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दुनिया खेलेगी, भारत सीखेगा और आगे बढ़ेगा

वर्ष 1930 में 13 टीमों के साथ शुरू हुआ फीफा विश्व कप आज दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन बन चुका है। उरुग्वे की पहली जीत से लेकर लियोनेल मेसी के विश्व चैम्पियन बनने तक इस टूर्नामेंट ने फुटबाॅल इतिहास को कई अविस्मरणीय पल दिए हैं। अब 2026 का विश्व कप इस गौरवशाली यात्रा का नया अध्याय बनने जा रहा है। पहली बार 48 टीमें, 104 मैच और तीन देश इसकी मेजबानी करेंगे। भारत इस विश्व कप में भाग नहीं ले रहा है लेकिन भारतीय फुटबाॅल के लिए यह टूर्नामेंट प्रेरणा और सीख का बड़ा अवसर है। यदि जमीनी स्तर पर सही निवेश, बेहतर ढांचा और दीर्घकालिक योजना पर काम किया जाए तो भविष्य में भारत भी विश्व कप के मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकता है। यह विश्व कप भारतीय फुटबाॅल को यही संदेश देता है कि लक्ष्य बड़ा जरूर है लेकिन उसे हासिल करने का रास्ता खुला हुआ है

भारत में जिस तरह क्रिकेट का जुनून देखने को मिलता है उसी तरह दुनियाभर में फुटबाॅल के करोड़ों दीवाने हैं। ऐसे खेल प्रेमियों के लिए एक नए फुटबाॅल युग का आगाज होने जा रहा है। हम बात कर रहे हैं फीफा विश्व कप 2026 की जो 11 जून से 19 जुलाई 2026 तक अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में आयोजित होगा। यह विश्व कप कई मायनों में ऐतिहासिक होगा क्योंकि पहली बार तीन देश इसकी संयुक्त मेजबानी करेंगे और पहली ही बार 48 टीमें खिताब के लिए मुकाबला करेंगी। यह विश्व कप कई मायनों में खास होने वाला है। इस टूर्नामेंट में चार-चार टीमों के 12 ग्रुप बनाए गए हैं और कुल 104 मैच खेले जाएंगे। जिन्हें लेकर खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों में उत्साह देखने को मिल रहा है लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया में सवाल उठ रहे हैं कि यह विश्व कप ऐतिहासिक क्यों है? 48 टीमों वाला महाकुंभ भारत के लिए क्या मायने रखता है? आज तक भारत क्यों नहीं पहुंच पाया विश्व कप में? इससे भारत क्या सीख सकता है? क्या इस खेल महाकुंभ से भारत की उम्मीदों को बल मिलेगा जैसे तमाम प्रश्न दागे जा रहे हैं।

खेल विश्लेषकों का कहना है कि फुटबाॅल की दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन फीफा विश्व कप 2026 इतिहास रचने जा रहा है। यह केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि वैश्विक संस्कृति, जुनून और राष्ट्रीय गौरव का उत्सव है। यह टूर्नामेंट कई मायनों में विशेष है। पहली बार विश्व कप में 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं, पहली बार तीन देशों की संयुक्त मेजबानी में यह आयोजन हो रहा है और पहली बार 104 मैच खेले जा रहे हैं। भारत भले ही इस बार भी विश्व कप में जगह नहीं बना सका लेकिन भारतीय फुटबॉल के लिए यह टूर्नामेंट बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

भारतीय फुटबाॅल की दिशा, दशा और भविष्य को समझने के लिए फीफा विश्व कप एक बड़ा आईना साबित हो सकता है क्योंकि फीफा ने इस बार विश्व कप का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां 32 टीमें खेलती थीं अब 48 टीमें मैदान में उतर रही हैं। सभी टीमों को 12 समूहों में बांटा गया है और प्रत्येक समूह में चार टीमें हैं। हर समूह की शीर्ष दो टीमों के साथ आठ सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमें भी नॉकआउट दौर में पहुंचेंगी। इससे प्रतियोगिता अधिक व्यापक और प्रतिस्पर्धी बन गई है। इस विस्तार का सबसे बड़ा उद्देश्य फुटबाॅल को अधिक देशों तक पहुंचाना और नए राष्ट्रों को विश्व मंच पर अवसर देना है। एशिया, अफ्रीका और ओशियानिया को पहले की तुलना में अधिक स्थान मिले हैं। एशिया को सीधे आठ स्थान और एक प्लेऑफ का अवसर मिला।

जहां तक सवाल है भारत के लिए यह विश्व कप क्यों खास है, का तो विश्व कप के विस्तार से सबसे अधिक उम्मीद उन देशों को थी जो अब तक नियमित रूप से क्वालीफाई नहीं कर पाते थे। भारत भी उनमें से एक है। वर्षों से भारतीय फुटबॉल प्रेमी यह सवाल पूछते रहे हैं कि क्या विश्व कप में टीम इंडिया को कभी देखने का सपना पूरा होगा? 48 टीमों के प्रारूप ने यह सम्भावना पहले की तुलना में अधिक वास्तविक बना दी है। हालांकि अवसर बढ़ने का मतलब यह नहीं कि चुनौती कम हो गई है। एशिया से जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, ईरान, कतर और उज्बेकिस्तान जैसे देश लगातार अपने फुटबाॅल ढांचे को मजबूत कर रहे हैं। भारत अभी भी इन देशों से काफी पीछे है। भारतीय टीम क्वालिफिकेशन के शुरुआती चरणों में ही बाहर हो गई थी। इसका अर्थ है कि केवल विश्व कप में टीमों की संख्या बढ़ जाना पर्याप्त नहीं है, भारत को अपनी जमीनी संरचना, कोचिंग और खिलाड़ी विकास प्रणाली में बड़े बदलाव करने होंगे।

भारत में फुटबॉल के प्रति उत्साह की कोई कमी नहीं है। पश्चिम बंगाल, केरल, गोवा, मणिपुर, मिजोरम और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में फुटबॉल एक जुनून की तरह खेला जाता है। फिर भी राष्ट्रीय टीम विश्व फुटबॉल में अपनी पहचान बनाने में संघर्ष कर रही है तो इसके कई कारण हैं। पहला जमीनी स्तर पर पर्याप्त फुटबॉल अकादमियों का अभाव। दूसरा स्कूल और कॉलेज फुटबॉल संरचना का कमजोर होना। तीसरा प्रतिभाओं की पहचान और विकास की सीमित व्यवस्था। चौथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैचों और प्रतिस्पर्धा की कमी। पांचवां पेशेवर क्लब संस्कृति का अपेक्षित स्तर तक विकसित न होना। हालांकि पिछले एक दशक में स्थिति में कुछ सुधार जरूर हुआ है। अखिल भारतीय फुटबाॅल महासंघ और इंडियन सुपर लीग ने फुटबाॅल को नई पहचान दी है। कई युवा खिलाड़ी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना देखने लगे हैं।

पिछले दस वर्षों पर नजर डालें तो भारतीय फुटबाॅल में कई सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देते हैं। देश में पेशेवर लीग का विस्तार हुआ है, क्लबों ने युवा खिलाड़ियों पर निवेश बढ़ाया है और विदेशी कोचों की मौजूदगी से खेल का स्तर बेहतर हुआ है। भारतीय फुटबाॅल के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि युवा खिलाड़ियों को नियमित प्रतिस्पर्धा मिलने से प्रतिभा निखरने लगी है। हालांकि अभी भी यह यात्रा लम्बी है। भारत को जापान और उज्बेकिस्तान जैसे देशों से सीखने की आवश्यकता है। इन देशों ने लम्बे समय की योजना बनाकर जमीनी स्तर से खिलाड़ियों को तैयार किया और आज वे विश्व कप के नियमित प्रतिभागी बन चुके हैं।

विश्व कप 2026 से क्या सीख सकता है भारत?
विश्व कप केवल ट्रॉफी जीतने की प्रतियोगिता नहीं है बल्कि फुटबॉल विकास का मॉडल भी प्रस्तुत करता है। भारत को इस आयोजन से कई महत्वपूर्ण सबक मिल सकते हैं। विश्व कप खेलने वाली अधिकांश टीमों ने 10 से 20 वर्षों की योजनाओं पर काम किया है। भारत को भी चुनावी या प्रशासनिक चक्रों से ऊपर उठकर दीर्घकालिक फुटबॉल रोडमैप बनाना होगा। विश्व फुटबाॅल में सफलता की शुरुआत अंडर-13, अंडर-15 और अंडर-17 स्तर से होती है। भारत को इसी स्तर पर निवेश बढ़ाना होगा। विश्व स्तरीय कोचिंग के बिना विश्व स्तरीय खिलाड़ी तैयार नहीं हो सकते। भारत को हजारों प्रशिक्षित कोचों की आवश्यकता है। आज फुटबाॅल केवल कौशल का खेल नहीं रह गया है। फिटनेस, डेटा एनालिटिक्स, पोषण और खेल विज्ञान भी सफलता के बड़े कारक बन चुके हैं।

क्या 2034 या 2038 विश्व कप खेल सकता है भारत?
यह सवाल हर भारतीय फुटबाॅल प्रशंसक के मन में है। इसका उत्तर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। यदि भारत अगले 8 से 12 वर्षों में जमीनी स्तर पर निवेश बढ़ाए, मजबूत युवा लीग विकसित करे, राष्ट्रीय टीम को नियमित अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा दिलाए और पेशेवर फुटबाॅल ढांचे को मजबूत बनाए तो विश्व कप में पहुंचने का सपना असम्भव नहीं रहेगा। 48 टीमों के प्रारूप ने रास्ता थोड़ा आसान जरूर किया है लेकिन मंजिल तक पहुंचने के लिए अभी भी कड़ी मेहनत करनी होगी।

भारत और फीफा विश्व कप
भारत अभी तक फीफा विश्व कप के फाइनल चरण में नहीं खेल पाया है। हालांकि 1950 विश्व कप के लिए भारत ने क्वालीफाई किया था लेकिन विभिन्न कारणों से टीम टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकी। इसके
बावजूद भारत दुनिया के सबसे बड़े फुटबाॅल दर्शक बाजारों में से एक बन चुका है।

फीफा विश्व कप का इतिहास
फेडरेशन इंटरनेशनल फुटबाॅल एसोसिएशन द्वारा आयोजित फीफा विश्व कप दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित फुटबाॅल टूर्नामेंट है। हर चार वर्ष में आयोजित होने वाला यह महाकुम्भ केवल खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि वैश्विक उत्सव बन चुका है। आज अरबों दर्शक इस टूर्नामेंट से जुड़ते हैं लेकिन इसकी शुरुआत बेहद साधारण तरीके से हुई थी। 20वीं सदी के शुरुआती वर्षों में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मुख्य रूप से ओलम्पिक खेलों तक सीमित था। फीफा के तत्कालीन अध्यक्ष जूल्स रिमेट ने एक स्वतंत्र विश्व फुटबॉल प्रतियोगिता का सपना देखा। 1928 में फीफा ने हर चार वर्ष में विश्व कप आयोजित करने का निर्णय लिया और 1930 में पहला टूर्नामेंट आयोजित हुआ।

पहला विश्व कप उरुग्वे में आयोजित किया गया। मेजबान देश के रूप में उरुग्वे का चयन इसलिए हुआ क्योंकि उसने 1924 और 1928 के ओलंपिक फुटबॉल स्वर्ण पदक जीते थे और वह अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी भी मना रहा था। इस टूर्नामेंट में केवल 13 टीमों ने भाग लिया। यूरोप से लम्बी समुद्री यात्रा और आर्थिक मंदी के कारण कई देशों ने हिस्सा नहीं लिया। फाइनल में उरुग्वे ने अर्जेंटीना को 4-2 से हराकर पहला विश्व कप अपने नाम किया। इसके बाद 1934 और 1938 के विश्व कप क्रमशः इटली और फ्रांस में आयोजित हुए। इसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध के कारण 1942 और 1946 के विश्व कप रद्द कर दिए गए। यह विश्व कप इतिहास का सबसे बड़ा व्यवधान था। 1950 में विश्व कप की वापसी हुई। इसी टूर्नामेंट में फुटबॉल इतिहास का सबसे चर्चित उलटफेर ‘माराकानाजो’ हुआ जब उरुग्वे ने मेजबान ब्राजील को हराकर खिताब जीत लिया। इस हार के बाद ब्राजील विश्व फुटबॉल की सबसे सफल टीम बनकर उभरा। महान खिलाड़ी पेले की अगुआई में ब्राजील ने1958, 1962 और 1970 में विश्व कप जीते। तीन खिताब जीतने के बाद ब्राजील को मूल  ‘जूल्स रिमे ट्राॅफी’ स्थायी रूप से सौंप दी गई। ब्राजील ने 1994 और 2002 में फीफा खिताब जीत सबसे सफल टीम का तमगा अपने नाम किया। विश्व कप की लोकप्रियता बढ़ने के साथ-साथ इसमें भाग लेने वाली टीमों की संख्या भी बढ़ती गई। वर्ष 1930-13 टीमें 1934 से 1978-16 टीमें, 1982-24 टीमें, 1998-32 टीमें, 2026-48 टीमों तक इसका विस्तार पहुंच गया है। यह विस्तार फुटबॉल को अधिक देशों तक पहुंचाने और नए राष्ट्रों को अवसर देने के उद्देश्य से किया गया है।

गौरतलब है कि पिछला फीफा विश्व कप 2022 के रोमांचक फाइनल में अर्जेंटीना ने फ्रांस को पेनल्टी शूटआउट में हराकर तीसरी बार खिताब अपने नाम किया था वहीं फ्रांस लगातार तीसरी बार विश्व विजेता बनने से चूक गया था। ऐसे में 2026 के विश्व कप में एक ओर जहां अर्जेंटीना अपने खिताब की रक्षा के इरादे से उतरेगा, वहीं फ्रांस पिछली हार से सबक लेकर तीसरी बार विश्व चैम्पियन बनने का सपना साकार करने की कोशिश करेगा।

फीफा विश्व कप  में लागू होंगे नए नियम
फीफा के चीफ रेफरी ऑफिसर पियरलुइगी कोलिना के अनुसार फीफा विश्व कप 2026 में कई नए नियम लागू किए गए हैं जिनका उद्देश्य खेल को अधिक तेज, निष्पक्ष और रोमांचक बनाना है। नए नियमों के तहत विवाद के दौरान मुंह ढकने या रेफरी के फैसले का विरोध करने पर खिलाड़ियों को रेड कार्ड मिल सकता है। थ्रो-इन, गोल किक और सब्स्टीट्यूशन के लिए समय-सीमा तय की गई है ताकि समय की बर्बादी रोकी जा सके। मेडिकल उपचार के बाद खिलाड़ियों को कुछ समय के लिए मैदान से बाहर रहना होगा। वहीं वीआर को गलत कार्ड, गलत पहचान और कुछ अन्य फैसलों में हस्तक्षेप की अतिरिक्त शक्ति दी गई है। इसके अलावा प्रत्येक हाफ में हाइड्रेशन ब्रेक भी अनिवार्य होगा। इन बदलावों से खेल की रफ्तार बढ़ाने और खिलाड़ियों व दर्शकों के अनुभव को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है।

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