भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को पार्टी का चाणक्य यूं ही नहीं कहा जाता है। हर बड़े नेता की काट के लिए शाह नए नेताओं को प्रमोट करने में माहिर हैं। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के साथ दो-दो उपमुख्यमंत्री बनाया जाना शाह की इस नीति के चलते ही हुआ था। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बसपा के वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की भाजपा में इन्ट्री भी इसी रणनीति का हिस्सा रही थी। मौर्य के भाजपा में शामिल होने से तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य की बढ़ती महत्वांकाक्षा पर शाह ने पानी फेर डाला था। पिछले दिनों गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कुंवर जी बावलिया ने पार्टी छोड़ भाजपा को ज्वाइन कर सभी को अचंभित कर डाला। अब बात खुली है कि इस  कोली जाति के नेता की भाजपा में इंट्री के पीछे भाजपा अध्यक्ष की अहम भूमिका रही है। बावलिया को तत्काल ही राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री बना दिया गया है। उनके भाजपा में आने से कोली समाज के दूसरे नेता पुरुषोत्तम सोलंकी का पार्टी में कद छोटा हुआ है। सोलंकी भाजपा के पुराने नेता हैं। पिछले लंबे अर्से से वे पार्टी नेतृत्व पर दबाव बना रहे हैं कि उन्हें राज्यमंत्री पद से प्रोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाया जाए। वे इतने नाराज हैं कि उन्होंने अपने कार्यालय जाना तक बेहद कम कर दिया है। लेकिन अब बावलिया को पार्टी में ला और कैबिनेट मंत्री बना शाह ने सोलंकी के दबाव का जवाब दे डाला है।

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