बाॅलीवुड और दक्षिण भारतीय सिनेमा में हीरो-हीरोइन के बीच उम्र का बढ़ता अंतर अब केवल सौंदर्य या ग्लैमर का मुद्दा नहीं रहा। यह लैंगिक समानता, करियर अवसर और सामाजिक सोच में बदलाव का मुद्दा बन उभर रहा है। फिल्म अभिनेत्री काजोल के शब्दों में ‘‘हम बूढ़े नहीं, सिनेमा की सोच बूढ़ी है।’’ फिल्म विशेषज्ञों की राय में अब वक्त आ गया है कि बाॅलीवुड और दक्षिण इंडस्ट्री अपनी सोच को बदले
बाॅलीवुड और दक्षिण सिनेमा में हीरो और हीरोइन के बीच उम्र का फासला सिर्फ एक फिल्मी ट्रेंड नहीं, बल्कि जेंडर असमानता की झलक भी देता है। जहां अभिनेता उम्र के साथ और निखरते हैं, वहीं अभिनेत्रियों के लिए अवसर सिमटते जाते हैं। यह ट्रेंड न तो नया है और न ही धीमा पड़ता दिख रहा है। दशकों से चली आ रही परम्परा आज भी बड़े बैनर्स और सुपरस्टार्स की फिल्मों में आम बात बन चुकी है। लेकिन बदलते सामाजिक विमर्श और डिजिटल युग की सजगता ने अब इस ‘एज गैप फाॅर्मूले’ को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

अभी हाल ही में रिलीज हुई कमल हासन की फिल्म ‘ठग लाइफ’ में कमल हासन द्वारा अपनी उम्र से आधी उम्र की हीरोइन के साथ किसिंग सीन करने पर जारी बहस अभी शांत भी नहीं हुई थी कि एक साक्षात्कार में काजोल ने बाॅलीवुड की इस पितृसत्तात्मक सोच पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा की ‘‘40 की उम्र पार करते ही हमें मां, बहन या दीदी के रोल मिलते हैं, जबकि हमारे हीरो 55 में भी काॅलेज ब्वाॅय बनकर रोमांस कर रहे होते हैं।’’ काजोल के इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिला है। लोगों ने रेखा, श्रीदेवी, तब्बू, रानी मुखर्जी और विद्या बालन जैसे सितारों के उदाहरणों को साझा करते हुए बताया कि किस तरह इंडस्ट्री में उम्र बढ़ते ही महिलाओं को हाशिए में डाल दिया जाता है।
दशकों पुरानी परम्परा
वर्ष 1950 और 60 के दशक में दिलीप कुमार, राज कपूर, देव आनंद जैसे दिग्गज अभिनेताओं ने अपने करियर के अंतिम पड़ाव तक खुद से कहीं छोटी अभिनेत्रियों के साथ रोमांस किया, वहीं 80 से 90 के दशक में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, सलमान खान, अक्षय कुमार और आमिर खान जैसे सितारे भी कम उम्र की अभिनेत्रियों के साथ स्क्रीन शेयर करते रहे। आज जब ये सितारे अपनी उम्र के 50वें या 60वें दशक में हैं, तब भी उनके सामने कास्ट की जाने वाली अभिनेत्रियां अक्सर 25 से 30 साल की होती हैं। उदाहरण के तौर पर अक्षय कुमार ने ‘हाउसफुल’ में कीर्ति सेनन के साथ रोमांस किया जबकि खुद उनसे उम्र में 23 साल बड़े हैं। सलमान खान और पूजा हेगड़े की जोड़ी ‘किसी का भाई, किसी की जान’ में सामने आई जबकि उनके बीच 24 साल का अंतर है। वहीं शाहरुख खान की ‘जवान’ में नयनतारा उनसे 13 साल छोटी हैं। कुछ सप्ताह पहले रिलीज हुई फिल्म ‘ठग लाइफ’ में जब 69 वर्षीय कमल हासन को 24 वर्षीय अभिनेत्री तृषा कृष्णन के साथ रोमांटिक सीन में दिखाया गया तो विवाद खड़ा हो गया था। दर्शक कमल हासन पर भद्दे कमेंट कर रहे हैं, उनकी फिल्म का बहिष्कार हो रहा है। कमल हासन और तृषा कृष्णन के किसिंग सीन ने एज गैप की बहस को बड़ा दिया है।

महिला कलाकारों के लिए ही उम्र की सीमा क्यों?
समस्या सिर्फ इतनी नहीं कि हीरो-हीरोइन के बीच उम्र का अंतर है, बल्कि यह भी है कि उम्र बढ़ने पर अभिनेत्रियों को लीड रोल मिलना कठिन हो जाता है, जबकि अभिनेता 50 की उम्र पार करने के बाद भी हीरो बने रहते हैं। दरअसल, अभिनेत्रियों के लिए फिल्मी कहानियों में उम्र के अनुसार किरदारों की गुंजाइश कम है। अधिकतर स्क्रिप्ट युवा प्रेम कहानियों पर केंद्रित होती हैं, जहां ‘युवा चेहरों’ की मांग रहती है। परिणामस्वरूप, उम्रदराज अभिनेत्रियों के लिए न तो रोमांटिक रोल मिलते हैं और न ही लीड रोल का किरदार मिलता है। एक वजह यह भी है कि अभिनय कौशल की बजाय ‘लुक्स’ को प्राथमिकता दी जाती है। जबकि ऐसी कई वरिष्ठ अभिनेत्रियां हैं जो अनुभव और अभिनय में नई पीढ़ी को पीछे छोड़ सकती हैं। उदहारण के लिए विद्या बालन, तब्बू, करीना कपूर, काजोल और रानी मुखर्जी जैसी प्रतिभावान अभिनेत्रियां हैं जो इन उम्रदराज अभिनेताओं के साथ रोमांस कर सकती है लेकिन ऐसा होता नहीं है, बल्कि उम्र बढ़ने के बाद उन्हें ‘मां’ या ‘साइड कैरेक्टर’ की भूमिका ऑफर की जाती है। हालांकि अब इस एज गैप पर बहस होने लगी है कई कलाकार अब इस चलन को चुनौती दे रहे हैं। पहले स्वरा भास्कर, ऋचा चड्ढा और तापसी पन्नू जैसी अभिनेत्रियों ने इस ‘एज गैप’ पर खुलकर बात की थी। अब काजोल ने भी इस एज गैप के भेदभाव को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने एक न्यूज वेबसाइट से बातचीत में कहा, ‘मुझे लगता है कि इस तरह का भेदभाव लम्बे समय से स्वीकार्य है। उदाहरण के लिए रजनी सर या किसी भी नायक को लें, एक भी अभिनेता ऐसा नहीं है जिसने अपने से 30 साल छोटी नायिकाओं के साथ काम नहीं किया है, भले ही वे 50 या उससे अधिक उम्र के हों। यह सब इतने लम्बे समय से हो रहा है कि किसी ने वास्तव में इस पर सवाल नहीं उठाया है। किसी ने नहीं पूछा कि ऐसा क्यों हो रहा है? हम क्या संदेश भेज रहे हैं? उन्होंने कहा कि ‘‘फिल्म निर्माण एक व्यवसाय है और फिल्म निर्माता वही बनाते हैं जो उन्हें लगता है कि बिकेगा। लेकिन वो भूल गए हैं हम बूढ़े नहीं, सिनेमा की सोच बूढ़ी है।’’ फिल्म इंडस्ट्री को आत्ममंथन की जरूरत है। अब वक्त आ गया है कि पर्दे पर रोमांस के साथ बराबरी भी दिखाई जाए।
क्या कहता है दर्शक वर्ग?
नए दौर का दर्शक इन असमान जोड़ियों पर सवाल उठा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफाम्र्स पर जब किसी फिल्म का ट्रेलर आता है जिसमें हीरो की उम्र हीरोइन से काफी ज्यादा होती है तो दर्शक भड़क जाते हैं। वो फिल्म के पात्रों की विश्वसनीयता पर जोर देते हैं। 60 का अभिनेता काॅलेज गर्ल का प्रेमी बनता है तो कहानी से विश्वसनीयता टूट जाती है। अभी हाल ही में सलमान खान की फिल्म ‘सिकंदर’ रिलीज हुई थी इसमें वो अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के साथ रोमांस करते हुए नजर आए थे। दर्शकों ने सलमान खान को खूब खरी-खोटी सुनाई। क्योंकि रश्मिका मंदाना और सलमान खान के बीच 31 साल का गैप है। इससे पहले रणबीर कपूर फिल्म ‘एनिमल’ में तृप्ति डिमरी के साथ इंटीमेट सीन को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रोल हो चुके हैं। क्योंकि दोनों के बीच उम्र का अंतर करीब 11 साल है। दर्शकों का मानना है जब 50-60 की उम्र के अभिनेता युवा हीरोइनों संग रोमांस कर सकते हैं तो 40 पार की अभिनेत्रियों को क्यों मां, बहन या साइड किरदारों तक सीमित कर दिया जाता है? एक्टिंग की दुनिया में दोहरे मापदंड हैं। जहां पुरुषों की उम्र को ‘अनुभव’ माना जाता है, वहीं महिलाओं की उम्र को ‘सीमा’ बना दिया जाता है।

इंडस्ट्री क्या कहती है?
फिल्म निर्माताओं का तर्क है कि ‘स्टार पावर’ की मांग में अक्सर सुपरस्टार को लेना अनिवार्य होता है और उनके सामने नई या उभरती अभिनेत्री को ही कास्ट करना आर्थिक दृष्टि से लाभदायक होता है, वहीं कुछ निर्माता यह भी मानते हैं कि दर्शकों का एक बड़ा वर्ग अब भी रोमांटिक जोड़ी को उनके वास्तविक उम्र के आधार पर नहीं, बल्कि ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री के आधार पर आंकता है।
फिल्म समीक्षकों की राय
फिल्म समीक्षक अनुपमा चोपड़ा कहती हैं, ‘‘समस्या सिर्फ उम्र की नहीं, बल्कि यह है कि इंडस्ट्री महिलाओं को उनकी उम्र के साथ स्वीकार नहीं करती। अगर नायिका 40 की हो जाए तो वह ‘मां’ बन जाती हंै, जबकि 55 साल का हीरो अब भी ‘रोमांटिक लीड’ बना रहता है।’’
राजीव मसंद लिखते हैं, ‘‘दर्शकों की सोच बदल रही है और अब ऐसी कास्टिंग को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। नई पीढ़ी वास्तविकता और समानता की मांग करती है।’’
बाॅलीवुड और दक्षिण भारतीय सिनेमा में हीरो-हीरोइन के बीच उम्र का बढ़ता अंतर अब केवल सौंदर्य या ग्लैमर का मुद्दा नहीं रहा। यह लैंगिक समानता, करियर, अवसर और सामाजिक सोच में बदलाव का मुद्दा बन उभर रहा है। काजोल के बोल, कमल हासन के दृश्य और दर्शकों की प्रतिक्रियाएं मिलकर एक बड़ी मांग कर रहे हैं कि अब पर्दे पर उम्र की समानता और सम्मान दोनों दिखना चाहिए।

