वर्ष 2023 उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी और वर्तमान विधायक पार्वती दास ने अपने दिवंगत पति चंदन रामदास की सीट पर लगभग 2400 मतों से जीत दर्ज की थी। दो वर्ष बाद उनकी विकास यात्रा का आकलन बताता है कि बागेश्वर नगर क्षेत्र में सड़क चैड़ीकरण, स्ट्रीट लाइट, सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं में कुछ सकारात्मक सुधार अवश्य दिखाई देते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति, सौर ऊर्जा, सिंचाई, शिक्षा, सड़कों की मरम्मत, जंगली जानवरों से सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मूलभूत मुद्दे अभी भी गम्भीर रूप से उपेक्षित हैं। कई गांवों में ‘हर घर नल’ योजना कागजों में सफल दिखती है लेकिन नलों में पानी नहीं आता, जबकि एससी/एसटी बाहुल्य बस्तियों में सौर ऊर्जा जैसी बुनियादी सुविधा तक नहीं पहुंची। जनता की सबसे बड़ी शिकायत जनप्रतिनिधि की सीमित सक्रियता, गांवों में कम दौरे और समस्याओं के प्रति धीमी प्रतिक्रिया को लेकर है। इसके बावजूद बैजनाथ अस्पताल में डिलीवरी, लैब, अल्ट्रासाउंड और एम्बुलेंस जैसी उपलब्धताएं लोगों को राहत देती हैं और शहर के कुछ वार्डों में बुनियादी ढांचे का सुधार भी स्वीकार किया जाता है। कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि बागेश्वर में विकास के प्रयास हुए हैं, पर वे संतुलित नहीं हैं, कुछ क्षेत्र चमके तो कई गांव आज भी पिछड़े हुए हैं। जनता का स्पष्ट संदेश यही है कि अब दिखावे नहीं, समान और ईमानदार जमीनी विकास की आवश्यकता है
बागेश्वर विधानसभा सीट उत्तराखण्ड की एक बेहद महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से संवेदनशील अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित सीट मानी जाती है, जो कुमाऊं मंडल के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है और बागेश्वर जिले के साथ-साथ आस-पास के ग्रामीण इलाकों को समेटती है। यह सीट लम्बे समय तक दिवंगत नेता चंदन रामदास के प्रभाव में रही, जिन्होंने यहां से लगातार कई चुनाव जीते और उत्तराखण्ड सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं, जिससे बागेश्वर सीट को ‘भाजपा का गढ़’ माना जाने लगा। अप्रैल 2023 में चंदन रामदास के निधन के बाद यह सीट खाली हुई और यहां उपचुनाव हुआ, जिसमें उनकी पत्नी पार्वती दास ने भारतीय जनता पार्टी की ओर से चुनाव जीत दर्ज की और वे वर्तमान में इस सीट की विधायक हैं। बागेश्वर विधानसभा में सामाजिक दृष्टि से दलित मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं लेकिन ब्राह्माण, क्षत्रीय और ओबीसी वर्ग का भी अच्छा प्रभाव है, जिससे यहां का चुनाव हमेशा बहुकोणीय राजनीतिक संतुलन पर टिका रहता है। परम्परागत तौर पर यहां मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच ही होता आया है। हालांकि स्थानीय मुद्दे, सड़क, स्वास्थ्य, पलायन और रोजगार यहां के चुनावी परिणामों को गहराई से प्रभावित करते हैं। बागेश्वर सीट को कुमाऊं की राजनीति का संकेतक भी माना जाता है क्योंकि यहां का जनादेश यह दर्शाता है कि पहाड़ की जनता राज्य सरकार के कामकाज को किस नजरिए से देख रही है, और इसी कारण हर विधानसभा चुनाव में यह सीट प्रदेश की सबसे ज्यादा चर्चित सीटों में गिनी जाती है। पार्वती दास को लेकर यहां मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिली। ज्यादातर लोगों की विधायक से शिकायत है कि वे क्षेत्र में नजर नहीं आती हैं।
‘दि संडे पोस्ट’ ने कांडा, गरुड़ और बागेश्वर नगर क्षेत्रों में व्यापक सर्वेक्षण किया। सर्वे के दौरान यह पाया गया कि कई इलाकों में सड़क चैड़ीकरण, स्ट्रीट लाइट, पार्कों के सौंदर्यीकरण और सफाई व्यवस्था में सकारात्मक सुधार हुए हैं, वहीं कुछ वार्डों और बाजार क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति, ट्रैफिक प्रबंधन, जल निकासी तथा स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास की दिशा में प्रयास तो हुए हैं, लेकिन योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की आवश्यकता है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगली सूअर, बंदर और बाघ के कारण खेती बर्बाद हो रही है। जमीनें बंजर पड़ती जा रही हैं और युवा रोजगार की तलाश में बाहर जा रहे हैं। सौर ऊर्जा सिर्फ जान-पहचान वाले या नेताओं के घरों के आस-पास ही लगाई जाती हंै, एससी/एसटी बाहुल्य कई गांवों 50-60 परिवारों के बीच, एक भी सौर ऊर्जा नहीं लगी और न ही सार्वजनिक जगहों पर लगाई गई। शिक्षा व्यवस्था भी कुछ ठीक नहीं है। विद्यालय में बच्चे कम हैं और शिक्षकों की कमी है, जिस कारण सभी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेज रहे हैं। कई ग्रामीणों ने कहा कि ‘‘2023 के उपचुनाव के बाद विधायक पार्वती दास शायद ही कभी उनके गांवों में आई हों।’’
‘दि संडे पोस्ट’ ने जब बैजनाथ क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया तो पाया कि ‘सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ में सुविधाएं तो हैं लेकिन पूरी नहीं हैं। कुछ मरीजों का कहना है कि ‘‘डाॅक्टर ठीक हैं, स्टाफ भी सहयोगी है, पर बड़ी सुविधाएं न होने की वजह से हमें अक्सर रेफर कर दिया जाता है।’’
डिलीवरी के लिए भर्ती महिलाओं का कहना था कि ‘‘यहां सामान्य सुविधाएं तो मिल जाती हैं लेकिन कई बार छोटी दिक्कत भी रेफर में बदल जाती है।’’ अस्पताल में मौजूद डाॅक्टरों ने भी माना कि अगर आधुनिक उपकरण और कुछ अतिरिक्त स्टाफ मिल जाए तो हाॅस्पिटल में सुविधाएं अच्छी हो सकती हैं।
गरुड़-बैजनाथ में डिलीवरी के लिए भर्ती महिला पुष्पा बुरोलिया का कहना है कि ‘‘यहां सुविधाएं ठीक हैं, समय पर डिलिवरी हो गई थी और हाॅस्पिटल में स्टाफ भी अच्छा है। कुछ दवाइयां यहीं से मिलती है, डिलिवरी के समय अल्ट्रासाउंड, दवाई फ्री में दी जाती है पर कुछ सुविधाएं यहां और होनी चाहिए क्योंकि कई बार डिलिवरी महिला को सुविधा न होने की वजह से यहां से बागेश्वर के हाॅस्पिटल में रेफर किया जाता है।’’ यहां मौजूद बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. अमित बंसल से अस्पताल की स्थिति को लेकर ‘दि संडे पोस्ट’ ने विस्तृत बातचीत की।
डाॅ. अमित बंसल ने बताया कि अस्पताल में इस समय चार परमानेंट डाॅक्टर, तीन बाॅन्ड डाॅक्टर, नौ नर्सिंग आॅफिसर वार्ड बाॅय, टेक्नीशियन सहित अन्य स्टाफ तैनात है। डाॅ. बंसल के अनुसार अस्पताल में वार्ड बाॅय की कमी सबसे बड़ी समस्या है। अक्सर इमरजेंसी में कुछ वार्ड बाॅय को बाहर भेजना पड़ता है, जिससे अंदर की व्यवस्था प्रभावित होती है। उनका कहना है कि ‘‘अगर वार्ड बाॅय की संख्या बढ़ जाए तो मरीजों की सुविधा और बेहतर हो सकती है।’’
डाॅ. बंसल ने बताया कि अस्पताल में कई सुविधाएं उपलब्ध हैं, जैसे एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, लैब, डिलीवरी रूम, ऑक्सीजन, जरूरी दवाइयां, 24 घंटे डाॅक्टरों की मौजूदगी, एम्बुलेंस इत्यादि। उन्होंने जानकारी दी कि सर्दियों में लगभग 150 मरीज प्रतिदिन आते हैं जबकि गर्मियों में यह संख्या 250-300 मरीज प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। जच्चा-बच्चा सेवाओं के बारे में उन्होंने बताया कि ‘‘गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए सभी सुविधाएं पूरी तरह फ्री हैं। दवाइयां और एम्बुलेंस सब अस्पताल की तरफ से दी जाती है। काॅम्प्लिकेशन वाली डिलीवरी को तुरंत जिला अस्पताल बागेश्वर रेफर कर दिया जाता है।“
अस्पताल को लेकर लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डाॅक्टर अक्सर जरूरी दवाइयां अस्पताल से उपलब्ध नहीं करवाते बल्कि बाहर के मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां लिख देते हैं। इससे गरीब मरीज बीमारी से नहीं इलाज के खर्च और दवाइयों की कीमतों से टूट जाते हैं। लोगों का कहना है कि इसका सीधा लाभ सिर्फ अस्पताल के पास मौजूद मेडिकल स्टोर्स को मिलता दिखाई देता है।
बेडी माधव वाट क्षेत्र में लोगों से बात करने पर एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि विधायक द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं काफी हद तक बेहतर की गई हैं। स्कूलों में बच्चों के लिए व्यवस्थाएं पहले से अधिक सुदृढ़ हुई हैं और चुनाव के समय किए गए कई वादों को पूरा किया गया है लेकिन बातचीत के दौरान एक गम्भीर समस्या बार-बार सामने आई, गांव के बीचों-बीच बहने वाला पुराना नाला।
ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के समय यह नाला इतना उफान पर आ जाता है कि इसी एकमात्र रास्ते से आने-जाने में लोगों को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ती है। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को तो कई बार कंधे पर उठाकर नाले के पार पहुंचाना पड़ता है क्योंकि फिसलने और बह जाने का डर हमेशा बना रहता है। नाले के किनारे कई घर हैं, जहां छोटे-छोटे बच्चे रहते हैं और हर बारिश में खतरा दोगुना हो जाता है। लोगों ने सवाल उठाया कि ‘‘अगर कोई बच्चा या व्यक्ति इस नाले में बह जाए तो जिम्मेदार कौन होगा?’’ ग्रामीणों का कहना है कि अगर यहां एक छोटी-सी पुलिया बन जाए तो वर्षों पुरानी यह समस्या तुरंत खत्म हो सकती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को कई बार शासन- प्रशासन को अवगत कराया लेकिन एक साल बीतने के बाद भी कोई कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ। हाल ही में नगर पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने पुल निर्माण की समस्या को सुनकर आश्वासन तो दिया लेकिन जमीन पर अभी तक कोई प्रगति नहीं दिख रही है।
गरुड़ निवासी भोपाल सिंह विधायक पार्वती दास से खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि ‘‘सालों तक चंदन राम दास जी विधायक रहे। उनके जाने के बाद पार्वती दास जी विधायक बनीं लेकिन विधायक निधि से अभी तक गांव में कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। न तो विधायक यहां देखने आती हैं और न कोई नेता। न ही शासन प्रशासन यहां की सुध लेता है। वोट के समय सब आते हैं लेकिन काम के नाम पर कोई नहीं। धरातल में कोई काम नहीं हुआ है, सिर्फ कागजी कार्यवाही में काम दिखाए जाते हैं। उनके अनुसार, ‘‘शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं भी ठीक नहीं हैं। यदि रात को कोई समस्या हो जाए तो 10 किलोमीटर दूर अस्पताल जाना पड़ता है, वह भी निजी गाड़ी से, जिससे काफी परेशानी होती है।“
वे कहते हैं ‘‘शिक्षा व्यवस्था की बात करें तो कई किलोमीटर दूर स्कूल है। प्राथमिक स्कूल में केवल 6,7 बच्चे पढ़ते हैं और शिक्षक न होने की वजह से शिक्षा व्यवस्था कमजोर है। ‘हर घर नल’ योजना में भी अनियमितताएं हैं। लगभग 150 परिवारों में से सिर्फ 20 घरों में नल लगे हैं लेकिन कागजों में उससे अधिक दिखाए गए हैं। जिनकी पहचान होती है, वहीं सौर ऊर्जा लगाई जाती है। सार्वजनिक स्थानों पर नहीं लगती। गांव में लगभग 50,60 अनुसूचित जाति परिवार रहते हैं लेकिन इनके यहां एक भी सौर ऊर्जा नहीं लगी। लोग अंधेरे में रहते हैं, कोई देखने या पूछने वाला नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि विधायक जी से कहने को बहुत कुछ है लेकिन यह सब वे तभी कहेंगे जब विधायक जी गांव में आएं और अपनी आंखों से यहां की स्थिति देखें।
पलटनिया गांव की नीमा पाण्डे कहती हैं कि ‘‘नेता हर बार चुनाव के टाइम पर यहां आते हैं और वादे करके जाते हैं लेकिन वह वादे अभी तक पूरे नहीं किए गए हैं। यहां पर न लोगों के पास गौशाला है, न ही शौचालय है और न ही पानी की सुविधा है। जो गांव की सड़क है वह भी जगह-जगह पर खराब है, जब भी हम शिकायत करते हैं तो सिर्फ हमें आश्वासन दिया जाता है लेकिन शासन- प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं होती।“
चंडिका वाट से एक बुुजुर्ग व्यक्ति ने बताया कि ‘‘मेरी सबसे बड़ी समस्या मकान की है, मेरा पुराना वाला मकान था वह आपदा में टूट गया। इसके बाद सरकार ने हमें दूसरे स्थान पर रखा, लेकिन 15 सालों से मुझे सरकार की तरफ से न ही कोई मकान मिला और न ही कोई सुविधा। मैंने कई बार विधायक जी से इस बारे में बात की लेकिन मुझे बस आश्वासन दिया गया।’’ उन्होंने बताया कि विधायक पार्वती दास द्वारा स्वास्थ्य खराब होने पर एक बार कुछ 5000 रुपए की धनराशि की सहायता की थी।
देवनाई गांव की हेमा देवी विधायक से खुश हैं। वे कहती हैं कि ‘‘हमारे गांव में विधायक निधि से सारी सुविधाएं की गई हैं। जैसे स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा व्यवस्था और रोड, पेयजल आदि सुविधा हैं। 2027 में भी पार्वती दास जी ही विधायक बनेंगी।’’
ग्राम सभा मटेना, लालपुर गरुड़ के उपैन जोशी का कहना है कि ‘‘कंसारी मोटर मार्ग ‘प्रधानमंत्री सड़क योजना’ के अंतर्गत बनवाया गया था। विगत 5-6 सालों के अंतर्गत इस रोड की स्थिति दयनीय है। इस सड़क में 5 से 6 विद्यालयों की गाड़ियां प्रतिदिन चलती रहती हैं और ग्रामवासियों के लिए यह रोजमर्रा एवं आवागमन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण एकल मार्ग है लेकिन सरकार का इस तरफ कोई भी ध्यान नहीं है।’’
उनका यह भी कहना है कि ‘‘स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए एवं पेयजल जैसी हमारी समस्याओं का निवारण किया जाए। वे आरोप लगाते हैं कि ‘जल जीवन मिशन’ के तहत जो कार्य एवं ‘हर घर नल’ लगवाए गए थे उसमें पूर्ण रूप से पानी नहीं आता। विधायक द्वारा कार्य और लागत धनराशि तो नीचे के अधिकारियों को प्राप्त करवा दी जाती है लेकिन उनके द्वारा सही तरीके से काम नहीं करवाया जाता, न ही हमारी बात सुनी जाती है। यहीं पर लालपुर है जिसकी हालत भी काफी खराब है परंतु प्रशासन को कई बार कहने पर भी कोई यहां देखने तक नहीं आता, सभी शासन-प्रशासन, अधिकारियों और कार्यकर्ता की मनमानी चल रही है। काॅल करने पर भी कोई उठाता नहीं है और न ही हमारी समस्याओं को सुना जाता है।’’
अमटोरा की मीना परिहार का कहना है कि ” विधायक पार्वती दास जी द्वारा विकास कार्य गांव में हुए हैं, शिक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। उनके गांव में रोड और पेयजल आदि सुविधा अच्छी है और विधायक जी यहां कोई भी कार्य हो तो आती हैं और सहयोग करती हैं।’’
कांडा के लक्षम राम लेकिन इसके ठीक उलट कहते हैं कि ‘‘पार्वती दास जब यहां आती हैं तो केवल आश्वासन ही देती हैं। कई बार उनसे सड़क निर्माण कार्य और रोड की मरम्मत के लिए कहा गया लेकिन आज भी आधी सड़क में ही डामरीकरण हुआ है। आगे का रास्ता काफी खराब है हर घर में लगे नलों का पानी बिल बहुत अधिक आ रहा है। गरीब आदमी इतना बिल कैसे भरे? न रोजगार है, न कोई सहारा। लोग बाहर पलायन कर रहे हैं।’’
जैसर, गागरीगोल के केशर सिंह कोरंगा ने बताया कि गांव में जंगली जानवरों जैसे जंगली सूअर, बंदर और कभी-कभी बाघ का आतंक रहता है। खेती न होने के कारण यहां के किसान बाहर पलायन कर रहे हैं। हर साल अधिक जमीन बंजर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि सिंचाई की भी काफी परेशानी है। हमारे गांव में विधायक निधि से आज तक कोई कार्य नहीं हुआ है। सिर्फ एक रोड ढुकरी में बनी थी वह भी आधी ही बनी, पूरी नहीं हुई।
ग्राम कंसारी के नारायण राम का कहना है कि ‘‘गांव में कुछ सुविधाएं हैं, लेकिन कई सुविधाएं आज भी नहीं हैं। यहां लगभग 30-40 हरिजन परिवार रहते हैं, जिनके यहां न तो सौर ऊर्जा लगी है और न ही रास्ते बने हैं। बरसात में घरों के आंगन की दीवार धंस गई थी, जिसे विधायक को दिखाया भी गया था। कई बार काॅल किया गया, लेकिन न काॅल उठाया गया और न कोई कार्रवाई हुई सिर्फ आश्वासन ही मिला।“
ग्राम सभा कांडा कोईराली की प्रियांशी रौतेला का कहना है कि ‘‘गांव में बिजली, हर घर नल मिशन के तहत पानी के कनेक्शन और स्कूल की सुविधा उपलब्ध है। पहले बच्चों को जंगलों के रास्ते होते हुए स्कूल जाना पड़ता था लेकिन अब गांव तक सड़क बन जाने से काफी सुविधा हुई है।“
कठायतबाड़ा क्षेत्र के कई ग्रामीणों का कहना है कि आज तक उनके गांव में एक भी सरकारी पेयजल योजना के तहत पानी का नल नहीं लगा है। ग्रामीणों के अनुसार यह क्षेत्र नगर पालिका सीमा के अंदर आता है इसके चलते जल निगम द्वारा कोई भी हर घर पेयजल कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि नगर पालिका हो या स्थानीय विधायक किसी ने भी यहां एक सार्वजनिक नल लगाने की कोशिश नहीं की और रास्तों पर सौर ऊर्जा लाइटें भी केवल एक-दो जगह दूर-दूर लगाई गई हैं, जिससे रात में अंधेरा और असुरक्षा की समस्या बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका अध्यक्ष सुरेंद्र खेतवाल के घर के पास क्षेत्र में सभी रास्तों पर पूरी सौर ऊर्जा लाइटें लगी हैं, नालियां अच्छी बनी हैं, सड़कें भी ठीक हालत में हैं लेकिन अन्य वार्ड में नालियां तो बनाई गई हैं, लेकिन उनका गंदा पानी सीधे रास्तों पर बहता है और रोजमर्रा की परेशानी झेलने के बावजूद समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
विधायक पार्वती दास के आवास को जाने वाले मार्ग पर एक नाला पड़ता है। इस नाले में इतना अधिक कूड़ा और गंदगी जमा है कि पास से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। यही नाला अस्पताल के पास से होकर राधा-कृष्ण मंदिर के पीछे से बहते हुए अंत में सरयू नदी में मिलता है। आस-पास के घरों के बाथरूम का गंदा पानी, दुकानदारों का कूड़ा और अन्य गंदगी सीधे इसी नाले में डाली जाती है। विडम्बना यह है कि इसी नाले का गंदा पानी सरयू नदी में जाकर मिलता है और आगे चलकर उसी नदी का पानी बाबा बागनाथ को जलाभिषेक के रूप में चढ़ाया जाता है। ऊपर से बहकर आ रही गंदगी किसी को दिखाई नहीं देती, न प्रशासन को, न नगर पालिका को और न ही जनप्रतिनिधियों को। स्वच्छता अभियान की बातें तो बहुत होती हैं लेकिन इस नाले की सफाई आज तक ठोस रूप से नहीं की गई।
कई लोगों का कहना है कि विधायक का ध्यान मुख्य रूप से मंदिरों के सौंदर्यीकरण पर ही केंद्रित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जितना खर्च मंदिरों के निर्माण और मरम्मत पर किया गया है, अगर वही बजट गांवों और नगर क्षेत्र के विकास पर लगाया जाता तो आज बागेश्वर की तस्वीर शायद कहीं बेहतर होती। लोगों का कहना है कि शहर में न तो पार्किंग की उचित व्यवस्था बनाई गई है और न ही ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए हैं। कई बार इतना अधिक जाम लग जाता है कि लोगों का सुरक्षित निकलना मुश्किल हो जाता है। खासकर अस्पताल के पास स्थिति और भी गम्भीर हो जाती है। अगर किसी समय एम्बुलेंस फंस जाए तो मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है। नगर पालिका द्वारा बनाए गए सार्वजनिक शौचालय भी ठीक नहीं है, शहर में पेयजल की समस्याएं भी लगातार बनी हुई हैं, जिसकी शिकायतें आम हैं। कई लोगों का मानना है कि पूर्व विधायक चंदा रामदास जनता से नियमित रूप से मिलते थे और क्षेत्र की परिस्थितियों को नजदीक से देखने की कोशिश करते थे। लेकिन उनकी पत्नी और वर्तमान विधायक पार्वती दास नगर क्षेत्र या गांवों में बहुत कम दिखाई देती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि नियमित रूप से क्षेत्र का निरीक्षण करें, लोगों से बात करें और जमीनी हालत देखें तो विकास कार्यों की दिशा और गति दोनों बेहतर हो सकती हैं।
कई लोगों ने यह भी कहा कि जब विधायक को सरकारी वाहन, ड्राइवर, पेट्रोल और यात्रा से जुड़ी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं तो महीने में एक-दो बार ही सही, गांव-गांव जाकर या नगर क्षेत्र में घूमकर स्थिति को स्वयं देखना चाहिए। लोगों का यह भी कहना है कि यदि वे समय निकालकर क्षेत्र का दौरा करें तो उन्हें विकास की जरूरतों और प्राथमिकताओं का वास्तविक अंदाज बेहतर रूप में मिल सकता है।

