देवभूमि उत्तराखण्ड की राजनीति इन दिनों शांत कम, विस्फोटक ज्यादा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की लोकप्रियता जहां आमजन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं पार्टी के भीतर कई वरिष्ठ नेता इससे असहज महसूस कर रहे हैं। खासकर वो चेहरे, जो खुद को मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए बेहतर दावेदार मानते आए थे, अब चुपचाप सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं और कुछ तो परदे के पीछे चालें भी चल रहे हैं।
गपशप गलियारों में चर्चा ये है कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा लोकसभा में अवैध खनन से जुड़े मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाना कोई संयोग नहीं, बल्कि एक ‘संकेत’ था कि संगठन और सरकार के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। इस बयान के बाद भाजपा के प्रदेश नेतृत्व और सरकार के बीच अनकहे तनाव की बू हर तरफ महसूस की जा रही है।
इतना ही नहीं, राज्य मंत्रिमंडल में खाली पड़े कई मंत्री पदों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी के पास आज की तारीख में पूर्ण मंत्रिमंडल नहीं है और विस्तार की चर्चा महीनों से ठंडे बस्ते में है। अंदरखाने की बात यह है कि कुछ विधायक खुद को मंत्री बनाए जाने की उम्मीद में हैं, लेकिन नामों को लेकर भाजपा आलाकमान और मुख्यमंत्री के बीच सहमति बन नहीं पा रही।

गौरतलब है कि उत्तराखण्ड में भाजपा नेतृत्व की अदला-बदली का इतिहास कोई पुराना नहीं। 2021 में त्रिवेंद्र सिंह रावत को अचानक हटाकर तीरथ सिंह रावत को लाया गया और कुछ ही महीनों में तीरथ को भी हटाकर धामी को मुख्यमंत्री बना दिया गया। तब से यह मान लिया गया कि राज्य में भाजपा का नेतृत्व ‘स्थिरता’ से नहीं, ‘स्थिति’ से तय होता है। अब जब धामी खुद को जनप्रिय और संगठन के प्रति प्रतिबद्ध नेता के तौर पर स्थापित करने में जुटे हैं तो भीतर ही भीतर कुछ लोग इस चमक को मंद करने की रणनीति बना रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सबसे लोकप्रिय एजेंडों में शामिल रहे समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर धामी ने सबसे पहले पहल कर खुद को संघ की नजरों में काम करने वाले मुख्यमंत्री स्थापित कर डाला। इतना ही नहीं बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों का अतिक्रमण कर बनाई गई मजारों को भी धामी ने ध्वस्त कर यह संदेश देने का काम किया कि अकेले योगी ही हिंदुत्व के पैरोकार नहीं हैं। चारधाम यात्रा को बीते तीन सालों में प्रदेश सरकार ने मजबूती देने का काम किया है। इतना ही नहीं प्रदेश कुमाऊं क्षेत्र में ‘मानस खंड माला’ के नाम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ाने के लिए धामी सरकार एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम में पूजा-अर्चना कर इस क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को कई गुना बढ़ा डाला है। राष्ट्रीय खेलों का पहली बार प्रदेशा में सफल आयोजन कर धामी ने न केवल राज्य में खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है, बल्कि उत्तराखण्ड के खिलाड़ियों को नाना प्रकार की सुविधाएं दे युवाओं को नई दिशा देने में भी सफलता पाई है। इन उपलब्धियों और प्रधानमंत्री ने निकटता चलते प्रदेश भाजपा के कई दिग्गज आपसी मतभेद भुला धामी को हटाने की रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। देहरादून से लेकर दिल्ली तक के सत्ता गलियारों में आम चर्चा है कि प्रदेश में कभी भी सत्ता परिवर्तन हो सकता है।
संगठन की आगामी समीक्षा बैठकें और मंत्रिमंडल विस्तार, ये सब आने वाले दिनों में तय करेंगे कि मुख्यमंत्री धामी की कुर्सी ‘स्थिर’ रहेगी या फिर उत्तराखण्ड एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की प्रयोगशाला बन जाएगा।

