कोरोना वायरस ने करीब डेढ़ साल से दहशत फैला रखी है। यह हर दिन अपने नए – नए रूप धारण कर रहा है जिससे ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो रहे हैं। इस वायरस के कारण अब तक लाखों लोगों की जानें जा चुकी हैं । इस पर काबू पाने के लिए वैक्सीनेशन भी जोरों पर है। कोरोना की दूसरी लहर से पिछले कुछ हफ्तों से थोड़ी राहत मिलती दिख रही है, लेकिन यह पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुई है। इस बीच अब देश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के साथ ही महाराष्ट्र में डेल्टा प्लस वैरिएंट से संक्रमित मरीजों के मिलने से एक बार फिर दहशत फैलने लग गई है । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि वायरस का डेल्टा प्लस वैरिेएंट रूप बी1.617.2 का आक्रामक रूप है। संभव है कि यह इम्युनिटी को आसानी से धोखा दे सकता है।

अगले कुछ हफ्ते अहम, डॉक्टर गुलेरिया
डॉक्टर गुलेरिया के मुताबिक देश में वायरस k 417N नाम के साथ एक और म्यूटेशन कर रहा है घायल । ब्रिटेन में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट तेजी के साथ बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे अभी वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट (वीओआई) की श्रेणी में रखा है। हालांकि वायरस का यह रूप समय के साथ आक्रामक हुआ तो इसे भी वैरिएंट ऑफ कन्सर्न की श्रेणी में रखना होगा।

दूसरी लहर की धीमी गति के बीच कोविड का पालन नहीं किया गया तो भारत में वायरस का यह रूप आक्रामक तरीके से फैल सकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में वायरस के बयान खतरे से बचने के लिए वायरस के स्पाइक पर नजर रखनी होगी। जीनोम सीक्वेंसिंग पर जोर देना होगा ताकि पता चले कि डेल्टा की क्या स्थिति है और इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा है कि हमें ब्रिटेन से सबक लेना होगा, सतर्कता नहीं बरती गई तो आने वाले दिनों में हम फिर से पुरानी स्थिति में जा सकते हैं।
महाराष्ट्र डायरेक्टरेट आफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के निदेशक डॉक्टर टीपी लहाणे ने बताया कि नवी मुंबई, पालघर और रत्नागिरी में डेल्टा प्लस के कुल सात मामले मिले हैं। सभी सैंपलों की जांच की जा रही है जिससे स्थिति स्पष्ट हो सके। इन क्षेत्रों से कुछ और सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं जिससे पता चलेगा कि वायरस का यह रूप फ़ैल रहा है या सीमित है।
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हाल ही में कोरोना वैरिएंट को लेकर अमेरिका में हुई रिसर्च में दावा किया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे लोगों में कोरोना वैरिएंट तेजी से फैल रहा है। राहत की बात यह है कि लोगों में कोरोना वायरस का प्रभाव पहले की तुलना में ज्यादा नहीं मिला है। जॉन्स हॉपकिन्स स्कूल ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययन में पाया गया कि कोरोना वायरस के दो वैरिएंट तेजी से फैल रहे हैं, लेकिन इन वैरिएंट से संक्रमित लोगों में अधिक प्रभाव नहीं मिला है। रिसर्च में कहा गया है कि SARS-CoV-2 जो वायरस कोरोना का कारण बनता है, उसका तेजी से फैलना एक चिंता का विषय बनता जा रहा है।

शोधकर्ताओं ने कोरोना वैरिएंट B.1.1.7 की जांच की, जो पहले यूके में पहचाना गया था। इसके साथ ही B.1.351, जो पहले दक्षिण अफ्रीका में पहचाना गया था। यह मूल्यांकन करने के लिए कि क्या मरीजों में इन वैरिएंट की वजह से वायरल का प्रभाव बढ़ा और इसके साथ संक्रमण भी। इस रिसर्च में संपूर्ण-जीनोम अनुक्रमण का उपयोग करके वैरिएंट की पहचान की गई। शोधकर्ताओं ने नमूनों के एक बड़े समूह का उपयोग यह दिखाने के लिए किया कि यूके वैरिएंट अप्रैल 2021 तक तेजी से फैलने वाले वायरस का 75 फीसदी हिस्सा था। शोधकर्ताओं ने 134 प्रकार के नमूनों की तुलना 126 नियंत्रण नमूनों से की और इसके साथ शोध के नतीजे निकाले हैं ।
क्यों खतरनाक है डेल्टा प्लस वैरिएंट
वायरस का डेल्टा रूप बी1.617 वैरिएंट अत्यधिक संक्रामक था। इसका स्पाइक प्रोटीन वायरस को मानव कोशिकाओं को संक्रमित करने में मदद करता है अब के417एन म्यूटेशन वाला वायरस पुराने वायरस की तुलना में मानव के रोग प्रतिरोधक तंत्र को आसानी से धोखा दे सकता है। इस वजह से कह सकते हैं कि यह वैक्सीन और किसी भी ड्रग थैरेपी के लिए भी चुनौती खड़ी कर सकता है।

