Uttarakhand

अतिक्रमण से त्रस्त, अधिकारी मस्त

राज्य के प्रमुख शहरों में शुमार हल्द्वानी वर्तमान में चौतरफा अतिक्रमण का शिकार हो चला है। हालात इतने विकट हैं कि शहर की मुख्य सड़क नैनीताल रोड तक पर अतिक्रमित कर दिया गया है। यहां से निकलने वाले एक नाले पर किया गया अतिक्रमण हटाने में शहर का प्रशासनिक अमला पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। इस अतिक्रमण चलते बरसात के दिनों में यह मुख्य सड़क स्वयं नाले में तब्दील हो जाती है। हीरानगर में पर्वतीय उत्थान मंच और वन विभाग की कॉलोनी के मध्य स्थित सड़क भी इसी प्रकार अतिक्रमण का शिकार हो चुकी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर अतिक्रमण हटाने के लिए गठित विशेष टास्क फोर्स भी मात्र कागजों तक सिमट कर रह गई है। इस टास्क फोर्स की अध्यक्ष जिलाधिकारी हैं और महत्वपूर्ण विभागों के वरिष्ठ अधिकारी इसके सदस्य हैं। ‘दि संडे पोस्ट’ की छानबीन बताती है कि शहर के व्यापारी अतिक्रमण हटाने का भारी विरोध करते हैं। व्यापारी वर्ग का राजनीतिक रसूख प्रशासन पर हमेशा से ही भारी पड़ता आया है जिसका नतीजा है कि कुमाऊं का प्रदेश द्वार बदहाल हो चला है

उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद पहाड़ों से मैदानों की ओर पलायन में तेजी आई है। पहाड़ों और ग्रामीण क्षेत्रों को छोड़कर हर कोई शहरों की ओर जाना चाहता है। जिस तेजी से शहरीकरण को बढ़ावा देती नजर आ रही है उस गति से शहरी नियोजनतंत्र को विकसित नहीं कर पा रही है। शहरीकरण का यही अव्यवस्थित ढांचा एक नई समस्या ‘अतिक्रमण’ को जन्म दे रहा है। राज्य के महत्वपूर्ण शहरों में शामिल हल्द्वानी उत्तराखण्ड के उन शहरों में शुमार है जो अतिक्रमण का शिकार हैं। यहां का प्रशासन महज खानापूर्ति के लिए अतिक्रमण हटाओ के अभियान छेड़ जनता की आंखों में धूल झोंकने के सिवाय कुछ नहीं कर रहा है। अभी तक जितने अतिक्रमण हटाओ अभियानों की घोषणा की गई और उन पर ईमानदारी और सख्ती से अमल करने की इच्छा हुक्मुरानों और अफसरानों ने रखी होती तो हल्द्वानी शहर की तस्वीर काफी हद तक बदली होती। हल्द्वानी के नगर निगम बनने के बाद तो स्थिति बद से बदतर हो चली है। नगर निगम बनने के बाद राजनीतिक दलों को मेयर का पद मिल गया अधिशासी अधिकारी की कुर्सी नगर आयुक्त के रूप में अधिकारियों के हिस्से आ गई लेकिन हल्द्वानी शहर के लिए बाशिंदों की समस्याएं जस की तस हैं। हल्द्वानी शहर में विकास के तमाम दावों के बीच सिकुड़ती सड़कें, सड़कों पर भयंकर टैªफिक जाम की समस्या बताती है कि समस्याओं के निदान के दावे महज जुबानी खर्च से ज्यादा कुछ नहीं है। नगर निगम, सार्वजनिक निर्माण विभाग और पुलिस के संयुक्त अभियान महज फड़-खोखों वालों पर कार्रवाई तक समिति हैं।

सिकुड़ती सड़कें और अतिक्रमित किए फुटपाथ सरकारी विभागों की काहिली की कहानी कहते हैं। शहर की नैनीताल रोड, बरेली रोड, रामपुर रोड से लेकर कालाढूंगी रोड भारी अतिक्रमण की शिकार हैं लेकिन नगर निगम और जिम्मेदार सरकारी विभाग इस समस्या से मुंह मोड़े हैं। अचानक नींद से जागते इन्हें अतिक्रमण हटाने की याद आती है लेकिन कुछ समय बाद ये फिर गहरी नींद में चले जाते हैं। हल्द्वानी के लोग 1992 के समय को याद करते हुए कहते हैं कि तत्कालीन जिलाधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने तमाम राजनीतिक दबावों को दरकिनार करते हुए अतिक्रमण के खिलाफ जिस प्रकार सख्ती दिखाई थी उसका ही परिणाम था कि आज कालाढूंगी रोड और नैनीताल रोड इतनी चौड़ी दिखाई देती हैं। हालांकि राजनेताओं के दबाव के चलते उनको ज्यादा समय यहां टिकने नहीं दिया गया। उन्हें कुछ वक्त और मिला होता तो शायद आज हल्द्वानी का स्वरूप कुछ और निखरा होता। हल्द्वानी शहर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में लगने वाला टैªफिक जाम अतिक्रमण के कारण ही है। सबसे बुरा हाल हल्द्वानी के मुख्य बाजारों का है। दिन के समय अतिक्रमण से ग्रस्त मुख्य बाजारों की सूरत किसी गली सी हो जाती है। व्यापारियों ने अतिक्रमण को भी एक धंधा बना दिया है। बताया जाता है कि अधिकतर दुकान के आगे लगने वाले फड़ और ठेलों से दुकानदार अच्छी खासी रकम वसूलते हैं। व्यापारी नेता अतिक्रमण हटाने की बात जरूर करते हैं लेकिन अतिक्रमण हटाते समय व्यापारी एकता के नाम पर अतिक्रमण हटाने का विरोध करते ऐसे नेता सबसे आगे दिखाई देते हैं। गत् वर्ष दीपावली के वक्त अतिक्रमण हटाने गई सिटी मजिस्ट्रेट रिचा सिंह को व्यापारी विरोध के चलते अपनी कार्यवाही रोकनी पड़ी थी। अतिक्रमण हटाने के लिए उत्तराखण्ड होईकोर्ट की पहल पर सिंचाईं विभाग, लोक निर्माण विभाग और राजस्व विभाग ने कई स्थल चिÐित कर कार्रवाई शुरू की गई थी लेकिन विरोध और राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव (गृह) राधा रतूड़ी ने जिलाधिकारी की अध्यक्षता में अतिक्रमण हटाने के लिए टास्क फोर्स बनाने का निर्देश दिया था जिसमें जिले के पुलिस अधीक्षक सदस्य सचिव तथा वन प्रभागीय अधिकारी समेत सिंचाईं और लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य बनाए गए थे। शुरुआत में यह टास्क फोर्स जोर-शोर से अतिक्रमण चिÐित करती दिखी लेकिन अतिक्रमण हटाते समय प्रशासन हांफता नजर आया और सारी कवायदें ठंडे बस्ते में चली गईं। शहर में अतिक्रमण की समस्या से निपटने के लिए और चिÐित करने के लिए ड्रोन से मैपिंग कर अतिक्रमण को चिÐित करने की बात पुलिस अधिकारी ने तब कही थी। वक्त बीतने के बाद अब ड्रोन मैपिंग योजना की बात भी कही नहीं होती।

रसूखदार रसूख के बल पर अतिक्रमण करने से परहेज नहीं करते। नैनीताल रोड पर वॉक वे मॉल और शहर की पॉश कॉलोनी कालिंदी कुंज में उस नाले को अतिक्रमण कर बंद कर दिया गया जिससे शहर का पानी गौला नदी पर निकलता था। इस अतिक्रमण की भयावहता बरसात में दिखाई देती है जब पूरी नैनीताल रोड-नाले में तब्दील हो जाती है। इसी प्रकार हीरानगर में पर्वतीय उत्थान मंच और वन विभाग की कॉलोनी के मध्य से सुशीला तिवारी अस्पताल को जोड़ने वाली सड़क के एक बड़े हिस्से पर अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया गया है लेकिन रसूखदारों के चलते इस पर प्रशासन की नजर नहीं जाती। इस बार 26 दिसंबर से नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने की घोषणा जोर-शोर से की गई थी लेकिन पहले ही दिन ये अभियान दम तोड़ गया। खास बात ये है कि सिंधी चौराहे के पास नगर निगम ही अतिक्रमणकारी निकला। नगर निगम की स्वयं की दुकानें अतिक्रमण के दायरे में आ रही हैं। आधी-अधूरी कवायदों और इच्छा शक्ति के अभाव के चलते भविष्य में अतिक्रमण हटाने की कवायद परवान चढ़ पाएगी इसमें संदेह है क्योंकि आगामी लोकसभा चुनाव के चलते राजनीतिक दलों के लिए अतिक्रमण हटाने का अभियान किसी खतरे से कम नहीं होगा।

 

बात अपनी-अपनी
अतिक्रमण हटाने के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न उचित नहीं है। नगर निगम और प्रशासन व्यापारियों को विश्वास में लेकर समन्वय स्थापित करे। अतिक्रमण हटाते समय ये ध्यान रखना चाहिए कि व्यापारियों का नुकसान भी न हो और अतिक्रमण भी हटे।
सुमित हृदयेश, विधायक, हल्द्वानी

अतिक्रमण के विषय में प्रशासन को हमेशा सजग रहना चाहिए। बाजार के अंतर्गत अत्यधिक ठेले इत्यादि लगते हैं, उनको नियंत्रित किया जाना चाहिए। बाहरी लोगों का सत्यापन जरूरी है। नाली और गूलों पर अतिक्रमण तो कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। अतिक्रमित क्षेत्र सामुदायिक उपयोग का होता है। इस सार्वजनिक सम्पत्ति को बिल्कुल सजगता से प्रशासन व निगम का दायित्व है इनकी रक्षा करना।
डॉ. जोगेन्द्र पाल सिंह रौतेला, निवर्तमान मेयर, नगर निगम हल्द्वानी

जिलाधिकारी महोदय द्वारा गठित समिति अतिक्रमण हटाने के कार्य में जुटी है। अतिक्रमणों को चिÐित कर हटाने की कार्रवाई गतिमान है। पक्के अतिक्रमण को तोड़ने के लिए संबंधित लोगों को नोटिस दिए गए हैं। निश्चित अवधि में वो अतिक्रमण नहीं हटाते तो प्रशासन उन्हें हटाएगा। कच्चे अतिक्रमण को हटाया जा रहा है।
ऋचा सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी

हम अतिक्रमण हटाने के कतई विरोध में नहीं हैं लेकिन अतिक्रमण हटाने के नाम पर उत्पीड़न करना गलत है।
हुकुम सिंह कुंवर, प्रदेश अध्यक्ष, देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल उत्तराखण्ड

 

 

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