राज्यसभा से लेकर सड़क तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अडाणी के आरोपों को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछने वाले ‘आप’ सांसद संजय सिंह की प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तारी ऐसे समय पर हुई है जब विपक्षी दल खुलकर केंद्र सरकार पर उत्पीड़न करने और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं
आठ जुलाई 2022 यानी आज से ठीक 453 दिन पहले दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने उपराज्यपाल विनय सक्सेना को एक रिपोर्ट सौंपी। ये वही रिपोर्ट है जिसने अब तक आम आदमी पार्टी के लिए एक के बाद एक कई मुश्किलें खड़ी कर रखी हैं। इस रिपोर्ट ने आप पार्टी के दिग्गज नेताओं को जेल की हवा तक खिला दी है। पहले सत्येंद्र जैन फिर मनीष सिसोदिया और अब संजय सिंह भी इस रिपोर्ट की जद में आ चुके हैं। ये रिपोर्ट दिल्ली के शराब घोटाले को लेकर थी। इसमें दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और ‘आप’ पार्टी पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे।
दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा इस रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई जांच की सिफारिश की गई थी। 17 अगस्त 2022 को सीबीआई ने केस दर्ज किया। इसमें मनीष सिसोदिया, तीन पूर्व सरकारी अफसर और दो कंपनियों को आरोपी बताया गया। इस घोटाले में चूंकि पैसों की हेराफेरी भी उजागर हुई, तो मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इसमें शामिल हो गई। फिर क्या था पैसों के हेर-फेर के मामले में ईडी ने भी केस दर्ज कर लिया।
रिपोर्ट में क्या था?
द रिपोर्ट में मुख्य सचिव द्वारा मनीष सिसोदिया पर गलत तरीके से शराब नीति तैयार करने का आरोप लगाया गया था। लाइसेंसधारी शराब कारोबारियों को अनुचित लाभ दिया गया और तो और कथित तौर पर एलजी और कैबिनेट की मंजूरी लिए बगैर ही शराब नीति में अहम परिवर्तन भी कर दिए गए। द मुख्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि आप सरकार ने कोरोनाकाल के दौरान महामारी का बहाना बनाकर मनमाने ढंग से 144 .36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ करवा ली।
द एयरपोर्ट जोन में शराब के व्यापार के लाइसेंस धारकों को 30 करोड़ वापस करने का आरोप लगा। ये वो रकम थी जिसको जब्त किया जाना था। क्योंकि एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से दुकान खोलने की मंजूरी नहीं दी गई थी।
द इतना ही नहीं, आबकारी विभाग ने बिना किसी मंजूरी के विदेशी शराब की कीमतें तय करने के फॉर्मूले में बदलाव किया और बीयर पर प्रति केस 50 रुपए की एक्साइज ड्यूटी हटा दी। द आरोप यहीं नहीं थमे, बल्कि बाद में सिसोदिया पर ये भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने बिना किसी मंजूरी के एक्साइज पॉलिसी को दो बार-1 अप्रैल से 31 मई और 1 जून से 31 जुलाई तक बढ़ा दिया।
संजय सिंह के घर पहले छापेमारी फिर गिरफ्तारी

मनीष सिसोदिया के बाद संजय सिंह ही हैं जो आम आदमी पार्टी के दूसरे बड़े नेता हैं, जिन्हें अब कथित शराब घोटाले में ईडी द्वारा गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी से पहले संजय सिंह से 10 घंटे तक पूछताछ चली। अभी तक संजय सिंह की गिरफ्तारी के पीछे दिनेश अरोड़ा की गवाही को वजह बताया जा रहा है। ईडी ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि दिनेश अरोड़ा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से उनके आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान बैठक में संजय सिंह भी उपस्थित रहे। ईडी को दिए बयान में दिनेश अरोड़ा की ओर से बताया गया कि उनकी मुलाकात एक कार्यक्रम में पहले संजय सिंह से हुई थी और उसके बाद उनकी मुलाकात मनीष सिसौदिया से हुई। दिल्ली में चुनाव से पहले फंड जुटाने के मकसद से यह कार्यक्रम किया गया था।
चार्जशीट के मुताबिक, दिनेश अरोड़ा की पहली मुलाकात संजय सिंह से हुई थी। उनकी मुलाकात मनीष सिसौदिया से उनके रेस्टोरेंट में हुई एक पार्टी में हुई थी। संजय सिंह के कहने पर अरोड़ा ने कई रेस्टोरेंट मालिकों से इस पर चर्चा की थी। अरोड़ा ने दिल्ली चुनाव के लिए पार्टी फंड इकट्ठा किया और 32 लाख रुपये का चेक सिसोदिया को सौंपा। ईडी का आरोप है कि बदले में संजय सिंह ने दिनेश अरोड़ा का एक मामला सुलझाया जो उत्पाद शुल्क विभाग के पास लंबित था।
आरोप पत्र के मुताबिक, दिनेश अरोड़ा द्वारा बताया गया कि सार्थक फ्लेक्स के रिटेल लाइसेंस धारक अमित अरोड़ा ने उन्हें और कंवरबीर को सार्थक फ्लेक्स के जॉइंट वेंच में भागीदार बनने के लिए कहा था। अमित ने उनसे अपनी दुकान पीतमपुरा से ओखला शिफ्ट करने के लिए मदद मांगी। लेकिन यह मामला उत्पाद विभाग के पास लंबित था। दिनेश अरोड़ा ने इस मुद्दे को सिसोदिया के सामने उठाया और फिर संजय सिंह के निर्देश पर आबकारी विभाग ने मामला सुलझा लिया।
अब भी जेल में हैं सिसोदिया
सीबीआई ने तीन आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। इनमें पूर्व सरकारी अफसर एजी कृष्णा (पूर्व एक्साइज कमिश्नर), आनंद तिवारी (पूर्व डिप्टी एक्साइज कमिश्नर) और पंकज भटनागर (पूर्व असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर) हैं। ये तीनों मनीष सिसोदिया के बेहद करीबी माने जाते हैं। इस मामले में अमित अरोड़ा (बड़ी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर), दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे भी आरोपी बनाए गए हैं। तीनों पर आरोप है कि इन्होंने सरकारी अफसरों के सहयोग से शराब कारोबारियों से पैसा इकट्ठा किया और उसे दूसरी जगह डायवर्ट कर दिया। लेकिन बाद में दिनेश अरोड़ा सरकारी गवाह बन गया जिसकी गवाही पर ही एक के बाद एक गिरफ्तारियां हो रही हैं।
चूंकि, मनीष सिसोदिया के पास आबकारी विभाग होने के कारण उन्हें दिल्ली के इस कथित शराब घोटाले में मुख्य आरोपी बनाया गया। सीबीआई द्वारा आरोप लगाया गया कि आबकारी मंत्री होने के फायदे को उठाते हुए सिसोदिया द्वारा ‘मनमाने’ और ‘एकतरफा’ फैसले लिए गए थे जिसके चलते सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सरकार को तो नुकसान हुआ और शराब कारोबारियों को अच्छा खासा मुनाफा मिला। 17 अगस्त 2022 को सीबीआई द्वारा केस दर्ज किया गया और दो दिन बाद ही 19 तारीख को मनीष सिसोदिया के घर और दफ्तर समेत सात राज्यों के 31 ठिकानों पर छापेमारी हो गई। 30 तारीख को सीबीआई ने सिसोदिया के बैंक लॉकर भी चेक किए। अंततः उनकी गिरफ्तारी हो गई और वो अभी भी पुलिस की हिरासत में हैं।

