हरिद्वार में 5000 रुपए से अधिक बकाया बिजली बिल वाले उपभोक्ताओं पर सख्त कार्रवाई करते हुए कनेक्शन काटे जा रहे हैं लेकिन बड़े बकायेदार सरकारी विभागों और व्यावसायिक संस्थानों पर अपेक्षित कठोरता न दिखने से जनता में असंतोष बढ़ रहा है
विद्युत वितरण खंड नगरीय हरिद्वार में इन दिनों बकाया बिजली बिलों की वसूली को लेकर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत उन उपभोक्ताओं पर विशेष कार्रवाई की जा रही है, जिन पर 5000 रुपए या उससे अधिक का बकाया है। विभागीय टीमें घर-घर जाकर नोटिस दे रही हैं और निर्धारित समय सीमा में भुगतान न होने पर विद्युत कनेक्शन काटने की कार्रवाई भी की जा रही है।
इस सख्त अभियान के चलते शहर में जहां एक ओर सक्रियता दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता में असंतोष भी बढ़ता नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि छोटे उपभोक्ताओं पर तो तत्काल कार्रवाई की जा रही है लेकिन लाखों-करोड़ों रुपए के बकायेदार सरकारी विभागों, संस्थानों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर समान कठोरता क्यों नहीं दिखाई जा रही।
हरिद्वार जैसे तीर्थनगरी में बिजली केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन और व्यवसाय की आधारभूत आवश्यकता है। घरों से लेकर होटल, धर्मशालाएं, अस्पताल और दुकानों तक सभी का संचालन बिजली पर निर्भर है। ऐसे में जब किसी गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार का कनेक्शन काटा जाता है तो उसका सीधा असर उनके दैनिक जीवन पर पड़ता है, बच्चों की पढ़ाई, पानी की आपूर्ति, मोबाइल चार्जिंग और अन्य जरूरी काम प्रभावित हो जाते हैं।
विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि नियमित राजस्व के बिना बिजली व्यवस्था को सुचारू रखना सम्भव नहीं है। यदि उपभोक्ता समय पर बिल जमा नहीं करते तो ट्रांसफाॅर्मर बदलने, लाइन सुधार और नई विद्युत लाइनों के विस्तार जैसे कार्य प्रभावित होते हैं। हालांकि यह तर्क तब कमजोर पड़ जाता है जब कार्रवाई केवल छोटे उपभोक्ताओं तक सीमित दिखाई देती है। शहर के कई क्षेत्रों में यह देखा गया है कि मजदूरों, रिक्शा चालकों, छोटे दुकानदारों और किराएदारों के कनेक्शन कुछ हजार रुपए के बकाया पर काट दिए जाते हैं जबकि कई सरकारी विभागों, नगर निकायों, जल संस्थान और बड़े उद्योगों पर लम्बे समय से भारी बकाया चल रहा है। इन मामलों में अक्सर कार्रवाई केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह जाती है।
विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि नियमित राजस्व के बिना बिजली व्यवस्था को सुचारू रखना सम्भव नहीं है। यदि उपभोक्ता समय पर बिल जमा नहीं करते तो ट्रांसफाॅर्मर बदलने, लाइन सुधार और नई विद्युत लाइनों के विस्तार जैसे कार्य प्रभावित होते हैं। हालांकि यह तर्क तब कमजोर पड़ जाता है जब कार्रवाई केवल छोटे उपभोक्ताओं तक सीमित दिखाई देती है। शहर के कई क्षेत्रों में यह देखा गया है कि मजदूरों, रिक्शा चालकों, छोटे दुकानदारों और किराएदारों के कनेक्शन कुछ हजार रुपए के बकाया पर काट दिए जाते हैं जबकि कई सरकारी विभागों, नगर निकायों, जल संस्थान और बड़े उद्योगों पर लम्बे समय से भारी बकाया चल रहा है। इन मामलों में अक्सर कार्रवाई केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह जाती है।
विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि बड़े संस्थानों पर कार्रवाई करना प्रशासनिक रूप से जटिल होता है जिसमें उच्च स्तर की अनुमति और कई बार राजनीतिक दबाव भी शामिल होता है। इसके विपरीत, छोटे उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटना आसान और त्वरित प्रक्रिया है। हालांकि जनता इस तर्क से संतुष्ट नहीं है। उनका मानना है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। यदि गरीब उपभोक्ताओं पर सख्ती की जाती है तो बड़े बकायेदारों के खिलाफ भी वैसी ही कार्रवाई होनी चाहिए।
इसके अलावा कई उपभोक्ताओं ने बिजली बिलों में गड़बड़ी, गलत रीडिंग और अचानक बढ़े बिलों की शिकायत भी की है। उनका कहना है कि शिकायतों के समाधान से पहले ही कनेक्शन काट दिए जाते हैं जिससे विवाद और बढ़ते हैं। ऐसे में वसूली अभियान के साथ शिकायत निवारण और किस्तों में भुगतान की सुविधा भी जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या के समाधान के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। यदि विभाग सार्वजनिक रूप से बड़े बकायेदारों की सूची और उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई को साझा करे तो जनता का विश्वास बढ़ेगा। इसके साथ ही सरकारी विभागों के बकाया को समायोजित करने के लिए बजट से सीधी कटौती जैसे उपाय भी अपनाए जा सकते हैं। कई राज्यों में इस तरह की व्यवस्था से सकारात्मक परिणाम मिले हैं। अंततः बिजली बिल वसूली अभियान आवश्यक है लेकिन इसकी सफलता केवल वसूली तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यह जनता के विश्वास और व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी निर्भर करता है। हरिद्वार जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन केंद्र में यह और भी जरूरी हो जाता है कि प्रशासन वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ सामाजिक न्याय का संतुलन बनाए रखे।
जनता की मांग स्पष्ट है कि यदि 5000 रुपया बकाया होने पर एक आम नागरिक का कनेक्शन काटा जा सकता है तो लाखों-करोड़ों रुपए बकाया रखने वाले किसी भी विभाग या प्रतिष्ठान को भी उसी नियम के तहत कार्रवाई का सामना करना चाहिए। यही समानता किसी भी व्यवस्था को मजबूत और विश्वसनीय बनाती है।
इन संस्थाओं पर है विद्युत विभाग का बकाया
नगर निगम पथ प्रकाश 23 करोड़ 40 लाख 39
नगर निगम 20 लाख 39000
लोक निर्माण विभाग 5 लाख 91 हजार
स्वास्थ्य विभाग 83 लाख 80000
पुलिस विभाग 64 लाख 88000
हरिद्वार विकास प्राधिकरण 877000
शिक्षा विभाग 21 लाख 70000
मेला अधिकारी 34 लाख 90000
इसके अलावा 400 उपभोक्ताओं पर 100000 से भी अधिक का बकाया है। कुल मिलाकर सरकारी विभागों पर लगभग 75 करोड रुपए बकाया है। साथ ही सामान्य उपभोक्ताओं पर लगभग 20 करोड़ रुपए से अधिक बकाया है।
नगर निगम 20 लाख 39000
लोक निर्माण विभाग 5 लाख 91 हजार
स्वास्थ्य विभाग 83 लाख 80000
पुलिस विभाग 64 लाख 88000
हरिद्वार विकास प्राधिकरण 877000
शिक्षा विभाग 21 लाख 70000
मेला अधिकारी 34 लाख 90000
इसके अलावा 400 उपभोक्ताओं पर 100000 से भी अधिक का बकाया है। कुल मिलाकर सरकारी विभागों पर लगभग 75 करोड रुपए बकाया है। साथ ही सामान्य उपभोक्ताओं पर लगभग 20 करोड़ रुपए से अधिक बकाया है।
बात अपनी-अपनी
जिनके बिल 1 लाख से ज्यादा हैं, उनके कनेक्शन नहीं कट रहे हैं लेकिन जिनका 5000 से 10000 के बीच बिजली बिल बकाया है उन्हें परेशान किया जा रहा है। सरकार की मिलीभगत है इन्हें पहले लाखों रुपए के बकायेदारों के कनेक्शन काटने चाहिए, उसके बाद छोटे लोगों पर कार्यवाही होनी चाहिए।
अशोक शर्मा, पूर्व सभासद एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता
छोटे बकायदारों को परेशान ना किया जाए बल्कि जिन पर बड़ी देनदारी है उनसे बिजली के बिल वसूले जाएं।
ओमप्रकाश जामदानी, दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री
ओमप्रकाश जामदानी, दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री
सभी बड़े बकायेदारों और विभाग से बात चल रही है। सभी ने भुगतान देने का आश्वासन दिया है, जल्दी ही भुगतान न हुआ तो सप्लाई काट दी जाएगी।
दीपक सैनी, अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खण्ड नगरीय, हरिद्वार
दीपक सैनी, अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खण्ड नगरीय, हरिद्वार