एक विडियो वायरस हो रहा है जिसमें पुलिसकर्मी एक घर पर एक पंडित को खींचता हुआ बाहर निकाल रहा है। वही उसके परिवार के लोग भी दिखाई दे रहे हैं। साथ में 2 – 3 युवक भी है। जिनमें से एक युवक लाठी लेकर पुलिस वाले पर प्रहार करने लगता है और कई लाठियां मारता है। जिनके वार से पुलिसवाला जमीन पर गिरकर तड़पने लगता है। इसके साथ ही और दूसरे युवक खाकी वर्दीधारी पर टूट पड़ते है। देखते ही देखते पुलिस कर्मी पर लात और घूसों की बरसात होने लगती हैं। इस दौरान घर की महिलाएं कहती सुनी जा रही है की पुलिस वाला है तो क्या इतने बड़े पंडित जी पर हाथ उठा रहा था।
वीडियो के बारे में दावा किया जा रहा है कि ये एक मंदिर का है। जिसमें पंडित कई लोगों को पूजा करा रहा था। इसका पुलिसकर्मी ने विरोध किया और साथ ही लॉकडाउन का पालन करने की हिदायत देते हुए खाकी वर्दी धारी पंडित को बाहर निकाल रहा था। वह उसे थाने ले जाना चाहता है। तभी उस पर युवकों ने हमला कर दिया और उसे बेदर्दी से मारते मारते अधमरा कर दिया। हालांकि, इस वीडियो की सत्यता कितनी है यह अभी पूरी तरह पता नहीं है।
लेकिन लॉक डाउन के 1 सप्ताह होने के बाद से अचानक पुलिसकर्मियों पर लोगों के हमले बढ़ने लगे हैं। जो पुलिस कोरोना महामारी से लोगों को बचाने के लिए उन्हें लॉक डाउन का पालन कराने की हिदायत दे रही है। साथ ही उनकी पहरेदार बनी हुई है। उस पर हो रहे ऐसे हमले चिंता में डालने वाले हैं । आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। क्या यह लोगों का लॉक डाउन के प्रति प्रतिकार है या पुलिस के खिलाफ प्रतिक्रिया है।

देश में खाकी पर इस दौरान जनता द्वारा हो रहे हमलों में दिनों-दिन इजाफा हो रहा है। पिछले 5 दिन की ही बात करें तो पूरे देश में अब तक करीब दर्जनभर मामले ऐसे सामने आ चुके हैं जिनमें जनता पुलिस के प्रति अपना गुस्सा निकालती दिख रही है। जिस यूपी पुलिस के एनकाउंटर के डर से अपराधी थर्रा उठते हैं, भोपा थाने के पुलिसकर्मियों को मुजफ्फरनगर के मोरना गांव में भीड़ ने पीट-पीट कर जख्मी कर दिया। दो दिन पूर्व हुए इस हमले में मोरना पुलिस चौकी इंचार्ज लेखराज सिंह और दो सिपाही बुरी तरह जख्मी हो गए हैं। जिन्हें गंभीर रूप से घायल होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां दारोगा लेखराज की हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
भीड़ के द्वारा पिटने वाले पुलिसकर्मीयो का कसूर सिर्फ यह था कि ये लोगों को लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल कराने का पाठ पढ़ाने मोरना गांव पहुंचे थे। हालांकि, इस मामले में मोरना के पूर्व ग्राम प्रधान और परिवार की दो महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है। दूसरा मामला मध्य प्रदेश के इंदौर के ताटपट्टी भक्खल का है। जहां स्वास्थ्यकर्मियों के साथ पुलिस एक व्यक्ति को मेडिकल जांच के लिए ले जा रहे थे। तभी आस-पास के लोगों ने पथराव कर दिया। लोगों ने कहा कि वहां किसी को भी कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं हुआ है।

अभी तीन दिन पहले ही बिहार के मुंगेर में स्वास्थ्यकर्मियों और फुलिसकर्मियो पर हमले हुए। इसके साथ ही मुंगेर में एक बच्ची की मौत के बाद मेडिकल टीम आस पास रहे लोगों की जांच के लिए पहुंची थी। मेडिकल टीम मालूम करना चाह रही थी कि जांच में कुछ पता चलता है तो भी नहीं तो एहतियातन लोगों को क्वारेंटिन में रहने की सलाह दी जाए। मेडिकल टीम के पहुंचते ही स्थानीय लोगों ने हंगामा कर दिया। इतना ही नहीं बल्कि लोगों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर पथराव किया। लोगों के हंगामे के चलते पुलिस को बुलाया गया। लेकिन लोग पुलिस की गाड़ी पर ही पथराव करने लगे। पुलिस वालों को चोटे भी आई। कोरोना वायरस की जांच के सिलसिले में स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिसकर्मियो पर पत्थरबाजी की घटनाएं हाल में कई बार हुई हैं।
गौरतलब है कि दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तब्लीगी जमात के लोगों के कोरोना संक्रमण को लेकर देश भर की पुलिस परेशान है। बिहार पुलिस को मधुबनी में भी ऐसी सूचना मिली थी और जब जांच करने पहुंची तो मस्जिद में मौजूद लोग पथराव के साथ साथ फायरिंग भी करने लगे थे। जांच टीम में गए बीडीओ और थानेदार किसी तरह जान बचाकर वहां से भाग निकले थे। जिस सरकारी गाड़ी से अधिकारी गये थे उसमें आग लगाकर तालाब में गिरा दिया गया। हालांकि, पुलिस ने 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है जिनमें से 4 गिरफ्तार भी किए जा चुके हैं।
कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार से लेकर धर्मगुरु तक अपील कर रहे हैं कि नमाज के लिए मस्जिद या किसी एक जगह न इकट्ठे हों और अपने-अपने घरों में ही नमाज अता करें। हालांकि कुछ लोगों को इन अपीलों से कोई फर्क नहीं पड़ता। आज उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में जुमे की नमाज अता करने के लिए जुटी भीड़ को हटाने गई पुलिस पर जमकर पत्थरबाजी हुई। इस घटना में दो पुलिसवाले गंभीर रूप से घायल हुए हैं। लॉकडाउन के बावजूद जुमे की नमाज के लिए कन्नौज के हाजीगंज स्थित एक घर में नमाजियों की भीड़ जमा हुई थी। सूचना मिलने पर पुलिस की टीम इन नमाजियों को हटाने पहुंची। नमाजियों ने पुलिसकर्मियों पर ही हमला कर दिया।

पहले ऐसी घटनाएं तो पुलिस मुठभेड़ को लेकर ही सुनने में आती थी। इसके अलावा पाकिस्तान जैसे देशों में जहां पोलियो ड्रॉप पिलाने को लेकर लोग दो बूंद जिंदगी की देने वालों पर ही धावा बोल देते पाए जाते हैं। ऐसे गंभीर संकट में जब सिर्फ देश की ही कौन कहे, पूरी दुनिया जिंदगी के लिए जूझ रही है। ऐसे में स्वास्थकर्मी और फुलिसकर्मी किसी पहरेदार से कम नहीं लगते हैं।
लेकिन लोग उन पर भी हमले कर रहे हैं। क्या हमला करने वालों को ये नहीं पता कि जो उनके पास जा रहे हैं वे भी सिर पर कफन बांध के निकले हैं। उधर दूसरी तरफ सवाल यह भी है कि जिस देश के प्रधानमंत्री कोरोना वायरस से बचाव में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिसकर्मियों के लिए ताली और थाली बजवाकर पूरे देश से सम्मान कराते है। लोग फूल बरसाते हैं।
लेकिन वहीं दूसरी तरफ उन सम्मान पाने वाले कर्मियों पर एक सप्ताह बाद ही लात और जूतों की बारिश की जाने लगी है। चिंताजनक यह है कि कोरोना से बचाव करने निकले पहरेदारों पर हमला करने वालों पर एक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को छोड़कर अभी तक कोई भी सख्त कार्यवाही कराने के लिए तैयार नहीं दिख रहा है।