प्रदेश में शिक्षा मंत्री रहते जो मंत्री एनसीईआरटी की एक समान प्रणाली लागू करने के लिए जाना गया उसके क्षेत्र का डिग्री काॅलेज महज तीन कमरों में चल रहा है। जिस जनप्रतिनिधि के आवास के करीब बना गुलरभोज इंटर काॅलेज जर्जर हालत में है, अध्यापकों के आने का इंतजार कर रहा है वहां पढ़ाई का स्तर कैसा होगा यह बखूबी समझा जा सकता है। गदरपुर में स्वास्थ्य सुविधाएं राम भरोसे हैं। दिनेशपुर कस्बे के मरीजों को एक एम्बुलेंस भी मय्यसर नहीं है। मटकोटा मार्ग में बड़े-बड़े गड्ढ़े क्षेत्र के साथ विकास में हुई लापरवाही को दर्शाता है। कृषि क्षेत्र में अव्वल रहने वाले किसान खाद-बीज के लिए तरस रहे हैं तो खनन माफियाओं से अपने खेतों को बचाने के लिए पुलिस से लेकर प्रशासन तक दर-दर भटक रहे हैं लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं है। गदरपुर विधानसभा क्षेत्र की ग्राउंड रिपोर्टिंग में सामने आया कि विकास की डगर पर आगे बढ़ने के बजाय आपसी राजनीति में उलझकर रह गई है और विकास कार्य अवरुद्ध हो रहे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्थानीय विधायक अरविंद पाण्डेय के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान से जनता के बीच निराशा बढ़ी है। जिस विकास की उम्मीद से जनता ने अरविंद पाण्डेय को लगातार तीसरी बार यहां का जनप्रतिनिधि बनाया वह उस उम्मीद पर खरे नहीं उतरे हैं

गदरपुर विधानसभा क्षेत्र ऊधमसिंह नगर जिले का एक प्रमुख निर्वाचन क्षेत्र है। यह नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। 2008 के परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व में आई। यह विधानसभा क्षेत्र ऊधमसिंह नगर जिले के मैदानी-तराई भाग में आता है, जिसकी सीमाएं रुद्रपुर, बाजपुर और रामपुर (उ.प्र.) के सीमावर्ती इलाकों से सटी हुई हैं। तराई क्षेत्र होने के कारण यहां की भूमि बेहद उपजाऊ है। धान, गेहूं और गन्ना मुख्य व्यावसायिक फसलें हैं। यहां कई राइस मीलें और कृषि आधारित उद्योग स्थापित हैं। क्षेत्र में मूल रूप से बुक्सा जनजाति, बंगाली समाज, सिख समुदाय और मुस्लिम परिवार रहते हैं जिसके कारण इस क्षेत्र को भारत का गुलदस्ता कहा जाता है। इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग 1,49,458 मतदाता हैं। यहां की लगभग 77.53 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है जबकि केवल 22.47 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्र (गदरपुर शहर) के अंतर्गत आती है। 2011 की जनगणना के मुताबिक इस क्षेत्र में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 11.34 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की आबादी लगभग 7.7 प्रतिशत है। 2012 से लेकर 2022 तक यहां हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अरविंद पांडेय ने कांग्रेस के प्रेमानंद महाजन को मात्र 1,120 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराया था। इससे पहले 2017 के चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र पाल सिंह को पाण्डेय ने 14,106 वोट से हराकर जीत हासिल की थी। आगामी चुनाव को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां अभी से तेज दिखाई दे रही हैं।

‘दि संडे पोस्ट’ द्वारा गदरपुर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न इलाकों, गदरपुर नगर, दिनेशपुर, गूलरभोज, आबाद नगर, महावीर नगर, कुशालपुर- कुईखेड़ा, काकर सेतु, रुद्रपुर-दिनेशपुर मार्ग तथा अन्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। साथ ही स्थानीय लोगों से बातचीत की गई जिसमें यह सामने आया कि क्षेत्र आज भी कई मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। डबल इंजन सरकार और पूर्व कैबिनेट मंत्री का क्षेत्र होने के बावजूद विकास को लेकर लोगों में मिश्रित प्रतिक्रिया दिखाई दी। क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, खनन, नशा, सफाई व्यवस्था, कृषि और भूमि अधिकार जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए। सीमित संसाधनों में डिग्री काॅलेज का संचालन, अस्पतालों में डाॅक्टरों, ऑपरेटरों  और सुविधाओं की कमी, दिनेशपुर में सरकारी एम्बुलेंस का अभाव, कुशालपुर- कुईखेड़ा क्षेत्र में खनन से प्रभावित कृषि भूमि, किसानों की फसल नुकसान और खाद सम्बंधी समस्याएं प्रमुख रूप से दिखाई दीं, वहीं काकर सेतु से रुद्रपुर-दिनेशपुर मार्ग तक गंदगी और कूड़ा निस्तारण की समस्या भी स्पष्ट रूप से देखने को मिली। यहां आबाद नगर और महावीर नगर की सड़कें, गूलरभोज में पुल की मांग, रोडवेज का संचालन शुरू न होना तथा रजिस्ट्रार कार्यालय का अभाव भी स्थानीय मुद्दों में शामिल है। कुल मिलाकर गदरपुर विधानसभा की जमीनी तस्वीर दर्शाती है कि विकास के दावों के बीच आज भी कई बुनियादी समस्याओं के समाधान की प्रतीक्षा कर रहा है।

आपसी राजनीतिक खींचतान के बीच फंसी जनता
गदरपुर में लोगों के बीच यह धारणा देखने को मिली कि पिछले कुछ वर्षों में विधायक अरविंद पाण्डेय और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मध्य चल रही नूरा-कुश्ती राजनीतिक गतिविधियां विकास कार्यों पर भारी पड़ रही हैं। कई नागरिकों का कहना है कि जनता को उम्मीद थी कि सरकार और जनप्रतिनिधि मिलकर क्षेत्र के विकास पर ध्यान देंगे लेकिन इसके बजाय राजनीतिक खींचतान अधिक दिखाई दी। लोगों का मानना है कि इसका सीधा असर विकास कार्यों की गति पर पड़ा। इस दौरान एक बात लगभग हर वर्ग के लोगों से सुनने को मिली कि पिछले साढ़े चार वर्षों में विकास कार्यों से अधिक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्थानीय विधायक अरविंद पाण्डेय के राजनीतिक सम्बंधों को लेकर चर्चा होती रही। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर कस्बों तक कई लोगों का मानना है कि दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी का प्रभाव कहीं न कहीं गदरपुर के विकास कार्यों पर पड़ा है।

कई लोगों ने यह भी कहा कि डबल इंजन सरकार होने के बावजूद गदरपुर को वह प्राथमिकता नहीं मिल पाई जिसकी जनता को उम्मीद थी। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे कई क्षेत्रों में अभी भी काफी काम किया जाना बाकी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री और स्थानीय नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल होता तो क्षेत्र में विकास परियोजनाओं की संख्या और गति दोनों अलग दिखाई देतीं।

पूर्व शिक्षा मंत्री की विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था बदहाल
गदरपुर विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे अरविंद पाण्डेय प्रदेश के शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। उनसे लोगों को शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं की उम्मीद थी लेकिन उनकी यह उम्मीद अधूरी है। क्षेत्र के पुराने और प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शामिल गुलरभोज स्थित एएनके इंटर काॅलेज का उदाहरण देते हुए कई लोगों ने विद्यालय भवनों, आधारभूत सुविधाओं और रखरखाव की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। कई स्थानों पर अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों का कहना था कि शिक्षा के क्षेत्र में जितने बड़े सुधारों की अपेक्षा थी, वे जमीन पर दिखाई नहीं देते।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति संतोषजनक नहीं दिखाई दी। क्षेत्र का डिग्री कॉलेज आज भी सीमित संसाधनों के साथ संचालित हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार डिग्री कॉलेज का संचालन लम्बे समय से मात्र दो से तीन कमरों में किया जा रहा है जबकि क्षेत्र के विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए एक पूर्ण विकसित परिसर की आवश्यकता महसूस की जाती है। क्षेत्र के विद्यार्थियों और अभिभावकों का मानना है कि उच्च शिक्षा के बेहतर अवसरों के अभाव में बड़ी संख्या में छात्रों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। कई लोगों ने कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री का क्षेत्र होने के बावजूद उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपेक्षित विस्तार और बुनियादी ढांचे का विकास दिखाई नहीं देता। शिक्षा व्यवस्था आज भी विधानसभा के उन प्रमुख मुद्दों में शामिल दिखाई देती है, जिन पर स्थानीय लोग अधिक चिंतित दिखाई दिए।

विधानसभा के बंगाली बहुल क्षेत्रों में लोगों ने शिक्षा सहायता योजनाओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की। कई नागरिकों ने बताया कि पूर्व में विद्यार्थियों को मिलने वाली शैक्षणिक सहायता और वजीफा योजनाओं को लेकर अब असमंजस की स्थिति है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष सहायता योजनाओं को मजबूत किया जाना चाहिए।

स्वास्थ्य सुविधाएं राम भरोसे
गदरपुर विधानसभा में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी एक प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने आई। विभिन्न क्षेत्रों में लोगों से बातचीत और अस्पतालों के सम्बंध में मिली जानकारी से यह महसूस हुआ कि क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था अभी भी कई बुनियादी चुनौतियों से जूझ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गदरपुर के सरकारी अस्पताल में कई आवश्यक मशीनें तो उपलब्ध हैं लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए पर्याप्त ऑपरेटर और तकनीकी स्टाफ नहीं हैं। लोगों का आरोप है कि कई मामलों में अस्पताल केवल प्राथमिक उपचार तक सीमित रह जाता है और गम्भीर मरीजों को रुद्रपुर रेफर कर दिया जाता है। इसी कारण कई लोगों ने गदरपुर अस्पताल को ‘रेफर सेंटर’ बनकर रह जाने की संज्ञा दी।

दिनेशपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर भी गम्भीर शिकायतें सामने आईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। लोगों के अनुसार अस्पताल में पर्याप्त मशीनें, संसाधन और उपचार सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं जिसके कारण मरीजों को छोटी-बड़ी बीमारियों के लिए भी अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है।

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी स्थिति चिंताजनक बताई गई। इस दौरान यह जानकारी सामने आई कि दिनेशपुर क्षेत्र में सरकारी एम्बुलेंस सेवा की उपलब्धता को लेकर लोग लम्बे समय से मांग उठाते रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्तमान में क्षेत्र में एक एम्बुलेंस संचालित होती है जिसका संचालन एक सामाजिक संस्था और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से किया जाता है। लोगों का कहना है कि इतने बड़े क्षेत्र के लिए सरकारी स्तर पर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।

लोगों से हुई बातचीत से यह महसूस हुआ कि गदरपुर विधानसभा में स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण आज भी एक बड़ी आवश्यकता बना हुआ है। डाॅक्टरों की कमी, तकनीकी स्टाफ का अभाव, सीमित चिकित्सा सुविधाएं, रेफरल पर बढ़ती निर्भरता और आपातकालीन सेवाओं की कमी जैसे मुद्दे क्षेत्र के लोगों की प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं।

सड़क और आधारभूत सुविधाओं की अधूरी तस्वीर
गदरपुर विधानसभा में ऐसे क्षेत्र सामने आए जहां वर्षों पुरानी आधारभूत समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। आबाद नगर क्षेत्र में स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां की सड़क पिछले लगभग 25 से 30 वर्षों से निर्माण और मरम्मत की प्रतीक्षा कर रही है। इसी प्रकार महावीर नगर क्षेत्र में भी सड़क सुविधा को लेकर लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गदरपुर-मटकोटा सड़क का मुद्दा क्षेत्र में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क को पूरा होने में वर्षों लग गए और निर्माण कार्य में अपेक्षित तेजी दिखाई नहीं दी। कई नागरिकों ने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही सड़क निर्माण कार्यों में तेजी दिखाई देने लगी। लोगों का मानना है कि यदि विकास कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं तो जनता को वर्षों तक परेशानियों का सामना न करना पड़े वहीं गदरपुर में निर्मित रोडवेज परिसर करीब आठ महीने पहले तैयार हो चुका है लेकिन अभी तक उसका नियमित संचालन शुरू नहीं हो पाया है, जिससे यात्रियों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल रही। इसके अलावा विधानसभा क्षेत्र में आज तक रजिस्ट्रार कार्यालय की स्थापना नहीं हो सकी है। इसके कारण भूमि, सम्पत्ति और रजिस्ट्री सम्बंधी कार्यों के लिए लोगों को अन्य स्थानों का रुख करना पड़ता है।
इसके अतिरिक्त गूलरभोज क्षेत्र में डैम के भीतर रहने वाले लोगों के आवागमन की समस्या भी प्रमुख रूप से सामने आई। क्षेत्रवासियों को लम्बे समय से एक पुल की आवश्यकता है ताकि डैम के दोनों ओर रहने वाले लोगों का आवागमन सुगम हो सके। वर्तमान में कई लोगों को आवागमन के लिए लम्बी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित होता है। इन सभी मामलों से यह संकेत मिलता है कि विधानसभा के कई हिस्सों में आज भी सड़क, परिवहन, प्रशासनिक सुविधाओं और सम्पर्क मार्गों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य पूरे होने की प्रतीक्षा में हैं, जिन्हें स्थानीय लोग क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक मानते हैं।

नशे का बढ़ता प्रकोप
गदरपुर विधानसभा में नशा आज सबसे गम्भीर सामाजिक समस्याओं में से एक बनता दिखाई देता है। विभिन्न गांवों और कस्बों में बातचीत के दौरान अभिभावकों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नशे की बढ़ती पहुंच पर चिंता व्यक्त की। लोगों का कहना है कि शराब, कच्ची शराब, अवैध शराब, स्मैक और अन्य सूखे नशे का प्रचलन पहले की तुलना में बढ़ा है। लोगों का कहना है कि युवाओं के बीच नशे की लत तेजी से फैल रही है, जिससे परिवार और समाज दोनों प्रभावित हो रहे हैं। कार्रवाई के दावे तो किए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर समस्या कम होती दिखाई नहीं देती। कई परिवारों ने इसे आने वाली पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। नशे के मुद्दे पर बात करते हुए कई स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में परम्परागत रूप से उपयोग किए जाने वाले भांग के बीजों की खेती पर तो कार्रवाई होती है, पहाड़ों में भांग के बीजों का उपयोग वर्षों से खानपान का हिस्सा रहा है। भांग के बीजों का उपयोग चटनी और अन्य खाद्य पदार्थों में किया जाता है तथा इसे पारम्परिक रूप से स्वास्थ्यवर्धक भी माना जाता है लेकिन जहां एक तरफ पहाड़ों में पुलिस दूर-दराज के गांवों तक पहुंचकर ऐसी फसलों को नष्ट कर देती है लेकिन गदरपुर क्षेत्र में जिन स्थानों पर खुलेआम नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली भांग उग रही है, वहां अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं देती। दिनेशपुर क्षेत्र के कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि चैराहे और आस-पास के इलाकों में उगी भांग की ओर प्रशासन का ध्यान नहीं जाता। लोगों का आरोप है कि रात के समय कुछ असामाजिक तत्व इन पौधों का इस्तेमाल नशे के लिए करते हैं।

किसानों के सामने बढ़ती चुनौतियां
गदरपुर विधानसभा कृषि प्रधान क्षेत्र है और यहां बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है। किसानों से बातचीत में सामने आया कि फसल नुकसान, बढ़ती लागत, खाद की उपलब्धता, भूमि अधिकार और कृषि से घटती आमदनी जैसे मुद्दे यहां पैर पसारे हुए हैं। कई किसानों ने बताया कि इस वर्ष मौसम की मार ने उनकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। जब गेहूं की फसल कटाई के लिए तैयार थी, उसी दौरान हुई बारिश और तेज हवाओं के कारण बड़ी मात्रा में फसल खेतों में गिर गई। किसानों के अनुसार कई स्थानों पर प्रति एकड़ 4 से 5 कुंतल तक उत्पादन का नुकसान हुआ। इसके बावजूद प्रभावित किसानों को राहत या मुआवजे को लेकर कोई विशेष पहल दिखाई नहीं दी, जिससे किसानों में निराशा है। किसानों का कहना है कि फसल उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है लेकिन उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा। कई किसानों ने बताया कि खेती से होने वाली आय और लागत के बीच का अंतर लगातार कम होता जा रहा है, जिससे कृषि कार्य आर्थिक रूप से कठिन होता जा रहा है। खाद की उपलब्धता भी किसानों की प्रमुख समस्याओं में शामिल है।

कई किसानों ने शिकायत की कि उन्हें खाद लेने के लिए लम्बी कतारों में खड़ा होना पड़ता है। किसानों का कहना है कि कई बार जरूरत के समय पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध नहीं हो पाती। कुछ किसानों ने यह भी बताया कि भूमि के आकार के अनुपात में खाद वितरण को लेकर भी असंतोष है और उन्हें आवश्यकता के अनुसार खाद नहीं मिल पाती। कृषि लागत बढ़ने को लेकर किसानों ने यह भी कहा कि खाद के बोरे पहले की तुलना में वजन में कम हुए हैं जबकि कीमतें बढ़ी हैं। किसानों का मानना है कि खेती की लागत बढ़ने से उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। कई किसानों ने कृषि से जुड़ी सरकारी सहायता योजनाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कृषि उपकरणों, सब्सिडी और अन्य सहायता योजनाओं का लाभ पहले की तुलना में कम दिखाई देता है। किसानों का मानना है कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए कृषि सहायता योजनाओं को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

गदरपुर की एक प्रमुख समस्या है गूलरभोज क्षेत्र की रेलवे स्टेशन में प्लेटफार्म नम्बर दो पर न तो बैठने की जगह है और न ही यात्रियों के लिए कोई टीन शेड आदि डाला हुआ है। जब रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नम्बर एक पर ट्रेन पहुंचती है तो दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए यात्रियों को ट्रेनों के डिब्बों से होकर दूसरी तरफ जाना पड़ता है जिस कारण कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। गूलरभोज रेलवे स्टेशन पर मूलभूत समस्याओं की कमी बनी हुई है जबकि यहां से प्रतिदिन 200 से ज्यादा यात्री हल्द्वानी और काशीपुर की ओर आवाजाही करते हैं।

भूमि अधिकार और वर्ग-4 भूमि का मुद्दा
यहां भूमि अधिकारों का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। कई ग्रामीणों का कहना है कि उनके परिवार पीढ़ियों से कृषि भूमि पर खेती करते आ रहे हैं। कुछ किसानों ने दावा किया कि पहले वर्ग-4 भूमि पर कब्जाधारियों का रिकाॅर्ड दर्ज किया जाता था लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऐसी प्रक्रियाओं में कमी आई है। ग्रामीणों का कहना है कि लम्बे समय से खेती कर रहे परिवारों में भूमि अधिकारों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। लोगों का मानना है कि भूमि रिकाॅर्ड और अधिकारों से जुड़े मामलों का पारदर्शी एवं स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसानों के सामने किसी प्रकार की असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न न हो।

सफाई व्यवस्था और कूड़ा निस्तारण की समस्या
गदरपुर विधानसभा क्षेत्र में विकास से जुड़े अन्य मुद्दों के साथ-साथ सफाई व्यवस्था की स्थिति भी गम्भीर चिंता का विषय दिखाई दी। कई स्थानों पर गंदगी और कूड़ा निस्तारण की समस्या स्पष्ट रूप से देखने को मिली। काकर सेतु से रुद्रपुर-दिनेशपुर मार्ग पर सड़क के दोनों ओर बड़े पैमाने पर कूड़े के ढेर पड़े मिले। पुल के नीचे बहते पानी में भी प्लास्टिक, पाॅलीथीन और अन्य प्रकार का कचरा जमा दिखाई दिया, जिससे आस- पास का क्षेत्र प्रदूषित एवं अव्यवस्थित नजर आया। मौके पर दुर्गंध की स्थिति इतनी गम्भीर थी कि वहां कुछ समय तक खड़ा रहना भी कठिन महसूस हुआ। यह भी देखा गया कि यह समस्या केवल इस मार्ग तक सीमित नहीं है।
विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में सड़क किनारे, खाली स्थानों और सार्वजनिक क्षेत्रों में भी कूड़ा फैला हुआ दिखाई दिया। कई स्थानों पर नियमित सफाई व्यवस्था के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले, जिसके चलते कचरा लम्बे समय से जमा होता प्रतीत हुआ। मौके पर मौजूद परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि कूड़ा निस्तारण और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर अभी भी प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता है। खुले में पड़े कचरे से न केवल क्षेत्र की स्वच्छता प्रभावित होती दिखाई दी बल्कि इससे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की सम्भावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

विधायक के प्रति मिला-जुला नजरिया
स्थानीय लोगों के बीच विधायक अरविंद पाण्डेय के प्रति पूरी तरह नकारात्मक या पूरी तरह सकारात्मक माहौल दिखाई नहीं दिया। कई लोगों का कहना था कि विधायक क्षेत्र में आते हैं, लोगों से मिलते हैं और उनकी पहुंच आम जनता तक बनी हुई है। कुछ स्थानीय नागरिकों ने बताया कि व्यक्तिगत कार्यों और जनसुनवाई के मामलों में विधायक का व्यवहार सहज और उपलब्ध रहने वाला माना जाता है। हालांकि दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोगों ने यह भी कहा कि क्षेत्र की समस्याओं के अनुपात में विकास कार्यों की गति अपेक्षित नहीं रही। लोगों का मानना है कि केवल जनता के बीच पहुंच बनाए रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में भी ठोस परिणाम दिखाई देने चाहिए थे। कुल मिलाकर विधानसभा में विधायक की व्यक्तिगत छवि और जनता से सम्पर्क को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक राय सुनने को मिली लेकिन विकास कार्यों को लेकर लोगों में असंतोष और अधिक अपेक्षाएं भी स्पष्ट रूप से दिखाई दीं।

गदरपुर में डबल इंजन सरकार फेल
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मेरा मुकाबला बेहद करीबी रहा था। मैं मात्र 1120 मतों के अंतर से चुनाव हारा था। दोनों प्रमुख प्रत्याशियों को 50 हजार से अधिक वोट मिले थे। यह परिणाम अपने आप में बताता है कि गदरपुर विधानसभा में कांग्रेस का मजबूत आधार रहा है। यदि पिछली बार कांग्रेस के भीतर कुछ लोगों ने भीतरघात न किया होता तो यह सीट कांग्रेस के खाते में जाती। पिछले साढ़े चार वर्षों से मैं लगातार क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ ही जनता के बीच सक्रिय हूं। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां कांग्रेस के पक्ष में हैं। कांग्रेस नेतृत्व सभी को साथ लेकर चलने का काम कर रहा है और इसका सकारात्मक प्रभाव क्षेत्र में दिखाई दे रहा है।
भाजपा विधायक और उनकी टीम पिछले साढ़े चार वर्षों में जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए। जिन विकास कार्यों और चुनावी वादों को लेकर जनता ने उन्हें चुना था, वे पूरे नहीं हो सके। क्षेत्र के विकास पर ध्यान देने के बजाय भाजपा के नेता आपसी खींचतान और विवादों में उलझे रहे। इसका नुकसान सीधे गदरपुर विधानसभा की जनता को उठाना पड़ा।

केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार है तथा विधायक भी भाजपा के हैं, इसके बावजूद गदरपुर विधानसभा विकास से कोसों दूर है। डबल इंजन सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए गए लेकिन उसका लाभ क्षेत्र की जनता को नहीं मिल पाया। गदरपुर-मटकोटा सड़क को बनने में लगभग चार वर्ष लग गए और अब चुनाव नजदीक आने पर उसका काम पूरा किया जा रहा है। दुखद यह है कि इस सड़क को लेकर भी भाजपा के नेता आपस में श्रेय लेने की होड़ में लगे हुए हैं।

सच्चाई यह भी है कि स्थानीय विधायक अरविंद पाण्डेय और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बीच राजनीतिक मतभेदों का असर क्षेत्र के विकास पर पड़ा। मुख्यमंत्री ने भी क्षेत्र को अपेक्षित महत्व नहीं दिया और विधायक ने भी उतनी दृढ़ता से क्षेत्र के लिए संघर्ष नहीं किया, जितनी अपेक्षा जनता करती थी। विधायक निधि से हुए कार्य भी जनता को स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते।

जब अरविंद पाण्डेय कैबिनेट मंत्री थे, तब लोगों को उम्मीद थी कि गदरपुर विधानसभा को डिग्री कॉलेज, बेहतर अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी लेकिन जनता की अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं। दिनेशपुर अस्पताल की स्थिति आज भी चिंताजनक है। वहां पर्याप्त डॉक्टर, मशीनें और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

गदरपुर विधानसभा में लगभग 28 हजार बंगाली मूल के मतदाता हैं, जिनमें बड़ी संख्या अनुसूचित जाति समुदाय की है। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के समय इस समाज के बच्चों को शिक्षा के लिए विशेष छात्रवृत्ति और सहायता मिलती थी। बाद में यह व्यवस्था बंद हो गई। शिक्षा मंत्री रह चुके स्थानीय विधायक ने इस समाज के हित में प्रभावी पहल क्यों नहीं की, इसका जवाब उन्हें देना चाहिए। आज स्थिति यह है कि शासन और प्रशासन पर जनप्रतिनिधियों का प्रभाव भी कमजोर दिखाई देता है। कई बार सत्ताधारी दल के विधायक, सांसद और पदाधिकारियों की बातों को भी प्रशासन गम्भीरता से नहीं लेता।

प्रेमानंद महाजन, पूर्व विधायक, गदरपुर

अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है
मैं भारतीय जनता पार्टी का एक साधारण कार्यकर्ता हूं और पूर्व में दो बार मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा चुका हूं। मेरा मानना है कि गदरपुर विधानसभा लम्बे समय तक विकास की दृष्टि से पिछड़ा क्षेत्र रहा है। इससे पहले भी यहां विपक्ष के विधायक रहे लेकिन विकास के नाम पर अपेक्षित कार्य नहीं हो सके। जब से अरविंद पाण्डेय जी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, तब से पिछले लगभग 15 वर्षों में विकास कार्यों को गति मिली है। यह सही है कि जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है लेकिन उपलब्ध संसाधनों और परिस्थितियों के अनुसार क्षेत्र में लगातार कार्य हुए हैं। विधायक के पास सीमित संसाधन होते हैं और कई विकास कार्य विभिन्न विभागों एवं सरकार की प्राथमिकताओं पर भी निर्भर करते हैं। अरविन्द पाण्डेय जी शिक्षा मंत्री रहे। उनके कार्यकाल के पांच वर्षों में से लगभग दो वर्ष कोरोना महामारी की वजह से प्रभावित रहे। इसके बावजूद तीन वर्षों में उन्होंने शिक्षा और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। हमें उम्मीद थी कि वे दोबारा मंत्री बनेंगे और क्षेत्र में विकास कार्यों को और गति मिलेगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। आज भी दिनेशपुर अस्पताल का उच्चीकरण एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कुछ तकनीकी कारणों से यह कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है लेकिन विधायक लगातार इसके लिए प्रयासरत हैं। यदि यह कार्य शीघ्र पूरा हो जाता है तो क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ा सुधार आएगा। उनके कार्यकाल में क्षेत्र में स्टेडियम का निर्माण हुआ, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कई कार्य हुए तथा आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया गया। कुल मिलाकर विकास कार्य संतोषजनक रहे हैं और जो कार्य अभी शेष हैं, उन्हें पूरा कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षा मंत्री के रूप में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक उत्तराखण्ड में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को लागू करना रहा। इससे शिक्षा व्यवस्था में समानता लाने का प्रयास हुआ। गरीब और अमीर, दोनों वर्गों के बच्चों के लिए एक समान पाठ्यक्रम की व्यवस्था की गई, जो शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम था। रोजगार के क्षेत्र में भी गदरपुर विधानसभा को सिडकुल का लाभ मिला है। क्षेत्र के बड़ी संख्या में युवा वहां कार्यरत हैं। शिक्षित और अशिक्षित दोनों वर्गों के लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। हालांकि रोजगार के क्षेत्र में अभी और कार्य किए जाने की आवश्यकता है, जिसके लिए सरकार और जनप्रतिनिधि लगातार प्रयास कर रहे हैं।

अनादि रंजन, पूर्व ब्लाक अध्यक्ष, भाजपा

सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य सुविधाओं की कमी
यह सत्य है कि दिनेशपुर के सरकारी अस्पताल में डाॅक्टरों और अन्य सुविधाओं की कमी रही है। दिनेशपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रमिक वर्ग के लोग निवास करते हैं, जिन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता है। वर्तमान में कई मरीजों को उपचार के लिए रुद्रपुर या अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। अस्पताल के उच्चीकरण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं और हमें विश्वास है कि निर्धारित मानकों के अनुरूप वहां जल्द ही आवश्यक डाॅक्टरों और सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। हाल के समय में महिला चिकित्सक की नियुक्ति भी कराई गई है। इसी प्रकार गदरपुर अस्पताल में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में सरकार ने कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं और आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी। खनन के विषय में मेरा मानना है कि गदरपुर क्षेत्र में दशकों से खनन गतिविधियां होती रही हैं। सड़क, भवन, अस्पताल, स्कूल, काॅलेज, उद्योग तथा आवासीय निर्माण जैसे विकास कार्यों के लिए रेत, बजरी और अन्य निर्माण सामग्री की आवश्यकता स्वाभाविक रूप से पड़ती है। इसलिए खनन इस क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। हालांकि पहले खनन गतिविधियों में पारदर्शिता का अभाव था और सरकार को अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो पाता था लेकिन वर्तमान सरकार ने खनन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया है। इसके परिणामस्वरूप राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां लगभग 250 करोड़ रुपए वार्षिक राजस्व प्राप्त होता था, वहीं वर्तमान में खनन से लगभग 1200 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। यह प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। पारदर्शी खनन व्यवस्था और राजस्व वृद्धि को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी प्रदेश को अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्रदान की है। हमारी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खनन पूरी पारदर्शिता के साथ हो तथा उससे प्राप्त राजस्व का उपयोग सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य विकास कार्यों को गति देने में किया जाए। आने वाले वर्षों में भी भारतीय जनता पार्टी विकास और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए गदरपुर विधानसभा के समग्र विकास के लिए कार्य करती रहेगी।

गुंजन सुखीजा, प्रदेश मंत्री, भाजपा

शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा गदरपुर
मेरा मानना है कि गदरपुर विधानसभा की जनता भारतीय जनता पार्टी और उसके जनप्रतिनिधियों से ऊब चुकी है। जनता ने भाजपा के विधायक को कई बार देखा है, भाजपा सरकार को कई बार अवसर दिया है लेकिन अलग-अलग तरीकों से जनता को केवल आश्वासन ही मिले हैं। इस बार गदरपुर की जनता पूरी तरह दृढ़ संकल्पित है और मेरा मानना है कि वह भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करने का काम करेगी। भाजपा के लोग अक्सर अपने आंतरिक विरोध और आपसी खींचतान की बातें करते हैं लेकिन मेरी समझ में यह सब एक योजनाबद्ध रणनीति का हिस्सा है। मेरा आरोप है कि ये लोग जनता के सामने अलग-अलग दिखाई देते हैं जबकि अवसर मिलने पर सभी ने अपने-अपने तरीके से आम आदमी के अधिकारों का हनन किया है, गरीबों का नुकसान किया है, क्षेत्र की जमीनों पर कब्जे को बढ़ावा दिया है तथा अवैध खनन के माध्यम से जल, जंगल और जमीन जैसी प्राकृतिक सम्पदाओं को माफियाओं के हवाले करने का काम किया है। मेरी दृष्टि में यह आपसी खींचतान भी एक राजनीतिक रणनीति है ताकि जनता का ध्यान शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास जैसे वास्तविक मुद्दों से भटकाया जा सके।

यदि शिक्षा की बात करें तो गदरपुर विधानसभा का विधायक प्रदेश का शिक्षा मंत्री रहा है। यह गदरपुर की जनता के लिए गर्व और सौभाग्य की बात हो सकती थी कि जिस व्यक्ति को उन्होंने विधायक चुना, उसे पूरे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा नीति को सम्भालने की जिम्मेदारी मिली। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलेगी, नए विद्यालय बनेंगे, भवनों का विकास होगा, नए विषय शुरू होंगे, शिक्षकों की नियुक्तियां होंगी और युवाओं को बेहतर अवसर प्राप्त होंगे लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि इन अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा गया। मैं यह राजनीतिक आरोप के रूप में नहीं बल्कि उदाहरण के साथ कहना चाहता हूं कि क्षेत्र का प्रमुख शिक्षण संस्थान एएनके इंटर कॉलेज विधायक के आवास से मात्र दो-तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है लेकिन शिक्षा मंत्री रहते हुए भी वहां न नए भवन बने, न पर्याप्त शिक्षक नियुक्त हुए, न नए विषय शुरू किए गए और न ही जर्जर भवनों की स्थिति में अपेक्षित सुधार हो सका। आज भी वहां कई भवन जर्जर अवस्था में हैं और विद्यार्थियों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। इसलिए मैं मानता हूं कि शिक्षा के क्षेत्र में जो योगदान होना चाहिए था, वह दिखाई नहीं देता। नशे और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर भी भाजपा सरकार विफल रही है। पहले भाजपा के नेता यह कहते थे कि दूसरे राज्यों के तस्कर उत्तराखण्ड का माहौल खराब कर रहे हैं लेकिन आज राज्य में भी भाजपा की सरकार है, केंद्र में भी भाजपा की सरकार है और पुलिस प्रशासन भी उन्हीं के अधीन कार्य कर रहा है। ऐसे में यदि नशे पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है तो इसके लिए सरकार को जवाब देना चाहिए। मेरा आरोप है कि नशा तस्करों और भाजपा के कुछ नेताओं के बीच मिलीभगत के कारण यह समस्या समाप्त नहीं हो पा रही है। मैं इस संदर्भ में पूर्व पुलिस महानिदेशक के एक सार्वजनिक बयान का उल्लेख करना चाहूंगा, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि पुलिस ईमानदारी और गम्भीरता से कार्य करें तथा उसे सरकार का पूरा सहयोग मिले तो अपराध और नशा तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। मेरा मानना है कि बिना प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण के इस स्तर पर नशा तस्करी सम्भव नहीं है। आज स्थिति यह है कि भूमि विवादों से लेकर अन्य मामलों तक में माफिया तंत्र मजबूत होता दिखाई देता है और यही कारण है कि समाज में अपराध और नशे की समस्या लगातार बढ़ रही है।

किसानों के लिए प्रभावी मुआवजे की चर्चा तक नहीं हुई। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। खाद और उर्वरक प्राप्त करने के लिए उन्हें लम्बी कतारों में खड़ा होना पड़ता है। पहले जो खाद की बोरियां 50 किलोग्राम की मिलती थीं, उनका वजन घटा दिया गया है जबकि कीमतों में वृद्धि हुई है। कृषि उपकरणों और कृषि सहायता योजनाओं की स्थिति भी पहले की तुलना में कमजोर हुई है। इसके अलावा क्षेत्र में ऐसे अनेक किसान हैं जो पीढ़ियों से भूमि पर खेती कर रहे हैं लेकिन अब उन्हें अपने भूमि अधिकारों को लेकर चिंता सताने लगी है। पहले जिन भूमि अभिलेखों में कब्जे दर्ज किए जाते थे, अब उनमें भी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। किसानों को आशंका है कि भविष्य में उनकी जमीनों पर अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
मेरा मानना है कि वर्तमान सरकार आम गरीब, किसान और मजदूर की सरकार नहीं है। आज प्रदेश में भू-माफिया, खनन माफिया, नकल माफिया और अन्य प्रकार के संगठित हित समूह लगातार मजबूत हुए हैं। सरकार और भाजपा के नेता वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय अन्य विषयों को प्रमुखता देते हैं जबकि जनता शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कानून व्यवस्था और किसानों के मुद्दों का समाधान चाहती है। मेरा स्पष्ट आरोप है कि प्रदेश में माफिया तंत्र को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और यही कारण है कि आम जनता की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

सुमित सिंह भुल्लर, अध्यक्ष, प्रदेश युवा कांग्रेस, उत्तराखण्ड

गदरपुर विधानसभा 2026 – विधायक रिपोर्ट कार्ड
विधायक : अरविंद पाण्डेय (अवधि : 4 वर्ष)
क्र. क्षेत्र                              मुद्दा / जमीनी स्थिति                 अंक  (10 में)

  1. जनसम्पर्क व क्षेत्रीय सक्रियता क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव बरकरार लेकिन जनता के बीच विकास से अधिक राजनीतिक खींचतान की चर्चा 6/10
  2. शिक्षा व उच्च शिक्षा पूर्व शिक्षा मंत्री का क्षेत्र होने के बावजूद डिग्री कॉलेज सीमित संसाधनों में संचालित, शिक्षा ढांचा अपेक्षानुसार विकसित नहीं 3/10
  3. स्वास्थ्य सेवाएं अस्पतालों में मशीनें हैं लेकिन ऑपरेटर और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, दिनेशपुर में एम्बुलेंस तक नहीं 2/10
  4. सड़क व आधारभूत ढांचा कई सड़कों का निर्माण हुआ लेकिन आबाद नगर, महावीर नगर, गूलरभोज पुल और रोडवेज संचालन जैसे मुद्दे लम्बित 4/10
  5. कृषि व किसान हित फसल नुकसान, खाद संकट, बढ़ती लागत और मुआवजा न मिलने से किसान असंतुष्ट 3/10
  6. भूमि अधिकार व वर्ग-4 भूमि वर्षों पुराना मुद्दा, स्थायी समाधान नहीं, किसानों में असुरक्षा की भावना 3/10
  7. सफाई व नगर प्रबंधन काकर सेतु से दिनेशपुर मार्ग तक कूड़े के ढेर, गंदगी और कचरा निस्तारण की गम्भीर समस्या 2/10
  8. नशा नियंत्रण क्षेत्र में नशे के बढ़ते प्रकोप को लेकर व्यापक चिंता, प्रभावी नियंत्रण के परिणाम दिखाई नहीं देते 3/10
  9. विकास परियोजनाओं का क्रियान्वयन डबल इंजन सरकार और पूर्व मंत्री का क्षेत्र होने के बावजूद कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अधूरी या धीमी 2/10
  10. समग्र विकास प्रदर्शन विकास कार्य हुए लेकिन अपेक्षाओं और उपलब्धियों के बीच बड़ा अंतर, जनता की प्रतिक्रिया मिश्रित 4/10
कुल अंक :  2.3/10               फाइनल ग्रेड : फेल

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