79वें कान्स फिल्म फेस्टिवल में इस बार भारत की मौजूदगी पहले से कहीं अधिक व्यापक और प्रभावशाली दिखाई देगी। करण जौहर, मौनी राॅय, ऐश्वर्या राय बच्चन, आलिया भट्ट, अमी विर्क, जैकलीन फर्नांडिस और पायल कपाड़िया समेत कई भारतीय सितारे रेड कारपेट पर चमक बिखेरेंगे, वहीं पंजाबी, मराठी, गुजराती, मलयालम और हिंदी फिल्मों की मजबूत भागीदारी भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा की वैश्विक स्वीकार्यता को नई ऊंचाई देगी। फिल्म मार्केट से लेकर ज्यूरी पैनल तक भारत की सक्रिय मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि विश्व सिनेमा में भारतीय कहानी और भारतीय चेहरों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है
फ्रांस में 12 मई से शुरू हो चुके 79वें कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 को लेकर भारतीय फिल्म जगत में जबरदस्त उत्साह है। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में गिने जाने वाले इस महोत्सव में इस बार भारतीय सिनेमा केवल ग्लैमर तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि कंटेंट, क्षेत्रीय सिनेमा, स्वतंत्र फिल्म निर्माण और अंतरराष्ट्रीय फिल्म कारोबार में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगा।
इस बार भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक निर्देशक पायल कपाड़िया का कान्स क्रिटिक्स वीक की ज्यूरी प्रमुख बनना है। 2024 में अपनी चर्चित फिल्म ‘ऑल वी इमेजिन एज लाइट’ के लिए ग्रां प्री जीतने वाली पायल कपाड़िया आज वैश्विक सिनेमा जगत में भारतीय समानांतर फिल्मों का सबसे बड़ा चेहरा बन चुकी हैं। उनका ज्यूरी प्रमुख बनना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय आर्ट सिनेमा की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का भी प्रतीक माना जा रहा है।
इस बार कान्स में क्षेत्रीय सिनेमा की मजबूत मौजूदगी विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है। पंजाबी स्टार एम्मी विर्क पहली बार कान्स के रेड कारपेट पर दिखाई देंगे। वह पंजाबी फिल्म ‘चर्दी कला’ की स्क्रीनिंग में हिस्सा लेंगे। लम्बे समय से पंजाबी सिनेमा अपनी अलग पहचान बना रहा है लेकिन कान्स जैसे मंच पर उसकी मौजूदगी भारतीय क्षेत्रीय फिल्मों की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को रेखांकित करती है।
मराठी फिल्म जगत से भी इस बार उल्लेखनीय प्रतिनिधित्व देखने को मिलेगा। वरिष्ठ अभिनेता अशोक सराफ, अभिनेत्री निवेदिता सराफ और अभिनेत्री प्राजक्ता माली की उपस्थिति यह दर्शाती है कि अब भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा केवल घरेलू दर्शकों तक सीमित नहीं रह गया है।
ग्लैमर और फैशन की दुनिया में भी भारतीय सितारों का दबदबा कायम रहेगा। हर साल की तरह इस बार भी ऐश्वर्या राय बच्चन कान्स रेड कारपेट का सबसे चर्चित भारतीय चेहरा होंगी। उनके साथ आलिया भट्ट, अदिति राव हैदरी और हाॅलीवुड अभिनेत्री ईवा लोंगोरिया एक अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी ब्रांड का प्रतिनिधित्व करती नजर आएंगी। पिछले कुछ वर्षों में कान्स में भारतीय अभिनेत्रियों की उपस्थिति केवल फैशन तक सीमित नहीं रही बल्कि यह भारतीय मनोरंजन उद्योग की वैश्विक ब्रांड वैल्यू का भी हिस्सा बन चुकी है।
अभिनेत्री तारा सुतारिया भी पहली बार कान्स में शिरकत करेंगी। हालांकि वह किसी फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए नहीं बल्कि ब्रांड एम्बेसडर के रूप में वहां मौजूद रहेंगी। इसी तरह मौनी राॅय तीसरी बार कान्स का हिस्सा बनेंगी। टीवी से फिल्मों तक का सफर तय करने वाली मौनी राॅय की लगातार मौजूदगी यह दिखाती है कि अब भारतीय टेलीविजन कलाकार भी अंतरराष्ट्रीय फैशन और मनोरंजन उद्योग में पहचान बना रहे हैं। जैकलीन फर्नांडिस भी दूसरी बार कान्स में दिखाई देंगी।
निर्माता-निर्देशक करण जौहर एक बार फिर कान्स रेड कारपेट पर नजर आएंगे। हाल ही में मेट गाला में अपनी उपस्थिति को लेकर चर्चा में रहे करण जौहर पिछले वर्ष फिल्म ‘होमबाउंड’ के प्रीमियर के लिए कान्स पहुंचे थे। उनकी मौजूदगी यह भी दिखाती है कि भारतीय मुख्यधारा सिनेमा अब वैश्विक मनोरंजन आयोजनों में लगातार अपनी जगह मजबूत कर रहा है। फिल्मकार अनुराग कश्यप और अनुभव सिन्हा भी इस बार कान्स में मौजूद रहेंगे। अनुराग कश्यप पहले ही ‘उड़ान’ और ‘गैंग्स आॅफ वासेपुर’ जैसी फिल्मों के जरिए कान्स में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। इस बार वह नई फिल्मों और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा को एक्सप्लोर करने पर ध्यान देंगे।
कान्स के फिल्म मार्केट में भी भारत की सक्रियता बढ़ी हुई दिखाई देगी। अभिनेता-निर्माता अंशुमान झा अपनी फिल्मों ‘बालन: दि बाॅय’, ‘सितम्बर 21’ और डाॅक्यूमेंट्री ‘स्पिरिट ऑफ दि वाइल्डफ्लावर’ को अंतरराष्ट्रीय खरीददारों और वितरकों के सामने पेश करेंगे। यह प्लेटफार्म दुनियाभर के फिल्म कारोबारियों के बीच साझेदारी और वितरण के लिए बेहद अहम माना जाता है।
कान्स के फिल्म मार्केट में भी भारत की सक्रियता बढ़ी हुई दिखाई देगी। अभिनेता-निर्माता अंशुमान झा अपनी फिल्मों ‘बालन: दि बाॅय’, ‘सितम्बर 21’ और डाॅक्यूमेंट्री ‘स्पिरिट ऑफ दि वाइल्डफ्लावर’ को अंतरराष्ट्रीय खरीददारों और वितरकों के सामने पेश करेंगे। यह प्लेटफार्म दुनियाभर के फिल्म कारोबारियों के बीच साझेदारी और वितरण के लिए बेहद अहम माना जाता है।
गुजराती अभिनेत्री-निर्माता मानसी पारेख भी अपने आगामी प्रोजेक्ट्स के साथ फिल्म मार्केट में हिस्सा लेंगी। उनकी फिल्म ‘लालो – कृष्ण साडा सहायते’ की सफलता के बाद अब गुजराती सिनेमा भी अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।
दरअसल, कान्स 2026 में भारत की मौजूदगी केवल सितारों की चमक तक सीमित नहीं है। यह भारतीय सिनेमा के बदलते स्वरूप, क्षेत्रीय फिल्मों के उभार, वैश्विक फिल्म कारोबार में बढ़ती हिस्सेदारी और भारतीय कलाकारों की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता की कहानी भी है। कभी केवल बाॅलीवुड तक सीमित माना जाने वाला भारतीय सिनेमा अब कई भाषाओं, संस्कृतियों और कहानियों के साथ विश्व मंच पर अपनी नई पहचान गढ़ता दिखाई दे रहा है।