करीब अट्ठारह साल पहले प्रदेश में दो केंद्रीय विद्यालय स्वीकृत किए गए थे। एक अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट में और दूसरा पौड़ी जिले के कोटद्वार में। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी के प्रयासों से कोटद्वार में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के साथ पढ़ाई का सत्र भी शुरू हो चुका है लेकिन दूसरी तरफ द्वाराहाट में आज तक विद्यालय अस्तित्व में नहीं आया है। द्वाराहाट के गौचर में स्थित बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा केंद्रीय विद्यालय के लिए जमीन हस्तांतरण का प्रपोजल दिया गया है लेकिन द्वाराहाट से 18 साल पहले चली केंद्रीय विद्यालय की फाइल आज तक देहरादून नहीं पहुंच पाई है। यही वजह है कि सरकार ने अभी तक केंद्रीय विद्यालय को अपनी कैबिनेट से पास नहीं किया है जबकि 2 साल पहले ही केंद्र सरकार केंद्रीय विद्यालय की स्थापना का निर्णय ले चुकी है। क्षेत्र की आक्रोशित जनता ने फिलहाल इस मुद्दे को लेकर आंदोलन की घोषणा कर दी है
अल्मोड़ा जनपद के द्वाराहाट क्षेत्र की जनता वर्ष 2008 से ही द्वाराहाट में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए निरंतर प्रयासरत रही है। केंद्रीय विद्यालय की स्थापना कराने के लिए क्षेत्र के पूर्व सैनिकों एवं पूर्व केंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों ने लोगों को जागरूक करने के साथ ही उनका योगदान भी विशेष रूप से सराहनीय रहा है।
वर्ष 2008 में उत्तराखण्ड सरकार के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने पूर्व सैनिक संगठन एवं पेंशनर वेलफेयर आॅर्गनाइजेशन के पत्रों का संज्ञान लेते हुए, तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री अर्जुन सिंह जी को द्वाराहाट में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए पत्र लिखा था। इसके अलावा समय-समय पर विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं क्षेत्रवासियों ने केंद्रीय विद्यालय संगठन, केंद्र सरकार तथा सांसदों से लिखित एवं मौखिक रूप से अनुरोध किए। इन निरंतर प्रयासों का परिणाम यह निकला कि द्वाराहाट में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा। केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के मद्देनजर सर्वे कार्य आरम्भ हुए और इसके प्रस्ताव में आई आपत्तियों का भी निराकरण किया गया।
वर्ष 2019 में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनने के बाद इस प्रस्ताव को मानो पंख लग गए। इस बाबत द्वाराहाट के समाजसेवी हीरा सिंह अधिकारी और सैनिक संगठन के पूर्व अध्यक्ष विनोद जोशी ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री निशंक के कार्यालय में अधिकारियों से वार्ता की। निशंक ने अधिकारियों को केंद्रीय विद्यालय की बाबत त्वरित कार्रवाई करने के आदेश दिए।
केंद्रीय विद्यालय स्थापना की राह में एक बड़ी बाधा तब उत्पन्न हुई जब जनपद अल्मोड़ा के तत्कालीन जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने मई 2019 में केंद्रीय विद्यालय संगठन के देहरादून स्थित क्षेत्रीय कार्यालय को पत्र लिखकर द्वाराहाट में 10 एकड़ भूमि उपलब्ध न होने के कारण प्रस्ताव निरस्त करने की सिफारिश कर दी। आश्चर्यजनक यह था कि वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने पहाड़ी राज्यों के लिए भूमि मानक शिथिल कर मात्र 2.5 एकड़ कर दिए गए थे। जबकि द्वाराहाट के केंद्रीय विद्यालय के पास 4 एकड़ भूमि पहले से ही उपलब्ध थी। जिस 10 एकड़ जमीन का हवाला देते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी ने द्वाराहाट में केंद्रीय विद्यालय का प्रस्ताव निरस्त करने की सिफारिश की थी वह मैदानी क्षेत्रों के लिए था। जबकि पहाड़ी राज्यों के लिए कभी 10 एकड़ का मानक रहा ही नहीं था।
चूंकि यह विषय तत्कालीन केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के संज्ञान में था, इसलिए जिलाधिकारी से पुनः पत्र लिखवाया गया जिसमें नए मानकों के अनुसार भूमि उपलब्ध होने की जानकारी दी गई। साथ ही प्रस्ताव को स्वीकार करने का अनुरोध किया गया।
जिलाधिकारी द्वारा प्रस्ताव भेजे जाने के ठीक अगले दिन निशंक के आदेश पर सर्वे एवं निरीक्षण कार्य पूर्ण किया गया। उसी दौरान प्रस्ताव की फाइल भी दिल्ली स्थित केंद्रीय विद्यालय संगठन मुख्यालय भेज दी गई। जहां इसे देश भर से आए उपयुक्त प्रस्तावों की श्रेणी में शामिल कर लिया गया। केंद्रीय विद्यालय के प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने में नैनीताल के सांसद अजय भट्ट की भी विशेष भूमिका रही।
वर्ष 2022-23 में भट्ट ने इसे अपने गृह क्षेत्र का महत्वपूर्ण मामला बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मौखिक एवं लिखित रूप से कई बार-बार अनुरोध किया। फलस्वरूप केंद्र सरकार की कैबिनेट ने 6 दिसम्बर 2024 को द्वाराहाट केंद्रीय विद्यालय के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी। मंजूरी मिलते ही द्वाराहाट के वाशिंदे आश्वस्त हो गए थे कि वर्ष 2025 के नए सत्र से केंद्रीय विद्यालय प्रारम्भ हो जाएगा।
केंद्रीय विद्यालय की स्थापना हेतु चार एकड़ भूमि तथा अस्थाई भवन के रूप में गौचर स्थित बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी में उपलब्ध भवन का उपयोग करने का प्रस्ताव था। काॅलेज द्वारा इस भूमि को केंद्रीय विद्यालय संगठन के नाम निःशुल्क हस्तांतरित करने का निर्णय भी उसके बोर्ड आॅफ गवर्नर्स द्वारा ले लिया गया था।
वर्ष 2025 में विद्यालय का सत्र आरम्भ होना तय माना जा रहा था। इसके लिए अस्थाई भवन की मरम्मत एवं रंग-रोगन का कार्य भी पूरा कर लिया गया था लेकिन दुर्भाग्यवश 2025 में द्वाराहाट का केंद्रीय विद्यालय प्रारंभ नहीं हो सका जबकि इसी वर्ष स्वीकृत कोटद्वार का केंद्रीय विद्यालय शुरू हो गया।
दिसम्बर 2025 के अंत में विद्यालय आरम्भ न होने की क्या वजह रही, इसी सोच में द्वाराहाट के लोग थे। इसी दौरान 22 दिसम्बर 2025 को जिलाधिकारी अल्मोड़ा द्वारा लिखा गया एक पत्र सामने आया जिसमें तकनीकी शिक्षा सचिव, उत्तराखण्ड शासन से बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी की चार एकड़ भूमि को केंद्रीय विद्यालय संगठन को निःशुल्क हस्तांतरित करने सम्बंधी निर्णय की जानकारी मांगी गई थी। यह आश्चर्यजनक था कि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृति मिलने के एक वर्ष बाद भी भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अभी तक प्रारम्भ नहीं हो पाई। जिलाधिकारी का पत्र शासन तक पहुंच चुका है लेकिन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अभी तक पूर्ण नहीं हो पाई है। इस बाबत जब बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी के निदेशक से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर दी गई हैं जबकि शासन के द्वारा बताया जा रहा है कि बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी द्वारा औपचारिकताएं अभी पूरी नहीं की गई हैं।
गौरतलब है कि एक बार सभी औपचारिकताएं पूर्ण हो जाने के बाद भूमि हस्तांतरण का निर्णय उत्तराखण्ड सरकार की कैबिनेट की बैठक में लिया जाएगा लेकिन बताया जा रहा है कि केंद्रीय विद्यालय की यह फाइल अभी बीच में ही लटकी है। सूत्रों के अनुसार फाइल अभी तक कैबिनेट स्तर तक नहीं पहुंच पाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्रीय नेतृत्व इस विषय में पूरी तरह सक्रिय नहीं है। केवल सोशल मीडिया पर श्रेय लेने की औपचारिकता पूरी की जा रही है।
अप्रैल 2026 तक भी विद्यालय का सत्र आरम्भ न होने से क्षेत्र की जनता में अत्यंत आक्रोश है। जनमानस ने उपजिलाधिकारी द्वाराहाट के माध्यम से सूबे के सीएम पुष्कर सिंह धामी को इस बाबत ज्ञापन भी सौंपा है। 2022 में यहां से भाजपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ें अनिल शाही गत 8 अप्रैल को खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलने देहरादून पहुंचे। मुख्यमंत्री धामी ने आश्वस्त किया है कि जल्द ही केंद्रीय विद्यालय की स्थापना करा दी जाएगी, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय जनता ने इस मुद्दे पर धरना प्रदर्शन करने का ऐलान कर दिया है। अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो लोग आमरण अनशन पर बैठने को विवश होंगे।
बात अपनी अपनी
द्वाराहाट के केंद्रीय विद्यालय इंफ्रास्ट्रक्चर में हम दस लाख की निधि खर्च कर चुके हैं। माननीय मुख्यमंत्री जी ने आदेश कर दिए हैं कि जमीन हस्तांतरण का मामला इस बार की कैबिनेट मीटिंग में पास हो जाएगा।
अजय टम्टा, केंद्रीय राज्यमंत्री
मैंने केंद्रीय विद्यालय की द्वाराहाट में स्थापना के लिए काफी प्रयास किए हैं। यहां सबसे पहले बिजली के हाई टेंशन तार बाधक बन रहे थे मैंने वह लाइन ट्रांसफर करवाई। विद्यालय के लिए केंद्र सरकार की कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है लेकिन हमारे प्रदेश की सरकार अभी तक भी इसे कैबिनेट में पास नहीं करा पाई है। इसके लिए मैंने माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी से बात की है। इसके अलावा मैंने धामी जी से यह भी बात की है कि वह जमीन ट्रांसफर में आ रही बाधा को भी दूर कराएं। केंद्रीय विद्यालय के लिए बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं इंजीनियरिंग कॉलेज को जमीन ट्रांसफर की जानी है लेकिन शासन ने अभी तक भी जमीन ट्रांसफर के आदेश की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया है। जमीन ट्रांसफर वाली फाइल प्रदेश के टेक्निकल सेक्रेटरी माननीय राज्यपाल जी के पास भेजेंगे और वहां से उस पर मोहर लगेगी। लेकिन अभी तक टेक्निकल सेक्रेटरी ने भी यह फाइल माननीय गवर्नर साहब को नहीं भेजी है।
मदन बिष्ट, विधायक, द्वाराहाट
मदन बिष्ट, विधायक, द्वाराहाट
हमने माननीय शिक्षा मंत्री जी को अवगत कराया है कि केंद्रीय विद्यालय इसी शिक्षा सत्र से प्रारंभ करने के लिए जनता आक्रोश में है एवं आंदोलित है। यह भी बताया कि द्वाराहाट के साथ स्वीकृत कोटद्वार में केंद्रीय विद्यालय की कक्षाएं पूर्व वर्ष में ही प्रारंभ हो चुकी हैं। द्वाराहाट की भूमि सम्बंधी अंतिम स्वीकृति शासन स्तर पर लंबित है। जल्दी ही स्वीकृति प्रदान करें।
संजू मठपाल, प्रतिनिधि धन सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री
संजू मठपाल, प्रतिनिधि धन सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री
बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं इंजीनियरिंग काॅलेज ने अपनी ओर से सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली है लेकिन अभी केबिनेट से स्वीकृति नहीं मिलने से मामला अटका पड़ा है।
विनोद जोशी, अध्यक्ष, पूर्व सैनिक संगठन
विनोद जोशी, अध्यक्ष, पूर्व सैनिक संगठन
मैं इस मामले में मुख्यमंत्री जी से मिला हूं उन्होंने तकनीकी शिक्षा सचिव रणजीत सिन्हा को जमीन हस्तांतरण की फाइल भेजने के लिए बोला है और कहा है कि आगामी 15 अप्रैल को होने वाली कैबिनेट बैठक में इसे पास करा दिया जाएगा।
अनिल शाही, भाजपा नेता, द्वाराहाट
अनिल शाही, भाजपा नेता, द्वाराहाट
केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय विद्यालय के रूप में क्षेत्र के जनमानस को एक शानदार उपहार प्रदान किया गया था, जिसको सम्मानपूर्वक ग्रहण करने में प्रदेश प्रशासन और क्षेत्रीय नेतृत्व अभी तक नाकाम रहा है। उनकी इसी नाकामी के कारण आज सवा वर्ष के पश्चात भी भूमि हस्तांतरण के मामले में उलझकर यह विद्यालय अभी तक अस्तित्व में नहीं आ पाया है। निश्चित तौर पर यह क्षेत्र के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उत्तराखण्ड प्रशासन और क्षेत्रीय नेतृत्व के उदासीन रवैये से द्वाराहाट का जनमानस आहत है और अब उसके पास अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सत्याग्रह आंदोलन करने के अलावा अन्य कोई रास्ता नहीं बचा है।
हीरा सिंह अधिकारी, समाजसेवी
हीरा सिंह अधिकारी, समाजसेवी
11 अप्रैल 2026 से हम अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने जा रहे हैं। यह निर्णय क्षेत्र के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य से जुड़े एक न्यायपूर्ण मांग को लेकर लिया गया है। अनशन किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है लेकिन क्षेत्र के बच्चों के शिक्षा के अधिकार से जुड़े इस गम्भीर मुद्दे के कारण हम इस कदम के लिए मजबूर हो गए हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ने द्वाराहाट को केंद्रीय विद्यालय की अमूल्य भेंट दी है। परंतु प्रशासनिक लापरवाहियों के कारण यह भेंट आज भी हमारे बच्चों की पहुंच से दूर है। हम पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हैं कि हमारे इस सत्याग्रह की आवाज प्रशासनिक अधिकारियों तक अवश्य पहुंचेगी। हम न किसी के विरोध में नारे लगाएंगे और न ही किसी की निष्क्रियता की निंदा करेंगे। हमारा एकमात्र लक्ष्य अपने बच्चों को वह हक दिलाना है जो उन्हें 6 दिसम्बर 2024 को भारत सरकार की केंद्रीय कैबिनेट ने प्रदान किया था।
नंदिता भट्ट, समाजसेविका, द्वाराहाट, अल्मोड़ा
नंदिता भट्ट, समाजसेविका, द्वाराहाट, अल्मोड़ा