महाराष्ट्र की राजनीति में अभिनेत्री कंगना को लेकर दो राष्ट्रीय पार्टियां अपनी – अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में जुट गई हैं। अभिनेता सुशांत राजपूत की मौत को लेकर शुरू हुई इस जंग में शिवसेना और भाजपा में सियासत शुरू हो गई है। हालांकि कंगना रनौत के मुद्दे पर भाजपा शिवसेना पर सीधे वार नहीं कर रही है, लेकिन वह राजनीतिक रूप से अभिनेत्री कंगना रनौत के कंधे पर बंदूक रखकर शिवसेना की सियासत को चुनौती दे रही है। इससे महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना फिलहाल कमजोर दिख रही है। दूसरी तरफ कंगना रनौत महाराष्ट्र की राजनीति का केन्द्र बनती जा रही है।
इस बीच फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बीच जारी लड़ाई में अब महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की एंट्री हो गई है। ख़बरों के मुताबिक उन्होंने इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अजेय मेहता से चर्चा की। इस दौरान राज्यपाल ने कार्रवाई पर नाराजगी भी जताई है। अजेय मेहता इस संबंध में सीएम उद्धव को जानकारी देंगे। वहीं, राज्यपाल कोश्यारी भी इस विषय पर केंद्र को एक रिपोर्ट देने वाले हैं।
बता दें कि बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बीच लड़ाई लगातार बढ़ती जा रही है। दोनों तरफ से जुबानी हमले अब और भी तेज हैं। कंगना ने तो उद्धव ठआकरे को वंशवाद का नमूना तो शिवसेना को सोनिया सेना तक कह डाला।
कंगना रनौत के ऑफिस पर कथित अवैध निर्माण की बीएमसी की कार्रवाई पर महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार भरपाई करने में लगी है। अब मुंबई पुलिस ने अभिनेत्री कंगना रनौत के खार स्थित घर और बांद्रा में उनके दफ्तर बंगले के बाहर सुरक्षा के इंतजाम किए हैं।
इससे पहले केंद्र सरकार ने कंगना को वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है। उन्होंने हाल ही में मुंबई पुलिस की आलोचना की थी और महानगर की तुलना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से की थी, जिस पर उठे विवाद के बाद उन्हें केंद्र की ओर सुरक्षा प्रदान की गई है। शिवसेना ने उनके बयानों की निंदा की।
कंगना कल 9 सितंबर को हिमाचल प्रदेश में अपने घर से मुंबई लौटी थीं। उनके लौटने से कुछ समय पहले ही शिवसेना के नियंत्रण वाले मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने उनके बांद्रा स्थित दफ्तर में ‘अवैध निर्माण कार्यों को गिराने की कार्रवाई शुरू की थी। हालांकि, कुछ समय बाद ही बंबई हाईकोर्ट ने अभिनेत्री को राहत देते हुए बीएमसी द्वारा अवैध निर्माण को तोड़ने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी ।

