लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वाईएसआर कांग्रेस के बुरी तरह से हारने के बाद भी जगन मोहन रेड्डी ने केंद्र सरकार और भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा था कि चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी के पास 16 लोकसभा सांसद हैं तो वाईएसआर कांग्रेस के पास भी 11 राज्यसभा और चार लोकसभा के यानी 15 सांसद हैं। संसद में उनकी ताकत नायडू से कम नहीं है। अब उनकी ताकत में बड़ी सेंध लग गई है। उनके दो राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है। यही नहीं चर्चा है कि जगन के पांच और सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं। ऐसे में सवाल है कि अगर जगन के पांच सांसद टीडीपी के संपर्क में हैं तो उन्हें रोकने के लिए उनके पास क्या रास्ता है? अगर सांसदों ने सोच लिया है कि उनको सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ जाना है तो उन्हें रोकना मुश्किल होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जगन मोहन रेड्डी के पास एक रास्ता है। जिस तरह सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने 2019 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद टूट की आशंका को देखते हुए अपने विधायकों को भाजपा में शामिल करा दिया था इसी तरह जगन अपने सांसदों के अपनी चिर प्रतिद्वंद्वी टीडीपी में जाने से रोकने के लिए उन्हें खुद ही भाजपा में शामिल करा सकते हैं। इससे भाजपा का उनके प्रति सद्भाव भी बनेगा। गौरतलब है कि जगन के ऊपर गिरफ्तारी का संकट भी मंडरा रहा है। नायडू की सरकार उनके पीछे पड़ी है और उससे भी बचने का रास्ता भाजपा का सद्भाव ही है। यह भी संभव है कि भाजपा और टीडीपी मिलकर किसी रणनीति पर काम कर रहे हों।

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