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बाइडन के बयान पर बवाल

जी-20 समिट के दौरान प्रेस कांफ्रेंस न होने देने की आलोचना के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने वियतनाम में मीडिया से खुलकर बात की और कहा कि पीएम मोदी की उनके साथ जिन मुद्दों पर खास चर्चा हुई, उनमें मानवाधिकार और मीडिया की आजादी भी शामिल थी। उनके इस बयान को लेकर बड़ा बवाल मच गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उनका यह दावा महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब पीएम मोदी इस साल जून में अमेरिका की अपनी पहली राजकीय यात्रा पर थे तो कई मानवाधिकार संगठनों ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता पर रोक लगाने और अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठाया था

जी-20 समिट के दौरान बाइडेन और मोदी

हाल ही में भारत के नेतृत्व में संपन्न हुए जी-20 सम्मेलन की भव्यता इतनी थी कि दुनिया दंग रह गई लेकिन इस आयोजन के खत्म होते ही इसका विश्लेषण और पोस्टमार्टम शुरू हो गया है। आयोजन सफल रहा कि विफल, विपक्ष के नेता इस पर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। इस सबके बीच अपनी वियतनाम में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी मुलाकात के दौरान ‘मानवाधिकारों का सम्मान’ और ‘स्वतंत्र प्रेस’ का मुद्दा उठाया था। उनका यह दावा महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब पीएम मोदी जून में अमेरिका की अपनी पहली राजकीय यात्रा पर थे तो कई मानवाधिकार संगठनों ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता पर रोक लगाने का मुद्दा उठाया था और राष्ट्रपति बाइडेन से इस बारे में बात करने का आग्रह किया था। जिस पर अब उनका बयान आया तो भारतीय राजनीति में बवाल मच गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद कांग्रेस द्वारा भी पीएम मोदी पर तंज कसा गया है। कांग्रेस ने ‘न करूंगा, न करने दूंगा’ लिखकर मोदी सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जो बाइडेन के भाषण के कुछ हिस्से का वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है। इसमें जयराम रमेश ने लिखा है, ‘मिस्टर मोदी ने मिस्टर बाइडेन से कहा कि न प्रेस कांफ्रेंस करूंगा, न करने दूंगा, इसका कोई असर नहीं हुआ। जो बाइडेन वही बात वियतनाम में कह रहे हैं जो उन्होंने भारत में पीएम मोदी के मुंह पर कहीं। ये बातें मानवाधिकार, सिविल सोसायटी और फ्री प्रेस की भूमिका के बारे में हैं।’

साथ ही कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाए थे कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की टीम को मीडिया से बातचीत करने की अनुमति नहीं दी गई और न ही पीएम मोदी से बाइडेन की मीटिंग के बारे में मीडिया के सवाल लेने दिए गए। इस पर तंज कसते हुए जयराम रमेश ने लिखा था, ‘यह बिल्कुल हैरान करने वाला नहीं है क्योंकि मोदी-स्टाइल का लोकतंत्र इसी तरह से काम करता है।’

भारत में जी-20 में शामिल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन वियतनाम पहुंचे। जहां उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जैसा मैं हमेशा करता हूं मैंने महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते हुए पीएम मोदी से सिविल सोसायटी और आजाद मीडिया पर चर्चा की। इसी के साथ उन्होंने बात करते हुए कहा कि मैं चीन को रोकना नहीं चाहता। जी-20 समिट के दौरान भारतीय मीडिया सहित अंतररष्ट्रीय मीडिया के साथ प्रेस कांफ्रेंस न होने देने की आलोचना के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने वियतनाम यात्रा के दौरान मीडिया से खुलकर बात की और कहा कि पीएम मोदी की उनके साथ जिन मुद्दों पर खास चर्चा हुई, उनमें मानव अधिकार और मीडिया की आजादी भी शामिल थी।

गौरतलब है कि भारत में जी-20 शिखर सम्मलेन में कई देशों के प्रमुख नेताओं द्वारा हिस्सा लिया गया था। नेताओं के बीच तमाम मुद्दों पर सहमति के लिए द्विपक्षीय वार्ताओं का भी आयोजन हुआ था। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच भी द्विपक्षीय वार्ता हुई। अपनी पहली भारत यात्रा के दौरान बाइडेन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से दिए गए डिनर का हिस्सा भी रहे। कयास लगाए जा रहे थे कि जी 20 शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और जो बाइडेन प्रेस के साथ संयुक्त बातचीत करेंगे, जैसा उन्होंने अमेरिका में किया था। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

मीडिया को सवाल पूछने की नहीं मिली अनुमति
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के कई अनुरोधों के बावजूद अमेरिका के पत्रकारों को नई दिल्ली में मोदी-बाइडेन की द्विपक्षीय बैठक के बाद राष्ट्रपति बाइडेन और प्रधान मंत्री मोदी से सवाल पूछने की इजाजत नहीं मिली। रिपोर्ट के अनुसार सीएनएन ने अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर जैक सुलिवन के हवाले से कहा कि ‘यह बैठक प्रधानमंत्री के आवास पर हुई, इसलिए उस संबंध में यह असामान्य है। यह बाइडेन की भारत में सामान्य द्विपक्षीय यात्रा नहीं है, जिसमें बैठकें प्रधानमंत्री के कार्यालय और पूरे कार्यक्रम में होती हैं।’ हालांकि जो बाइडेन ने वियतनाम यात्रा के दौरान मीडिया से कई मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि ‘मैंने मोदी के साथ मानवाधिकारों के सम्मान और एक मजबूत व समृद्ध देश के निर्माण में नागरिक संस्थाओं और स्वतंत्र प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका के महत्व को उठाया।’

बाइडेन ने कहा कि ‘मैं एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी और उनके नेतृत्व को जी-20 की मेजबानी के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।’ उन्होंने कहा कि मैंने इस बारे में चर्चा की है कि हम भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी को कैसे मजबूत करना जारी रखेंगे। हमने भारत-अमेरिका के रिश्तों को मजबूत करने की ओर कदम बढ़ाए हैं। पीएम मोदी और जो बाइडेन की द्विपक्षीय वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान के मुताबिक दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि स्वतंत्रता, लोकतंत्र, मानवाधिकार और सभी नागरिकों के लिए समान अवसर बेहद जरूरी हैं।

प्रेस वार्ता में सवालों का जवाब देते हुए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि उनका मिशन वियतनाम और अन्य एशियाई देशों के साथ संबंध बनाकर दुनिया भर में बेहतर माहौल बनाना है, जिससे स्टेबिलिटी और विकास के नए रास्ते खुल सकें। हाल के दिनों में वाशिंगटन और बीजिंग कई वैश्विक मुद्दों पर आमने-सामने रहे हैं और बाइडन ने चीन पर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अपनी इच्छानुसार मोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। अभी जो चीजें चल रही हैं उनमें से एक यह है कि चीन व्यापार और अन्य मुद्दों के संदर्भ में नियमों को बदलना चाहता है।

अमेरिका ने अपनी इंडो-पैसिफिक रणनीति के हिस्से के रूप में साझेदारी बनाने में भारी निवेश किया है, जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ क्वाड सुरक्षा वार्ता और ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ ओकस (ऑस्ट्रेलिया, यूके और यूएस) समझौता शामिल है। बाइडन ने जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत में की गईं महत्वपूर्ण बैठकों के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि ‘यह हमारे वैश्विक नेतृत्व और उन चुनौतियों को हल करने के वास्ते हमारी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण क्षण था जो दुनिया भर के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। समावेशी विकास और सतत विकास में निवेश करना, जलवायु संकट का समाधान करना, खाद्य सुरक्षा और शिक्षा को मजबूत करना,
वैश्विक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सुरक्षा को आगे बढ़ाना इसमें शामिल हैं।’

‘यह अपने आप में बड़ा विरोधाभास है कि एक ओर तो बाइडेन स्वतंत्र प्रेस की भूमिका याद दिला रहे हैं और स्वयं मोदी उतनी ही तेजी से उनकी सीख को दरकिनार करते हुए मीडिया से न स्वयं बात करते हैं और न ही अपने मेहमान को बात करने दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पहली बात तो यह है कि एक राष्ट्रपति को दूसरे संप्रभु मुल्क के राष्ट्राध्यक्ष से यह कहने की आखिर ज़रूरत ही क्यों पड़ी कि वे मानवाधिकारों का सम्मान करें और नागरिक संस्थाओं व स्वतंत्र मीडिया की भूमिका को समझें। क्या अपने देश को हर घड़ी ‘लोकतंत्र की जननी’ बतलाने वाले राष्ट्र प्रमुख से इस बात की उम्मीद नहीं की जानी चाहिये कि वे इन तथ्यों को पहले से जानें?’ फिर, एक अन्य राष्ट्राध्यक्ष को क्या यह सीख दी जाने की आवश्यकता इसलिये पड़ गई क्योंकि उसे इस बात का इल्म है कि मेजबान देश में ऐसा नहीं हो रहा है? यानी घर आया मेहमान जानता है कि आप मानवाधिकार का सम्मान नहीं करते, यह देश नागरिक संस्थाओं की भूमिका से अनभिज्ञ है और यहां मीडिया आज़ाद नहीं है।

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