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विश्वकप की जंग के लिए तैयार

मिशन विश्वकप में भारतीय टीम इस बार तीसरा विश्वकप खिताब जीतने के इरादे से उतरेगी। आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 का यह टूर्नामेंट इंग्लैंड और वेल्स में आयोजित किया जाएगा। भारतीय सेलेक्शन कमेटी के चीफ सेलेक्टर एमएसके प्रसाद ने इसे मजबूत और संतुलित टीम बताया है। 15 सदस्यों के इस भारतीय दल का नेतृत्व विराट कोहली करेंगे। इस टीम में ऑल राउंडर विजय शंकर और विकेटकीपर- बल्लेबाज दिनेश कार्तिक को शामिल किया गया है।

बीसीसीआई ने 30 मई से शुरू होने जा रहे क्रिकेट के महाकुंभ में विश्वकप 2019 के लिए 15 सदस्यीय भारतीय टीम का ऐलान कर दिया। टीम के करीब 12-13 नाम तो लगभग पहले से तय थे। वही चुने भी गए, लेकिन टीम में चुने गए दो-तीन नाम थोड़ा चौंकाने वाले रहे हैं। अंबाती रायडू और ऋषभ पंत दो ऐसे नाम हैं जिनके चयन की चर्चाएं जोर शोर से थीं, लेकिन ये दोनों खिलाड़ी वर्ल्ड कप 2019 में नहीं खेल पाएंगे।

कर्नाटक के बल्लेबाज केएल राहुल को टीम के रिजर्व ओपनर के तौर पर चुना गया है। न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने पहले ही अपनी वर्ल्ड कप टीम का ऐलान कर दिया था। भारत तीसरा ऐसा देश है जिसने वर्ल्ड कप 2019 के लिए अपने खिलाड़ी तय कर लिये हैं। टीम इंडिया पांच जून 2019 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने वर्ल्ड कप अभियान की शुरुआत करेगी। हालांकि इस विश्वकप का पहला मैच मेजबान इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला जाएगा। मौजूदा विश्वकप के लिए भारतीय टीम मजबूत दिख रही है, लेकिन हमें ये भी गौर करना होगा कि ये वर्ल्ड कप 2015 की भारतीय टीम से कैसे अलग है।

पिछले वर्ल्ड कप 2015 के कुछ भारतीय खिलाड़ियों की कमी इस साल वर्ल्ड कप में खलेगी। उनमें से एक हैं भारतीय तेज गेंदबाज उमेश यादव, जो साल 2015 के वर्ल्ड कप में भारतीय क्रिकेट टीम का अहम हिस्सा थे। वो टीम इंडिया के तरफ से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने थे। उन्होंने वर्ल्ड कप के आठ मैचों में कुल 18 विकेट हासिल किए थे और टीम इंडिया को सेमीफाइनल में पहुंचाने में मदद की थी। पिछले कुछ वक्त से वो लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं और यही वजह कि उन्हें इस साल वर्ल्ड कप के लिए नहीं चुना गया। हालांकि जैसा अनुभव उमेश के पास है उसकी कमी इस साल भारतीय टीम में जरूर खलेगी।

एमएसके प्रसाद की अगुआई में पांच सदस्यीय चयन समिति ने दिनेश कार्तिक के अलावा ऑल राउंडर विजय शंकर, लोकेश राहुल और रविंद्र जडेजा को 15 सदस्यीय टीम में शामिल किया है। अंबाती रायडू को जगह नहीं मिल पाई है। चौथे क्रम के बल्लेबाज के लिए 55 वनडे खेल चुके रायडू की जगह नौ वनडे खेलने वाले विजय शंकर को तरजीह दी गई है। हालांकि इस क्रम पर कई अन्य विकल्प खुले हैं।

विकेटकीपर धोनी अपना चौथा विश्वकप खेलेंगे जो कि उनका अंतिम विश्वकप माना जा रहा है। कप्तान कोहली का यह तीसरा और रोहित शर्मा, शिखर धवन, रविंद्र जडेजा, मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर इससे पहले 2015 में विश्वकप टीम में शामिल थे। दिनेश कार्तिक का भी दूसरा विश्वकप है। आठ खिलाड़ियों लोकेश राहुल, विजय शंकर, केदार जाधव, हार्दिक पंड्या, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह का यह पहला विश्वकप होगा।

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने पहले ही कहा था कि टी-20 आईपीएल का प्रदर्शन विश्वकप चयन में भूमिका नहीं अदा करेगा और ऐसा ही हुआ। हाल में चल रहे आईपीएल के बारहवें सीजन में ऋषभ पंत के शानदार प्रदर्शन के बावजूद कार्तिक का अभी तक का निराशाजनक प्रदर्शन पंत पर भारी साबित हुआ। तेज गेंदबाजी के विभाग में जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी मुख्य दो गेंदबाज होंगे जबकि भुवनेश्वर बैकअप के रूप में होंगे।

विजय शंकर : ऑल राउंडर के रूप में उपयोगी। नंबर चार पर आजमाए जा सकते हैं। रायडू की जगह आए हैं जो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज में फ्लॉप रहे थे। मध्यम गति के गेंदबाज चौथे पेसर की भी भूमिका निभा सकते हैं। लोकेश राहुल : इनके नाम पर कोई बहस नहीं हुई। फार्म में लौट आए हैं। रिजर्व ओपनर के अलावा नंबर चार सहित किसी क्रम पर बल्लेबाजी कर सकते हैं।

दिनेश कार्तिक : रिजर्व विकेटकीपर के रूप में दिनेश कार्तिक के पास अनुभव है। वह बल्लेबाजी में फिनिशर की भूमिका भी अदा कर सकते हैं

रविंद्र जडेजा : ऑल राउंडर हैं और यदि पिच सूखी या अनुकूल हो तो ज्यादा घातक। कलाई के स्पिनरों युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव की मौजूदगी के बावजूद बल्लेबाजी की अतिरिक्त योग्यता के कारण शामिल।

ऑलराउंडर विजय शंकर ने भारत की विश्वकप टीम में जगह बनाने के बाद कहा कि उनका सपना सच हो गया और वह इंडियन टी-20 लीग टीम के साथी भुवनेश्वर कुमार के साथ इस महासमर का दबाव झेलने की कला सीख रहे हैं।

शंकर ने इंडियन टी-20 लीग के अपने साथी भुवनेश्वर का जिक्र करते हुए कहा, ‘मैं भारतीय विश्वकप टीम का हिस्सा बनकर काफी खुश हूं। यह सपने के साकार होने जैसा है। यहां हैदराबाद में भी कुछ सदस्य विश्वकप विजेता टीम के हैं और मैंने उनसे इस बारे में यह समझने के लिए बात की है कि विश्वकप टीम में खेलना कैसा लगता है और फिर इसे जीतने का अहसास क्या होता है। मैंने उनसे काफी कुछ सीखा है कि इस तरह के महासमर में दबाव से निपटने के क्या तरीके हैं।

शंकर को बल्लेबाजी क्रम में जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद है, विशेषकर चौथे नंबर पर। तमिलनाडु के इस खिलाड़ी ने अपनी त्रिआयामी काबिलियत के बूते यह स्थान हासिल किया जिसके पहले अंबाती रायडू के पास जाने की उम्मीद थी।

भुवनेश्वर अपना दूसरा विश्वकप खेलेंगे, वह भी खुश थे। उन्होंने कहा, ‘मैं भी विश्वकप के लिए चुने जाने से काफी खुश हूं, इंग्लैंड के हालात मेरी मजबूती के अनुरूप होंगे और मैं इसका पूरा फायदा उठाने की कोशिश करूंगा। इंडियन टी-20 लीग में से मुझे विश्वकप जैसे बड़े टूर्नामेंट से पहले सही मैच अभ्यास मिला है।

हैदराबाद के टीम मेंटोर और पूर्व भारतीय बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने कहा कि भारतीय चयनकर्ताओं ने एक मजबूत टीम चुनी है। उन्होंने कहा, ‘भारतीय टीम काफी संतुलित टीम है और खिताब की प्रबल दावेदारों में से एक है। मैंने भुवी और विजय को नेट पर खेलते हुए देखा है। वे अच्छी फार्म में हैं और विश्वकप जैसे मंच पर शानदार प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। मुझे उम्मीद है कि ये टीम की सफलता में काफी बड़ा योगदान देंगे।

बात विश्वकप में खेलने की हो तो कोई भी टीम इतने बड़े आयोजन में प्रयोगों से बचना चाहेगी, लेकिन टीम इंडिया पर अगले माह इंग्लैंड में होने वाले विश्वकप को लेकर यह बात फिट नहीं बैठने जा रही है। इसका उदाहरण नंबर चार बल्लेबाजी क्रम पर मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद का बयान है, जिसमें उन्होंने इस क्रम पर कई विकल्प मौजूद होने की बात कहकर विजय शंकर, केदार जाधव, दिनेश कार्तिक को आजमाने को कहा है।

वर्ष 1983 का विश्वकप जीतने वाली टीम के विकेट कीपर सैयद किरमानी को यही बात गले के नीचे नहीं उतर रही है। विजय शंकर बेहद भाग्यशाली हैं जिन्हें विश्वकप की टीम में जगह मिली है, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि दक्षिण अफ्रीका और आस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले दोनों बेहद महत्वपूर्ण मुकाबलों में उन्हें टीम में जगह नहीं मिलेगी। वहीं 1987 और 1992 का विश्वकप खेलने वाली भारतीय टीम के विकेट कीपर किरन मोरे ऋषभ पंत को टीम में नहीं लिए जाने को गलत करार दे रहे हैं।

नंबर चार पर कोहली की पहली पसंद बीते वर्ष अक्टूबर से अंबाती रायडू रहे, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुई घरेलू श्रृंखला के दौरान उनकी पसंद बदल गई। रायडू ने पिछले अक्टूबर से नंबर चार पर 14 पारियों में 42.18 की औसत से 85.60 के स्ट्राइक रेट के साथ 464 रन बनाए। खास बात यह रही कि इस दौरान अन्य किसी बल्लेबाज को इस क्रम पर आजमाया नहीं गया। नतीजन इस क्रम पर रिजर्व बल्लेबाज की जगह नहीं बन पाई। शंकर ने अब तक नौ वन डे खेले हैं, लेकिन एक बार भी नंबर चार पर नहीं खेले हैं।

जून माह में इंग्लिश परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नंबर चार का क्रम बेहद महत्वपूर्ण है। यहां कुकाबुरा नहीं बल्कि दो-दो ड्यूक गेंदों से आक्रमण होगा। भारत के पहले चारों मैच मजबूत दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और पाकिस्तान से हैं। जून के भारी मौसम में यहां गेंद काफी घूमती है। किरमानी इसी को लेकर हैरान हैं। उनका कहना है कि जब किसी मजबूत बल्लेबाज का विकल्प ही नहीं है तो ऐसे में पहले दो मैचों में इस क्रम पर केदार जाधव को मौका देना चाहिए।

दिक्कत यह है कि अगर टॉप ऑर्डर फेल हो गया तो मध्यक्रम में इसे संभालने वाला मैच विनर कौन होगा? धोनी से उम्मीद की जा सकती है पर उनके साथ एक और बल्लेबाज होना चाहिए। इसी एक्स फैक्टर की वकालत किरन मोरे करते हैं। मोरे का कहना है कि इस क्रम पर पंत को आजमाने से विकल्प मिल सकते थे। हालांकि किरमानी पंत पर कार्तिक के चयन को जायज ठहराते हैं। उनका मानना है कि पंत को अभी विकेट कीपिंग में काफी कुछ करने की जरूरत है।

वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम

विराट कोहली (कप्तान), रोहित शर्मा (उपकप्तान), शिखर धवन, केएल राहुल, विजय शंकर, महेंद्र सिंह धोनी, हार्दिक पांड्या, केदार जाधव, दिनेश कार्तिक (विकेटकीपर), युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह, रविंद्र जडेजा, मोहम्मद शमी।

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