साल पहले कनाडा में हुई। चार साल पहले भारत के निवासी एक व्यक्ति की मुलाकात कनेडियन युवती से हुई थी। जहा दोनों एक-दूसरे के संपर्क में आए। इसके बाद अक्टूबर 2020 में दोनों ने शादी कर ली। शादी के चार महीने बाद ही पति पत्नि को खबर मिली कि भारत में रह रहे उनके पिता को हार्ट-अटैक हो गया है। फरवरी 2021 में पति पत्नि दोनों भारत आ गए , ताकि पिता की सेवा कर सकें। दोनों उनकी देखभाल करने लगे। इसी दौरान पति को कोरोना हो गया। उनका इलाज करवाया गया। लेकिन 10 मई से तबीयत अधिक बिगड़ गई। इसके चलते उन्हें वडोदरा के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया गया। लेकिन उनकी तबियत में सुधार होने की बजाय सेहत लगातार गिरने लगी। फेफड़ों का संक्रमण इतना बढ़ गया कि फेफड़ों ने काम करना ही बंद कर दिया। हालात यह थे कि दो महीने से वह वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे।
तीन दिन पहले की बात है जब डॉक्टरों ने उसकी पत्नी और सास-ससुर को बुला कर कहा कि मरीज की तबीयत में सुधार की गुंजाइश नहीं के बराबर है। हालत ऐसी है कि उनके पास ज्यादा समय नहीं बचा है। डॉक्टरो ने मरीज की जिंदगी को ज्यादा से ज्यादा तीन दिन का समय बताया। यह सुन कर कनेडियन पत्नी ने डॉक्टर से कहा कि वह अपने पति के अंश से मातृत्व धारण करना चाहती हूं। इसके लिए वह उनके स्पर्म की इच्छुक है। डॉक्टरों ने पत्नी के प्रेम के प्रति सम्मान जताया और कहा कि मेडिको लीगल एक्ट के मुताबिक पति की मंजूरी के बिना स्पर्म सैंपल नहीं लिया जा सकता है।
लाख गुजारिश करने के बाद भी डॉक्टर महिला को स्पर्म देने के लिए नहीं माने। इसके बाद अपने सास-ससुर के साथ मिलकर कनेडियन महिला ने गुजरात हाईकोर्ट में गुहार लगाने का फैसला किया। यहां यह भी बताना जरुरी है कि हाईकोर्ट जाने से पहले डॉक्टरों ने केनेडियन महिला को यह बता दिया था कि उसके पति के पास सिर्फ 24 घंटे का समय बचा है। गुजरात हाईकोर्ट में याचिका लगा कर केनेडियन महिला ने दूसरे दिन अर्जेंट सुनवाई की गुहार लगाई। हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बेंच के सामने यह मामला सुनवाई के लिए पहुंचा। 15 मिनट बाद ही कोर्ट ने उनके हक में फैसला दे दिया।

