ख्याति प्राप्त शायर शौक़ बहराइची का एक शेर वर्तमान भारत की दिशा और दशा को बड़ी साफगोई से सामने रखता है कि ‘बर्बाद गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफी था हर शाख पर उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा।’ 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी मुहिम छेड़ने वाले अन्ना आंदोलन के गर्भ से उत्पन्न आम आदमी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इन दिनों खुद भ्रष्टाचार के आरोपों की जद् में आ चुका है। दिल्ली के कथित आबकारी घोटाले की तपिश अब ‘आप’ के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दरवाजे तक पहुंच चुकी है। इस कथित घोटाले को केंद्र सरकार और भाजपा का षड्यंत्र करार देने वाली ‘आप’ लेकिन मोहल्ला क्लीनिकों में चौतरफा पसरा भ्रष्टाचार का खुलासा होने के बाद बैकफुट पर जाती नजर आ रही है। दिल्ली के उपराज्यपाल ने विजिलेंस जांच में सामने आए इस घोटाले की विस्तृत जांच सीबीआई को सौंपने का एलान कर ‘आप’ सरकार और पार्टी को गहरी सांसत में डाल दिया है
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। पिछले एक साल से आम आदमी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व कथित शराब घोटाले का ताप झेल रहा है तो कई और घोटालों का शोर भी राजधानी में सुनाई देने लगा है। कुछ महीनों से देश की राजधानी दिल्ली में खराब गुणवत्ता वाली दवाओं की सप्लाई को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिकों में फर्जी मरीजों के नाम पर
पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी टेस्ट करवाए जाने का मामला सामने आया है। इसमें 100 करोड़ रूपए से भी अधिक के घोटाले की बात कही जा रही है। मोहल्ला क्लीनिकों को दिल्ली सरकार आम जनता को उपलब्ध कराई गई अपनी श्रेष्ठ योजनाओं में गिनती है। इस योजना के जरिए दिल्ली के नागरिकों को मुफ्त में स्वास्थ सुविधाओं का भारी लाभ मिल रहा है। अब लेकिन इस जनसुविधा में भारी भ्रष्टाचार का मामला उजागर होने के बाद उपराज्यपाल ने पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई के हवाले कर दी है।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस मामले में सीबीआई जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अनुशंसा की है। दरअसल दिल्ली सरकार द्वारा चलाए जा रहे इन मोहल्ला क्लिनिकों में हजारों मामलों में फर्जी और गलत मोबाइल नंबर दर्ज कर फर्जी मरीजों का पंजीकरण किया गया और फिर निजी लैब में उनकी जांच कराने की पर्चियां काटी गई। आरोप है कि इस तरह करोड़ों रुपए की अदायगी निजी लैबोरेट्रीज को किया गया और सरकार को भारी चूना लगाया गया।
क्या है मोहल्ला क्लीनिक?
यह दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार की महत्वाकांक्षी जनउपयोगी योजना है। जब अरविंद केजरीवाल की सरकार सत्ता में आई तो उन्होंने गरीबों की मदद और बड़े अस्पतालों की भीड़ कम करने के लिए मोहल्ला क्लीनिक की शुरुआत वर्ष 2015 में की थी। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य यह था कि लोगों को उनके दरवाजे पर ही स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जा सके। इनमें निर्धन वर्ग के लोगों को मुफ्त जांच, दवाओं और परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इन मोहल्ला क्लीनिकों में 212 तरह की जांच मुफ्त की जाती है। इसके अलावा यह व्यवस्था भी की गई है कि यदि किसी मरीज को अल्ट्रासाउंड या किसी अन्य जांच की आवश्यकता महसूस होती है तो डॉक्टर के लिखने पर किसी निजी लैब में वह जांच कराई जा सकती है जिसका भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है। ऐसे में यह मोहल्ला क्लीनिक निर्धन और अन्य वर्गों के लिए बेहद लाभकारी साबित रहे हैं। लेकिन हाल ही में सामने आए घोटाले ने इस प्रोजेक्ट के उद्देश्य को भारी क्षति पहुंचाने का काम किया है।
क्या है पूरा मामला
दिल्ली सरकार ने फरवरी वर्ष 2023 में दो निजी लैब एजिलस डाइगलोस्कि लिमिटेड और मेट्रोपोलिश हेल्थकेयर लिमिटेड के साथ एक समझौता किया, जिसके तहत मोहल्ला क्लीनिकों में आने वाले मरीजों की पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच के लिए सहमति बनी। यानी मोहल्ला क्लिनिक में डॉक्टरों को जिन मरीजों के लिए ये टेस्ट करवाने की जरूरत लगेगी, उन्हें यहां भेजा जा सकेगा। मरीजों के टेस्ट भी मुफ्त किए जाएंगे और जो भी भुगतान होगा, वह सरकार को करना होगा।
कैसे सामने आया मामला
दिल्ली में कुल 526 मोहल्ला क्लिनिक हैं। बीते साल अगस्त में इनमें से सात मोहल्ला क्लीनिकों में कुछ अनियमितता पाई गई थी। यहां काम करने वाले लोग आते ही नहीं हैं और गलत तरीके से अपनी हाजिरी लगा देते हैं। खास बात ये पता चली कि स्टॉफ यहां पर पहले से ही रिकॉर्ड किए गए वीडियो के आधार पर डॉक्टरों की हाजिरी लगा देते हैं। इस गोरखधंधे का खुलासा होते ही सितंबर महीने में एफआईआर दर्ज की गई और कुछ स्टाफ को हटाया भी गया। लेकिन यह सिलसिला यहां नहीं रुका। अक्टूबर में जब इन मोहल्ला क्लीनिकों के तीन महीने के टेस्ट सैंपल की जांच के लिए डाटा विजिलेंस विभाग को भेजा गया तो बड़े पैमाने पर हुए गड़बड़झाले का खुलासा हुआ। इन दोनों लैब में बीते साल जुलाई से सितंबर तक के रिकॉर्ड जुटाए गए।
विजिलेंस जांच
एजिलस डाइगलोस्कि में इन 7 मोहल्ला क्लिनिकों द्वारा जुलाई से लेकर सितंबर वर्ष 2023 के बीच रेफर किए गए 5,21,221 टेस्ट कराए गए। इसी तरह मेट्रोपोलिश हेल्थकेयर में जुलाई से सितंबर 2023 के बीच 85,616 टेस्ट करवाए गए। जांच में सामने आया है कि इन 7 मोहल्ला क्लीनिकों में फर्जी और गलत मोबाइल नंबर दर्ज कर मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया गया और उनकी लैब जांच कराने के लिए कहा गया। कई मोबाइल नंबर को एक से ज्यादा मरीजों के लिए इस्तेमाल किया गया। 11,657 मरीजों का मोबाइल नंबर सिर्फ ‘0’ लिखा गया। 8251 मरीजों का नंबर ही नहीं लिखा गया। 817 मोबाइल नंबर का इस्तेमाल 15 या उससे ज्यादा मरीजों के मामले में किया गया। 3,092 मरीजों के नंबर 9999999999 दर्ज किया गया। यह मोहल्ला क्लीनिक जफर कलां, उजवा, शिकारपुर, गोपाल नगर, ढांसा, जगजीत नागर और बिहारी कॉलोनी में स्थित हैं।
डॉक्टरों की लगातार गैरमौजूदगी
जांच में यह भी पाया गया है कि इन मोहल्ला क्लीनिकों में मरीजों की मेडिकल काउंसलिंग कर, डॉक्टर की गैरमौजूदगी में अनधिकृत कर्मचारियों द्वारा दवाएं दी जाती थीं, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती थी। पिछले साल सितंबर में कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इसके बाद पिछले साल जुलाई से सितंबर तक तीन महीनों के लिए दो प्राइवेट लैब्स द्वारा किए गए सैंपल टेस्ट की समीक्षा भी की गई। जिसमें पाया गया कि मरीजों के रजिस्ट्रेशन और बाद में उनकी प्रयोगशाला जांच के लिए फर्जी नंबर का इस्तेमाल किया गया था। जांच में ये भी सामने आया है कि टेस्ट के लिए लेब इनफार्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन उसे आधार से लिंक करने का कोई सिस्टम ही नहीं था। विजिलेंस का ये भी कहना है कि सिर्फ सात मोहल्ला क्लीनिकों के मामले में इतनी बड़ी अनियमितताएं मिली हैं, तो बाकी का भी अगर डाटा भी जांच के लिए जाता है तो हो सकता है और बड़ा घोटाला देखने को मिले।
जांच अब सीबीआई के हवाले
इस मामले में सीबीआई को मामला भेजते हुए उपराज्यपाल ने लिखा है कि ‘दिल्ली में पहले खराब क्वालिटी की दवाओं का मामला सामने आया और अब मोहल्ला क्लीनिकों में इस तरह का गोरखधंधा। इससे साफ है कि किस तरह से गरीब और मजलूम दिल्लीवासियों के अधिकार पर चोट की जा रही है। इस मामले की तह तक जाना बेहद जरूरी है।’
आम आदमी पार्टी का बयान
इस मामले में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज कहते हैं कि उन्होंने ही 20 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया था कि 7 मोहल्ला क्लीनिक में स्टाफ द्वारा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में गड़बड़ी करके गलत तरीके से अटेंडेंस लगाई जा रही है, जिसके बाद उन 7 मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर, फार्मासिस्ट, मल्टी टॉस्किंग वर्कर और असिस्टेंट पर कार्रवाई करके उनको हटा दिया गया था। अब जिस डाटा की बात कही जा रही है, वो भी उन्हीं मोहल्ला क्लीनिकों का है। अगर कोई गड़बड़ी मिलती है, तो अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार नीतियां बनाती है और अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है उन्हें सुचारू रूप से लागू करें और यह स्वास्थ्य विभाग के सचिव की जिम्मेदारी बनती है।’ सौरभ भारद्वाज का यह भी कहना है कि उन्होंने बीते साल 21 अप्रैल को आदेश दिए थे कि मोहल्ला क्लीनिकों के औचक निरीक्षण के लिए सीनियर डॉक्टर की फ्लाइंग स्क्वाड बनाई जाए। लेकिन स्वास्थ्य सचिव ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
आप पर हमलावर हुई भाजपा
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इस मामले में दिल्ली सरकार की नीयत पर बड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। बकौल त्रिवेदी ‘आप सरकार ने पहले मोहल्ला क्लीनिक बनाए, फिर उसका दायरा बढ़ाते हुए निजी कंपनियों को ठेका दे दिया और फर्जी बिल बना मोटा घोटाला किया। पीएम नरेंद्र मोदी इसलिए लगातार डिजिटल पर जोर देते हैं, लेकिन ये लोग उसका विरोध इसी कारण करते रहे ताकि उसकी आड़ में घोटालों को अंजाम दे सकें।’

