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खांटी राजनीति या हृदय परिवर्तन?

विगत पखवाड़े 25 मार्च से भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ‘सौगात-ए-मोदी’ अभियान की शुरुआत की है। बिहार में इस वर्ष तथा असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष होने वाले चुनावों की तैयारी के रूप में इस अभियान को देखा जा रहा है। भाजपा नेता इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ नीति का विस्तार बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह अभियान जनता के जीवन में ठोस बदलाव लाने का एक प्रयास है- चाहे वह आधारभूत संरचनाओं का विकास हो, जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच या फिर नए अवसरों का सृजन। वहीं विपक्ष इस अभियान को संदेह की दृष्टि से देख रहा है। उनका तर्क है कि चुनाव आते ही भाजपा को जनता की याद क्यों आती है? वे पूछते हैं- क्या यह सच्चे हृदय परिवर्तन का संकेत है या फिर एक सोची-समझी चुनावी रणनीति, जिससे मतदाताओं को लुभाया जा सके? यह सच है कि लोकतंत्र में विकास और कल्याण कार्यों का स्वागत होना चाहिए, पर जब ये कार्य चुनाव के आस-पास ही अधिक सक्रिय रूप से दिखते हैं तो जनता के मन में संदेह उठना स्वाभाविक है। इसलिए यह सवाल बना रहेगा ‘सौगात-ए-मोदी’ केवल एक चुनावी ‘सौगात’ है या वाकई बदलाव की ईमानदार पहल? इसका उत्तर जनता ही अपने विवेक और अनुभव से तय करेगी

बीते पांच फरवरी को हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की बम्पर जीत के बाद अब पार्टी की निगाहें इसी साल के अंत में बिहार और अगले साल यानी 2026 में असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर है। इसी के तहत भाजपा ने अल्पसंख्यक वोटों को रिझाने के लिए गत सप्ताह 25 मार्च से ‘सौगात-ए- मोदी’ अभियान की शुरुआत की है। इसके अंतर्गत देशभर में 32 लाख वंचित मुसलमानों को ईद मनाने के लिए विशेष किट दी जा रही है। भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा ने इस अभियान की जिम्मेदारी सम्भाली है। मोर्चे के 32 हजार कार्यकर्ता देश की 32 हजार मस्जिदों के साथ मिलकर जरूरतमंदों तक ये किट पहुंचाएगी। इसके लिए हर मस्जिद से 100 लोगों को मदद पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। सौगात-ए-मोदी किट में कपड़े और खाने पीने का सामान है। इसमें महिलाओं के लिए सूट, पुरुषों के लिए कुर्ता-पायजामा, दाल, चावल, सेवई, सरसों तेल, चीनी, कपड़े, मेवा, खजूर शामिल हैं। प्रत्येक किट की कीमत 500 से 600 रुपए के करीब बताई गई है जिस पर सियासत भी गरमा गई है।

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर त्यौहार के जश्न और हर किसी की खुशी में शामिल होते हैं। हम हर त्यौहार को रंगों से भरपूर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आज हम ‘सौगात-ए-मोदी’ किट बांट रहे हैं क्योंकि यह रमजान का महीना है। सभी की आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए। रमजान के पवित्र महीने और ईद, गुड फ्राइडे, ईस्टर,नरौज के मौके पर अल्पसंख्यक मोर्चा ‘सौगात-ए-मोदी’ अभियान के जरिए जरूरतमंदों तक पहुंचेगा। जिला स्तर पर ईद मिलन समारोह भी आयोजित किए जाएंगे।’ अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी यासिर जिलानी ने कहा- ‘ये अभियान भाजपा के मुस्लिम समुदाय के बीच कल्याणकारी योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए है। इसके जरिए भाजपा और एनडीए के लिए राजनीतिक समर्थन जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।’

बीजेपी नेता और दिल्ली हज कमेटी की अध्यक्ष कौसर जहां कहते हैं- ‘प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह एक और बहुत अच्छी पहल है। आपने देखा होगा कि जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है हमने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी बिना किसी भेदभाव के अपने साथ लिया है जो हमारा मूल मंत्र है कि ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ को दर्शाता है। भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी का कहना है कि- ‘नरेंद्र मोदी का विकास एजेंडा कभी भी वोटों के लिए सौदा नहीं रहा है। पिछले 11 सालों में उन्होंने समाज के आखिरी पायदान पर खड़े लोगों के जीवन में खुशियां लाने का काम किया है।’ केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि ‘मेरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘सबका साथ, सबका विकास’ में विश्वास करते हैं। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार और बिहार सरकार विकास की दिशा में काम कर रही है।’

दूसरी तरफ विपक्ष भाजपा से सवाल पूछ रही है कि यह राजनीति है या हृदय परिवर्तन। कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने भाजपा पर हमला करते हुए आरोप मढ़ा है कि ‘बिहार में चुनाव है तो ‘सौगात किट’ के जरिए भाजपा वोट मांग रही है। अगर बिहार में ‘सौगात’ देने की इच्छा थी तो बिहार से पलायन रोकने के लिए नौकरियां देनी चाहिए थी।’

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का मानना है कि ‘अगर प्रधानमंत्री मोदी के ये विचार हैं तो मैं उनका स्वागत करता हूं लेकिन देश में करीब 25 करोड़ मुसलमान हैं। 95 प्रतिशत मुसलमान गरीब हैं। पीएम को उनकी सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार सुनिश्चित करना चाहिए।’

तृणमूल कांग्रेस से सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि ‘क्या आपने मगरमच्छ का चेहरा देखा है? ऐसा लगता है कि जानवर मुस्कुरा रहा है लेकिन जब आप उसके पास जाते हैं तो वह आपको निगल जाएगा। यही स्थिति भाजपा के साथ भी है। दुनिया उनके कारनामों के बारे में जानती है, लेकिन उनके पास दिखाने के लिए कुछ नहीं है।’ महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए उसकी राजनीति को दोहरा और स्वार्थी बताया है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय को ईद के मौके पर ‘सौगात-ए-मोदी’ किट बांटने की योजना पर सवाल उठाए और इसे वोट बैंक की राजनीति करार देते हुए कहा कि भाजपा ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ का नारा दिया था, लेकिन अब वही पार्टी मुसलमानों को किट बांट रही है और यह ‘सौगात-ए-मोदी’ नहीं, बल्कि ‘सौगात-ए-सत्ता’ है। निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भाजपा से सवाल पूछा कि ‘यह राजनीति है या हृदय परिवर्तन? यह कैसा प्रेम है? ईश्वर उन्हें सद्बुद्धि दे और वे संविधान को स्वीकार करें। उन्हें नफरत की राजनीति से दूर रहना चाहिए। भाजपा ऐसी पार्टी है जो एक वोट के लिए कुछ भी कर सकती है।’

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि विपक्ष अक्सर बीजेपी पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाता है इस रणनीति से बीजेपी यह साबित करना चाहती है कि उसकी नीतियां समुदाय-आधारित नहीं, बल्कि गरीबी-आधारित हैं। उदाहरण के लिए ‘सौगात-ए-मोदी’ को सभी धर्मों के गरीबों तक विस्तार करने की बात कही जा रही है, ताकि तुष्टिकरण का ठप्पा न लगे। बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और वहां 17 फीसदी मुस्लिम आबादी निर्णायक भूमिका निभाती है। ऐसे में बीजेपी-एनडीए गठबंधन को इंडिया जैसे विपक्षी दलों से कड़ी चुनौती है जो मुस्लिम वोटों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। यह योजना ‘मोदी की गारंटी’ के तहत पेश की जा रही है। सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा ईद के मौके पर अल्पसंख्यक परिवारों को ‘सौगात-ए-मोदी’ के जरिए रिझाने का प्रयास कर रही है?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी इस योजना के तहत मुस्लिम वोट बैंक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। बीजेपी की यह योजना पार्टी की पारंपरिक छवि जो हिंदुत्व और बहुसंख्यक समुदाय के बीच मजबूत आधार वाली मानी जाती है से हटकर एक समावेशी छवि बनाने की कोशिश का हिस्सा है। इससे पहले बीजेपी पसमांदा मुसलमानों के अधिकारों की बात करती रही है।

भाजपा जानती है कि मुस्लिम वोटर आमतौर पर उसके खिलाफ एकजुट हो जाते हैं। ऐसे में ‘सौगात-ए-मोदी’ के जरिए पार्टी इस ध्रुवीकरण को कम करना चाहती है। क्योंकि उसकी कोर रणनीति हिंदुत्व और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण रही है जैसा कि ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ और ‘एक हैं तो सेफ हैं’ जैसे नारों से दिखता है। लेकिन ‘सौगात-ए-मोदी’ के जरिए पार्टी यह दिखाना चाहती है कि वह केवल हिंदुओं की नहीं, बल्कि सभी समुदायों की पार्टी है। यह खासकर उन राज्यों में महत्वपूर्ण है जहां अल्पसंख्यक वोट निर्णायक हैं।

यह रणनीति केवल बिहार या राज्य चुनावों तक सीमित नहीं है। आगामी विधानसभा चुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों में भी इस योजना का लाभ मिल सकता है। ‘सौगात-ए-मोदी’ जैसे कदम 2025 बिहार, यूपी निकाय, 2026 असम और पश्चिम बंगाल के चुनावों के लिए भी जमीन तैयार कर रहे हैं। इस रणनीति का मकसद सभी को साथ लेकर चलना है। बीजेपी इस रणनीति के जरिए मुस्लिम समुदाय में अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है। साथ ही वह विपक्ष के उन आरोपों को भी गलत साबित करना चाहती है जिसमें उसे मुस्लिम विरोधी बताया जाता है। भाजपा का मानना है कि इस रणनीति से उसे खासकर बिहार में होने वाले चुनावों और इसके बाद पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में फायदा मिल सकता है। लेकिन मुस्लिम समुदाय का बीजेपी के प्रति ऐतिहासिक अविश्वास और हिंदुत्व की छवि इस रणनीति को कमजोर कर सकती है। वहीं विपक्ष इसे वोट के लिए नाटक बताकर बीजेपी के खिलाफ अभी से नैरेटिव बनाने में जुट गया है। ऐसे में इसका फायदा भाजपा को कितना मिलेगा यह तो चुनाव परिणामों के बाद ही पता चलेगा।

गौरतलब है कि पिछले साल 5 राज्यों के विधानसभा और आम चुनाव 2024 पर फोकस करते हुए अल्पसंख्यक वोटों को अपने पाले में करने के लिए भाजपा ने राष्ट्रीय सदस्यता अभियान की शुरुआत करते हुए अपने अल्पसंख्यक मोर्चा को अल्पसंख्यक समुदायों से 50 लाख सदस्यों को शामिल करने का काम सौंपा था जिसमें उसे कामयाबी नहीं मिली। भाजपा के इस कदम को अल्पसंख्यकों तक पहुंचने के आखिरी प्रयास के रूप में माना जा रहा था। पार्टी का यह कदम पसमांदा मुस्लिम समुदाय का समर्थन हासिल करने के असफल प्रयासों के बाद आया जिन्हें मुसलमानों के बीच निचली जाति माना जाता है। यही नहीं पिछले साल पार्टी ने सूफी संवाद महाअभियान के साथ सूफी समुदाय के लिए एक आॅलिव ब्रांच का भी विस्तार किया था। भाजपा ने लोकसभा चुनावों से पहले विशेष रूप से केरल में ईसाइयों तक भी पहुंचने की कोशिश की और इसका पार्टी को लाभ भी मिला क्योंकि बीजेपी ने त्रिशूर में सुरेश गोपी के माध्यम से राज्य में अपनी पहली लोकसभा सीट जीती। लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही लगातार भाजपा नेताओं के मुसलमानों पर हमले बोलने वाले बयान आ रहे हैं।

भाजपा नेताओं के मुस्लिम विरोधी बयान

बीजेपी नेता लगातार मुसलमानों पर हमलावर हैं। कुछ समय पहले मोदी सरकार में मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा था कि ‘भारत में मुसलमानों को रहने देना भारी भूल रही। जब धर्म के आधार पर देश का बंटवारा हुआ था तो उनको यहां नहीं रहने देना था। चुनाव से पहले भी उन्होंने मुसलमानों पर निशाना साधते हुए कहा था कि मुझे देशद्रोहियों का वोट नहीं चाहिए।’

इससे पहले पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता शुभेन्दु अधिकारी ने कहा था कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ की जरूरत नहीं है। ‘जो हमारे साथ हैं हम उनके साथ’ का नया नारा देते हुए कहा था कि ‘भाजपा को अल्पसंख्यक मोर्चा भंग कर देना चाहिए।’ शुभेन्दु ने पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव में भाजपा के खराब प्रदर्शन के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराया था। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी कहा था कि उनके राज्य में मुसलमानों की संख्या काफी बढ़ गई है और यह उन्हें काफी दर्द देता है।

मुसलमानों पर भाजपा नेता ही नहीं खुद पीएम मोदी ने भी बयान दिए हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान पहले चरण की वोटिंग के बाद 21 अप्रैल को राजस्थान के बांसवाड़ा में चुनावी रैली में दिए एक भाषण में पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में समुदाय विशेष के लिए ‘घुसपैठिए’ और ‘ज्यादा बच्चे पैदा करने वाला’ जैसी बातें कहीं थी। पीएम ने कहा था कि पहले जब उनकी सरकार थी तब उन्होंने कहा था कि ‘देश की सम्पत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। इसका मतलब ये सम्पत्ति इकट्ठा करके किसको बांटेंगे-जिनके ज्यादा बच्चे हैं उनको बांटेंगे, घुसपैठियों को बांटेंगे। क्या आपकी मेहनत का पैसा घुसपैठियों को दिया जाएगा? आपको मंजूर है ये?’

देश में मुसलमानों की आबादी

वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में मुसलमानों की आबादी 15 प्रतिशत से ऊपर है। देश की 15 लोकसभा सीटें मुस्लिम बहुल हैं इसके बावजूद लोकसभा में इनकी भागीदारी काफी कम रही है। 543 सदस्यों वाली 18वीं लोकसभा में 26 मुस्लिम सांसद चुने गए हैं इनमें से भाजपा के केवल एक हैं।

क्या है ‘सौगात-ए-मोदी’ किट?

ईद के शुभ अवसर पर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर देश के सभी कोनों में जरूरतमंद मुसलमानों के घरों तक ईद की खुशहाली पहुंचाने के लिए मोदी किट पहुंचाने का निर्णय लिया गया है। भाजपा ने साफ लहजे में कहा कि ‘सौगात-ए-मोदी’ किट गरीब मुसलमानों को ईद का तोहफा है। गरीब मुसलमान भी अच्छे से ईद मना सकें इसलिए उन्हें ईद मनाने के लिए यह किट दे रही है।

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