उन्होंने कहा, ‘कभी जाति और कभी धर्म तो कभी लिंग को लेकर जिस तरह की अभद्र टिप्पणियां की जाती है, पर पार्टी नेतृत्व सबकुछ जानकर भी शांत रहता है. यह दिखता है कि नेतृत्व ने भी इस स्तर की राजनीति को स्वीकार कर लिया है. ऐसे माहौल में अपने स्वाभिमान के समझौता करके पार्टी में बने रहना मुमकिन नहीं रह गया था.’
पंखुड़ी पाठक ने यह भी कहा कि वो किसी भी दल से जुड़ने की नहीं सोच रही हैं. वो अब अपना पूरा ध्यान उच्च शिक्षा पूरी करने पर लगाएंगी. उन्होंने #ISupportAkhilesh अभियान को भी बंद कर दिया है.
दिल्ली में रहने वाली पंखुड़ी नॉन पॉलिटिकल बैकग्राउंड से हैं. उनके पिता जे सी पाठक और मां आरती पाठक डॉक्टर हैं. यह दोनों निजी प्रैक्टिस करते हैं. पंखुड़ी दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) की लॉ स्टूडेंट हैं. पंखुड़ी लंबे समय से समाजवादी पार्टी की छात्र सभा से जुड़ी रही. वर्ष 2010 में हंसराज कॉलेज के चुनाव में उन्होंने ज्वाइंट सेक्रेटरी पद का चुनाव जीता था. उस समय उनकी उम्र लगभग 18 साल थी. उन्होंने 2 से 3 साल तक पार्टी की तरफ से प्रत्याशियों को छात्रसंघ का चुनाव भी लड़ाया. पंखुड़ी पाठक समाजवादी पार्टी से 2010 में ही जुड़ीं थी.
