मध्यप्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि आज साढ़े 12 बजे वे बीजेपी में में शामिल हो सकते हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति में कई दिनों से सियासी धमासान मचा हुआ था। अब सवाल यह उठता है किसने ज्योतिरादित्य को बीजेपी में आने के लिए राजी किया, इसके पीछे कौन है जिसने सिंधिया की बात बीजेपी आलाकमान तक पहुंचाई। किसके भरोसे बीजेपी ने मध्यप्रदेश में ऑपरेशन लोट्स चलाया? इन तमाम सवालों के जवाब सामने आने लगे हैं। सिंधिया की बात प्रधानमंत्री और गृहमंत्री तक पहुंचाने वाला कोई और नहीं बल्कि बीजेपी प्रवक्ता जफर इस्लाम है।
जफर इस्लाम बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया प्रवक्त है। टीवी चैनलों की डिबेट में जफर हर रोज भाजपा का बचाव करते है। जफर एक विदेशी बैंक में काम करते थे और अच्छा वेतन भी पाते थे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के इतने कायल हुए कि उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ कर बीजेपी ज्वॉइन कर लिया। कहा जाता है कि जफर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच काफी अच्छे संबंध हैं। जफर काफी शालीन स्वभाव के व्यक्ति है। शायद यही वजह है कि बीजेपी ने जफर इस्लाम को मध्यप्रदेश में ऑपरेशन लोटस को चलाने का जिम्मा दिया।

ज्योतिरादित्य सिंधिया और जफर एक दूसरे को पहले से काफी अच्छी तरह जानते थे। जब भी सिंधिया दिल्ली आते थे तो जफर के साथ उनकी मुलाकात होती रहती थी। पिछले पांच महीनों से जफर ज्योतिरादित्य को भाजपा में लाने की कोशिश कर रहे थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सिंधिया और जफर की हाल के समय में लगातार पांच बैठके हुई थी जिसमें खुद ज्योतिरादित्य ने भाजपा में आने की पेशकश की थी। उनकी इस पेशकश को गृहमंत्री और भाजपा आलाकमान तक जफर ने पहुंचाया था। इसके बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में ऐसा तूफान आया कि कांग्रेस का सबकुछ बहाकर ले गया।
मध्यप्रदेश में पूरा ऑपरेशन सिंधिया के अनुसार ही चला। इस ऑपरेशन में केवल भाजपा की तरफ से लॉजिस्टिक और अन्य सहायता ही प्रदान की गई थी। सोमवार और मंगलवार को जब सिंधिया प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मिले थे उस समय जफर 7 लोक कल्याण मार्ग पर ही मौजूद थे। मंगलवार को जब अमित शाह सिंधिया को प्रधानमंत्री आवास पर लेकर गए थे तो उस समय भी जफर इस्लाम गृहमंत्री की गाड़ी में थे।
सिंधिया ने मंगलवार को कांग्रेस को अलविदा कह दिया है। अब उन्हें बीजेपी की तरफ से राज्यसभा भेजे जाने की तैयारी है। केंद्रीय सत्र समाप्त होने के बाद सिंधिया को सरकार में मंत्री बनाया जाएगा। सिंधिया के इस्तीफे की खबर मिलते ही मध्यप्रदेश के 6 मंत्रियों सहित 22 विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि सिंधिया के साथ इस्तीफा देने वाले विधायकों को मध्यप्रदेश में सरकार बनने के बाद मंत्री पद दिया जाएगा।

