उत्तराखण्ड में इन दिनों उत्तर प्रदेश निर्माण निगम के अपर परियोजना प्रबंधक राजन सिंह की प्रतिनियुक्ति को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है। यह मामला सिर्फ प्रतिनियुक्ति तक सीमित नहीं है। सवाल उठ रहे हैं कि जब राज्य में पहले से ही पर्याप्त संख्या में अनुभवी और योग्य अभियंता मौजूद हैं तो फिर बाहरी राज्य के अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? जिस प्रकार से राजन सिंह की प्रतिनियुक्ति उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण में अधीक्षण अभियंता के पद के साथ ही उसी आदेश में हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की महत्वपूर्ण परियोजना यूनिटी माॅल के निर्माण का हवाला देते हुए उनके वरिष्ठ पद के सापेक्ष कनिष्ठ पद पर अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया उसने पूरे मामले को संदेहास्पद बना दिया है
हरिद्वार में विकास कार्यों को गति देने के लिए विभिन्न विभागों में अभियंता तैनात हैं। राज्य निर्माण के बाद से ही लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, आवास विभाग और विभिन्न विकास प्राधिकरणों में अभियंताओं की लम्बी-चौड़ी फौज मौजूद चली आ रही है। इसके बावजूद जब राज्य सरकार द्वारा किसी दूसरे राज्य के अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर लाकर दो-दो मुख्य प्राधिकरणों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाती है तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठना लाजमी हो जाता है? प्रदेश में इन दिनों उत्तर प्रदेश निर्माण निगम के अपर परियोजना प्रबंधक राजन सिंह की प्रतिनियुक्ति को लेकर उत्तराखण्ड के इंजीनियरिंग तंत्र में कई तरह की चर्चाएं और असंतोष देखने को मिल रहा है।
दरअसल यह मामला सिर्फ प्रतिनियुक्ति तक सीमित नहीं है। चर्चा इस बात को लेकर भी है कि जब उत्तराखण्ड में पहले से ही पर्याप्त संख्या में अनुभवी और योग्य अभियंता मौजूद हैं तो फिर किसी बाहरी राज्य के अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? यही नहीं, जिस प्रकार से राजन सिंह की प्रतिनियुक्ति उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण में अधीक्षण अभियंता के पद पर करते हुए उन्हें उसी आदेश में हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की महत्वपूर्ण परियोजना यूनिटी माॅल के निर्माण का हवाला देते हुए उनके वरिष्ठ पद के सापेक्ष कनिष्ठ पद पर हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) में अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया, उसने पूरे मामले को और अधिक विवादित बनाने के साथ-साथ संदेहास्पद बना दिया है। प्रमुख सचिव आवास रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम द्वारा जिस प्रकार एक ही आदेश संख्या 607V_2आ./ 2025.80237 दिनांक 23 सितम्बर 2025 जारी करते हुए उत्तर प्रदेश के एक ही अधिकारी को दो जगह प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया, इसको लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
राज्य के विभिन्न प्राधिकरण सहित अन्य निर्माण इकाइयों में कार्यरत इंजीनियरों के बीच राज्य सरकार के इस अचंभित करने वाले आदेश को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कई अभियंताओं का मानना है कि यह व्यवस्था न तो प्रशासनिक दृष्टि से तार्किक प्रतीत होती है और न ही सेवा नियमों की भावना के अनुरूप लगती है। आम तौर पर प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारियों को उनके मूल पद के समकक्ष या उससे मेल खाते पदों पर ही तैनाती दी जाती है लेकिन इस मामले में राजन सिंह का मूल पद अपर परियोजना प्रबंधक बताया जा रहा है जबकि उन्हें हरिद्वार- रुड़की विकास प्राधिकरण में अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है जो पदक्रम के लिहाज से कनिष्ठ माना जाता है। सवाल यह भी खड़े हो रहे हैं कि यूनिटी माॅल का हवाला देकर कनिष्ठ पद अधिशासी अभियंता हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के पद पर उनकी ताजपोशी जिस प्रकार की जा रही है, आने वाले समय में यूनिटी माॅल के निर्माण में कोई दोष या भ्रष्टाचार उजागर होता है तो उसकी जिम्मेदारी कैसे तय की जाएगी क्योंकि तब तक राजन सिंह अपने मूल प्रदेश जा चुके होंगे।
इस पूरी कवायद को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर ऐसी क्या आवश्यकता थी कि उत्तर प्रदेश से अधिकारी को बुलाकर इस प्रकार की व्यवस्था की गई और राज्य के सर्वाधिक महत्वपूर्ण माने जाने वाले उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण सहित हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण जैसे प्राधिकरणों की जिम्मेदारी दी गई। प्रदेश के कई वरिष्ठ अभियंताओं का कहना है कि राज्य में पहले से ही अनुभवी अधिकारियों की कोई कमी नहीं है। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में कई ऐसे अधिकारी मौजूद हैं जो वर्षों से विकास कार्यों का अनुभव रखते हैं और इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकते थे लेकिन ऐसे अधिकारियों की अनदेखी की गई जो उत्तराखण्ड सेवा के अधिकारी थे।
कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि इस प्रकार की नियुक्तियां प्रशासनिक पारदर्शिता और मेरिट की भावना पर भी सवाल खड़े करती हैं। यदि राज्य के भीतर उपलब्ध अधिकारियों की अनदेखी कर बाहरी अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाती है तो इससे विभाग के भीतर असंतोष और मनोबल पर भी असर पड़ता है और जिम्मेदारी भी तय नहीं हो पाती। यही वजह है कि इंजीनियरिंग महकमे के भीतर इस फैसले को लेकर दबे स्वर में नाराजगी की चर्चा भी सुनने को मिल रही है।
हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की बात करें तो यह प्राधिकरण राज्य के महत्वपूर्ण विकास प्राधिकरणों में से एक माना जाता है। हरिद्वार और रुड़की जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में भवन निर्माण, अवैध निर्माण पर नियंत्रण, मास्टर प्लान के अनुरूप विकास और आधारभूत ढांचे के निर्माण की जिम्मेदारी इसी प्राधिकरण के कंधों पर होती है। ऐसे में यहां तैनात होने वाले अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
सूत्रों के अनुसार राजन सिंह को अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के बाद विभाग के भीतर कई तरह की प्रशासनिक जटिलताएं भी सामने आ सकती हैं। चूंकि उनका मूल पद इससे वरिष्ठ बताया जा रहा है, इसलिए कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों के निर्धारण को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा रही है। कई बार इस तरह की व्यवस्थाएं विभागीय कामकाज को प्रभावित भी कर सकती हैं।
राज्य के कुछ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर, प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था मूल रूप से प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है। यदि किसी विभाग या संस्था में विशेषज्ञता की आवश्यकता हो या किसी विशेष परियोजना के लिए अनुभवी अधिकारी की जरूरत हो तो प्रतिनियुक्ति के माध्यम से अधिकारियों को बुलाया जाता है लेकिन जब यह व्यवस्था सामान्य प्रशासनिक ढांचे से हटकर दिखाई देती है, तब स्वाभाविक रूप से उस पर सवाल उठने लगते हैं। इसी के चलते राजन सिंह की प्रतिनियुक्ति पर सवाल उठ रहे हैं।
उत्तराखण्ड में इससे पहले भी कई बार प्रतिनियुक्ति को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। कई मामलों में यह आरोप लगाए गए कि प्रतिनियुक्ति का उपयोग कुछ विशेष अधिकारियों को लाभ पहुंचाने या पसंदीदा पदों पर तैनाती दिलाने के लिए किया जाता है। हालांकि सरकार की ओर से हर बार इन आरोपों को खारिज करते हुए यह कहा जाता रहा है कि सभी नियुक्तियां नियमों के तहत और प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर की जाती हैं।
राजन सिंह के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। आधिकारिक तौर पर इस प्रतिनियुक्ति को प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बताया जा रहा है लेकिन विभाग के भीतर और इंजीनियरिंग कैडर में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं जारी हैं। कुछ लोग इसे सामान्य प्रशासनिक निर्णय मान रहे हैं जबकि कई लोग इसे असामान्य बताते हुए इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। एक और महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्य में अधिकारियों की सीमित संख्या होने के बावजूद यहां के अभियंताओं ने कई बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।
राजन सिंह के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। आधिकारिक तौर पर इस प्रतिनियुक्ति को प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बताया जा रहा है लेकिन विभाग के भीतर और इंजीनियरिंग कैडर में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं जारी हैं। कुछ लोग इसे सामान्य प्रशासनिक निर्णय मान रहे हैं जबकि कई लोग इसे असामान्य बताते हुए इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। एक और महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्य में अधिकारियों की सीमित संख्या होने के बावजूद यहां के अभियंताओं ने कई बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।
चारधाम ऑल वेदर रोड, शहरी विकास योजनाएं, सिंचाई परियोजनाएं और विभिन्न आधारभूत ढांचा परियोजनाओं में राज्य के अभियंताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में जब बाहरी अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर लाया जाता है तो स्वाभाविक रूप से स्थानीय अधिकारियों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या उनकी क्षमता और अनुभव पर भरोसा नहीं किया जा रहा।
इसके अलावा इस पूरे मामले का एक प्रशासनिक पहलू भी है। यदि किसी अधिकारी को उसके मूल पद से नीचे के पद पर अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है तो इससे सेवा संरचना और पदक्रम की स्पष्टता पर भी असर पड़ सकता है। आम तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था में पदक्रम का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है ताकि विभागीय कामकाज सुचारू रूप से चल सके और जिम्मेदारियों का निर्धारण स्पष्ट रहे।
राजन सिंह की प्रतिनियुक्ति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार या सम्बंधित विभाग की ओर से इस पर क्या स्पष्टीकरण सामने आता है। सवाल इसलिए भी बड़ा हो जाता है कि आवास विभाग के मुखिया वर्तमान में स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हैं।
फिलहाल इतना जरूर है कि उत्तराखण्ड के इंजीनियरिंग महकमे में इस प्रतिनियुक्ति को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है। कई अधिकारी इसे असामान्य व्यवस्था मान रहे हैं और यह उम्मीद जता रहे हैं कि भविष्य में इस प्रकार के निर्णय लेते समय राज्य के भीतर उपलब्ध संसाधनों और अधिकारियों की क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी।
कुल मिलाकर देखा जाए तो उत्तराखण्ड में अभियंताओं की लम्बी- चैड़ी फौज होने के बावजूद उत्तर प्रदेश के निर्माण निगम से अपर परियोजना प्रबंधक राजन सिंह की प्रतिनियुक्ति और उसके बाद उन्हें उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण में अधीक्षण अभियंता तो हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण में अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की पूरी प्रक्रिया ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला सिर्फ एक नियुक्ति का नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, पदक्रम की व्यवस्था और राज्य के भीतर उपलब्ध प्रतिभा के उपयोग जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले समय में इस मामले पर सरकार या सम्बंधित विभाग की ओर से क्या रुख अपनाया जाता है। लेकिन राजन सिंह की प्रतिनियुक्ति ने शासन की मंशा पर गहरे सवाल खड़े किए हैं जिनका जवाब धामी सरकार को देना है।
बात अपनी-अपनी
एक ही अधिकारी को वरिष्ठ और कनिष्ठ पद पर प्रतिनिधि के आधार पर तैनात करना नैतिक दृष्टि से सही नहीं है और भी बहुत लोग हैं। इसमें देखने वाली बात यह है की राजन सिंह में ऐसी क्या खासियत है जो उनको डबल चार्ज देने की जरूरत आन पड़ी। वह भी उत्तर प्रदेश सेवा के इंजीनियर को। यह भी किया जा सकता था कि हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के बगल में स्थित किसी विभाग के अधिशासी अभियंता को अतिरिक्त कर दे दिया जाता लेकिन नहीं दिया गया।
रामजी लाल, सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता, ग्रामीण निर्माण विभाग हरिद्वार
रामजी लाल, सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता, ग्रामीण निर्माण विभाग हरिद्वार
राजन सिंह को उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण में अधीक्षण अभियंता तो हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण में अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। मुझे लगता है कि इंजीनियर की कमी होने के चलते यह चार्ज दिया गया है। जहां तक मेरी जानकारी है आवास विभाग में दो-तीन अधिशासी अभियंता वर्तमान में मौजूद हैं।
एच.सी.एच. राणा, सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण
एच.सी.एच. राणा, सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण
मैं 2003 से उत्तराखण्ड में कार्यरत हूं। वर्तमान में मेरी प्रतिनियुक्ति देहरादून आवास विभाग में है और हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण का मुझे अतिरिक्त चार्ज दिया गया है मैं खुद इस चार्ज से मुक्त होना चाहता हूं।
राजन सिंह, अधीक्षण अभियंता, आवास विभाग उत्तराखण्ड में प्रतिनियुक्ति पर तैनात
राजन सिंह, अधीक्षण अभियंता, आवास विभाग उत्तराखण्ड में प्रतिनियुक्ति पर तैनात
नोट : हरिद्वार विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सोनिका को कई बार फोन करने के बावजूद उनसे सम्पर्क नहीं हो पाया।