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क्या बैंकों के विलय से अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ़्तार !

केंद्रीय सरकार  ने शक्रवार को कई बैंकों के आपस में विलय का बड़ा फैसला लिया है।  इस बड़े फैसले से बैंक और एनबीएफसी के 4 टाइअप हुए हैं जिससे अब देश में सरकारी बैंकों की संख्या घटकर 12 रह जाएगी। जिसमें वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यूनाइटेड बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और पंजाब नेशनल बैंक का विलय होगा। दूसरी तरफ, केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक का भी आपस में विलय किया जाएगा। इसी तरह यूनियन बैंक, आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का भी विलय किय़ा जाएगा। इंडिय़न बैंक और इलाहाबाद बैंक का भी आपस में विलय होगा।

सरकार का कहना है कि बैंकों के विलय से फंसा कर्ज घटेगा और ताकत बढ़ेगी। केंद्र का इरादा ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धी बैंको को सामने लाने का है ताकि विकास दर तेज की जा सके। इससे बैंकों की बैलेंसशीट सुधरेगी और कर्ज देने की क्षमता भी बढ़ेगी।

आइए जानते है बैंकों के विलय के फायदे और नुकसान :

फायदे :-
  1. मजबूती मिलने से बैंक सस्ता और ज्यादा कर्ज बांट सकेंगे।
  2. बैंकों के परिचालन की लागत घटेगी।
  3. बैंकों की नए राज्यों और क्षेत्रों में पहुंच बढ़ेगी।
  4. नई तकनीक-विशेषज्ञता आ सकेगी।
  5. बैंक कर्मियों के वेतन में असमानता दूर होगी।

नुकसान :-

  1. बैंकों के विकेंद्रीकरण से क्षेत्रीय लाभ खत्म होंगे।
  2. बड़े बैंकों में आर्थिक संकट के वक्त ज्यादा जोखिम होगा।
  3. फंसे कर्ज में मॉनिटरी बिना विलय का लाभ नहीं।
  4. बैंक कर्मचारियों को तकनीकी स्तर पर चुनौती बढ़ेगी।

इस विषय के बारे में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने एक सम्हारोह में भी कहा था कि, ‘‘जहां तक बैंकिंग क्षेत्र की बात है, भारत को गिने-चुने बड़े बैंकों की जरूरत है जो हर मायने में मजबूत हों।”

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