Sargosian / Chuckles

राजनीति में चमक बिखेरेंगे चैतन्य?

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल आमतौर पर मीडिया और लाइमलाइट से दूर रहते हैं लेकिन हाल ही में चैतन्य ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से दिल्ली में मुलाकात की है। इसके बाद जिस तरह से भूपेश बघेल मुलाकात के फोटो पोस्ट कर बधाई देते नजर आ रहे हैं वे न सिर्फ राजनीतिक लाॅन्चिंग के बड़े संकेत माने जा रहे हैं बल्कि 2028 के विधानसभा चुनाव की दावेदारी की ओर इशारा भी कर रहे हैं। हालांकि चैतन्य की सक्रिय सियासी एंट्री होगी या नहीं, यह आने वाला समय ही तय करेगा लेकिन राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या चैतन्य बघेल राजनीति में चमक बिखेरेंगे? चैतन्य बघेल के अभी तक के जीवन यात्रा की बात करें तो उन्होंने शुरुआती शिक्षा महर्षि विद्या मंदिर से प्राप्त की। इसके बाद शंकराचार्य विश्वविद्यालय, भिलाई से बी.काॅम और भिलाई इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी से एमबीए किया। अब तक वे सक्रिय राजनीति से दूर रहे हैं और खेती-किसानी व रियल एस्टेट के कारोबार से जुड़े रहे हैं। जुलाई 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित शराब घोटाले और मनी लाॅन्ड्रिंग मामले में उन्हें गिरफ्तार किया था। वे करीब छह महीने जेल में रहे। ईडी का आरोप है कि घोटाले से जुड़ी राशि का एक हिस्सा उनके पास पहुंचा। फिलहाल वे कांग्रेस से जुड़े हैं लेकिन उनके पास कोई आधिकारिक पद नहीं है और न ही उन्होंने कोई चुनाव लड़ा है। जेल से रिहाई के बाद खड़गे से उनकी यह पहली मुलाकात है।

पीके आ रहे हैं कांग्रेस के करीब


बिहार की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज है। कुछ दिनों पहले प्रशांत किशोर (पीके) की प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात और अब लोकसभा में राहुल गांधी को बोलने की अनुमति न दिए जाने पर उनके समर्थन वाले बयान ने नए सियासी कयासों को जन्म दे दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या पीके और कांग्रेस के बीच राजनीतिक दूरी कम हो रही है? हालांकि अब तक न तो जन सुराज की ओर से और न ही कांग्रेस की ओर से इस सम्बंध में कोई आधिकारिक बयान आया है। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि हालिया घटनाक्रमों ने सियासी अटकलों को जरूर हवा दी है लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह महज मुद्दों पर समर्थन है या किसी बड़े राजनीतिक समीकरण की शुरुआत। आने वाले समय में दोनों पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और राजनीतिक कदम ही इस चर्चा को ठोस आधार दे पाएंगे और तभी तस्वीर साफ होगी। गौरतलब है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे जन सुराज और कांग्रेस दोनों के लिए निराशाजनक रहे। जन सुराज ने पहली बार 238 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। पार्टी को लगभग 3.44 प्रतिशत वोट शेयर मिला। दूसरी ओर महागठबंधन के तहत 61 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को केवल 6 सीटों पर ही जीत मिली जो 2020 के मुकाबले काफी कम था। चुनाव परिणामों के तुरंत बाद दिसम्बर 2025 में प्रशांत किशोर ने दिल्ली में  प्रियंका गांधी से मुलाकात की। यह बैठक कई घंटों तक चली लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया। इसके बाद हाल ही में बिहार नवनिर्माण यात्रा के दौरान पीके ने राहुल गांधी को संसद में बोलने से रोके जाने को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। उनके इस बयान ने अटकलों को और बल दिया। यही नहीं अप्रैल 2022 में प्रशांत किशोर ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने संगठनात्मक सुधारों को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी थी और ‘एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप’ 2024’ जैसे सुझाव रखे थे। हालांकि अपेक्षित स्वतंत्रता न मिलने की चर्चा के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ी और पीके ने बाद में जन सुराज की राह चुनी।

बढ़ सकती है बिस्वा की मुश्किलें


असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अपने बड़बोले बयानों से अक्सर राजनीतिक सुर्खियों में रहते हैं। इस बीच उनके एक वीडियो को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है जिससे प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विवाद की शुरुआत 7 फरवरी को तब हुई जब भाजपा असम प्रदेश के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स से एक वीडियो पोस्ट किया गया। वीडियो के साथ ‘पाॅइंट ब्लैंक शाॅट’ कैप्शन लिखा गया था। वीडियो में हिमंत बिस्वा सरमा हाथ में बंदूक लिए नजर आते हैं। उनके सामने दो व्यक्तियों की तस्वीरें दिखाई देती हैं। एक सफेद बनियान और टोपी में जबकि दूसरे की लम्बी दाढ़ी है। वीडियो में सरमा निशाना साधते हैं और एक प्रतीकात्मक (नकली) गोली चलाई जाती है जो तस्वीर पर लगती हुई दिखाई गई है। एक तस्वीर पर ‘पाईजान’ लिखा दिखता है और पास में ‘पाकिस्तान हाई कमीशन’ लिखा एक फ्रेम भी नजर आता है। नीचे एक समूह की धुंधली तस्वीर दिखाई देती है। गोली चलने के बाद मुख्यमंत्री का एआई जनरेटेड का उबाॅय रूप दिखाया गया है जिसके ऊपर असमिया में ‘जाति, माटी और भेटी’ लिखा है जो उनका राजनीतिक नारा भी है। वीडियो में ‘विदेशी मुक्त असम’ और ‘बांग्लादेशियों पर रहम नहीं किया जाएगा’ जैसे वाक्य भी नजर आते हैं। साथ ही पाकिस्तान क्यों गए थे जैसा सवाल भी दिखाया गया है जिसे कुछ लोग कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई से जोड़कर देख रहे हैं वहीं दूसरी तरफ इस कथित वीडियो को लेकर एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने मुख्यमंत्री सरमा पर गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले छह महीनों से एक खास समुदाय के खिलाफ नफरत भरे बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने अदालत से मांग की है कि मुख्यमंत्री को चुनाव लड़ने से रोका जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। अजमल का कहना है कि सरमा अपने पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं। अजमल ने इस वीडियो को समाज में तनाव बढ़ाने वाला और एक समुदाय के खिलाफ उकसाने वाला बताया है। बहरहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और भाजपा तथा एआईयूडीएफ के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और यह विवाद और गहरा हो सकता है। यहां तक कहा सुना जा रहा है कि आगामी राज्य विधानसभा चुनाव में विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की राह में रोड़ा अटकाने का काम कर सकता है।

राहुल के चुनाव लड़ने पर लगेगी रोक


देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था संसद का बजट सत्र इस समय जारी है। पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक और दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक प्रस्तावित है लेकिन सत्र के दौरान संसद परिसर में अनुशासन और मर्यादा को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गत् सप्ताह एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि कांग्रेस के 20-25 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में जबरन प्रवेश किया, अभद्र भाषा का प्रयोग किया और प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। भाजपा का दावा है कि इस दौरान एक कांग्रेस सांसद ने अवैध रूप से वीडियो रिकाॅर्ड किया जो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। पार्टी ने कहा कि वह लोकतांत्रिक बहस की परम्परा में विश्वास करती है और किसी भी प्रकार की दबाव की राजनीति का समर्थन नहीं करती। भाजपा के अनुसार यह घटना संसदीय मर्यादा का गम्भीर उल्लंघन है। इसी बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से रोकने की मांग करते हुए प्रस्ताव नोटिस दिया है। दुबे का कहना है कि यह विशेषाधिकार हनन का मामला नहीं बल्कि कथित विदेशी सम्पर्कों और विदेश यात्राओं से जुड़े आरोपों पर आधारित है। यह विवाद राहुल गांधी के उस बयान के बाद सामने आया जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को ‘पूर्ण आत्मसमर्पण’ बताते हुए सरकार पर किसानों और ऊर्जा सुरक्षा के हितों से समझौते का आरोप लगाया था। भाजपा ने इन आरोपों को भ्रामक बताया है। दूसरी ओर कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सांसद शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना चाहते थे और लगाए गए आरोप एकतरफा हैं। उनका आरोप है कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष को निशाना बना रही है। ऐसे में मीडिया और सोशल मीडिया में सवाल उठ रहे हैं कि क्या राहुल गांधी की सदस्यता रद्द हो सकती है? क्या उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है? संसदीय प्रक्रिया के जानकारों का मानना है कि किसी सांसद की सदस्यता समाप्त करने के लिए निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। संसदीय कार्य मंत्रालय और लोकसभा सचिवालय पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रहे हैं। यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो सम्बंधित सदस्यों के खिलाफ आचार संहिता के तहत कार्रवाई सम्भव है। फिलहाल यह मामला संसद की गरिमा, सांसदों के आचरण और लोकतांत्रिक संवाद की परम्परा से जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में जांच और राजनीतिक रुख से ही स्पष्ट होगा कि यह विवाद किस दिशा में बढ़ता है और क्या राहुल गांधी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं। बढ़ते टकराव के बीच यह देखना अहम होगा कि क्या संसद में संवाद और संयम की परम्परा बहाल हो पाती है या गतिरोध जारी रहता है।

You may also like

MERA DDDD DDD DD