रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने 19 मई को ‘क्लीन नोट पॉलिसी’ के तहत एक अहम फैसला लेते हुए 2 हजार रुपये के नोट वापस लेने का फैसला लिया था। जिसके अनुसार ग्राहकों को 30 नवंबर तक 2 हजार के नोट बैंक में जमा करने थे। जिसके बाद से अब तक इन नोटों की सर्कुलेशन का अधिकतर हिस्सा बैंकों में जमा हो चुका है। रिजर्व बैंक के अनुसार प्रचलन के 97 फीसदी से ज्यादा 2 हजार रुपये के नोट बैंक में वापस आ चुके हैं।
सेंट्रल बैंक ने भी बताया है कि 19 मई 2023 को 2 हजार रुपये के जितने नोट प्रचलन में थे, उनमें से 97.26 फीसदी नोट बैंक में वापस आ चुके हैं। इसके साथ ही सेंट्रल बैंक ने यह भी बताया कि 2 हजार रुपये के नोट अभी लीगल टेंडर बने हुए हैं और आगे भी लीगल टेंडर बने रहेंगे। गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ‘क्लीन नोट पॉलिसी’ के अनुसार 2 हजार रुपये के नोट वापस लेने का फैसला लिया है। जिसका अर्थ था की अब 2 हजार के नोट चलन में नहीं रहेंगे । भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को सलाह दे दी गयी कि वे तत्काल प्रभाव से 2 हजार रुपये के नोट ग्राहकों को देना बंद कर दें। हालांकि ये नोट तब तक वैध रहेंगे जब तक आरबीआई ये नहीं कह देता कि इस तारीख के बाद ये अवैध हो जाएंगे। आदेश में कहा गया था कि 2 हजार के नोटों को बैंक में जमा करने और उन्हें बदलवाने की प्रक्रिया 23 मई से शुरू होगी जो 30 सितम्बर 2023 तक चलेगी।
२ हजार की नोट को चलन से क्यों हटाया गया
2 हजार के नोटों को चलन से हटाने के पीछे सबसे बड़ा कारण आरबीआई ने यह बताया था कि जिस उद्देश्य से 2 हजार के नोट जारी किये गए थे वह पूरा हो गया है। साल 2016 में देश से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सरकार 1000 और 500 रुपये के नोटों पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। जिसे नोटीबंदी कहा गया। इन नोटों की वैधता को हटा देने से देश में एकदम से देश की अर्थव्यवस्था में मुद्रा की कमी आई। इस आवश्यकता को जल्द पूरा करने के लिए आरबीआई ने 2 हजार के नोट जारी करने का निर्णय लिया था। अब पर्याप्त मात्रा में अन्य मूल्यवर्ग के नोटों के उपलब्ध हो जाने से 2 हजार रुपये के नोट जारी करने का उद्देश्य पूरा हो चुका है। जिसे देखते हुए आरबीआई ने साल 2018-19 से ही 2 हजार के नोटों को छापना बंद कर दिया गया था ।

31 मार्च 2017 से पहले 2 हजार रुपये के लगभग 89 फीसदी नोट संचलन में थे और ये अपनी अनुमानित आयु सीमा, जो कि 4 से 5 साल है, के अंत में हैं। 31 मार्च 2018 तक इन नोटों की अधिकतम मात्रा 6.73 लाख करोड़ रुपये (संचलन में नोटों का 37.3 प्रतिशत) थी, जो 31 मार्च 2023 को घटकर 3.62 लाख करोड़ रुपये (संचलन में नोटों का 10.8 प्रतिशत) पहुँच गयी । यह भी देखा गया कि 2 हजार के नोट लेन-देन के लिए आमतौर पर उपयोग में नहीं लिए जा रहा था । इसके अलावा, मुद्रा की आवश्यकता पूर्ति के लिए अन्य मूल्यवर्ग के नोटों की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध थे। जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि 2 हजार रुपये की अतिरिक्त नोटें जो ना तो बैंक के पास थेऔर न ही चलन में वो ब्लैक मनी के रूप में रखा जा रहा था। हालांकि 2 हजार रुपये के नोट को चलन से वापस लेने का अर्थव्यवस्था पर ‘बहुत सीमित’ प्रभाव ही पड़ेगा क्योंकि ये नोट चलन में मौजूद कुल मुद्रा का सिर्फ 10.8 प्रतिशत ही हैं।
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