तेरह अप्रैल 2025 को खबर आई कि मेहुल चोकसी को बेल्जियम में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी भारत की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अनुरोध पर हुई है, जिसमें उन्होंने मुम्बई की विशेष अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंटों के आधार पर इंटरपोल और बेल्जियम प्रशासन से सहयोग मांगा था। मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और कानूनी सफलता है। अब चुनौती है कि बेल्जियम की न्याय व्यवस्था में यह साबित किया जाए कि भारत में उसे निष्पक्ष सुनवाई मिलेगी और मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा। यदि भारत इस दिशा में सफल रहता है, तो मेहुल चोकसी को जल्द भारत लाकर पीएनबी घोटाले के लिए न्याय के कटघरे में खड़ा किया जा सकता है
भारतीय हीरा व्यापारी और ‘गीतांजलि जेम्स लिमिटेड’ के प्रमुख मेहुल चोकसी अंतत: कानून के शिकंजे में आ गया प्रतीत होता है। चोकसी की कम्पनी भारत सहित अनेक देशों में गहनों के व्यापार में एक बड़ा नाम थी। चोकसी के नेतृत्व में ‘नक्षत्र’, ‘अस्मी’, ‘गिली’, ‘माया’, ‘डिआना’ जैसे ब्रांड खूब फले-फूले। वह भारतीय आभूषण उद्योग में एक स्थापित नाम बन चुका था, लेकिन 2018 में वह देश की सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी के केंद्र में आ गया।
मेहुल चोकसी और उनके भांजे नीरव मोदी पर आरोप है कि इन्होंने पंजाब नेशनल बैंक को करीब 14,000 करोड़ रुपए की चपत लगाई। इस घोटाले की योजना बेहद सुनियोजित और तकनीकी थी। बैंक से विदेशी व्यापार के लिए लोन लेने के लिए लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एलओयू) एक तरह की गारंटी होती है, जिसे बैंक दूसरे बैंकों को भेजता है। चोकसी और नीरव मोदी ने पंजाब नेशनल बैंक के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों से सांठ-गांठ कर फर्जी एलओयू जारी करवाए। इन फर्जी एलओयू को स्विफ्ट नामक अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम से दूसरे विदेशी बैंकों को भेजा गया। परंतु इन लेन-देन को पंजाब नेशनल बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम में दजज् ही नहीं किया गया, जिससे वर्षों तक यह धोखाधड़ी छिपी रही। जब एक एलओयू की अवधि समाप्त होती तो नया एलओयू जारी कर दिया जाता। इस प्रकार पिछला कर्ज चुका देने का भ्रम पैदा किया गया और यह चेन कई वर्षों तक चलती रही।
चोकसी पर आरोप है कि इन फजीज् बैंक गारंटियों से प्राप्त धन को विदेशी खातों में भेजकर उसका उपयोग निजी सम्पत्तियों की खरीद, कम्पनियों में निवेश और महंगे आभूषणों के लिए उसके द्वारा किया गया।
भारत छोडना और नागरिकता बदलना 2018 में जैसे ही घोटाले का पर्दाफाश हुआ, उससे कुछ ही दिन पहले मेहुल चोकसी भारत से फरार हो गया। उसने पहले से ही एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता ले रखी थी, जो ‘इन्वेस्टमेंट इन सिटिजनशिप’ योजना के तहत दी गई थी। भारत सरकार ने उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया, उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया, लेकिन एंटीगुआ की नागरिकता और वहां की अदालती प्रक्रिया उसकी ढाल बनी रही।
चोकसी पर लगे आरोप क्या हैं?
पंजाब नेशनल बैंक के साथ धोखाधड़ी और आपराधिक षडयंत्र और मनी लॉन्ड्रिंग, बैंकिंग नियमों का उल्लंघन विदेशों में अवैध सम्पत्तियां अजिज्त करना।
सीबीआई और प्रवतज्न निदेशालय (ईडी) ने उनके खिलाफ कई चाजज्शीट दाखिल की हैं और उन्हें भगोड़ा आथिज्क अपराधी घोषित किया गया है।
गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की वर्तमान स्थिति
13 अप्रैल 2025 को चोकसी बेल्जियम में गिरफ्तार हुआ। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहले से ही निगरानी रखी हुई थी और जैसे ही वह चिकित्सा के लिए बेल्जियम पहुंचा, भारतीय एजेंसियों ने इंटरपोल और बेल्जियम सरकार को उसकी गिरफ्तारी के लिए औपचारिक अनुरोध भेजा। बेल्जियम की पुलिस ने मुम्बई कोर्ट के जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर उसे हिरासत में लिया। भारत सरकार अब उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज कर रही है। हालांकि चोकसी पहले भी डोमिनिका से भारत प्रत्यर्पण के प्रयासों को कानूनी हथियारों से विफल कर चुका है, लेकिन इस बार भारत की उम्मीदें ज्यादा मजबूत हैं।
भारत लाने की संभावनाएं
भारत सरकार बेल्जियम के साथ प्रत्यर्पण संधि के तहत काम कर रही है। अदालत में अगर चोकसी मेडिकल आधार पर या मानवाधिकारों की दुहाई देता है, तो प्रक्रिया लम्बी हो सकती है। भारत के पास पर्याप्त
दस्तावेज, केस डायरी, चार्जशीट और रेड कॉनज्र नोटिस मौजूद हैं, जिससे प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को बल मिल सकता है।
मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और कानूनी सफलता है। अब चुनौती है कि बेल्जियम की न्याय व्यवस्था में यह साबित किया जाए कि भारत में उसे निष्पक्ष सुनवाई मिलेगी और मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा। यदि भारत इस दिशा में सफल रहता है तो मेहुल चोकसी को जल्द भारत लाकर पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के लिए न्याय के कटघरे में खड़ा किया जा सकता है – जो भारत की न्याय व्यवस्था और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के लिए एक महत्वपूणज् संदेश होगा।
कई भगोड़े अभी बाकी हैं
भारत से भागे आर्थिक अपराधियों की सूची में मेहुल चोकसी अकेला नाम नहीं है। उसके जैसे कई और कारोबारी हैं, जिन्होंने देश के बैंकों और निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचाया और फिर विदेश में शरण ले ली। इनमें कई खासे चर्चित नाम शामिल हैं जिन्हें भारत सरकार अभी तक वापस ला पाने में विफल रही है :
नीरव मोदी
नीरव मोदी ललित मोदी विजय माल्या
14,000 करोड़ का पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में मेहुल चोकसी के साथ आरोपी है और वर्तमान में लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण की अपील की थी जिसे 2021 में मंजूरी मिल गई थी, लेकिन उसने मानवाधिकार उल्लंघन का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट (यूके) में अपील की है।
विजय माल्या
किंग फिशर एयरलाइंस के नाम पर 9,000 करोड़ का बैंक लोन घोटाला का आरोपी विजय माल्या राज्यसभा के सदस्य रह चुका है। उसके प्रत्यर्पण को लेकर ब्रिटेन की अदालतें भारत के पक्ष में फैसला दे चुकी है, लेकिन अब भी प्रत्यपज्ण में ‘गोपनीय कानूनी प्रक्रिया’ के कारण विलम्ब हो रहा है।
ललित मोदी
आईपीएल में वित्तीय अनियमितताएं और विदेशी मुद्रा कानूनों का उल्लंघन का आरोपी ललित मोदी लम्बे असेज् से फरार है। ब्रिटेन में रह रहे मोदी के खिलाफ भारत सरकार ने इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस की मांग की थी, लेकिन ब्रिटिश अदालतों में उनके खिलाफ कार्रवाई धीमी है।
संजीव कपूर
3,871 करोड़ का बैंक घोटाला का आरोपी कपूर सम्भत: यूएई या अन्य खाड़ी देशों में है। सीबीआई और ईडी दोनों की जांच चल रही है। रेड कॉनज्र नोटिस जारी किय जा चुका है।
जतिन मेहता नितिन संदेसरा और चेतन संदेसरा
चेतन संदेसरा और नितिन संदेसरा
8,100 करोड़ का बैंक लोन घोटाले के आरोपी वर्तमान में नाइजीरिया अथवा यूएई में रह रहे बताए जाते हैं। भारत के अनुरोध के बावजूद यूएई या नाइजीरिया ने अभी तक प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया है।
जतिन मेहता
6,800 करोड़ लोन डिफॉल्ट, धोखाधड़ी का आरोपी जतिन मेहता ‘विन्सन डायमन्डस कम्पनी’ का मालिक था। मेहता ने सेंट किट्स की नागरिकता ले ली है।