राज्य स्थापना के बाद अस्तित्व में आई सितारगंज विधानसभा सीट अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए आरक्षित की गई थी जिसका फायदा बसपा नेता नारायण पाल को मिला। पाल यहां से 2002 और 2007 में दो बार लगातार बसपा के टिकट पर जीत कर विधानसभा पहुंचे लेकिन 2012 में वे भाजपा के किरण मंडल से शिकस्त खा गए। तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को चुनाव लड़ने के लिए एक सीट की जरूरत पड़ी तो किरण मंडल ने अपनी सीट छोड़ दी। तब हुए उपचुनाव में विजय बहुगुणा ने अपने छोटे पुत्र सौरभ बहुगुणा के हाथ में सितारगंज फतह करने की जिम्मेदारी सौंपी। सौरभ ने इसमें सफलता हासिल की तथा सितारगंज को ही अपना कार्य क्षेत्र बना लिया। इसके बाद 2017 और 2022 में लगातार दो बार सौरभ ने सितारगंज सीट को जीतकर बहुगुणा परिवार का कब्जा बरकरार रखा है। वर्तमान धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा सितारगंज के विकास में लगातार प्रयत्नशील रहे हैं। प्रदेश की अन्य विधानसभा क्षेत्रों के मुकाबले आज सितारगंज बेहतर स्थिति में है। पिछले साढ़े नौ साल के दौरान सौरभ ने विकास के रोडमैप को बेशक धरातल पर उतारा है बावजूद इसके इस विधानसभा के बाशिंदे पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आते हैं। सितारगंज शहर के अंदर जलभराव की समस्या है तो सफाई के दावे जिस तरह कागजों में हैं वह धरातल पर नहीं दिखाई देते हैं। बच्चों के लिए खेल स्टेडियम नहीं है तो कई गांवों के लोग सड़क सुविधा से वंचित हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा बंगाली समाज को ओबीसी का दर्जा दिलाने का वादा भी उनके पुत्र सौरभ बहुगुणा आज तक पूरा नहीं कर सके हैं। शक्तिफार्म में बेशक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक केंद्र में तब्दील कर दिया गया है लेकिन आज भी लोगों को ईलाज से महरूम होना पड़ रहा है। सितारगंज में रेल पहुंचाने का ड्रीम प्रोजेक्ट अभी तक अधूरा है। शक्तिफार्म और सितारगंज के बीच बंटे इस विधानसभा की खूबियों और खामियों से परिचय करा रही है यह जमीनी रिपोर्ट
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में एक वर्ष से भी कम का समय बचा है। राजनीतिक गलियारों में दावेदारों की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। सितारगंज विधानसभा में डेढ़ लाख के करीब मतदाता हैं। जातीय समीकरण में मुस्लिम 22 हजार, अनुसूचित जाति आठ हजार, थारू जनजाति के मतदाता 6 हजार, पंजाबी मतदाताओं की संख्या तकरीबन 14,000 है तो वहीं ब्राह्मण और ठाकुर मतदाताओं की संख्या आठ हजार है। बंगाली मतदाता यहां निर्णायक भूमिका में रहते हैं। जिनकी संख्या 32,000 से अधिक है। इस क्षेत्र ने पिछले दो दशकों से कृषि प्रधान क्षेत्र से आगे बढ़कर औद्योगिक पहचान बनाई है। 2000 में उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद अस्तित्व में आई सितारगंज विधानसभा सीट पर 2002 (तब आरक्षित) के विधानसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी के नारायण पाल ने भारतीय जनता पार्टी की बीना आर्य को हराकर यह सीट जीती थी। 2007 के चुनाव में भी नारायण पाल यहां से बहुजन समाज पार्टी के टिकट से जीते थे और उन्होंने कांग्रेस के कांता प्रसाद सागर को हराया था। 2012 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के किरण मंडल ने बहुजन समाज पार्टी के नारायण पाल को चुनाव में पराजित किया लेकिन किरन मंडल ने एक राजनीतिक समझौते के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के लिए यह सीट खाली कर दी और उपचुनाव में विजय बहुगुणा विधायक चुने गए। हालांकि ये दलबदल भारतीय जनता पार्टी के लिए झटका था लेकिन इसने सितारगंज की तस्वीर बदल कर रख दी। 2012 के बाद से इस सीट पर बहुगुणा परिवार का कब्जा रहा है। 2017 में और 2022 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सौरभ बहुगुणा यहां से विधायक हैं और वर्तमान में धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। ऊधमसिंह नगर जिले की इस विधानसभा क्षेत्र में विकास का पहिया जिस तेजी से आगे बढ़ा है उसने इस विधानसभा क्षेत्र को अन्य विधानसभा क्षेत्रों के मुकाबले बेहतर स्थिति में ला खड़ा किया है।
2017 से 2026 तक के साढ़े नौ साल के दौरान सितारगंज विधानसभा क्षेत्र के विकास के रोडमैप को यहां के जनप्रतिनिधि सौरभ बहुगुणा ने धरातल पर उतारा है। विकास के लिए जो दावे कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा द्वारा किए गए वह पूरी तरह खरे तो उतरे लेकिन कहीं न कहीं विकास की चमक के बीच कमियों की चुभन भी नजर आती है। मुख्यमंत्री के रूप में विजय बहुगुणा इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं तो कैबिनेट मंत्री के रूप में उनके पुत्र सौरभ बहुगुणा इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसके बावजूद विकास के रोडमैप में कहीं न कहीं कमी है लेकिन कुल मिलाकर जो तस्वीर नजर आती है वो इस विधानसभा क्षेत्र में बदलाव की तसदीक करती है।
सितारगंज विधानसभा सीट पर कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने सितारगंज, शक्तिफार्म, नानकमत्ता रोड, सिसैया, बरुआबाग, बैकुंठपुर, देवनगर, गुरुग्राम और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक सड़कों का निर्माण एवं डामरीकरण किया है। सितारगंज-टनकपुर 6 लेन हाइवे का काम तेजी से चल रहा है। कई वर्षों से खराब स्थिति में पड़े ग्रामीण मार्गों को नया स्वरूप मिला है। शक्तिफार्म क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया गया क्योंकि यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ने वाली सड़कों के सुधरने से किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिली है। हालांकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में शिकायतें हैं कि सड़कें तो बनीं लेकिन जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात में सड़कें जल्दी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। कुछ सड़कों की गुणवत्ता को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठे हैं।
सितारगंज विधानसभा सीट का एक हिस्सा शहरी क्षेत्र से लगा हुआ है जो कि नगर पालिका परिषद के अंतर्गत आता है। यह क्षेत्र आज भी समस्याओं से जूझ रहा है। शहर के अंदर पानी की निकासी के लिए नालियों की उचित व्यवस्था न होने के कारण बरसात के दिनों में जलभराव की स्थिति बनी रहती है। मानसून के वक्त सितारगंज शहर का मुख्य बाजार और गलियां जलमग्न हो जाती हैं। फड़, खोखा, ठेले वालों के लिए वेंडिंग जोन की बात करें तो नगर पालिका द्वारा स्थान का चयन तो कर लिया गया लेकिन धरातल पर ये कहीं नजर नहीं आता। जिसके चलते बेतरतीब तरीके से ठेले और फड़ों द्वारा सड़क को घेरे जाने से सड़कों में अराजकता जैसी स्थिति बनी रहती है। प्रशासन द्वारा समय-समय पर इनको हटाने से गरीब लोगों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाता है। लोगों का कहना है कि वो पिछले 40 वर्षों से यहां पर दुकान लगा कर रोजगार कर रहे हैं।
नगर पालिका परिषद सितारगंज द्वारा सुचारू ढंग से कार्य न करने के और कई अनियमितताओं के चलते आम आदमी के कई सवाल हैं जिसका जवाब नगर पालिका के पास नहीं हैं। मौनी माता मंदिर और महेंद्र सिंह मेमोरियल स्कूल गुरुद्वारा वार्ड नं. 6 के सामने कूड़े के ढेर लगे रहते हैं, दोपहर 12 बजे तक कूड़ा उठाया जाता है। नगर की सफाई व्यवस्था के लिए नगर पालिका मोटी रकम खर्च करती है इसके बावजूद नियमित सफाई का कार्य नहीं होता है। सफाई के लिए ठेकेदार द्वारा जो कर्मचारी लगाए गए हैं उनकी संख्या कागजों में तो है लेकिन धरातल पर कुछ नजर नहीं आता। प्राप्त जानकारी के अनुसार कर्मचारियों के भुगतान में भी देरी की जा रही है। वेतन के रूप में उनको 10 हजार रुपए का भुगतान खाते में दिया जा रहा है जबकि मुख्यमंत्री द्वारा पर्यावरण मित्र को 500 रुपए प्रतिदिन की घोषणा की गई थी। पर्यावरण मित्रों को भविष्य निधि से भी वंचित रखा गया है।
सौंदर्यीकरण के नाम पर जेल कैम्प रोड पर लाइट के पोल लगे हैं लेकिन यहां पर रोशनी कहीं दिखाई नहीं देती। लोगों का कहना है कि 2 साल से लाइट बदली नहीं गई है जिस वजह से यहां पर हमेशा अंधेरा रहता है। जेल कैम्प रोड किनारे लोगों का कहना है कि बच्चों के लिए खेल मैदान के रूप में मिनी स्टेडियम का निर्माण होना था जिसमें 90 लाख का बजट आवंटित किया गया था। इसमें न तो मिट्टी का भरान किया गया और जो बाउंड्री वाॅल बनाई गई है वह भी मानकों के अनुसार नहीं बनाई गई है। कोई भी कार्य इसमें सरकारी मानकों के अनुसार नहीं हुआ है। यह काम अभी भी अधर में लटका हुआ है। सितारगंज विधानसभा क्षेत्र के अद्दिकतर लोगों का कहना है कि डबल इंजन सरकार में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने विकास का जितना दावा किया था उस पैमाने पर विकास तो हुआ है लेकिन इस विधानसभा में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की कुछ विकास की योजनाओं का खाका उस तरह तैयार नहीं किया गया, जिससे क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ बेहतर तरीके से मिल सके।
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सुरेंद्र प्रसाद का कहना है कि कोठा गांव में लगभग 5 हजार जनसंख्या है जो 60 सालों से सड़क से वंचित है। वन व सिंचाई विभाग की आपसी खींचतान के चलते यह सड़क अधर में लटकी हुई है। सन 1956 में बैकुल डैम बना था। उससे पहले यहां के लोगों का बसाव शुरू हो गया था। उनकी प्रमुख मांग है कि जमीनों का नियमितिकरण हो, जिससे उन्हें मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल सके।
शक्तिफार्म निवासी भारत भूषण सिंह कहते हैं कि यहां की मुख्य समस्या बेरोजगारी है। जिसका कारण 2017 में चीनी मिल का बंद होना है। इस क्षेत्र के 40 से 50 लोग जो इस मिल में कार्यरत थे, उनके परिवार का पालन पोषण होता था। वर्तमान में सब बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। उस वक्त विधायक सौरभ बहुगुणा ने घाटे के चलते इस मिल को पीपीपी मोड में चलने की बात कही थी और एक-दो साल यह चली भी थी। फिर यह प्राइवेट सेक्टर को 30 साल के लिए लीज पर दे दी गई। फिलहाल चीनी मील चल रही है लेकिन यहां काम करने वाले लोगों का कहना है कि मामला कोर्ट में लम्बित है। हम सन 1991 में कम्पनी में आए थे और 2012 से सीजनल परमानेंट हुए और 2017 में मिल बंद हो गई। तब हमें वीआरएस के नाम पर सवा लाख रुपया मिला उससे क्या होता है। पूरी जिंदगी खराब हो गई है। शक्ति फार्म के अंतर्गत रतन फाॅर्म नम्बर 2 के पूर्व प्रधान पंकज बसु के अनुसार हमारे क्षेत्र में गांव के अंदर रोड का निर्माण हुआ है जहां बाढ़ का खतरा रहता था वहां सुरक्षा के लिए दीवारें बना दी गई हैं। मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए सभी जगह पैसा दिया गया है तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध है।
शक्ति फार्म नम्बर 3 के स्थानीय निवासी अनंत मंडल का कहना है कि हमारी प्रमुख मांग है बंगाली समाज को ओबीसी या अनुसूचित जाति का दर्जा मिले। यह हमारी काफी लम्बे समय से मांग रही है। उस समय मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने इस सम्बंध में हमें आश्वस्त किया था लेकिन जो भी सरकारें आई उन्होंने इस बारे में कोई कार्य आगे नहीं बढ़ाया। वो कहते हैं कि विकास बहुत हुआ है लेकिन कुछ काम होने अभी बाकी हैं। शक्ति फार्म को एक डिग्री कॉलेज की जरूरत है। वहां एक पॉलिटेक्निक होना चाहिए। स्वास्थ्य की बात करें तो शक्तिफार्म में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत कर 30 बेडों वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तब्दील कर दिया गया है। साथ ही 32 नए पद स्वीकृत किए गए हैं लेकिन काश्तकारों के लिए गेहूं आदि फसलों के लिए सरकारी कांटा नहीं लग पाया इससे बहुत असुविधा होती है और किसानों को खाद बीज भी पूर्ण ढंग से नहीं मिल पा रहा है।
नाकुलिया वार्ड के पूर्व एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष मोहम्मद अयूब खान कहते हैं कि विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य तो हुए हैं। किच्छा से खटीमा तक रेल परियोजना का कार्य भी चल रहा है। अस्पतालों का भी
उच्चीकरण हुआ है और सड़कों का भी पर्याप्त विकास हुआ है तथा लाइटें भी लगी हैं।
सितारगंज के आदर्श अम्बेडकर विद्यालय समिति के प्रबंधक भीष्म नारायण का कहना है कि सरकार से हमारी मांग है कि विद्यालय परिसर की जमीन का नियमितीकरण हो। इसके प्रांगण में जलभराव की समस्या है। इसका हल निकाला जाए जाना चाहिए। इस विद्यालय के मुख्य गेट पर वन विभाग की चौकी है जो बहुत समय से बंद है। इसे किसी दूसरी जगह ले जाना चाहिए क्योंकि मुख्य चैराहे पर होने के कारण यहां पर हर समय दुर्घटना की सम्भावना बनी रहती है।
नकुलिया क्षेत्र के ही उर्वेंद्र का कहना है कि गांव में सड़कों का निर्माण तो हुआ है लेकिन पानी की निकासी के लिए नालियां नहीं बनाई गई हैं जिससे जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है। वार्ड नम्बर एक चिंतमाजरा के स्थानीय निवासी जरार का मानना है कि कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा के कार्यकाल में बेहतर कार्य हुए हैं। सड़कों का निर्माण हुआ है। सड़कों के किनारे सोलर लाइट लगी हैं और मंत्री जी मिलनसार हैं।
बाईपास काॅलोनी वार्ड नम्बर 11 के रामपाल सक्सेना का कहना है कि सरकारी हॉस्पिटल खटीमा रोड सितारगंज के पास हमारी दुकान नगर पालिका क्षेत्र में है। हमें अतिक्रमण के नाम पर जबरन हटाया जा रहा है। हमारा यही काम धंधा है। हमारा अनुरोध है वेंडिंग जोन बनाया जाए और हमारे व्यवसाय की उचित व्यवस्था की जाए।
उकरौली सिडकुल की स्थाई निवासी पारवी कहती हैं कि हमारे क्षेत्र में 2000 के आस-पास जनसंख्या है। हमारी सड़क की समस्या है। इस क्षेत्र में खनन होता है। चेकिंग से बचने के लिए खनन के वाहन मुख्य सड़क से न जाकर गांवों की आंतरिक सड़कों से निकलते हैं। जिस कारण सड़कों में गड्ढे हो गए हैं और सड़क चलने लायक नहीं रह गई हैं।
निर्मल ग्रामसभा निर्मल नगर रतन फाॅर्म नम्बर एक के स्थानीय निवासी विश्वजीत का कहना है कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में विकास कार्य हुए हैं। वर्तमान में बैगुल नदी पर पुल का निर्माण होना है जिसका शिलान्यास अभी मुख्यमंत्री ने किया है। जिसकी लागत 11 करोड़ के लगभग है। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत ऊधमसिंह नगर के सितारगंज में इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क की स्थापना को मंजूरी दी है। सितारगंज में जहां एक्वा पार्क का निर्माण हो रहा है वह क्षेत्र सिडकुल फेज-2 में आता है। 44.50 करोड़ रुपए की लागत वाली इस केंद्रीय सहायता प्राप्त योजना में केंद्र का योगदान 40.05 करोड़ रुपए होगा। एक्वा पार्क प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत भारत सरकार द्वारा लाई गई एक अनूठी योजना है जहां विभिन्न मात्स्यिकी गतिविधियों को एक ही स्थान पर किया जाता है। ये मत्स्य पालकों को बहुत बढ़िया मंच प्रदान करने का काम करता है। एक्वा पार्क के एक सिरे की चकबंदी की जा रही है वहीं दूसरी छोर में निर्मल नगर रतन फार्म नम्बर 1 के लोगों की जमीन इस नदी के तट से सटी हुई है। यह नदी हल्द्वानी के चोरगलियां से बहते हुए सितारगंज बेगुल डैम में मिल जाती है। एक्वा पार्क की अपनी सीमा में चकबंदी होने से दूसरी ओर मानसून के समय नदी के एकतरफा बहाव से गांव के लोगों की जमीनों का भू-कटाव का खतरा हो सकता है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र की बात करें तो सितारगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को उप जिला चिकित्सालय में उच्चीकृत किया गया है जो 90 बेड का होगा। इसमें मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सहित 65 पद स्वीकृत किए गए हैं। इसी प्रकार शक्तिफार्म के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उच्चीकृत कर 30 बेड का अस्पताल बनाने के साथ 32 नए पद स्वीकृत किए हैं। हालांकि प्रदेश के अन्य चिकित्सालयों की तरह ये अस्पताल भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा के कार्यकाल की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं लेकिन जिस बात पर उनके राजनीतिक विरोधी भी एकमत हैं वो है उनका सहज स्वभाव एवं आम जनता के बीच उपलब्ध रहना। विकास के नाम पर उपलब्धियां भी उनके खाते में दर्ज हैं।
बात अपनी-अपनी
सितारगंज नगर पालिका शहर के अंतर्गत वार्ड नं. 1, जीएस कॉलोनी, वार्ड नं. 6, आईटीआई मेन रोड से लिंक होने वाले रोड जलभराव से ग्रस्त है। शहर में जनमानस को लेकर सुरक्षा की दृष्टि से कोई भी सीसीटीवी कैमरा उपलब्ध नहीं है और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उच्चीकरण की व्यवस्था नहीं की गई है जिसमें मुख्यतः गम्भीर बीमारी गुर्दे की जिसमें डायलिसिस के बहुत मरीज को प्राइवेट अस्पताल या खटीमा उपजिला स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है। यहां पर मोहल्ला क्लीनिक की भी जरूरत है। शिक्षा के क्षेत्र में म्यूनिसिपल बोर्ड नगर पालिका हाईस्कूल तक बच्चों के लिए एक स्कूल का निर्माण कर सकती है। नगर पालिका में पर्यावरण मित्र की सुरक्षा को लेकर अनदेखी होती है और पर्याप्त मात्रा में नगर पालिका के अंदर पर्यावरण मित्रों की कमी है। कुल मिलाकर नगर पालिका परिषद का बंटाधार हुआ है।
सरफराज राजू, पूर्व प्रत्याशी, नगर पालिका परिषद, सितारगंज
कांग्रेस की सरकार में अनेकों विकास कार्य हुए लेकिन वर्तमान विधायक कहते हैं, हमारी उपलब्धियां हैं। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल बंद होने के कगार पर हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में अस्पताल के अंदर यह हाल है कि यहां की सरकारी दवाइयां बाहर अपने चहेतों को सप्लाई कर दी जाती है। इतनी बड़ी आबादी में एक ही सरकारी हाॅस्पिटल है जिसमें परमानेंट डाॅक्टर नहीं हैं।
नारायण पाल, पूर्व विधायक, सितारगंज
सितारगंज की जनता दशकों बाद भी अधूरे वादों एवं बदहाली की मार झेल रही है। वर्ष 2012 के उपचुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने सितारगंज की जनता से जो बड़े वादे किए थे, वे आज भी फाइलों में दबे नजर आते हैं। क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या जमीनों का विनयमितीकरण आज तक अधर में लटका है, जिससे किसान अपने अधिकारों के लिए भटक रहे हैं। क्षेत्र में न तो युवाओं के लिए खेल स्टेडियम बना और न ही बेरोजगारी दूर करने के ठोस प्रयास हुए। नगर आज भी जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं का हाल यह है कि आपात स्थिति में मरीजों को हल्द्वानी या बरेली रेफर करना पड़ता है। किसानों को समय पर खाद-बीज न मिलना उनकी कमर तोड़ रहा है। अधिकारी वर्ग की उदासीनता और भ्रष्टाचार के कारण आम जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है। सड़कों की खस्ताहाली और ध्वस्त कानून- व्यवस्था शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोल रही है।
नवतेज पाल सिंह, पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी, सितारगंज
कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा 2012 से अब तक वह सितारगंज की जनता के बीच में सक्रिय हैं। अपने व्यवहार के कारण ही उन्हें 2017 के विधानसभा चुनाव में सितारगंज की जनता ने भारी मतों से विजयी बनाया। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने विधानसभा के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किया जिसमें एसडीएच की स्थापना, सिरसा सड़क, सुखी नदी का पुल शामिल है। साथ ही उन्होंने भूमिधरी और जाति प्रमाण पत्रों में लिखा जाने वाला पूर्व पाकिस्तानी विस्थापित शब्द को हटवाकर बंगाली समुदाय की वर्षों पुरानी मांगों को भी पूरा किए। अपने इन्हीं कार्यों की बदौलत जनता ने उन्हें सर आंखों पर बिठा लिया और सौरभ बहुगुणा को अपने भाई-बेटे के रूप में देखने लगे। लोगों के बीच जनप्रिय होने के चलते वह दोबारा 2022 का विधानसभा चुनाव जीते। अब वह धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मंत्री बनने के बाद विभागों के कामकाज को सम्भालने और अधिकारियों के साथ समन्वय बनाने के साथ ही उन्होंने अपने लोगों का साथ नहीं छोड़ा। वह समय-समय पर देहरादून से अपने विधानसभा क्षेत्र पहुंच जन समस्याओं को सुनते हैं और उसके निस्तारण का भरसक प्रयास भी करते हैं। भारी व्यस्तता के बावजूद वह लोगों के सुख-दुख में जरूर पहुंचते हैं। सितारगंज में महाविद्यालय नहीं था, छात्र- छात्राओं को शिक्षा ग्रहण करने के लिए खटीमा, हल्द्वानी एवं रूद्रपुर जाना पड़ता था अब यहां महाविद्यालय है। सीएचसी का उच्चीकरण हुआ उप जिला चिकित्सालय बना। मिनी स्टेडियम, जगह होने के चलते यहां का आईटीआई काॅलेज पड़ोसी विधानसभा नानकमत्ता में चलता था और पाॅलिटेक्निक काॅलेज सितारगंज के नाम से काशीपुर में चलता है, आज ये काॅलेज सितारगंज में चलते हैं, लाइब्रेरी है। अच्छी सड़कें हैं। अन्य विधानसभा के अपेक्षा सितारगंज में बेहतर विकास हुआ है।
नारायण सिंह रावत, वरिष्ठ पत्रकार, सितारगंज
सितारगंज विधानसभा 2026 – विधायक रिपोर्ट कार्ड
विधायक : सौरभ बहुगुणा (अवधि : 4 वर्ष)
क्र. क्षेत्र मुद्दा / जमीनी स्थिति अंक (10 में)
- जनसम्पर्क व उपलब्धता मंत्री होने के बावजूद क्षेत्र में सक्रिय, जनता के बीच सहज और सुलभ छवि 9/10
- सड़क व आधारभूत ढांचा अनेक सड़कों का निर्माण, 6-लेन हाईवे, पुल परियोजनाएं, कुछ गांव अब भी सड़क से वंचित 8/10
- स्वास्थ्य सेवाएं सीएचसी का उच्चीकरण, नए पद स्वीकृत, फिर भी विशेषज्ञ सुविधाओं और रेफरल की समस्या 7/10
- शिक्षा व कौशल विकास महाविद्यालय, आईटीआई, पाॅलीटेक्निक जैसी सुविधाएं बढ़ीं, शक्तिफार्म में डिग्री काॅलेज की मांग बाकी 7.5/10
- रोजगार व औद्योगिक विकास एक्वा पार्क, औद्योगिक गतिविधियां, चीनी मिल बंद होने से रोजगार संकट और बेरोजगारी की शिकायतें 6/10
- शहरी प्रबंधन व जलभराव सितारगंज शहर में जलभराव, अव्यवस्थित बाजार और वेंडिंग जोन की समस्या बरकरार 4.5/10
- सफाई व नगर पालिका व्यवस्था सफाई पर भारी खर्च के बावजूद कूड़ा, अंधेरी सड़कें और कर्मचारियों की कमी की शिकायतें 4/10
- ग्रामीण विकास व कृषि किसानों के लिए सड़क, पुल, सुरक्षा दीवारें, खाद-बीज और सरकारी कांटे की समस्या बनी हुई 7/10
- अधूरे वादे व स्थानीय मांगें बंगाली समाज को ओबीसी दर्जा, खेल स्टेडियम, भूमि नियमितीकरण जैसी मांगें अधूरी 5/10
- समग्र विकास प्रदर्शन अन्य विधानसभा क्षेत्रों की तुलना में विकास बेहतर लेकिन कुछ महत्वपूर्ण कमियां अब भी चुभती हैं 8/10
कुल अंक : 6.6/10 फाइनल ग्रेड : पास
‘सितारगंज को रेल से जोड़ना मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट’
उत्तराखण्ड सरकार में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा प्रदेश की राजनीति के युवा और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। वे अविभाजित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हेमवती नंदन बहुगुणा के पौत्र और उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पुत्र हैं। राजनीति विरासत में पाने के बावजूद उन्होंने एक जमीनी नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफलता हासिल की है। सौरभ बहुगुणा वर्तमान में पशुपालन, दुग्ध विकास, गन्ना, मत्स्य पालन और कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व सम्भाल रहे हैं। इन विभागों के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में कई पहल की हैं। सौरभ की सक्रिय कार्यशैली और जनसम्पर्क क्षमता ने उन्हें राज्य सरकार के प्रमुख चेहरों में शामिल कर दिया है। पिछले 9 सालों में सितारगंज विधानसभा क्षेत्र में क्या किया और क्या नहीं किया इस पर ‘दि संडे पोस्ट’ के रोविंग एसोसिएट एडिटर आकाश नागर ने उनसे बात की
सितारगंज विधानसभा क्षेत्र के विधायक के रूप में आप अपने 9 वर्षों के कार्यकाल का आकलन कैसे करते हैं?
बहुत सारे काम हुए हैं, कुछ पेंडिंग हैं। इन 9 सालों में 550 करोड़ की योजनाओं को हमने धरातल पर उतारा है। जो यहां पर सुविधाएं नहीं थी चाहे वह डिग्री काॅलेज की हो या पाॅलिटेक्निक काॅलेज हो या सरकारी अस्पताल में डाॅक्टर हो या सिरसा रोड हो, सुखी नदी पुल हो, निर्मलनगर- रामनगर के बीच में पुल हो या भूमिधरी की समस्या, इन सभी समस्याओं पर हमने काम किया है। शक्तिफार्म, सितारगंज क्षेत्र में एक बहुत पुरानी मांग थी, हमारे यहां पार्क और पार्किंग नहीं है। युवाओं को ओपन स्पेस नहीं मिलता है, बुजुर्गों को घूमने के लिए जगह नहीं थी उनके लिए 15 करोड़ रुपए से पार्क और पार्किंग की स्वीकृति कराई गई। जिस पर काम कम्पलीट होने की स्टेज पर है। सितारगंज नगर पालिका में पिछले 9 सालों से 16-17 करोड़ के काम हो गए हैं। गांव-गांव सड़कें बनी हैं। हमारे यहां डिग्री काॅलेज में कोर्सेस बढ़े हैं। कुल मिलाकर मुझे अपने कार्यालय से संतुष्टि है। मैं एक खिलाड़ी रहा हूं, अपनी नजरों से देखूं तो मैंने हर चीज में अपना एक गोल तय किया था जिसे लगभग-लगभग मैंने पूरा कर लिया है। अगर आप मुझसे ओवर आॅल पूछेंगे तो एक रेलवे का प्रोजेक्ट छोड़कर मेरा जो 2022 का घोषणा पत्र था उसकी 99 प्रतिशत योजनाओं को मैंने पूरा कर लिया है।
सितारगंज के शहरी क्षेत्र की बात करें तो वहां अतिक्रमण, जलभराव और जाम जैसी अव्यवस्थाएं व्याप्त हैं जबकि ये मुख्य क्षेत्र है इससे निजात पाने के लिए आपने कोई पहल की है? क्योंकि जिस नगर पालिका पर इसकी जिम्मेदारी थी उस पर अक्सर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं?
ऐसा नहीं है, नगर पालिका में यहां पहली बार भाजपा का अध्यक्ष बना है। चेयरमैन सुखदेव सिंह जी और पूरा बोर्ड भाजपा का है। उनके बनने के बाद लगातार अचीवमेंट हुआ है। अतिक्रमण हटाए गए। अगर आप मीना बाजार जाकर देखेंगे तो पाएंगे कि वह सितारगंज की सबसे सुंदर सड़क हो गई है जो कि सबसे कंजेस्टेड रोड मानी जाती थी। लगातार अतिक्रमण हटाने का भी काम किया गया है और जाम की समस्या से हमारे यहां के लेाग न जूझे उसके लिए लोगों को समझाया भी जा रहा है। पालिका द्वारा इस सम्बंध में अवेयरनेस कैम्प भी लगाए गए हैं। पुलिस तथा नगर पालिका के माध्यम से चालान भी किए गए हैं। पिछले एक साल में ही जब से नगर पालिका के चेयरमैन हमारी पार्टी के नेता बने हैं तब से 14-15 करोड़ के काम सड़क और नालियों के ही हुए हैं। लगातार नालियों की सफाई चल रही है ताकि बारिश के सीजन में जलभराव की समस्या न आए। मुझे उम्मीद है कि नगर पालिका में 5 साल के कार्यकाल में जो काम होंगे उसमें शहर की सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं में वो सुधार नहीं दिखाई देता जितना अपेक्षित था। सितारगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को उप जिला चिकित्सालय का दर्जा मिल गया, शक्तिफार्म पीएचसी को सीएचसी का दर्जा मिल गया लेकिन इनमें डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी कब तक दूर होगी?
2017 में मेरे विधायक बनने से पहले सितारगंज सरकारी अस्पताल सीएचसी था वहां सिर्फ दो डाॅक्टर हुआ करते थे, आज उसका उच्चीकरण हुआ है। प्राइवेट कम्पनी बालाजी के माध्यम से अगर आप उस अस्पताल की स्थिति देखेंगे तो उत्तराखण्ड का सबसे अच्छा और फैसिलिटी देने वाला अस्पताल होगा। आज वहां 14 से ज्यादा डॉक्टर कार्यरत हैं। जब स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल जी इस अस्पताल का सर्वे करने गए तो उन्होंने बयान दिया था कि उत्तराखण्ड का सबसे अच्छा अस्पताल अगर कहीं है तो वह यही है। हां, आपकी यह बात सही है कि कुछ स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की वहां कमी अभी बनी हुई है। आपको तो मालूम है पूरे उत्तराखण्ड में ये समस्या चल रही है। इस सम्बंध में सुबोध उनियाल जी से मेरी वार्ता हुई है। मुझे पूरी उम्मीद है कि इस बार ट्रांसफर-पोस्टिंग सीजन में जो नियुक्ति होगी उसमें सितारगंज के अस्पताल सहित शक्तिफार्म अस्पताल, बरा अस्पताल और तिलियापुर के अस्पताल को डॉक्टर दिए जाएंगे।
क्षेत्र की प्रमुख सड़कों और पुलों की वर्तमान स्थिति हालांकि पहले की अपेक्षा बेहतर नजर जरूर आती है लेकिन कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जो सड़को से वंचित हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। इसके लिए क्या योजना है?
जब मैं शासन को कोई प्रस्ताव भेजता हूं तो मैं पूरी कोशिश करता हूं कि हर क्षेत्र को उसका रिप्रजेंटेशन मिले। चाहे वह हमारे थारू समाज के लोग हों, चाहे बंगाली समाज के लोग हों, सिख समााज के लोग हों या मुस्लिम समाज के लोग या वह हमारे देशी समााज के लोग हों, मैं जो भी अपने प्रस्ताव भेजता हूं उन सभी प्रस्ताव में यही कोशिश करता हूं कि हर क्षेत्र के लोगों के लिए कोई न कोई काम जरूर हो। ओवर आॅल देखेंगे तो 550 करोड़ की योजनाओं को मैंने धरातल पर उतारा है। हर क्षेत्र में काम हुए हैं। हमारी कोशिश सर्व समाज को साथ लेकर पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना है।
प्राथमिक हों या माध्यमिक विद्यालय खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, शिक्षकों और आवश्यक संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। इनकी कमी को पूरा करने के लिए आप क्या कर रहे है?
आपने सही बोला हमारे यहां जो प्राथमिक विद्यालय हैं इनमें अध्यापकों की कमी है इसके लिए शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत जी लगातार कार्य कर रहे हैं। यह स्थिति सितारगंज की ही नहीं पूरे उत्तराखण्ड की है कि हमारे सरकारी विद्यालयों में कुछ न कुछ कमी जरूर है। यही कारण है कि लोगों का रुझान प्राइवेट स्कूलों की तरफ हो रहा है। हालांकि 3000 अध्यापकों के अप्वाइंटमेंट हो रहे हैं लेकिन जितने होने चाहिए उससे कम हैं।
शक्तिफार्म और आस-पास के क्षेत्र में जलभराव समस्या, इंटर कॉलेज और डिग्री काॅलेज न होना, फसलों की सरकारी खरीद के लिए कांटा न लग पाना, खाद का समय से न मिलना जैसी समस्याएं हैं इस पर आपकी क्या पहल है?
शक्तिफार्म में मुझे नहीं लगता कि वहां कोई ऐसी समस्या है जो वहां के किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। वहां हमने उपमंडी का गठन किया है। वहां पर मैं खुद गया था और कांटों की व्यवस्था देखकर आया हूं। चाहे वहां गन्ने का सीजन हो, धान का या गेहूं का हर बार वहां पर कांटे लगते हैं और किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल जाता है। जहां तक बाढ़ की बात है शक्तिफार्म के कुछ गांव ऐसे हैं जो बाढ़ से ग्रस्त रहते हैं। चाहे वह निर्मलनगर हो, राजनगर हो या रूद्रपुर नगर। ऐसे कुछ गांव हैं जो नदी किनारे हैं उनके लिए हमने 15 से 16 करोड़ की बांध की योजनाएं स्वीकृत कराई है। अगर आप जाकर देखेंगे जहां रिटेनिंग वाॅल का काम चल रहा है। कोशिश जारी है कि नदी के किनारे के गांवों की जमीन न कटे और उन्हें कोई नुकसान न हो।
भूमि और राजस्व के मामले लम्बे समय से लम्बित हैं, खासकर भूमि नियमितीकरण और मालिकाना हक के मामलों पर सरकार की क्या नीति है?
2013 में जब पिताजी मुख्यमंत्री बनकर आए थे तो वर्ग 4, वर्ग 8, वर्ग एक-क वर्ग एक-ख आदि की जमीनों को भूमिधरी कराने के लिए केंद्र में प्रस्ताव बनाकर भेजा गया, अभी भी लगातार प्रोसेस जारी है। सरकार ने बार-बार उस जिओ को एक्सटेन भी किया है। हमारे कल्याणपुर के लोग जो 60-70 साल पूर्व पिथौरागढ़ व अन्य जगह से विस्थापित किए गए थे, उनको भी हमने इस बार भूमिधरी से जोड़ने का काम किया है इसमें क्योंकि सारे पेपर वर्क करने होते हैं, जांच होती है, वेरिफिकेशन होता है, टीडीएस होता है जिससे बहुत सयम लगता है लेकिन लगातार हम भूमिधरी पर काम कर रहे हैं।
वन भूमि और राजस्व भूमि के विवादों का समाधान लम्बे समय से नहीं हो पाता जिससे आम आदमी तो परेशान रहता ही है इसका विकास योजनाओं पर भी असर पड़ता है, किस तरह समाधान निकालने की योजना है?
मेरी विधानसभा में 11 से 12 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जो वन भूमि से प्रभावित होती है। आपको मालूम है कि उत्तराखण्ड में अधिकतर जगह फाॅरेस्ट से कनवर्टेड है। यह रिजर्व फॉरेस्ट की श्रेणी में आता है जो केंद्र सरकार से संबंधित होता है। इसके लिए सरकार ने एक कमेटी भी बनाई है जो धरातल पर सर्वे भी कर रही है। जैसे ही उसकी रिपोर्ट आएगी उसकी रिपोर्ट को हम स्वीकृत करेंगे कि इनको रेवेन्यू में कन्वर्ट किया जाना चाहिए लेकिन वो सिर्फ उन गांवों को कर सकते हैं जिनमें हम ये साबित कर सकें कि फाॅरेस्ट का जो स्वरूप है वह खत्म हो चुका है। उनको फिर हम केंद्र सरकार के पास भेजेंगे क्योंकि मामला एनजीटी से भी जुड़ा है इसलिए इसे केंद्र सरकार से फिर सुप्रीम कोर्ट भेजा जाएगा और तब वहां से स्वीकृत किए जाएंगे।
आपके क्षेत्र में सिडकुल स्थापित है लेकिन बेरोजगारी दर कम होने का नाम नहीं ले रही है। अभी भी यहां स्थानीय बेरोजगारों के लिए 70 प्रतिशत का आरक्षण लागू नहीं हुआ है?
2017 में जब मैं पहली बार विधायक बना तो इस मुद्दे पर अपनी ही सरकार के खिलाफ विधानसभा में सवाल किया था कि स्थानीय बेरोजगारों को 70 प्रतिशत आरक्षण उद्योग-धंधों में क्यों नहीं दिया गया? तब मुझे बताया गया कि स्किल्ड और नाॅन स्किल्ड मिलकर 70 प्रतिशत हो जाते हैं। मैं आपको डाटा उपलब्ध करा दूंगा कि सितारगंज की कोई भी कम्पनी ऐसी नहीं है जो 70 प्रतिशत के बेंचमार्क को पूरा न करती हो।
2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की रणनीति क्या है?
देखिए, भाजपा की स्थिति यह है कि हम केवल विधानसभा चुनाव में ही सक्रिय नहीं रहते हैं बल्कि पांचों साल जनता के बीच रहते हैं। विकास कार्य को धरातल पर उतरती हैं। जनता क्या चाहती है उस पर हम काम करते हैं। इसका बहुत ही सटीक उदाहरण आपको बिहार और बंगाल चुनाव में देखने को मिला है। किस तरह जनता ने भाजपा पर विश्वास करते हुए दो तिहाई बहुमत के साथ वहां सरकार बनाई है जहां पर किसी को उम्मीद नहीं थी कि भारतीय जनता पार्टी कभी यहां पावर में आएगी। उत्तराखण्ड में धामी जी के नेतृत्व में सरकार ने लगातार जनता के हित में काम किया है। प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों के विकास योजनाएं पहुंचाने का काम किया है। चाहे वह टूरिज्म हो, चाहे बागवानी या एग्रीकल्चर के माध्यम से हो, रोड कनेक्टिविटी के माध्यम से हो सभी में जनता यह जानती है कि अगर उत्तराखण्ड का विकास होना है तो भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में ही, जो सरकार बनेगी वही कर पाएगी।
विपक्ष सरकार पर विकास कार्यों की अनदेखी का आरोप लगाता है, आप क्या जवाब देंगे?
आज के हालातों को देखें तो उत्तराखण्ड में विपक्ष कहीं दिखता ही नहीं है। जिस तरह से विपक्ष आपस में बंटा हुआ है वह पूरा प्रदेश देख रहा है। एक मंच पर सारा विपक्ष कहीं नहीं दिख रहा है। एक-दूसरे के ऊपर कटाक्ष किए जा रहे हैं। वहां जो सबसे सीनियर नेता हरीश रावत हैं वे कहते हैं कि मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा, मेरी पूछ नहीं हो रही। विपक्ष पहले अपनी ही लड़ाइयां निपटा ले। विपक्ष को हमारी सरकार का विकास इसलिए नहीं दिख रहा है कि विपक्ष कभी विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा ही नहीं है, उन्होंने सिर्फ समुदाय को बांटने की बात की है। इसलिए ही उत्तराखण्ड में पहली बार दो तिहाई बहुमत से अधिक बहुमत मिला और मिथक तोड़ते हुए हमारी सरकार बनी। उत्तराखण्ड की जनता बखूबी समझ चुकी है कि मोदी जी के सपनों का उत्तराखण्ड बनाना है तो भारतीय जनता पार्टी के साथ चलना होगा।
सितारगंज विधानसभा के विकास के लिए आपके पास भविष्य की क्या योजनाएं हैं?
बहुत सारे काम हुए हैं, अब सिर्फ एक ही महत्वपूर्ण कार्य बाकी हैं, जिसके लिए मैं प्रयासरत हूं। मुझे उम्मीद है कि वो काम भी पूरा हो जाएगा वह मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट है सितारगंज को रेलवे लाइन से कनेक्ट करना। उसके लिए मैं लगातार केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री से मिल रहा हूं। एक वही काम है जो मुझे खटक रहा है कि वादा करके भी हो नहीं पाया। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही मैं इस परियोजना को शुरू करा सकूंगा।