राजनीतिक दृष्टि से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा विपक्ष के लिए भी एक अवसर था। विपक्ष चाहता तो सरकार का विरोध-प्रदर्शन कर राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष धामी सरकार की जन विरोधी तस्वीर पेश कर सकता था लेकिन विपक्ष इसमें चूक गया। कांग्रेस लगातार राज्य सरकार को बेरोजगारी, पलायन, महंगाई और विभिन्न स्थानीय मुद्दों पर घेरने का प्रयास करती रही है लेकिन जब पार्टी के मुखिया स्वयं राज्य में आकर सरकार और संगठन के बीच समीक्षा बैठक कर रहे थे तब विपक्ष के आरोपों की धार कुछ हद तक कमजोर ही दिखाई दी। इसका भी मुख्यमंत्री धामी को राजनीतिक लाभ मिला। देहरादून निवासी शेखर चंद्र जोशी कहते हैं ‘‘तीन दिन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे में कहीं भी पूरे प्रदेश में कांग्रेस ने कोई धरना-प्रदर्शन या विरोध नहीं किया। इससे नितिन नबीन को लगा कि धामी सरकार में सब कुछ ठीक-ठाक है।’’
जंग को धार, विरोधियों पर वार
गदरपुर स्थित जिस विधायक का आवास सियासत के अलम्बरदारों का अड्डा बना था वह यूं धराशायी होगा और सत्तारूढ़ पार्टी के सबसे बड़े विरोधी विधायक सूबे के सीएम के गुणगान करने लगेंगे यह असम्भव लग रहा था। जो नेता मुख्यमंत्री धामी को असहज करने में आगे रहते थे वह हाथों में फूल लेकर सबसे आगे नजर आएंगे यह एक सपना था। अपने तीन दिवसीय दौरे में असम्भव को सम्भव और सपनों को हकीकत बनाकर भाजपा के हाईकमान ने दिखा दिया कि वह अब सीएम धामी की हैट्रिक लगाने के लिए मजबूत फील्डिंग कर रहा है। यही नहीं संगठन और सरकार का समन्वय स्थापित कर न केवल भाजपा मुखिया नितिन नबीन ने विरोधियों पर वार किया बल्कि 2027 की जंग में धार लगा गए
प्रकरण – 1
‘उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देश के सबसे ईमानदार मुख्यमंत्री हैं। वे धामी को 2047 तक मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।’ गदरपुर के विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पाण्डेय ने ऐसा कहकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। खासकर उन लोगों की रातों की नींद हराम होती नजर आई जो सीमए धामी के विरोध में अरविंद पाण्डेय को एक मोहरें के रूप में इस्तेमाल करने की शतरंजी चाल चल रहे थे। ऐसे में जब प्रदेश का सत्तासीन पार्टी का कोई एकमात्र विधायक मुख्यमंत्री को निशाने पर ले रहा था और उनके विरोध में पनप रही आवाज को बुलंद करने का बीड़ा उठाए हुए था अचानक उसका हृदय परिवर्तन होना आश्चर्यचकित कर देने वाला प्रकरण साबित हो रहा है।
प्रकरण – 2
जिस दिन से प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बने हैं उसी दिन से उनके खिलाफ तरह-तरह के हालात पैदा करने और उन पर सीधे हमले न करने की बजाय सरकारी मशीनरी को जनता की समस्यायों को हल न करने वाला कहकर राजनीतिक चक्रव्यूह बनाने वाले लोग अचानक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का स्वागत करने वालों में सबसे अग्रिम पंक्ति में खड़े नजर आए तो इसे राजनीतिक गलियारों में चमत्कार कहा जा रहा है।
प्रकरण – 3
पिछले चार साल से प्रदेश की भाजपा राजनीति को ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सबसे असहज करने वाला मुद्दा है अंकिता भंडारी हत्याकांड। इस हत्याकांड से हर उत्तराखण्डी व्यक्ति बहुत ही व्यथित और आक्रोशित है। इस आक्रोश को थामने के लिए धामी सरकार न केवल आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा की कार्यवाही कर चुकी थी बल्कि सीबीआई जांच के आदेश भी दे चुकी थ। लेकिन आम आदमी का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा था। कारण यह कि इस कांड में भाजपा के महामंत्री (संगठन) अजेय कुमार और प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम को आरोपी मानते हुए यह प्रचारित किया जा रहा था कि यही वो दो वीवीआईपी हंै जिनकी वजह से अंकिता भंडारी हत्याकांड को अंजाम दिया गया। हालांकि यह कही सिद्ध नहीं हो सका है कि दोनों में से एक का भी नाम प्रत्यक्ष रूप से इस हत्याकांड से जुड़ा है लेकिन बावजूद इसके जनता के सबसे बड़े जख्म पर मरहम लगाते हुए महामंत्री संगठन अजेय कुमार को उत्तराखण्ड से हटा दिया गया।
प्रकरण – 4
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का यह कहना कि ‘‘मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ही नेतृत्व में होंगे 2027 के विधानसभा चुनाव।’’ उन अफवाहों पर विराम लगा गया है जो आए दिन छोटे से राज्य उत्तराखण्ड की राजनीति को अस्थिर करने का काम कर रहे थे।
उक्त चारों प्रकरण भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के 28 मई को उत्तराखण्ड के तीन दिवसीय दौरे पर आने के बाद के हैं। नबीन के देवभूमि की पावन भूमि पर कदम रखने के महज चार दिन में ही वह सब कुछ हो गया जो उत्तराखण्ड की राजनीति में अचरज माना जा रहा था। नबीन के पहली बार उत्तराखण्ड आगमन से ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के वह कांटे दूर हो गए जो उनकी तीसरी बार ताजपोशी में सबसे बड़ी बाधा साबित हो रहै थे। एक तरह से देखा जाए तो नबीन का उत्तराखण्ड दौरा मुख्यमंत्री धामी के लिए राजनीतिक संजीवनी साबित हो रहा है।
कहा जा सकता है कि ऐसे में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का उत्तराखण्ड दौरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए कई मायनों में सकारात्मक साबित हुआ है। इस दौरे से न केवल विरोधियों को साधने का काम हुआ है बल्कि यह भी स्पष्ट हो गया कि केंद्रीय नेतृत्व मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व और उनके कार्यों से संतुष्ट दिखाई दे रहा है।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का दौरा ऐसे समय हुआ जब उत्तराखण्ड में धामी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। किसी भी सरकार के लिए यह समय उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और शेष कार्यों को गति देने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यह तीन दिवसीय दौरा अहम कड़ी साबित हो सकता है। इस दौरान भाजपा हाईकमान द्वारा पार्टी पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों और संगठन के विभिन्न स्तरों के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करना भी सराहनीय कहा जा रहा है। इस दौरे की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी केंद्र में दिखाई दिए। सबसे बड़ा लाभ मुख्यमंत्री धामी को यह मिला कि दौरे के दौरान संगठन की ओर से उनके नेतृत्व पर किसी प्रकार का प्रश्नचिह्न नहीं लगाया गया। भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष का दौरा अक्सर संगठनात्मक समीक्षा के रूप में देखा जाता है। यदि किसी मुख्यमंत्री के कार्यों को लेकर असंतोष होता है तो उसके संकेत भी ऐसे दौरों में देखने को मिलते हैं लेकिन उत्तराखण्ड में ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। इसके विपरीत विकास कार्यों और सरकार की योजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। इससे यह संदेश गया कि केंद्रीय नेतृत्व मुख्यमंत्री धामी के साथ मजबूती से खड़ा है।
धामी सरकार पिछले कुछ वर्षों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी), नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, भू-कानून में संशोधन तथा निवेश आकर्षित करने जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उठा चुकी है। नितिन नबीन के दौरे के दौरान इन उपलब्धियों का उल्लेख होने से मुख्यमंत्री धामी न केवल गदगद दिखाई दिए बल्कि उनकी राजनीतिक स्थिति पहले से मजबूत हुई। भाजपा कार्यकर्ताओं को यह विश्वास मिला कि सरकार द्वारा उठाए गए कदम पार्टी की वैचारिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं।
इस दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी बताया जा रहा है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार भी रहा। अक्सर देखा जाता है कि सरकार बनने के कुछ वर्षों बाद संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच दूरी बढ़ने की शिकायतें सामने आती हैं लेकिन नितिन नबीन ने विभिन्न बैठकों के माध्यम से कार्यकर्ताओं की बात सुनी और संगठन को सक्रिय बनाए रखने का संदेश दिया। इसका अप्रत्यक्ष लाभ मुख्यमंत्री धामी को मिलना तय है क्योंकि एक मजबूत और सक्रिय संगठन सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम होता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पिछले चार वर्षों के कार्यकाल को देखें तो इस दौरान निवेश, पर्यटन, सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में कई परियोजनाओं पर काम हुआ है। राज्य में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और उसके बाद हुए निवेश समझौतों को धामी सरकार की बड़ी उपलब्धि माना गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के दौरान इन प्रयासों की सराहना होने से यह संदेश गया कि सरकार विकास के एजेंडे पर आगे बढ़ रही है। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे मुख्यमंत्री की प्रशासनिक क्षमता को भी मजबूती मिली है।
नितिन नबीन ने अपने दौरे के दौरान आगामी चुनावी चुनौतियों और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर विशेष बल दिया। सर्वविदित है कि भाजपा की चुनावी सफलता का आधार हमेशा उसका मजबूत संगठन माना जाता है। यदि संगठन सक्रिय रहता है तो सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने में आसानी होती है। इस दृष्टि से भी मुख्यमंत्री धामी के लिए यह दौरा लाभकारी रहा क्योंकि संगठन की मजबूती अंततः सरकार की राजनीतिक ताकत को बढ़ाने में सहायक साबित होगी।
धामी सरकार की चुनौतियां
ऐसा नहीं है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार इतनी बेहतर भी चल रही है कि जनता संतुष्ट है। जमीनी स्तर पर देखा जाए तो धामी सरकार का तीसरी बार सत्ता में आना कम संघर्षशील नहीं है। इस समय धामी सरकार के सामने कई चुनौतियां सुरसा की भांति मुंह खोले खड़ी हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन, रोजगार के अवसरों का विस्तार, स्वास्थ्य सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहते हैं। ऐसा नहीं है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे पर इन समस्याओं का जिक्र न हुआ हो। नितिन नबीन के दौरे में इन विषयों पर भी चर्चा हुई। इससे यह संकेत मिला कि संगठन इन चुनौतियों से अवगत है और सरकार को इनके समाधान के लिए प्रयास करने होंगे। यह स्थिति मुख्यमंत्री के लिए थोड़ा असहज करने वाली मानी जा सकती है। भाजपा के एक नेता के अनुसार पार्टी के भीतर संभावित असंतोष या गुटबाजी की चर्चाओं को अभी पूरी तरह खत्म नहीं कहा जा सकता है। भाजपा नेतृत्व ने बेशक एकजुटता का संदेश दिया है लेकिन पिछले राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उत्तराखण्ड की राजनीति में कुछ भी सम्भव है। इसलिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सतर्क रहना होगा। राज्य स्थापना के समय से ही सूबे की राजनीति में समय-समय पर नेतृत्व परिवर्तन और आंतरिक प्रतिस्पर्धा की साजिशें होती रही हैं।
चूक गया विपक्ष