जब भी किसी बड़े खेल आयोजन का मौका हो और भारत में टीम भेजने का मामला हो तो विवाद ना हो,ऐसा मुमकिन नहीं है। भारतीय ओलिंपिक संघ यानी आईओए ने फुटबॉल की टीमों को तो ना भेजने का फैसला किया ही है साथ ही और भी कई टीमों का पत्ता एशियन गेम्स से कट गया है।
जकार्ता मे होने वाले एशियन गेम्स के लिए इंडियन ओलिंपिक ऐसोसिएशन यानी आईओए ने भारतीय दल का ऐलान कर दिया है तमाम रस्साकशी के बावजूद फुटबॉल की टीम को भारतीय दल में जगह नहीं दी गई है। आईओए की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक फुटबॉल ही नहीं बल्कि और भी कई खेलों की टीमों को जगह नहीं मिल सकीहै। भारत की ओर से 36इवेंट्स में कुल 524 एथलीट्स एशियाड में भाग लेने जाएंगे जिनमें से 277 पुरुष और 247 महिला एथलीट्स हैं।
आईओए ने इससे पहले 2370 एथलीट्स और ऑफिशियल्स की लिस्ट खेल मंत्रालय को भेजी थी जिसे अब काट-छांट के छोटा कर दिया गया है।
चार साल पहले इंचियोन में हुए एशियन गेम्स में 28 इवेंट्स में 541 एथलीट्स ने हिस्सा लिया था। इस हिसाब से देखें तो इस बार 17 कम एथलीट्स एशियन गेम्स में हिस्सा लेंगे।
जकार्ता में भाग लेने वाले भारतीय दल में सबसे अधिक संख्या एथलेटिक्स के खिलाड़ियों की होगी. इस इवेंट 52 एथलीट् भाग लेंगे जिनमें से सात एक्रिडिटेशन भी पेंडिंग हैं।
अगस्त में शुरू हो रहे एशियन गेम्स में भारतीय फुटबॉल टीम के ना भेजे जाने पर विवाद बढ़ता जा रहा है। आईओए ने भारत की पुरुष और महिला टीमों को इंडोनेशिया के शहर जकार्ता में होने वाले इन गेम्स में ना भेजने का फैसला किया है जिसके जवाब में फुटबॉल फेडरेशन ने आईओए को फुटबॉल के खेल की समझ ना होने का आरोप लगाते हुए अपने खर्चे पर टीम को भेजने की बात कही है।
भारतीय फुटबॉल फेडरेशन के जनरल सैक्रेटरी कुशल दास का कहना है, ‘ हमें आईओए की ओर से अब तक कोई आधिकारिक संदेश नही मिला है बस टेलीफोन के जरिए ही बता दिया गया है कि फुटबॉल की टीमों को नही भेजा जाएगा। अगर खर्चे की ही बात है तो हमारी फेडरेशन टीम की यात्रा और उसके रहने का खर्च उठाने के लिए तैयार है।
वर्ष 1951 के बाद यह पहली बार होगा जब एशियन गेम्स में भारत की फुटबॉल टीम को इसका हिस्सा नहीं नहीं बनाया गया। आईओए का दावा है कि एशियन गेम्स में टीम भेजने के लिए प्रदर्शन का जो पैमाना तय किया गया है, भारतीय फुटबॉल टीम उसपर खरी नहीं उतर रही है लिहाजा फुटबॉल टीम का पत्ता काट दिया गया है। अब फुटबॉल संघ ने इस मसले पर खेल मंत्रालय का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है।

