उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर क्षेत्र में स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण अब देश को समर्पित हो चुका है। 29 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री द्वारा इसके उद्घाटन के साथ ही उत्तर भारत के एविएशन मानचित्र में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो गई है। यह परियोजना भारत के बुनियादी ढांचे के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है और आने वाले समय में क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिलेंगे।
लम्बे समय से प्रतीक्षित इस एयरपोर्ट का निर्माण उत्तर भारत में बढ़ती हवाई यातायात की मांग को पूरा करने और दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से किया गया है। इसके संचालन से न केवल यात्रियों को एक वैकल्पिक और आधुनिक हवाई सुविधा मिलेगी बल्कि दिल्ली-एनसीआर के समग्र परिवहन ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।
पहले चरण के तहत एयरपोर्ट की क्षमता लगभग 1.2 करोड़ (12 मिलियन) यात्रियों को प्रतिवर्ष सम्भालने की है। उद्घाटन के बाद शुरुआती दौर में सीमित संचालन और ट्रायल फ्लाइट्स के जरिए व्यवस्थाओं को परखा जाएगा जबकि नियमित वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत 2024 के अंत से 2025 की शुरुआत के बीच प्रस्तावित की गई थी जो अब 29 मार्च 2026 को उद्घाटन के बाद जल्द ही पूर्ण रूप से प्रारम्भ होने की दिशा में है। प्रारम्भिक चरण में ही हजारों यात्रियों के प्रतिदिन यहां से उड़ान भरने का अनुमान है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दीर्घकालिक और बहु-चरणीय विकास योजना है। इसे चार चरणों में विकसित किया जाना है और पूर्ण रूप से तैयार होने के बाद इसकी क्षमता लगभग 7 करोड़ (70 मिलियन) यात्रियों प्रतिवर्ष तक पहुंचने की सम्भावना है। साथ ही यहां छह रनवे विकसित करने की योजना है जो इसे एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल कर सकती है। यह एयरपोर्ट भविष्य में बीजिंग और दुबई जैसे वैश्विक विमानन केंद्रों के समकक्ष खड़ा होने की क्षमता रखता है।
इस एयरपोर्ट को अत्याधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। इसे भारत का पहला ‘नेट-जीरो एमिशन’ एयरपोर्ट बनाने का लक्ष्य रखा गया है जिसमें सौर ऊर्जा, ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी और जल संरक्षण प्रणालियों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। यात्रियों के लिए डिजिटल चेक-इन, बायोमेट्रिक बोर्डिंग और तेज सुरक्षा प्रक्रियाएं इसे एक विश्वस्तरीय अनुभव प्रदान करेंगी। जहां एक ओर यह परियोजना एविएशन सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है वहीं दूसरी तरफ जेवर और आस-पास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आर्थिक विकास को भी गति दे रही है। एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों में रियल एस्टेट सेक्टर में अभूतपूर्व उछाल देखने को मिल रहा है। जमीन की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है और निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है।
एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक कॉरिडोर, वेयरहाउसिंग हब, लॉजिस्टिक्स पार्क और डेटा सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी इस क्षेत्र को एक संगठित औद्योगिक और शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। इसके अलावा, प्रस्तावित फिल्म सिटी, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स इस क्षेत्र को बहुआयामी आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।
स्थानीय स्तर पर इस परियोजना का व्यापक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव भी देखने को मिल रहा है। निर्माण कार्य के दौरान ही हजारों लोगों को रोजगार मिला है जबकि संचालन शुरू होने के बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार सृजित होने की सम्भावना है। होटल, परिवहन, रिटेल और सेवा क्षेत्र में भी तेजी से विस्तार हो रहा है।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, जेवर, दनकौर और आस-पास के क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों में कई गुना वृद्धि हुई है। जो क्षेत्र कभी ग्रामीण स्वरूप में था, वह अब तेजी से शहरी और व्यावसायिक केंद्र में परिवर्तित हो रहा है। निवेश के लिहाज से यह क्षेत्र अब देश के प्रमुख ‘हाॅटस्पाॅट्स’ में शामिल हो चुका है। कनेक्टिविटी के स्तर पर भी यह एयरपोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा। इसे दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, आगरा और अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ने के लिए एक्सप्रेसवे, मेट्रो और हाई-स्पीड रेल परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल काॅरिडोर और डेडिकेटेड फ्रेट काॅरिडोर से जुड़ाव इसे एक प्रमुख लाॅजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करेगा।
हालांकि इस परियोजना के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी रही हैं, जैसे भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय निवासियों का पुनर्वास लेकिन सरकार और सम्बंधित एजेंसियां इन मुद्दों के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत हैं ताकि विकास और संतुलन दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सके।