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अब विकास कार्यों में घिरे त्रिवेंद्र

विपक्षी दलों के सांसद और विधायक अपने क्षेत्र के साथ सरकार पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते रहे हैं। अभी तक उनके इन आरोपों को आम जन ज्यादा तव्वजों नहीं देते थे। क्योंकि अधिकतर लोगों का मानना है कि विपक्ष का काम सिर्फ सरकार की आलोचना करना है। मगर उत्तराखंड सरकार की ओर से जारी एक पत्र विपक्षी दल के आरोपों को सही साबित करती है। इतना ही नहीं उक्त पत्र सरकार की निष्पक्षता और संविधान की ली गई शपथ के साथ खिलवाड़ को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निजी सचिव की ओर से 4 जुलाई को एक पत्र जारी किया गया। इस पत्र में राज्य की 57 विधानसभाओं क्षेत्रों के विकास कार्यों की समीक्षा मुख्यमंत्री द्वारा किए जाने का कार्यक्रम दिया गया है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि पत्र में दिये गए सभी 57 विधानसभा क्षेत्र भाजपा विधायकों के हैं। यानी शेष 13 विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों की समीक्षा नहीं की जायेगी। ये वो क्षेत्र हैं, जहां का प्रतिनिधित्व विपक्षी दल के विधायक कर रहे हैं।
राज्य की विधान सभा के विकास कार्यों की समीक्षा के इस कार्यक्रम से कांग्रेस के 11 विधायकों और 2 निर्दलीय विधायकों की विधानसभाएं गायब हैं ।
मसलन देहरादून जिले के चकराता क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह करते हैं। वह क्षेत्र भी समीक्षा कार्यक्रम में शामिल नहीं है। इसके अलावा रुद्रप्रयाग जिले का केदारनाथ, उत्तरकाशी जिले से पुरोला, हरिद्वार जिले से भगवानपुर, अल्मोड़ा जिले का जागेश्वर का प्रतिनिधित्व कांग्रेस के विधायक करते हैं। इनके अलावा धनोल्टी और भीमताल विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक हैं। ये दोनों विधानसभा क्षेत्र को भी विकास कार्यों की समीक्षा कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है।
केदारनाथ से कांग्रेस विधायक मनोज रावत कहते हैं, ‘मुख्यमंत्री  ने संविधान की शपथ ली है कि वे राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करेंगे। लेकिन यहां मुख्यमंत्री खुले तौर पर भेदभाव कर रहे हैं। वे अपने को लोकतांत्रिक सरकारों में असली और अंतिम निर्विवाद राजा मानते हैं। इसीलिए वे विरोधियों की परवाह नहीं करते।’
वे आगे बताते हैं कि मुख्यमंत्री बनने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत स्वयं को बहुत ही लोकतांत्रिक मुख्यमंत्री सिद्ध करने के लिए एक घोषणा की थी। उक्त घोषणा के मुताबिक हर विधायक को एक साल में 10 करोड़ की सड़कें दी जाएंगी और एक साल में उनकी संस्तुति पर 50 लाख रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष से जरूरतमंदों को दिए जाएंगे। लेकिन यदि आप 1 साल के आंकड़ों को उठाकर देखें तो कांग्रेस के विधायकों को कुछ भी नहीं दिया गया है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत शिक्षिका उत्तरा पंत प्रकरण और धुमाकोट बस दुर्घटना के बाद इस मामले में भी घिरते नजर आ रहे हैं।

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