कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया लंबे अर्से से पार्टी आलाकमान संग खफा चल रहे हैं। हालांकि ग्वालियर रियासत के राजवंश से ताल्लुक रखने वाले सिंधिया खुलकर कुछ नहीं बोल रहे, लेकिन उनके हावभाव और उनके चेले-चपाटों की बयानबाजी से साफ जाहिर है कि सिंधिया अपने गृह प्रदेश में ज्यादा पावर चाह रहे हैं। कमलनाथ के सीएम बनने के साथ ही सिंधिया ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए जोर लगाना शुरू कर दिया था। लेकिन पार्टी आलाकमान ने इसकी सहमति नहीं दी। सरकार में भी सिंधिया समर्थक विधायकों को भले ही कमलनाथ ने मंत्री बना दिया, लेकिन महत्वपूर्ण मंत्रालय उन्हें नहीं दिए गए हैं। सिंधिया के कहने पर नौकरशाह कुछ भी करने को तैयार नहीं क्योंकि उन्हें सीएम ऑफिस से सीधा आदेश है। ऐसे में सिंधिया पार्टी छोड़ने का मन बना रहे हैं। खबर है कि भाजपा में शामिल होने के बजाए राजा साहब अलग दल बनाने पर विचार कर रहे हैं। खबर यह भी है कि उन्हें भाजपा की तरफ से सीएम पद का ऑफर भी है। ऐसे में यकायक ही अपने ट्वीटर एकाउंट से ‘कांग्रेस वर्कर’ शब्द हटा सिंधिया का ‘जनसेवक’ और ‘क्रिकेट प्रेमी’ लिखना स्पष्ट संकेत है कि जल्द ही वे कांग्रेस छोड़ सकते हैं।
महाराज की नाराजगी का राज

