Uttarakhand

कहानी एक असफल पुलिस जांच की

पड़ताल
 
कोरोना महामारी की दूसरी लहर में हरिद्वार में कुंभ आयोजन कराए जाने के फैसले पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। कोरोना महामारी के बीच कई दिनों तक हरिद्वार में लाखों लोग पहुंचते रहे और स्नान करते रहे। इसके बाद लाखों फर्जी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट का घोटाला सामने आया। यहां आने वाले लाखों लोगों की नकली रिपोर्ट बनाई गईं। महीनों तक चली जांच के बाद भी हरिद्वार पुलिस इसकी तह तक पहुंच पाने में नाकाम साबित रही। पुलिस ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए इस घोटाले में शामिल बड़ी मछलियों को पकड़ने की बजाय मैसर्स मैक्स कॉरपोरेट कम्पनी के मालिकों को मुख्य अभियुक्त बना पूरी जांच को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। ‘दि संडे पोस्ट’ ने इस मामले में गहरी पड़ताल की। जिसमें सामने आया है कि जांच न केवल आधी-अधूरी है, बल्कि कई महत्वपूर्ण तथ्यों को अनदेखा कर ‘मित्र पुलिस’ मुख्य आरोपियों को बचाने में लगी रही
पटकथा
दिसंबर, 2019 में चीन का बुहान शहर एक वायरस चलते विश्व भर में चर्चा का केंद्र बनने लगा था। यह वायरस था SARS-COV-2  जिसे आमजन की भाषा में कोरोना वायरस कह पुकारा गया। शीघ्र ही इस वायरस ने पूरे विश्व को अपनी गिरफ्त में ले लिया, जिंदगी थमने लगी और चौतरफा हाहाकार मच गया। 30 जनवरी 2020 को विश्व स्वास्थ संगठन ने इसे अंतरराष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया। 2020 से लेकर 2023 तक कोरोना उर्फ कोविड-19 चलते विश्वभर में लगभग 70 लाख  लोग मौत के आगोश में समा गए। सबसे अधिक मौतें अमेरिका, भारत, ब्राजील, मेक्सिको और रूस में दर्ज की गईं। इस दौरान विभिन्न देशों की सरकारों ने अनेकों उपाय इस वायरस का फैलाव रोकने के लिए लागू किए। इनमें देश व्यापी लॉकडाउन, सामाजिक दूरी, मास्क पहनना और 2020 के अंत में वैक्सीनेशन की शुरूआत करना शामिल है।
2021 में हालात थोड़ा सुधरे जरूर लेकिन तभी इस वायरस के नए वैरिएंट ने कहर बरपाना शुरू कर दिया। ‘डेल्टा’ और ओमिक्रोन नामक यह नए वैरिएंट एक बार फिर से बड़ी महामारी का कारण बन उभरे। ऐसे भयावह समय में उत्तराखण्ड के शहर हरिद्वार में 14 जनवरी 2021 से 27 अप्रैल 2021 तक ‘कुंभ मेले’ का आयोजन हुआ। ‘दि संडे पोस्ट’ की पड़ताल अंतरराष्ट्रीय महामारी के दौर में आयोजित इस मेले के दौरान हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं की कोविड-19 जांच प्रक्रिया में हुए एक बड़े घोटाले से जुड़ी है। ‘दि संडे पोस्ट’ की पड़ताल से जो तस्वीर उभरती है वह राज्य की मित्र पुलिस द्वारा इस घोटाले के असली गुनहगारों को बचाने और छोटी मछलियों को पकड़ पूरे मामले पर पर्दा डालने का भयावह सच सामने रखती है।

कोविड टेस्टिंग घोटाले की कहानी

हर 12 वर्ष बाद मकर संक्राति के दिन 14 जनवरी से शुरू होने वाले कुंभ मेले का आयोजन वर्ष 2021 में हरिद्वार में हुआ था। कोविड महामारी चालू थी, लाखों लोग इस बीमारी चलते दम तोड़ रहे थे। ऐसे कठिन समय में मेला आयोजित करने का फैसला हर दृष्टि से गलत था लेकिन हुक्मरानों ने अंतरराष्ट्रीय महामारी के दौर में भी इसे आयोजित कराने का निर्णय लिया और महामारी के दृष्टिगत् हरिद्वार जा मां गंगा में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की कोविड जांच को अनिवार्य कर यह भी संदेश देने का प्रयास किया कि वह हर प्रकार की एहतियात बरत रही है। इस आयोजन को कराने की जिम्मेदारी मेला अधिकारी की होती है। 31 दिसंबर, 2020 को मेला अधिकारी ने विभिन्न समाचार पत्रों में एक टेंडर प्रकाशित कराया जिसमें देश की प्रतिष्ठत टेस्टिंग प्रयोगशालाओं से कुंभ मेले के दौरान कोविड-19 वायरस की टेस्टिंग कराने हेतु आवेदन मांगे गए। मेला अधिकारी हरिद्वार ने विभिन्न आवेदकों में से एक आवेदक मैसर्स मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज को इस कार्य के लिए चुना और उन्हें यह टेंडर आवंटित कर दिया गया। 31 दिसंबर 2020 को जो टेंडर मेलाधिकारी हरिद्वार द्वारा जारी किया गया था उसमें मान्यता प्राप्त लैब से निविदा मांगी गई थी। मैसर्स मैक्स कॉरपोरेट ने हरियाणा की दो मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के साथ एमओयू कर इस टेंडर को हासिल कर लिया।

एमओयू के अनुसार लैब को करने थे टेस्ट

मैक्स कॉरपोरेट कंपनी ने हरियाणा की दो मान्यता प्राप्त टेस्टिंग प्रयोगशालाओं संग इस टेंडर को हासिल करने के लिए करार किए। ये दो प्रयोगशाला थीं मैसर्स नलवा लैबोरेट्री प्राइवेट लिमिटेड तथा मैसर्स डॉ. लाल चंदानी लैबस प्राइवेट लिमिटेड। इन दोनों ही मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं संग मैक्स कॉरपोरेट कंपनी ने जो करार किए उसके अनुसार इन प्रयोगशालाओं की जिम्मेदारी कोविड-19 का टेस्ट करना, इस टेस्ट के लिए महाकुंभ आने वाले श्रद्धालुओं का सैम्पल लेना और उनकी टेस्ट रिपोर्ट को इस कार्य के लिए बने सरकार के पोर्टल में अपलोड करना था। दूसरी तरफ टेंडर पाने वाली कम्पनी मैक्स कॉरपोरेट की जिम्मेदारी कुंभ मेला अधिकारी को इन टेस्ट से जुड़े बिल जमा करना, स्थानीय स्तर पर टेस्टिंग कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए व्यवस्था करना तथा मेलाधिकारी संग कोऑर्डिनेशन करना था। इन दोनों ही प्रयोगशालाओं द्वारा मैक्स कॉरपोरेट कंपनी के साथ करार करने बाद इस टेंडर को हासिल करने के लिए जो दस्तावेज कुंभ मेलाधिकारी के समक्ष जमा कराए ‘दि संडे पोस्ट’ के पास उनकी प्रति मौजूद है जिनसे स्पष्ट जाहिर होता है कि कोविड-19 की जांच के लिए ये दोनों लैब्स ही पूरी तरह जिम्मेदार थी और मैक्स कॉरपोरेट कंपनी का काम इन्हें कुंभ मेला क्षेत्र में सभी प्रकार की सहुलियत प्रदान करना और चूंकि टेंडर मैक्स कॉरपोरेट को आवंटित हुआ था इसलिए कुंभ मेला ऑथोरिटी को इन लैब्स द्वारा की गई जांच का बिल प्रस्तुत करना भर था। इन दोनों प्रयोगशालाओं द्वारा मैक्स कॉरपोरेट के संग हुए करार में स्पष्ट रूप से कहा गया कि-‘At our end, we shall provide all the tecnical know-how, manpower, reagents and data entry support for sample testing and reporting of testing samples’ (अपनी ओर से, हम नमूना परीक्षण, परीक्षण किए गए नमूनों की रिपोर्टिंग के लिए सभी तकनीकी जानकारी, मानव शक्ति, रसायन और डेटा एंट्री सहायता प्रदान करेंगे)।

फर्जी टेस्टिंग की कहानी

महाकुंभ 2021 कोविड महामारी के दौर में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा आयोजित मेले की शुरूआत के साथ ही कोविड जांच का काम भी युद्ध स्तर पर शुरू किया गया था। इसी दौरान भारत सरकार की शीर्ष संस्था ‘इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ (आईबीएमआर) के समक्ष एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई जिसमें कहा गया कि उसके आधार नंबर और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल रैपिड एंटीजन टेस्ट करने में किया गया है लेकिन उसके द्वारा इस टेस्ट को कराने के लिए कोई सैम्पल नहीं दिया गया। आईसीएमआर द्वारा 14 मई 2021 को यह शिकायती पत्र उत्तराखण्ड सरकार को जैसे ही भेजा गया, शासन-प्रशासन में हड़कंप मच गया। उत्तराखण्ड सरकार द्वारा कोविड महामारी पर नियंत्रण पाने के लिए बनाए गए उत्तराखण्ड टेस्ट कंट्रोल रूम कोविड-19 के चीफ ऑपरेशन ऑफिसर ने जिलाधिकारी हरिद्वार को इस बाबत जांच के लिए कहा। डीएम हरिद्वार ने 16 जून 2021 को अपनी प्रारम्भिक जांच रिपोर्ट तैयार की जिसमें कुंभ मेले के दौरान कोविड-19 की जांच में गड़बड़ी होने की बात सामने आई। इस जांच रिपोर्ट के अनुसार कुंभ शुरू होने के बाद 13 अप्रैल 2021 से 16 मई 2021 के मध्य मैसर्स मैक्स कॉरपोरेट द्वारा 1,04,796 सैम्पल लिए गए और सरकारी पोर्टल में कुल 95,102 रिपोर्ट अपलोड की गईं। जिनमें कोविड पॉजिटिविटी दर मात्र 0.18 प्रतिशत पाई गई जो उक्त अवधि में हरिद्वार की सामान्य पॉजिटिविटी दर 5.3 प्रतिशत से काफी कम थी। रिपोर्ट में कहा गया कि फर्जी एंट्री कराने का उद्देश्य आर्थिक लाभ प्राप्त करना है।इस जांच में यह भी पाया गया कि ‘मैसर्स मैक्स कॉरपोरेट ने जिन सैम्पल लेने वाले लोग (सैम्पल कलक्टर्स) के नंबर उपलबध कराए गए हैं उनसे पता चला है कि वे न तो मैक्स कॉरपोरेट और न ही दोनों लैब्स से जुड़े हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सम्बंधित फर्म द्वारा सैम्पल कलक्टर्स की भी फर्जी एंट्री की गई।’ डीएम हरिद्वार ने अपनी इस जांच रिपोर्ट में इस फर्जीवाड़े को आपदा अधिनियम और महामारी अधिनियम का उल्लंघन मानते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। जांच रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि ‘उक्त फर्म (मैसर्स मैक्स कॉरपोरेट) द्वारा कुंभ मेला समाप्त होने के बाद भी 51,298 एंट्रियां पोर्टल पर दर्ज की गई तथा एक ही मोबाइल नंबर पर कई सैम्पल की एंट्री की गई। रिपोर्ट में एक ही पते पर हरिद्वार नेपाल फार्म पर कुल 3825 सैंपल लिए जाने तथा मोबाइल नंबर 774708144, पर 56 व्यक्तियों के सैम्पल दर्ज होने का उल्लेख करते हुए कहा कि फर्म ने सही नाम/पता/मोबाइल नंबर दर्ज नहीं कर धोखाधड़ी की है और शासकीय धन का दुरुपयोग किया है। इस जांच रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि कोविड महामारी में मानव जीवन को गंभीरता से नहीं लेते हुए हानि पहुंचाने का कृत्य करते हुए आपदा अधिनियम-2005 और महामारी अधिनियम-1997 का उल्लंघन किया गया…। यह पाया गया है कि अधिकांश एंट्रियां जनपद हरिद्वार से बाहर अन्य राज्यों (राजस्थान, उत्तर प्रदेश इत्यादि में की गई हैं जिससे यह स्पष्ट है कि फर्म ‘मैक्स कॉरपोरेट सर्विस/नलवा लैब तथा डॉ. लाल चंदानी लैब द्वारा फर्जी एंट्रियां उत्तराखण्ड से बाहर की विभिन्न लोकेशसन पर की गई जो पूर्णतः फर्जी है और इस प्रकार राज्य के साथ धोखाधड़ी की गई है।’

मित्र पुलिस की एकतरफा जांच
डीएम हरिद्वार के निर्देश पर कोतवाली हरिद्वार में मैसर्स मैक्स कॉरपोरेट, नलवा लैबोरेट्रिज प्रा.लि. तथा डॉ. लाल चंदानी लैब के खिलाफ महामारी अधिनियम 1997, आपदा अधिनियम 2005, आईपीसी 1860 की धारा 3,53,120-बी, 188 269, 270, 420, 468, 471 में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। यह एफआईआर 17 जून, 2021 को लिखी गई।
शुरू हुआ बलि का बकरा बनाने का खेला

यहूदियों में एक परंपरा है जिसमें समाज के सभी पापों को एक बकरी ने नाम कर उसकी बलि दे दी जाती है और यह मान लिया जाता है कि समस्त पाप समाप्त हो गए। बलि का बकरा मुहावरा इसी परंपरा से उत्पन्न हुआ है। बलशाली लोगों के पास ठगने के लिए निर्बल को अपराधी ठहराने का खेला कोविड-19 की टेस्टिंग के दौरान हुई कथित धोखाधड़ी के उस पहलू को सामने लाता है जहां इस धोखाधड़ी की जांच को देवभूमि की ‘मित्र पुलिस’ ने सही तरीके से नहीं कर इसे पूरे प्रकरण में सबसे कम दोषियों को बलि का बकरा बना डाला और बलशालियों को बक्श दिया।
कोतवाल हरिद्वार के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक राकेंद्र सिंह कठैत द्वारा अदालत में दायर अंतरिम रिपोर्ट (चार्जशीट) में अद्भुत खेला कर दिखाया। ‘दि संडे पोस्ट’ के पास मौजूद इस प्रकरण से जुड़े दस्तावेज स्पष्ट करते हैं कि कोविड-19 की जांच करने और जांच रिपोर्ट को आईसीएमआर के पोर्टल में अपलोड करने की पूरी जिम्मेदारी दोनों मान्यता प्राप्त लैब्स का काम था। ‘दि संडे पोस्ट’ के पास मौजूद मैसर्स मैक्स कॉरपोरेट और नलवा लेबोरेट्रिज प्रा.लि. के मध्य हुए करार की प्रति मौजूद है जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है-
1. The first Party (M/s Max Corporate Services) Shall be responsible for coordination with client, billing and over allmanagement of project, local coordination for the project and and when required  (प्रथम पक्ष (मैसर्स मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज) की जिम्मेदारी ग्राहक संग समन्वय बनाने, बिल तैयार करने और स्थानीय स्तर पर प्रोजेक्ट का संचालन करने की होगी)।
2.The second party (M/S Nalwa laboratories Pvt.Ltd) shall procure, supply, sample collection, testing and final report generation of covid antigen or RTPCR test as per requirement of this agreement  (द्वितीय पक्ष मैसर्स नलवा लैब प्रा.लि.) का कार्य सैम्पल लेना, टेस्ट करना और टेस्ट रिपोर्ट तैयार करने की होगी।
3.Shall deliver report and complete execution and do client meetings, presentation and coordination regarding the same as per requirement (द्वितीय पक्ष रिपोर्ट बनाने तथा संपूर्ण कार्य को संचालित करने, ग्राहक संग मीटिंग करने तथा आवश्यकता अनुसार समन्वय बनाने के लिए जिम्मेदार होगा)।उपरोक्त से स्पष्ट है कि कोविड जांच करने और जांच रिपोर्ट को आईसीएमआर के पोर्टल में अपलोड करने की जिम्मेदारी टेस्टिंग करने वाली प्रयोगशालाओं की थी। इस तथ्य को लेकिन हरिद्वार कोतवाली की जांच टीम ने पूरी तरह अनदेखा करते हुए मैक्स कॉरपोरेट कंपनी के पार्टनर शरद पंत और उनकी पत्नी मल्लिका पंत पर संगीन धाराएं लगा डाली लेकिन हरियाणा की एक प्रयोगशाला नलवा लैब्स के मालिक के प्रति ‘मित्र पुलिस’ ने आईपीसी की धारा 417 (धोखाधड़ी की धारा जिसमें अधिकतम सजा एक वर्ष की है) को लगा अपने कर्तव्य की इतिश्री कर दी। यहां यह उल्लेखनीय है कि शरद पंत और मल्लिका पंत पर जो धाराएं आरोपित की गईं हैं उनमें उन्हें सात वर्ष अथवा उससे अधिक की सजा का प्रावधान है। हरिद्वार पुलिस ने 8 नवंबर, 2021 को मैक्स कॉरपोरेट के मालिक शरद पंत और उनकी पत्नी मल्लिका पंत को तो गिरफ्तार कर जेल भेज दिया लेकिन कोविड टेस्ट करने वाली प्रयोगशाला नलवा लैब्स के मालिक पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। यहां यह उल्लेखनीय है कि डॉ. लाल चंदानी लैब के द्वारा किए गए कोविड जांच में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई लेकिन नलवा लैब की जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी की बात हरिद्वार पुलिस ने अपनी चार्जशीट में स्वीकारी जरूर लेकिन लैब के मालिक पर मात्र धारा 417 लगा उसे बड़ी राहत देने का काम कर दिखाया।

अबाच्डअप इंवेस्टीगेशन

1752 में अंग्रेजी भाषा में एक नया शब्द जुड़ा-  ‘Botch’  (बॉच) जिसका अर्थ है किसी को खराब करना। इसी शब्द से बना ‘A Botched up investigation’, अंग्रेजी शब्दकोष के अनुसार ‘A Botched up investigation’, अंग्रेजी शब्दकोष के अनुसार  ‘A botched up investigation is an investigation that is done poorly or ruined due to lock of skill or carelessness (असफल जांच एक ऐसी जांच है जो कौशल की कमी या लापरवाही के कारण खराब तरीके से की जाती है या बर्बाद हो जाती है)।कुंभ मेले के दौरान कोविड जांच में निश्चित तौर पर बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ था। लेकिन हरिद्वार पुलिस इस घोटाले की तह तक पहुंच पाने में नाकाम रही और उसने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को पूरी तरफ नजरअंदाज कर इस घोटाले में शामिल बड़ी मछलियों को पकड़ने के बजाय मैक्स कॉरपोरेट कंपनी के मालिकों को मुख्य अभियुक्त बना पूरी जांच को संदिग्ध बनाने का काम कर दिखाया है।

‘दि संडे पोस्ट’ की पड़ताल से सामने आता है कि पुलिस की जांच आधी-अधूरी है और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को पुलिस ने नजरअंदाज कर दिया है जैसे- 1. कोविड जांच को करना और जांच रिपोर्ट को आईसीएमआर के पोर्टल पर अपलोड करना नलवा लैब और डॉ. लाल चंदानी लैब का दायित्व था और मैक्स कॉरपोरेट का काम स्थानीय स्तर पर इन लैब्स को जमीनी सहायता कराना भर था। कोविड जांच और रिपोर्ट्स तैयार करने की जिम्मेदारी इन लैब्स की थी। इसके लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरिद्वार द्वारा इन दोनों लैब्स को यूनिक आईडी दिया गया था। यह यूनिक आईडी लैब के पास थे और मैक्स कॉरपोरेट के पास यह आईडी नहीं थी। इससे स्पष्ट होता है कि कथित फर्जी जांच रिपोर्ट लैब द्वारा सरकारी पोर्टल में अपलोड की गई। इसके बावजूद पुलिस ने नलवा लैब के मालिक पर मात्र धारा 417 लगाई गई जो धोखाधड़ी की धारा है जिसमें अधिकतम सजा एक बरस की है। मैक्स कॉरपोरेट के मालिकों पर लेकिन भारतीय दण्ड संहिता की गंभीर धाराएं 188, 269, 270, 470, 467,468,471,120 बी तथा आपदा अधिनियम की धारा 53 इत्यादि लगाई गई हैं। पुलिस ने नलवा लैब पर इतनी दरियादिली क्यों दिखाई, यह यक्ष प्रश्न है?

2. पुलिस रिपोर्ट में एक भी ऐसे व्यक्ति का जिक्र नहीं होना पाया गया है जिसने बयान दिया हो कि उसकी फर्जी रिपोर्ट बनाई गई अथवा जिसने टेस्ट कराया ही नहीं लेकिन उसके द्वारा टेस्ट कराया जाना दिखाया गया हो। यह अपने आप में बेहद गंभीर बात है कि इतने बड़े स्तर पर यदि कोविड-19 की जांच में फर्जीवाड़ा किया गया और 104,000 एंटीजन टेस्ट तथा 5700 आरटीपीसीआर टेस्ट हुए तब भी पुलिस एक गवाह को नहीं तलाश पाई जो सामने आया हो और जिसने फर्जीवाड़े की बाबत अपना बयान दर्ज कराया हो?

3. पुलिस जांच में इस बात का भी कोई उल्लेख नहीं है कि इतने बड़े स्तर पर कोविड जांच का काम लैब्स द्वारा किया गया और सरकारी पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड इन लैब्स को जारी यूनिक आईडी का दुरुपयोग कर किया। दोनों की स्थितियों में यदि फर्जीवाड़ा हुआ तो उसमें लैब की सांठगांठ अवश्य रही होगी लेकिन कार्यवाही केवल मैक्स कॉरपोरेट के मालिकों के खिलाफ ही क्यों की गई?

निष्कर्ष

पुलिस की जांच कई महत्वपूर्ण तथ्यों को और कई तकनीकि पहलुओं को नजरअंदाज करने की तरफ इशारा करती है। यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि कुंभ मेलाधिकारी द्वारा अधिकृत लैब से ही कोविड जांच कराने सम्बंधी टेंडर जारी किया गया था तब क्योंकर एक ऐसी कंपनी (मैक्स कॉरपोरेट) को यह टेंडर आवंटित कर दिया गया? क्यों नहीं सीधे मान्यता प्राप्त लैब्स को यह टेंडर दिया गया? स्पष्ट है कि मैक्स कॉरपोरेट को टेंडर दिए जाने के पीछे भी कोई न कोई खेला हुआ है जिसकी जिम्मेदारी तत्कालीन मेला प्रशासन की बनती है। कुल मिलाकर इस फर्जीवाड़े का सच भी राज्य में पूर्व में हुए कई घोटालों की तरह ही कहीं गहरे दफन हो कर रहना तय है। यह राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टालरेंस’ के सच को जरूर सामने लाने का काम करता है।

सरकार का पक्ष
वर्ष 2021 में राज्य सरकार ने कहा कि कुंभ मेला हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है, जो हर 12 साल में होता है और इसे स्थगित या रद्द करना करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का अपमान होगा। इस आयोजन को रोकने से सामाजिक असंतोष और आस्था से जुड़े मुद्दे उत्पन्न हो सकते थे। सरकार का तर्क था कि कुंभ मेला सदियों से चली आ रही परम्परा का हिस्सा है और इसे धार्मिक अनुष्ठानों के निर्वाहन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

तब सरकार ने यह भी दावा किया था कि कुंभ मेले के आयोजन के दौरान सख्त कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। मेला क्षेत्र में सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनने और सैनिटाइजेशन के उपाय किए जाएंगे। इसके अलावा, जिन श्रद्धालुओं को स्नान करने की अनुमति दी गई, उन्हें कोविड-19 निगेटिव रिपोर्ट के साथ ही मेले में प्रवेश दिया जाएगा।
उत्तराखण्ड के तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने यह भी कहा था कि सरकार ने व्यवस्थाएं की हैं ताकि संक्रमण के फैलने से बचा जा सके। साथ ही उन्होंने दावा किया था कि कोविड प्रोटोकॉल के अनुपालन के लिए कई कदम उठाए गए हैं।

सरकार ने यह भी तर्क दिया कि कुंभ मेले की अवधि को सामान्य से कम कर दिया गया था। यह मेला परंपरागत रूप से 3-4 महीने तक चलता है, लेकिन 2021 में इसे एक महीने के लिए सीमित कर दिया गया। सरकार ने इस फैसले को संक्रमण को नियंत्रित करने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बाद में 17 अप्रैल 2021 को अपील की थी कि प्रतीकात्मक रूप से कुंभ मेला समाप्त कर दिया जाए, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके। इसके अलावा, सरकार ने यह भी तर्क दिया कि इस तरह के बड़े आयोजनों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है। कुंभ मेले से उत्तराखण्ड के पर्यटन और व्यापार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है जो कोविड-19 के कारण प्रभावित हुआ था। मेले के आयोजन से स्थानीय व्यवसायों को आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद थी।


विपक्ष के तर्क

2021 में जब देश कोविड-19 की दूसरी लहर से जूझ रहा था ऐसे में हरिद्वार में कुंभ मेला आयोजित किया गया तो इस फैसले की आलोचना हुई। देश ही नहीं विदेशों के भी कई संगठनों, विशेषज्ञों और राजनीतिक दलों द्वारा इस बाबत अपने-अपने तर्क सामने रख है जो इस प्रकार थे:-
कई प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने कुंभ मेले को ‘सुपर- स्प्रेडर इवेंट’ करार दिया। भारतीय मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) जैसे संगठनों ने भी सरकार को इस तरह के बड़े धार्मिक आयोजनों की अनुमति देने के लिए फटकार लगाई।

महामारी विज्ञानियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि कुंभ मेले जैसे बड़े आयोजनों से वायरस का प्रसार तेजी से हो सकता है और इसकी वजह से देश के विभिन्न हिस्सों में संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ सकती है।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने कुंभ मेले के आयोजन को लेकर सरकार की आलोचना की थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने इसे गैर-जिम्मेदाराना फैसला बताया था। उन्होंने यहां तक कहा कि वे खुद कुंभ मेले में शामिल नहीं होंगे और श्रद्धालुओं से भी इसे छोड़ने की अपील की। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस ने भी इसे गैर- जिम्मेदाराना बताते हुए कहा था कि सरकार के पास कुंभ जैसे आयोजनों को रोकने का विकल्प था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों ने भी कुंभ मेले के आयोजन की आलोचना तब की थी। इन मीडिया रिपोर्टों में मेले के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनने और कोविड प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर जोर दिया गया। विदेशी मीडिया जैसे ‘बीबीसी’, ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘दि गार्जियन’ ने भी इसे प्रमुख रूप से कवर किया और भारत सरकार की इस मामले में लापरवाही की आलोचना की थी।इसी के साथ कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने भी इस पर सवाल उठाए थे। तब इन संगठनों ने सरकार पर यह आरोप लगाया था कि धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक लाभ के लिए अनुमति दी जा रही है, जबकि लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को नजरअंदाज किया जा रहा है।
स्वराज इंडिया ने महामारी के दौरान इतने बड़े धार्मिक आयोजन की अनुमति देने पर गंभीर आपत्ति जताई और इसे अनुचित बताया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य निकायों ने भी ऐसे आयोजनों पर चिंता जताते हुए कहा था कि महामारी के दौरान भीड़भाड़ वाले आयोजन वैश्विक स्तर पर भी संक्रमण के फैलाव का कारण बन सकते हैं।

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