• कृष्ण कुमार
डोईवाला विधानसभा सीट को वीआईपी का दर्जा यूं ही नहीं दिया गया है बल्कि यहां से दो-दो पूर्व मुख्यमंत्री नेतृत्व कर चुके हैं। ऐसे में लोग सोचते होंगे कि यहां तो विकास की गंगा अविरल बही होगी लेकिन ऐसा नहीं है। विकास की गंगा आई तो सही मगर जिस तरह भगीरथ ने प्रण पूरा किया ऐसा कोई नहीं कर सका। यहां भगीरथी प्रयास तो हुए लेकिन वह सफल नहीं हुए जिसके चलते यहां की जनता निराश है। डिग्री कॉलेज बना तो वह शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। जिस लाॅ यूनिवर्सिटी का शिलान्यास और भूमि पूजन हो चुका था वह सात साल बाद भी अस्तित्व में नहीं आ सकी। पर्यटन के नाम पर 180 बीघा जमीन की लूट हुई तो यहां बसे टिहरी विस्थापित अपनी जमीन नहीं बचा पाए। पहले टिहरी से और अब एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के नाम पर डोईवाला से पलायन की आशंका से भयभीत लोगों की आपबीती को प्रस्तुत करती यह विधानसभा यात्रा

कभी अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय डोईवाला, मसूरी और देहरा विधानसभा का हिस्सा रही डोईवाला विधानसभा उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद 2002 में हुए परिसीमन के बाद वजूद में आई। मुख्यमंत्री रमेश चंद्र पोखरियाल ‘निशंक’ और त्रिवेंद्र रावत जैसे दो-दो मुख्यमंत्री भी इसी विधानसभा ने दिए हैं जिसके चलते यह वीआईपी सीट मानी जाती है। 2002 में पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा के त्रिवेंद्र रावत महज 1536 मत पाकर विधायक निर्वाचित हुए। 2007 में त्रिवेंद्र रावत 14 हजार से भी ज्यादा मतों के अंतर से चुनाव जीतकर लगातार दूसरी बार विधायक बने। 2012 में रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ कांग्रेस के दिग्गज नेता हीरा सिंह बिष्ट से सिर्फ 1272 मतों से चुनाव जीतने में कामयाब रहे। 2014 में निशंक हरिद्वार संसदीय सीट से सांसद का चुनाव जीते तो डोईवाला विधानसभा  में  उपचुनाव हुआ जिसमें भाजपा ने फिर से त्रिवेंद्र रावत को चुनाव में उतारा लेकिन इस बार कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट 6512 मतों के बड़े अंतर से चुनाव जीते जबकि 2017 के विधानसभा चुनाव में त्रिवेंद्र रावत फिर से डोईवाला से चुनाव में उतरे और इस बार उन्होंने अपने चिर प्रतिद्वंद्वी हीरा सिंह बिष्ट को 24 हजार से भी अधिक मतों के अंतर से हराया। 2022 के चुनाव में भी भाजपा की जीत का सिलसिला रुका नहीं और भाजपा के बृजभूषण गैरोला ने कांग्रेस के गौरव गिन्नी को करीब 29 हजार से भी अधिक मतों के अंतर से हराया।

इस तरह से देखा जाए तो डोईवाला विधानसभा में 5 बार लगातार भाजपा का वर्चस्व रहा है सिर्फ एक बार उपचुनाव में कांग्रेस इस सीट पर चुनाव जीती है। राजनीतिक तौर पर यह सीट भाजपा की मानी जाती रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव में लेकिन डोईवाला सीट नए राजनीतिक समीकरणों की ओर बढ़ रही है।
‘दि संडे पोस्ट’ ने डोईवाला विधानसभा के तीनों न्याय पचायत क्षेत्रों का भ्रमण किया और आम जनता से क्षेत्र के विकास तथा समस्याओं पर बातचीत की। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के पैमाने पर भारी विरोधाभास देखने को मिला जहां शहरी क्षेत्रों में हाईवे फलाईओवर और चकाचक सड़कें, शहरी सुविधाएं हैं जिनमें लगातार विकास के काम होते रहते हैं तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों को देखें तो आज कई क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण हो चुका तथा कई नई सड़कें स्वीकृत तो हुई हैं लेकिन इन क्षेत्रों में आज भी रोजगार की कमी, पेयजल की गम्भीर समस्या, खेती-किसानी और खेती का घटता रकबा जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी रही तो अनियोजित खेती की भूमि पर आवासीय क्षेत्रों के निर्माण और उसके विस्तार से भी पूर्व से चले आ रहे संसाधनों के निरंतर घटने से समस्या और भी गम्भीर नजर आ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत समस्याओं का अम्बार
डोईवाला विधानसभा के रानीपोखरी और थानो न्याय पंचायत में लोगों को पीने के पानी और खेतों के लिए सिंचाई की सुविधा लम्बे समय से नहीं मिल पा रही है। थानो न्याय पंचायत के रामनगर डांडा, तलाई, कुटयाल आदि गांवों के लिए निसाकखाला से टेप करके पीने के पानी की व्यवस्था की गई थी लेकिन बरसात में यह पाईप लाईन क्षतिग्रस्त हो जाती है जिससे कई-कई माह तक पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पाती है। गर्मियों में तो हालात और भी खराब हो जाते हैं। इन क्षेत्रों में प्राकृतिक स्रोत सूख गए हैं जिससे पीने के पानी के लिए मारामारी हो रही है।
रामनगर डांडा निवासी चंद्र प्रकाश बडोला बताते हैं कि  सिर्फ पेयजल की ही समस्या नहीं है। वर्षों पूर्व खाले को टेप करके पीने की पानी की व्यवस्था की गई थी। तब रामनगर डांडा की आबादी बहुत कम थी लेकिन आज रामनगर डांडा की ही आबादी 3500 हो चुकी है और अब इस क्षेत्र में बसावट बहुत तेजी से हो रही है और नए आवासीय क्षेत्रों को भी इसी पाईप से पीने का पानी दिया जा रहा है इससे पीने के पानी की समस्या और गम्भीर होने लगी है। इसके लिए हमने अनेक बार विधायक, डीएम और पेयजल विभाग से मांग की है कि हमारे क्षेत्र के लिए नई पेयजल योजना बनाई जाए लेकिन आज तक हमारी मांग पर कोई काम नहीं हुआ।
विधानसभा के दुरस्थ पर्वतीय क्षेत्र हल्द्वाड़ी में तो पीने के पानी की भारी समस्या बनी हुई है। इस गांव के करीब 70 परिवारों को खच्चरों से पीने का पानी मंगवाना पड़ रहा है। जो ग्रामीण खच्चरों का खर्चा नहीं उठा सकते वे अपने सिर पर कई मील दूर से पीने का पानी लाने को मजबूर हैं। लगभग आधा दिन तो पीने के और अन्य जरूरी कामों के लिए पानी लाने में ही गुजर जाता है। इस क्षेत्र के लिए पेयजल योजना का प्रस्ताव कई वर्ष पूर्व बन चुका है लेकिन आज भी उक्त प्रस्ताव शासन और पेयजल विभाग की फाइलों में ही दबा हुआ है। हैरत की बात यह है कि हल्द्वाड़ी गांव के लिए टिहरी जिले के सुआसैंण के प्राकृतिक जल स्रोत से टैप करके पेयजल लाइन बनी हुई है लेकिन पिछले चार सालों से भारी आपदा और बरसात के कारण वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है तब से लेकर आज तक हल्द्वाड़ी के निवासियों को पीने का पानी मयस्सर नहीं हो पा रहा है।
खेती-किसानी भी चौपट
केंद्र सरकार और राज्य सरकार की किसानों के लिए लाई गई घेरबाड़ योजना की असल हकीकत रामनगर डांडा के किसानों से पता चल सकती है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उनको कभी घेरबाड़ योजना के बारे में किसी ने बताया ही नहीं और न ही किसी को इसका लाभ मिल पाया है।
रामनगर डांडा के निवासी दर्शनलाल डोभाल बताते हैं कि थानो न्याय पंचायत के सभी गांवों में सुअरों और बंदरों का आतंक लम्बे समय से बना हुआ है। फसलों को प्राकृतिक आपदा से तो नुकसान होता ही है लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान जंगली जानवरों से हो रहा है। आवारा छोड़े गए पालतु पशुओं के झुण्ड के झुण्ड रात को खेत में घुस जाते हैं और खड़ी फसल को चौपट कर देते हैं। इसके बावजूद आज तक हमलोगों को घेरबाड़ योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। ग्राम प्रधान हो या पंचायत स्तर के अधिकारी किसी ने भी किसानों को घेरबाड़ योजना के बारे में न तो जागरूक किया है और न ही किसी को बताया है। हैरत की बात यह है कि थानो क्षेत्र में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चैहान उत्कृष्ट किसान पुरस्कार वितरण और केंद्र सरकार की योजना पर एक कार्यक्रम कर चुके हैं परंतु तस्वीर का दूसरा पक्ष क्षेत्र के किसानों की सरकारी योजना से दूरी असल हकीकत बयां कर रही है।
इसी तरह से रानीपोखरी न्याय पंचायत के कई गांवों की भी हालत ऐसी ही बनी हुई है। रानीपोखरी क्षेत्र कभी खेती किसानी के लिए विख्यात था। स्थानीय निवासी नरेंद्र सिंह चैहान कहते हैं कि पहले रानीपोखरी क्षेत्र में 20 हजार बीघा भूमि पर खेती होती थी। अंग्रेजों ने इन क्षेत्रों के लिए नहरों बनाई थी जिनसे वर्षभर पानी मिलता था और भरपूर फसलें होती थी लेकिन कई वर्षों से ब्रांच नहरों में पानी न मिलने से धीरे-धीरे लोगों ने खेती करना छोड़ दिया और अब सिर्फ 2500 बीघा भूमि पर ही खेती हो रही है। जिस तरह से सिंचाई के लिए पानी खत्म होता जा रहा है उससे लगता है कि आने वाले समय में 200 बीघा भूमि पर भी खेती हो जाए तो गनीमत होगी।
बिजली की कई-कई घंटों की कटौती से आम जनता को दोहरी परेशानी हो रही है। रानीपोखरी, डांडी, पुन्नीवाला, झीलवाला बड़कोट आदि गांवों में तो 12-12 घंटों की विद्युत कटौती के कारण कई समस्याएं हो रही हैं। खेतों की सिंचाई के लिए निजी ट्यूबेल बिजली न होने से सिंचाई नहीं हो पा रही है। तीन वर्षों से सिंचाई की मुख्य नहर की ब्रांच नहरों में सिंचाई का पानी तक नहीं मिल पा रहा है। रानीपोखरी न्याय पंचायत के 11 ग्राम सभाएं सिंचाई की भारी कमी से पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। इनमें रानीपोखरी मोजा, रानीपोखरी, डांडी, बड़कोट, झीलवाला, रैणा पुर भट्ट नगरी और घमंडपुर गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
यातायात के सीमित साधनों से त्रस्त जनता
थानो और इसके आस-पास के क्षेत्रों में बड़ी तेजी से आबादी बढ़ रही है। देहरादून से महज 30 किलोमीटर दूर होने से और जमीनों की उपलब्धता के कारण इस क्षेत्र में आवासीय तथा पर्यटन गतिविधियां, जिनमें कई होटल, रिसोर्ट आदि का निर्माण हो चुका है और कइयों का निर्माण चल रहा है। साथ ही देहरादून से जाॅलीग्रांट एयरपोर्ट का महत्वपूण मार्ग होने के चलते यह क्षेत्र एक कस्बे के तौर पर भी उभर रहा है पंरतु इस क्षेत्र में यातायात के लिए कोई ठोस व्यवस्था न होने के कारण समस्याएं बनी हुई हैं। थानो-देहरादून-थानो के लिए निजी परमिट पर मिनी सिटी बस की सुविधा है लेकिन थानो से धारकोट, लडुवाकोट, बडेरना, हल्द्वाड़ी तथा थानो-नाहीं कला, भोगपुर, रानीपोखरी, जाॅलीग्रांट, भानियावाला आदि के लिए कोई स्थाई यातायात की व्यवस्था न होने से इन क्षेत्रों के लोगों के लिए भारी समस्या बनी हुई है। इसके लिए या तो अपने निजी वाहन या फिर जीप और टैम्पू से जाना पड़ता है। परंतु यह सुविधा तय समय पर ही चलती है जिसके लिए घंटों का इंतजार करना पड़ता है। इन क्षेत्रों के लिए थानो से सिटी बस लगाए जाने की मांग लम्बे समय से की जा रही है।
चक सिंधवाल गांव के रघुवीर सिंह कृषाली कहते हैं कि थानो आज नहीं तो कल नगरीय क्षेत्र के रूप में विकसित होगा ही लेकिन जिस तरह से नई-नई बसावट और आबादी बढ़ रही है उससे यातायात के लिए सीटी बस की बहुत जरूरत है। हमने कई बार अपने विधायक जी से मांग की है कि कम से कम थानो से एक भोगपुर, भानियावाला, रानीपोखरी और धारकोट के लिए सिटी बस की सुविधा दी जाए लेकिन हर बार हमें आश्वासन ही मिलता रहा है।
उच्च शिक्षा के नाम पर औपचारिकता
डोईवाला में शहीद दुर्गामल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय है। अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय में इस महाविद्यालय की स्थापना की गई। उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद इसका नाम शहीद दुर्गामल के नाम पर रखा गया और इसे स्नातकोत्तर महाविद्यालय बनाया गया। आज इस महाविद्यालय में 1400 छात्र अध्यनरत हैं लेकिन इस महाविद्यालय में स्टाफ की कमी निरंतर बनी हुई है। कार्यालय स्टाफ के नाम पर सभी स्टाफ आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत हैं। एक भी स्टाफ नियमित नहीं है। इसी तरह से 38 नियमित प्रवक्ताओं के नियमित पद कार्यरत हैं जबकि 15 पद रिक्त चले आ रहे हैं। तीन प्रवक्ता संविदा के तहत कार्य कर रहे हैं जबकि यह महाविद्यालय करीब दो लाख से भी ज्यादा आबादी के लिए एक मात्र उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
स्नातकोत्तर महाविद्यालय तो बना दिया गया है लेकिन आज तक एम. काॅम और एमएसी की शिक्षा की सुविधा इस महाविद्यालय में नहीं है। यही नहीं महिला छात्रावास भी स्वीकृत है और करोड़ों की लागत से महिला छात्रावास का भवन कई वर्ष पूर्व बन चुका है लेकिन छात्रावास के लिए वार्डन, सहायक वार्डन और अन्य स्टाफ की नियुक्तियां न होने से इसको आज तक शुरू नहीं किया गया। अब इस महिला छात्रावास के भवन के कुछ कक्षों में कर्मचारी और कुछ भवनों में अन्य विषयों की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
विकास के नाम पर छलावा
डोईवाला विधानसभा में विकास के नाम पर जनता को ठगा जाता रहा है। कभी पर्यटन विकास के नाम पर करीब सौ बीघा भूमि का खुर्द-बुर्द की गई तो कभी लाॅ यूनिवर्सिटी के नाम पर छला गया जबकि राज्य बनने से पूर्व इस क्षेत्र में रोजगार के साधनों को एक के बाद एक उद्योग सरकारी नीतियों और पर्यावरण के नाम पर खत्म कर दिए गए। इस क्षेत्र में विख्यात वीनस सीमेंट फैक्ट्री और चूने भट्टे के साथ-साथ चूने और लाईम स्टोन की खदानों सुप्रीम कोर्ट के दून घाटी अधिसूचना के नाम पर बंद कर दिया गया जिससे इस क्षेत्र के हजारों लोगों का रोजगार ही खत्म हो गया। राज्य बनने के बाद सरकारी तंत्र द्वारा क्षेत्र को सिर्फ दावे और वादों की भूल-भुलैया में घुमाया जाता रहा है।
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के नाम पर धोखा
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में डोईवाला विधानसभा क्षेत्र में भारत का 22वां राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय खोले जाने की घोषणा की गई और इसके लिए सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गई। सबसे पहले इसे कैबिनेट से स्वीकृति दी गई फिर रानीपोखरी के लिस्ट्राबाद स्थिति राजकीय रेशम फार्म स्थित सूक्ष्म, लघु एवं उद्योग, उद्योग विभाग की 10 एकड़ भूमि को लाॅ यूनिवर्सिटी के लिए उपयुक्त पाते हुए उच्च शिक्षा विभाग को इस भूमि को आवंटित करने के आदेश जारी कर दिए गए। मार्च 2019 में त्रिवेंद्र रावत द्वारा बड़े जोर-शोर से लाॅ यूनिवर्सिटी का भूमि पूजन और शिलान्यास किया गया। 7 वर्ष बीतने के बाद भी एक ईंट तक नहीं लगाई जा सकी। हैरत की बात यह है कि मुख्यमंत्री द्वारा शिलान्यास करने के 7 वर्ष के बावजूद आज तक एक भी ईंट तो नहीं लगाई जा सकी है लेकिन शिलान्यास का प्रस्तर शिलालेख भी गायब कर दिया गया है।
2021 में राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री बने लेकिन लाॅ यूनिवर्सिटी धरातल पर नहीं उतर पाई, परंतु सरकार ने नया काम यह किया कि लाॅ यूनिवर्सिटी के लिए कुमाऊं क्षेत्र में भी भूमि चयन करने के आदेश तक जारी कर दिए। इसके लिए बकायदा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 28 अप्रैल 2023 को एक कमेटी बनाई गई और कमेटी ने लाॅ यूनिवर्सिटी के लिए उधमसिंह नगर, किच्छा और हल्द्वानी के गौलापार में भी भूमि की खोज करने का निर्णय लेकर इसकी पत्रावली को तत्कालीन उच्च शिक्षा विभाग मंत्री धन सिंह रावत को अनुमोदन के लिए भेजा लेकिन मंत्री धनसिंह रावत ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि रानीपोखरी के लिस्ट्राबाद में लाॅ यूनिवर्सिटी का भूमि पूजन हो चुका है अतः इसी स्थान पर लाॅ यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाए। उच्च शिक्षा मंत्री के आदेश बाद भी लाॅ यूनिवर्सिटी का काम शुरू तो नहीं होे पाया लेकिन इसी वर्ष राज्य सरकार द्वारा सौंग नदी बांध परियोजना के प्रभावितों को दिए जाने के लिए सिंचाई विभाग को 6.233 हेक्टेयर भूमि आवंटित कर दी गई।
25 मार्च 2026 को सिंचाई विभाग द्वारा आवंटित भूमि का सीमांकन करने के लिए अपनी टीम भेजी जिसके बाद भारी विवाद हो गया। स्थानीय निवासी हर हाल में इस भूमि पर लाॅ यूनिवर्सिटी बनाए जाने की मांग कर रहे थे। स्थानीय निवासियों का मानना था कि मुख्यमंत्री द्वारा शिलानयास करने के बाद कभी न कभी इस क्षेत्र में लाॅ यूनिवर्सिटी जरूर बनेगी लेकिन सरकार द्वारा भूमि के एक बड़े हिस्से को बांध प्रभावितों को आवंटन करने के बाद जनता सड़कों पर उतर आई और आंदोलन करने लगी। 26 मार्च से धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जो आज भी लगातार चल रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि लाॅ यूनिवर्सिटी के मामले में सरकार स्वयं राजनीति कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत द्वारा अपनी विधानसभा में लाॅ यूनिवर्सिटी का शिलान्यास किया गया लेकिन नेतृत्व परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस विश्वविद्यालय को कुमाऊं क्षेत्र में ले जाने का प्रयास कर रहे हैं।
बड़कोट के पूर्व प्रधान और आंदोलनकारी प्रभुलाल बहुगुणा कहते हैं कि मुख्यमंत्री ने कुमाऊं में लाॅ यूनिवर्सिटी के लिए भूमि खोजने हेतु मुख्य सचिव की कमेटी बनाई फिर इस भूमि को बांध प्रभावितों को आवंटित कर दिया गया। इससे एक बात साफ हो गई कि मुख्यमंत्री ही नहीं चाहते कि इस क्षेत्र में लाॅ यूनिवर्सिटी बने।
स्थानीय निवासी और पत्रकार चंद्र प्रकाश बुडाकोटी कहते हैं कि वर्षों से रेशम विभाग की भूमि लघु उद्योग के लिए विभाग को दी गई थी लेकिन एक भी उद्योग नहीं लगाया जा सका। फिर इसके बाद इस भूमि को नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए दे दिया गया और अब सरकार ने इस भूमि को बांध प्रभावितों को दे दिया। सरकार की इच्छा ही नहीं है कि इस क्षेत्र में लाॅ यूनिवर्सिटी बने, इसलिए 2023 में सरकार ने ही गौलापार हल्द्वानी में जमीन ढूंढ़ने के आदेश दिए और मुख्य सचिव को इसके लिए कमेटी बनानी पड़ी। दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय विधायक बृजभूषण गैरोला द्वारा दो बार विधानसभा सदन में लाॅ यूनिवर्सिटी के बारे में सवाल पूछा गया था तब सरकार ने विधायक को लिखित में लाॅ यूनिवर्सिटी का प्रस्ताव खारिज नहीं होने का जवाब दिया और यह भी उल्लेख किया गया था कि रानीपोखरी के लिस्ट्राबाद में ही लाॅ यूनिवर्सिटी का निर्माण किया जाएगा। बावजूद इसके आज भी लाॅ यूनिवर्सिटी का मामला अधर में ही लटका हुआ है। अभी तक सिंचाई विभाग को दी गई भूमि का आवंटन रद्द नहीं किया गया है जिससे स्थानीय निवासियों में लाॅ यूनिवर्सिटी खारिज होने की आंशका बढ़ चुकी है।
पर्यटन के नाम पर जमीन की लूट
डोईवाला विधानसभा के झीलवाला में करोड़ों की जमीन का झोल भी सामने आ चुका है। विकास के नाम पर किस तरह से जमीनों की लूट इस क्षेत्र में लम्बे समय से होती रही है, यह झीलवाला प्रकरण में साफ तौर पर दिखाई देता है। कई वर्ष पूर्व झीलवाला में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली के कई कारोबारियों द्वारा करीब 180 बीघा भूमि खरीदने की अनुमति ली गई लेकिन कुछ ही वर्ष के बाद पर्यटन के नाम पर कौड़ियों के भाव में खरीदी गई भूमि को करोड़ों में बिल्डर्स लाॅबी के हाथों बेचकर नौ दो ग्यारह हो गए। हैरत की बात यह है कि पर्यटन कारोबारी और बिल्डर्सलाॅबी के इस खेल को रोकने के लिए जमीन की रजिस्ट्रियों पर रोक लगाने का साहस दिखाने वाले एसडीएम ऋषिकेश का ही तबादला कर दिया गया।
दरअसल दिल्ली के कारोबारियों द्वारा राज्य सरकार को प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ग्राम बड़कोट माफी के परगना परवादून के झीलवाला क्षेत्र में 185 बीघा भूमि को खरीदने का प्रस्ताव शासन को दिया। प्रस्ताव में पर्यटन सम्बंधित गतिविधियां चलाने, हेल्थ स्पा, ध्यान योग केंद्र की स्थापना, एम्युजमेंट पार्क, वाटर पार्क नेचुरल एवं वोटनिकल पार्क, शैल उद्यान की स्थापना करने तथा कल्चरल सेंटर और स्वीमिंग पुल का निर्माण करके झीलवाला क्षेत्र को प्रदेश का बड़ा पर्यटन हब बनाने का उल्लेख किया गया था।
सरकार ने भी कारोबारियों के प्रस्ताव को कई शर्तों के साथ मंजूर करके भूमि खरीदने की अनुमति दे दी। इस जमीन का भू उपयोग परिवर्तन शुल्क जमा करवाया गया लेकिन जैसे ही भू उपयोग परिवर्तन शुल्क जमा हुआ पर्यटन कारोबार करने की असल हकीकत सामने आ गई। कौड़ियों के भाव खरीदी जमीन की कीमतें कई गुना बढ़ गई। इस जमीन से करोड़ों कमाने का रास्ता मिल गया। इस जमीन को बिल्डर्स लाॅबी को बेच दिया गया जबकि इस भूमि पर अगर पर्यटन क्षेत्र विकसति होता तो सैकड़ों स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है, साथ ही यह क्षेत्र विकसित होता और स्वरोजगार के साधन भी बढ़ते।
विस्थापितों को फिर से विस्थापन का डर
भानियावाला में टिहरी बांध के विस्थापित को सैकड़ों परिवारों को भूखण्ड आवंटित कर अठूरवाला क्षेत्र में बसाया गया लेकिन इस क्षेत्र में भूमि खरीद-फरोख्त के नियमों को ताक पर रखा जाता रहा। आज इस क्षेत्र में खेती की जमीन ही करीब- करीब खत्म हो चुकी है और एक नगर बस गया है जिसके चलते टिहरी बांध विस्थापित ही अल्पसंख्यक हो गए हैं। अधिकांश विस्थापितों ने अपनी जमीनें बेच दी हैं। सरकार ने इन जमीनों को बेचने या फिर खेती की जमीनों को आवासीय बनाने में कभी रोक लगाई न ही प्रशासन ने कभी इस पर कोई ध्यान दिया।
टिहरी बांध विस्थापित और वरिष्ठ पत्रकार गजेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि ‘‘हमने देश के अंधेरे को दूर करने के लिए अपनी मातृभूमि को छोड़ने का निर्णय लिया और सरकार के साथ खड़े रहे लेकिन सरकार ने हमें ऐसी स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया कि हम अपना सर्वाइवल नहीं कर पाए। हम पहाड़ों के लोग थे, पहाड़ी संस्कृति से उठाकर हमें नई संस्कृति में झोंका गया लेकिन हम नए परिवेश में कैसे सर्वावल करे यह सरकर ने कभी नहीं सोचा। पहले बांध के लिए हमें अपने घरों से उजाड़ा गया फिर हवाई अड्डे के लिए हमारी जमीनों को हम से छीना गया। हमने यह भी स्वीकार किया लेकिन फिर से हमारी जमीनांे को हवाई अड्डे के चैड़ीकरण के लिए छीनने का काम सरकार कर रही है। हम जमीन दे देंगे क्योंकि हम देश और प्रदेश के विकास के साथ खडे रहे हैं लेकिन अब हमें जमीन के बदले जमीन चाहिए। हमें जमीन की कीमत नहीं चाहिए। सरकार ने हमारे साथ कई धोखे किए हैं। हमारी जमीनों को सर्किल रेट पर उलझाया गया। जिस जमीन का बाजारी भाव 20 हजार वर्ग गज है उसे सरकार कहती है कि खेती की जमीन है और इस पर हेक्टेयर के हिसाब से सर्किल रेट लगेगा। सरकार अपना सर्किल रेट अपने पास रखे हमें जमीन के बदले जमीन दे बस हमें और कुछ नहीं चाहिए।

बात अपनी-अपनी

विधायक गैरोला जी बहुत विनम्र और मिलन सार हंै हमेशा क्षेत्र के लोगों से मिलते रहते हैं। हम व्यापारियों की हर मांग पर वे हमारे साथ खड़े होते हैं। विकास तो निरंतर होता रहता है। कोई भी विधायक हो वह काम करेगा ही लेकिन जनता से मिलना और जनता के लिए काम करने वाला ज्यादा बेहतर काम करता है गैरोला जी भी ऐसे ही विधायक हैं।

रमेश वासन, अध्यक्ष, व्यापार मंडल, डोईवाला

डोईवाला शहर में काम तो बहुत हो रहे हैं। गलियों में टाइलें लगाई जा रही हैं। जल भराव को रोकने के लिए काम हो रहे हैं। विधायक जी बहुत मिलनसार है और हमारी मांगों पर हमेशा सकारात्मक रुख रखते हैं। हमारी एक मांग है कि डोईवाला नगर पालिका का भवन नगर पंचायत के हिसाब से है। अब नगर पालिका बन गई है लेकिन भवन वही है। हमने विधायक जी से मांग की है कि हमंे शहर में कोई भूमि दी जाए जिससे हम नगर पालिका का बड़ा नया भवन बना सके लेकिन अभी आश्वासन ही मिला है। अगर हमंे रेशम विभाग की जमीन का कुछ हिस्सा मिल जाए तो हमारी एक बड़ी समस्या खत्म हो जाएगी।
नरेंद्र सिंह नेगी, अध्यक्ष, नगर पालिका, डोईवाला

डोईवाला में ट्रिपल इंजन की सरकार है लेकिन जिस डोईवाला ने निशंक और त्रिवेंद्र रावत जैसे दो-दो मुख्यमंत्री दिए हो उस डोईवाला के हालात सबसे बुरे हैं। लाॅ यूनिवर्सिटी रानीपोखरी से हटाकर बाहर ले जाई जा चुकी है। हर्रावाला आर्युवेद विश्वविद्यालय के हालात इतने खराब हो चुके हैं कि रोज नए घोटाले सामने आ रहे हैं। नगर पालिका में भाजपा का बोर्ड है लेकिन सड़कों और गलियों के हालात बद से बदतर हैं। जलभराव से जनता तस्त है। डोईवाला क्षेत्र में भू माफियों का कब्जा हो रहा है, ग्राम समाज की जमीनों पर कब्जे हो चुके हैं लेकिन न तो भाजपा सरकार को और न ही विधायक को इससे कोई मतलब है। रोजगार के नाम पर इस क्षेत्र में नए उद्योग नहीं लगाए जा रहे हैं। खेती खत्म हो रही है, नहरों में पानी नहीं है जिससे किसानों की खड़ी फसल बर्बाद हो रही है। इतना कह सकता हूं कि डोईवाला के विधायक का कार्यकाल पूरी तरह से फेल है।

सागर मनवाल, युवा कांग्रेसी नेता, डोईवाला

पिछले लगातार दो कार्यकाल में भाजपा सरकार रही है और डोईवाला में भाजपा के ही विधायक हैं। पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत जी थे जो मुख्यमंत्री भी थे, अब बृजभूषण गैरोला जी है लेकिन न तो काम त्रिवेंद्र रावत जी के कार्यकाल में और न गैरोला जी के कार्यकाल में डोईवाला की जनता ने देखा। काम का शोर ज्यादा दिखाया जाता है। वो जिला अस्पताल की घोषणा बताते हैं लेकिन सबसे बुरा हाल डोईवाला के अस्पताल का ही है। बुनियादी सुविधाओं जैसे पीने का पानी तक अस्पताल में नहीं हैं। स्टाफ जब जी में आता है बाहर चला जाता है। डोईवाला विधानसभा कृषि प्रधान क्षेत्र है लेकिन सबसे बुरी हालत किसानों की है। एक बीघा भूमि के लिए सिर्फ एक 20 किलो का खाद का कट्टा दिया जा रहा है। नहरें टूट चुकी है, सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। पूरी गन्ना बेल्ट सरकार की अनेदखी से खत्म हो रही है। खेती की जमीनों पर अवैध आवासीय काॅलोनियां, माॅल और बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें खड़ी हो रही हैं लेकिन न तो सरकार और न ही विधायक गैरोला जी को इससे कोई मतलब है। हम जब क्षेत्र के लोगों से मिलते हैं तो सभी एक ही बात कहते हैं कि हमारे विधायक जी यहां कभी नहीं आते। मुझे तो लगता है कि विधायक गैरोला गायब हो चुके हैं।

अशोक सेमवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष ,आम आदमी पार्टी, उत्तराखण्ड

जब में विधायक था तब मैंने कई योजनाएं और काम स्वीकृत करवाए थे लेकिन मेरे बाद 9 साल हो गए हैं तब से लेकर आज तक नए काम तो शुरू नहीं हुए पुराने काम भी रोक दिए गए हैं। इस सीट से मुख्यमंत्री रहे हैं लेकिन दुख के साथ कहना पड़ता है कि डोईवाला एक ऐसी सीट है जिसके साथ सबसे ज्यादा भेदभाव हुआ है। आज किसानों की आय दुगना करने के दावे हो रहे हैं लेकिन डोईवाला में ही खेती समाप्त होती जा रही है। सिंचाई की नहरों में पानी नहीं है, ट्यूबेल नए नहीं बनाए गए जो पहले के बने हैं उनको ही अपना बताकर जनता को बरगलाया जा रहा है।

हीरा सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक, डोईवाला

तीस पैंतीस साल पहले हमें टिहरी से निकालकर यहां फेंक दिया गया। टिहरी में हमारी उपजाऊ खेती की जमीन थी लेकिन यहां जमीन में खेती करना बहुत मुश्किल था। किसी तरह हमने इस जमीन को खेती के लायक बनाया और अब हमें फिर से विस्थापित किए जाने का काम सरकार कर रही है। एक पीढ़ी तो हमारी इस जमीन में मेहनत करते चली गई। मेरे पिताजी इस जमीन में कड़ी मेहनत करके हुए स्वर्गवासी हुए। अब दूसरी पीढ़ी मैं हूं। हमें जमीन के बदले जमीन ही चाहिए। कम से कम हमारी तीसरी पीढ़ी के पास जमीन तो बची रहे।

रबिंद्र सिंह नेगी, बांध विस्थापित, अठूरवाला

डोईवाला विधानसभा 2026 – विधायक रिपोर्ट कार्ड
विधायक : बृजभूषण गैरोला (अवधि: 4 वर्ष)
क्र. क्षेत्र                                                मुद्दा / जमीनी स्थिति                  अंक  (10 में)
  1. जनसम्पर्क व क्षेत्रीय सक्रियता विधायक क्षेत्र में सक्रिय दिखते हैं लेकिन कई पुरानी समस्याओं पर परिणाम सीमित 6/10
  2. पेयजल व्यवस्था हल्द्वाड़ी, रामनगर डांडा, थानो क्षेत्र में गम्भीर जल संकट, कई गांव आज भी स्थायी समाधान की प्रतीक्षा में 3/10
  3. कृषि व सिंचाई नहरों में पानी नहीं, खेती का रकबा लगातार घटा, जंगली जानवरों से फसल नुकसान 3.5/10
  4. सड़क व आधारभूत ढांचा शहरी क्षेत्रों में बेहतर सड़कें लेकिन ग्रामीण व पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं अब भी अधूरी 6/10
  5. परिवहन सुविधा थानो व आस-पास के क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन का अभाव, सिटी बस की मांग वर्षों से लम्बित 4/10
  6. उच्च शिक्षा पीजी काॅलेज में स्टाफ की भारी कमी, एम.काॅम और एमएससी नहीं, छात्रावास भवन निष्प्रयोज्य 4/10
  7. रोजगार व आर्थिक विकास पुराने उद्योग बंद, नए रोजगार सृजन की कमी, पर्यटन और शिक्षा परियोजनाएं अधर में 4/10
  8. लाॅ यूनिवर्सिटी परियोजना भूमि पूजन के 7 वर्ष बाद भी निर्माण शुरू नहीं, जनता में भारी असंतोष 2/10
  9. भूमि प्रबंधन व नियोजन झीलवाला भूमि प्रकरण, अनियोजित बसावट और विस्थापितों के मुद्दों पर सवाल 4/10
  10. समग्र विकास प्रदर्शन शहरी क्षेत्र चमके, लेकिन ग्रामीण समस्याएं जस की तस, विकास असंतुलित नजर आता है 5/10
कुल अंक :  4.5/10                           फाइनल ग्रेड : पास

‘मैं दलगत राजनीति से दूर रहता हूं’
डोईवाला विधानसभा से भाजपा विधायक बृजभूषण गैरोला ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी गौरव चौधरी को लगभग 29 हजार मतों के अंतर से पराजित किया था। संगठनात्मक पृष्ठभूमि से आने वाले गैरोला की पहचान एक सहज और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय नेता के रूप में रही है। हालांकि डोईवाला जैसी वीआईपी सीट पर पेयजल, सिंचाई, परिवहन और लाॅ यूनिवर्सिटी जैसे लम्बित मुद्दों के समाधान को लेकर जनता की अपेक्षाएं अभी भी बनी हुई हैं। विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर गैरोला कि हमारे विशेष संवाददाता कृष्ण कुमार से बातचीत

सवा चार साल में अपने क्षेत्र के प्रमुख विकास कार्यों और योजनाएं बताएं?
जब मैं विधायक बना था तो हमें विकास कार्यों के लिए एक विजन पत्र बनाने का आदेश मिला था जिसमें मैंने दस महत्वपूर्ण बिंदु रखे। इस विजन पत्र के अनुसार ही मैं अपने क्षेत्र में विकास कार्य करवाने का प्रयास करता रहा हूं और मुझे खुशी है कि मैं अपने काम में बहुत हद तक सफल रहा हूं। यह भी सच है कि कई ऐसे काम हैं जो पूरे नहीं हुए हैं, अभी भी कई क्षेत्रों में समस्याएं बनी हुई हैं।

सनगांव सतेली मोटर मार्ग अब जल्द ही शुरू हो जाएगा। इस रोड के न बनने के कारण 2024 के लोकसभा चुनाव में जनता बहिष्कार करने की बात तक करने लगी थी। इसी तरह से थानो से बड़ेरना के लिए गोदी सेरा बडेरना मोटर मार्ग जो कि 50 सालों से रूका हुआ था उसे भी शुरू करने का काम मेरे द्वारा करवाया गया है। धारकोट से लडुवा कोट मोटर मार्ग का डामरीकरण हो गया है और अब इसे लडुवा कोट से हल्द्वाड़ी तक विस्तार की स्वीकृति मिल चुकी है। इस रोड को भविष्य में टिहरी जिले के पसमी बवंडी जो कि थत्यूड़ और चम्बा ब्लाॅक में पड़ता है, से जोड़ कर इसे सतेली जो कि मेरी विधानसभा का सबसे दुर्गम गांव है, को भी रोड कनेक्टविटी हो जाएगी। लड़ुवा कोट से ही अखंड भिलंगना होते हुए रायुपर तक मोटर मार्ग को भी स्वीकृति मिल गई है। अब इस क्षेत्र के लोगों को देहरादून, रायपुर आने के लिए धारकोट थानो होते हुए देहरादून आने के लिए लम्बा रास्ता तय नहीं करना पड़ेगा।
सिंधवाल गांव पूर्व से कोटला गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने का शासनादेश जारी हो गया है। चित्तौड़ घैसेंणी गांव के लिए आजादी के बाद पहली बार सड़क मार्ग, गडूल पट्टी में बागी नवाकोट मोटर मार्ग का डामरीकरण का काम पूरा हो चुका है। बमेत-मासी के लिए सड़क का पहला फेस का काम पूरा हो चुका है अब दूसरे फेस में डामरीकरण शुरू हो जाएगा। इठारना-देबली की सड़क का डामरीकरण का काम पूरा करवा दिया है। बमेत से इठारना तक की सड़क का चैड़ीकरण का काम स्वीकृत करवा दिया है। डोईवाला दुधली मोटर मार्ग का चैड़ीकरण शुरू करवा दिया है। डोईवाला के संयुक्त चिकित्सालय को उपजिला चिकित्सालय में उच्चीकरण करवा दिया है। थानो का 100 साल पुराना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का गे्रड बढ़ाए जाने का शासनादेश जारी करवा दिया है।
माजरी में मैंने स्टेट वेटनरी हाॅस्पिटल का निर्माण करवाया है। यह राज्य में पहला राज्य स्तरीय वेटनरी अस्पताल है। इसका निर्माण पूरा हो चुका है और हर्रावाला में स्टेट लेवल का 76 करोड़ की लागत से होम्योपैथी मेडिकल काॅलेज भी बन गया है। भवन और अन्य इमारतंे तैयार हो चुकी हैं। इस वर्ष यह विश्वविद्यालय भी शुरू हो जाएगा। आयुष मेडिकल काॅलेज तो पहले से ही संचालित हो रहा है, अब होम्योपैथी का भी मेडिकल काॅलेज मेरी विधानसभा में शुरू होने वाला है। बुल्लावाला में उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की फैकल्टी का केंद्र स्वीकृत करवा दिया है। इसके लिए भूमि भी स्वीकृत हो दी गई है। जल्द ही इस केंद्र का निर्माण भी शुरू हो जाएगा। इससे हमारे क्षेत्र के छात्रों को हल्द्वड़ी नहीं जाना पड़ेगा। टिहरी बांध विस्थापितांे की संस्कृति को बनाए रखने के लिए अठूरवाला में पुरानी टिहरी की यादें और घंटाघर तथा म्यूजियम के निर्माण की योजना को स्वीकृति मिल गई है। जल्द ही इस में काम शुरू हो जाएगा। मेरा क्षेत्र खेती-किसानी से जुड़ा है जिसके लिए सिंचाई की नहरंे जो सौ साल पुरानी हो चुकी हैं उनका नवीनीकरण और नई ब्रांच नहरें और पुरानी नहरों की मरम्मत का काम मैंने अपनी प्राथमिकता में रखा। जीवनवाला, बाला वाला, नत्थुवाला, टिहरी विस्थापितों को भोगपुर क्षेत्र या थानो क्षेत्र हो या जाॅली ग्रांट का इलाका हो, सभी जगहों पर नहरों का काम करवाया है।
थानो न्याय पंचायत में पेयजल की सबसे बड़ी समस्या है। दुर्गम क्षेत्र हल्द्वड़ी में तो खच्चरों से पीने का पानी लाना पड़ रहा है?
मैं आपसे पूरी तरह से सहमत हूं कि हल्द्वड़ी में पेयजल की भारी समस्या हो रही है। इसके लिए हमने नई पेयजल लाइन को स्वीकृत करवा दिया है और तत्काल राहत के लिए सोलर पम्प बांटे हैं जिससे स्रोतों से पीने का पानी मिल जाए। यह समस्या वास्तव में गम्भीर है क्योंकि टिहरी जिले के क्षेत्र से पेयजल को टेप करके लाया जा रहा है लेकिन वह लाइन आपदा के कारण हमेशा टूट जाती है। अब मैंने पेयजल विभाग को कहा है कि इसके लिए नई पेयजल लाइन का निर्माण किया जाए। जल्द ही नई लाइन शुरू हो जाएगी।
रानीपोखरी के ग्यारह गावों में ब्रांच नहरों में दो-तीन साल से पानी नहीं आ रहा है?
रानीपोखरी की नहरों के हेड की मरम्मत का काम पूरा करवा दिया है लेकिन कहीं कुछ कमियां हैं तो उसे भी पूरा किया जा रहा है। रानीपोखरी में हो सकता है कि कुछ ऐसे मामले शेष हों लेकिन लगभग सारी नहरों का काम पूरा हो चुका है।
किसानों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है?
मैंने विधानसभा में यह सवाल उठाया था कि मेरे क्षेत्र में घेरबाड़ योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। अब भारत सरकार ने राज्य की घेरबाड़ योजना के लिए 90 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए हैं जल्द ही मेरे क्षेत्र के किसानों को घेरबाड़ योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
स्थानीय लोग कहते हैं कि विधायक जी से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है सिटी बस नहीं मिल पा रही है?
हमने एक टाटा मैजिक लगाई थी लेकिन संचालकोंका कहना था कि सवारी नहीं मिल रही है जिससे इन रूटों पर घाटा हो रहा है। मैंने आरटीओ से बैठक करके थानो से भोगपुर, रानीपोखरी होते हुए भानियावाला, जाॅली ग्रांट होकर थानो के लिए एक सिटी बस का नया रूट स्वीकृत करवाने की बात की है। आरटीओ ने इस पर सहमति जताई है और इसके लिए सिटी बस और टाटा मैजिक का परमिट जारी करने की बात पर सहमति दी है। जल्द ही इन रूटों पर छोटे सवारी वाहनों का परमिट दिया जाएगा।
रानीपोखरी में लाॅ यूनिवर्सिटी की क्या स्थिति है?
मेरी गारंटी है कि रानीपोखरी में ही लाॅ यूनिवर्सिटी का निर्माण होगा। मैंने सदन में यह सवाल पूछा तो सरकार ने लिखित में मुझे यही जवाब दिया। जब मामला सामने आया तो मैंने मुख्यमंत्री धामी जी से इस बारे में मिलकर बात की और सारी जानकारी दी तब उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि लाॅ यूनिवर्सिटी रानीपोखरी के लिए ही स्वीकृत है और वहीं बनेगी। इससे साफ बात और कुछ नहीं हो सकती। जो लोग धरना दे रहे हैं वे सिर्फ राजनीति कर रहे हैं।
आपके क्षेत्र में कृषि भूमि पर अनियोजित आवासीय काॅलोनियां बन रही हैं?
कृषि भूमि पर मकान और अन्य निर्माण बगैर नक्शा पास करवाए नहीं हो सकते। मैंने प्राधिकरण को कई बार पत्र लिखा है कि ऐसे निर्माण पर तुरंत कार्यवाही करें, कार्यवाही हो भी रही है। डोईवाला क्षेत्र में अनेक अवैध प्लाॅटिंगों पर कार्यवाही की गई है।
आपके क्षेत्र में जमीनों का रकबा कम हो रहा है, क्या कारण है?
मैं जब भी अपने क्षेत्र में जाता हूं तो सबसे पहले मैं कहता हूं कि अपनी जमीनों को बचाओ इसे मत बेचो। आप इस राज्य के भूमिधरी तभी तक हैं जब आपके पास भूमि होगी। भूमि ही नहीं रहेगी तो अपनी पहचान कैसे साबित करोगे? लेकिन इसमें हम क्या कर सकते हैं, सभी को सम्पति खरीदने और बेचने का अधिकार है। हम तो अपील ही कर सकते हैं फिर भी कुछ लोग अपनी जमीनों को बेच रहे हैं।
क्या टिहरी बांध विस्थापितों को हवाई अड्डे के विस्तार के लिए फिर से विस्थापित होना पड़ेगा?
मैं इस विषय को लेकर गम्भीरता से लगा हूं। मुख्यमंत्री जी से भी इस बारे में मिल चुका हूं लेकिन भारत सरकार के एयरपोर्ट को लेकर कुछ तकनीकी पक्ष हैं। हमने कहा है कि 61 परिवार जो कि इससे प्रभावित हो रहे हैं, को भूमि के बदले भूमि दी जाए। यही मांग विस्थापितों की भी है। वह मुआवजा के बदले जमीन की मांग कर रहे हैं जो कि उचित है। सरकार ने हमारी बात को गम्भीरता से सुना और माना। यूकाडा ने भी हमारी मांग पर पूरा सहयोग करने की बात कही और घमंडपुर रानीपोखरी में इनके लिए जमीन ढूंढ़ ली गई है जिसका अधिग्रहण किया जाने वाला है।
शिक्षा के क्षेत्र में आपकी क्या योजना है?
प्रवक्ताओं के ट्रांसफर हो रहे हैं जिससे नए प्रवक्ता ट्रांसफर होकर आने वाले हैं। हमने कई बिल्डिंगें नई बना दी है जिससे फैकल्टी का काम हो रहा है। एमएससी और एम.काॅम का मामला मैंने सदन में भी उठाया था। सरकार ने कहा है कि जल्द की इस पर काम हो जाएगा। महिला छात्रावास के लिए भी आदेश हो चुका है, शायद इस वर्ष शुरू होने की उम्मीद है।
डोईवाला नगर पालिका क्षेत्र में जल भराव और पालिका के नए भवन के लिए जमीन की मांग की जा रही है। रेशम विभाग से जमीन दिए जाने की मांग हो रही है। इस पर आपने कोई कार्यवाही की है?
डोईवाला नगर पालिका हो गई है और अब इसमें कई ग्रामीण क्षेत्र शामिल हो गए हैं। सड़कें और गलियां सभी का निर्माण हो रहा है। जल भराव को दूर करने के लिए नालियों और सुरक्षा के इतंजाम किए जाते हैं। रेशम विभाग की नसर्री चल रही है इसलिए रेशम विभाग की जमीन तो नहीं मिल पाएगी लेकिन मैंने इसके लिए शहर के नजदीक भूमि ढूंढ़ने का काम किया है। ऐसी जमीन मेरी नजर में भी है लेकिन अभी उसका खुलासा करना ठीक नहीं है। जल्द ही भूमि मिलेगी ऐसा मेरा विश्वास है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को राहत नहीं मिल रही है?
मेरी विधानसभा में सॉन्ग, जाखण, ओफर सुसवा नदियों का क्षेत्र है। तीनों में ही बाढ़ की समस्या रहती है। इसके लिए मैंने बाढ़ राहत और नियंत्रण के लिए तटबंध ओफर पुस्तों का काम सबसे ज्यादा करवाए  हैं। भट्टनगरी में भी पुस्ते का विस्तार करने का आदेश मैं दे चुका हूं जल्द ही वहां पर भी पुस्ते का निर्माण हो जाएगा।

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