कर्नाटक चुनाव से पहले ही विपक्षी एकता एक बार फिर बिखरते दिख रही है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने अब कर्नाटक में अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार पार्टी राज्य में 40 से 45 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। हालांकि सीटों की संख्या क्या होगी यह अभी तक औपचारिक तौर पर घोषित नहीं किया गया है। कर्नाटक चुनाव में एनसीपी की एंट्री से मुकाबला और रोमांचक हो गया है। अभी तक कर्नाटक चुनाव में मुख्य तौर पर लड़ाई बीजेपी-कांग्रेस- जेडीएस के बीच मानी जा रही थी। लेकिन अब समीकरण बदल सकते हैं। कर्नाटक चुनाव में अपने पार्टी के उम्मीदवार उतारने को लेकर एनसीपी का कहना है कि यह फैसला हाल ही में पार्टी से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छीने जाने के बाद लिया गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय दल का दर्जा पाने के लिए हमें ऐसे फैसले करने पड़ेंगे। माना जा रहा है कि एनसीपी को उम्मीद है कि वह महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा क्षेत्र में महाराष्ट्र एकीकरण समिति के साथ गठजोड़ करेगी, जो एक बड़ी मराठी आबादी का गढ़ है। एनसीपी के इस फैसले को विपक्षी एकता के लिए झटके की तरह देखा जा रहा है। खास बात यह है कि एनसीपी के इस एलान से शरद पवार की विपक्षी एकता को और मजबूत करने की अपील के बाद हुआ है। गौरतलब है कि हाल ही में शरद पवार, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने चर्चा में विपक्ष के दलों को एक मंच पर लाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया था। पवार ने तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसे दलों को साथ लेने पर भी जोर दिया। यह बैठक खड़गे के आवास में हुई थी।
विपक्षी एकता को झटका

