Uttarakhand

बरकरार है ‘दिल वाले दुल्हनिया’ का जादू

‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ को एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंस ने अपनी पसंदीदा यात्रा-आधारित रोमांटिक फिल्मों में शामिल किया है

भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित और लम्बे समय तक याद रखी जाने वाली फिल्मों में शामिल ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ (डीडीएलजे) को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। ऑस्कर पुरस्कारों का संचालन करने वाली संस्था अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसस ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफाम्र्म ‘एक्स’ पर यात्रा पर आधारित अपनी पसंदीदा रोमांटिक फिल्मों की सूची साझा की, जिसमें इस फिल्म को भी प्रमुखता से शामिल किया गया।

इस सूची में कई चर्चित अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के साथ ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ का नाम शामिल होना इस बात का संकेत है कि भारतीय सिनेमा की यह क्लासिक प्रेम कहानी आज भी वैश्विक दर्शकों के बीच उतनी ही प्रासंगिक है। सोशल मीडिया पर साझा की गई इस पोस्ट में फिल्मों के दृश्य दिखाए गए और लोगों से उनकी पसंदीदा ट्रैवल रोमांस फिल्म के बारे में पूछा गया। इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए फिल्म की मुख्य अभिनेत्री काजोल ने इसे अपनी पसंदीदा फिल्म बताया, जिससे भारतीय दर्शकों के बीच एक बार फिर इस फिल्म को लेकर उत्साह देखने को मिला।

साल 1995 में रिलीज हुई इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा में रोमांस को एक नई दिशा दी थी। शाहरुख खान और काजोल की जोड़ी ने राज और सिमरन के किरदारों को इस तरह जीवंत किया कि वे आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं। आदित्य चोपड़ा के निर्देशन में बनी यह फिल्म न केवल उनके करियर की शुरुआत थी बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग में एक नए युग की शुरुआत भी मानी जाती है।

फिल्म की कहानी एक यूरोपीय यात्रा के दौरान शुरू होती है जहां राज और सिमरन की मुलाकात होती है और धीरे-धीरे यह मुलाकात प्रेम में बदल जाती है लेकिन कहानी का असली मोड़ तब आता है जब सिमरन को भारत लौटकर पारम्परिक तरीके से विवाह के लिए तैयार किया जाता है। इसके बाद राज का भारत आकर परिवार का विश्वास जीतने का प्रयास, और प्रेम को सामाजिक स्वीकृति दिलाने की उसकी जिद, इस फिल्म को एक साधारण प्रेम कहानी से कहीं अधिक गहराई देती है। ‘डीडीएलजे’ केवल एक रोमांटिक फिल्म नहीं बल्कि भारतीय परिवार व्यवस्था, परम्परा और आधुनिकता के बीच संतुलन की कहानी भी है। यही कारण है कि यह फिल्म हर पीढ़ी के दर्शकों से जुड़ती रही है। फिल्म का प्रसिद्ध संवाद ‘‘जा सिमरन, जा…’’ आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार संवादों में गिना जाता है।

इस फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह आज भी मुम्बई के मराठा मंदिर सिनेमाघर में लगातार प्रदर्शित हो रही है और इसे दुनिया की सबसे लम्बे समय तक चलने वाली फिल्मों में शामिल किया जाता है। तीन दशक बीत जाने के बाद भी इसके दर्शकों की संख्या में कमी नहीं आई है।

पिछले वर्ष इस फिल्म ने अपने 30 साल पूरे किए थे। इस अवसर पर शाहरुख खान और काजोल लंदन पहुंचे, जहां लीसेस्टर स्क्वायर में फिल्म के प्रतिष्ठित दृश्य की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह किसी भारतीय फिल्म के लिए पहली बार था कि उसे इस तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया।

काजोल ने उस समय कहा था कि सिमरन का किरदार केवल एक फिल्मी पात्र नहीं है बल्कि वह उन लाखों भारतीय लड़कियों का प्रतिनिधित्व करती है जो अपने परिवार की परम्पराओं का सम्मान करते हुए भी अपने सपनों को जीना चाहती हैं। यही कारण है कि यह किरदार आज भी लोगों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है।

आॅस्कर अकादमी द्वारा मिली यह नई पहचान एक बार फिर साबित करती है कि ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ केवल एक फिल्म नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा की सांस्कृतिक धरोहर है, एक ऐसी कहानी, जो समय के साथ और भी मजबूत होती जा रही है और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी।

You may also like