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विपक्षी एकजुटता के बाद भी संसद से पारित हुआ नागरिकता संशोधन विधेयक

 लोकसभा और राजयसभा में भारी  हंगामे के बीच नागरिकता (संशोधन) विधेयक, सीएबी,  पारित हो गया है। संसद के उच्च सदन में नागरिकता संशोधन बिल के समर्थन में 125 वोट , जबकि बिल के खिलाफ सिर्फ 105 वोट ही पड़े। यह बिल लोकसभा में पहले ही पारित हो चुका है, अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन हो जाएगा।गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन बिल कल 11 नवंबर बुधवार दोपहर में ही राज्यसभा में पेश किया।

राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पर काफी हंगामा हुआ. विपक्ष ने इस बिल को पहले सेलेक्ट कमिटी के पास भेजे जाने का प्रस्ताव रखा।  हालांकि यह प्रस्ताव भी वोटिंग के बाद गिर गया।  वहीं अन्य विपक्षी सांसदों ने इस बिल में संशोधन के प्रस्ताव रखे, वो भी वोटिंग के बाद गिर गए। शिवसेना ने इस बिल पर राज्यसभा में वॉक आउट किया और किसी भी प्रकार की वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।  एक दिन पहले शिवसेना ने लोकसभा में इस बिल का समर्थन किया था।

नागरिकता संशोधन बिल पर राज्यसभा में  बहुमत बनाम नैतिकता की लड़ाई की जमीन  में भारी हंगामे  के बीच नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 राजयसभा में भी पारित हो गया। इस विधेयक में तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना के शिकार हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और इसाई धर्मावलंबियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। लोकसभा में विधेयक के विरोध में 80 तो पक्ष में 311 वोट पड़े थे।

राज्यसभा में सत्ताधारी एनडीए के पास बहुमत नहीं था । लेकिन  जिस तरह से अल्पमत में होने के बावजूद सरकार ने इससे पहले भी  एक के बाद एक तीन तलाक और अनुच्छेद 370 को हटाने वाले विधेयक को पास करवा लिया था ठीक उसी तरह वह नागरिकता संसोधन बिल को  भी पास करवाने  में सफल हुई ।

नागरिकता संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान पी चिदंबरम ने कहा कि यह विधेयक अदालत में गिर जाएगा। उन्होंने कहा, ‘मुझे पूरा यकीन है कि ये बिल अदालत में नहीं टिकेगा। मेरे सवाल हैं कि आपने तीन देशों को ही क्यों चुना, बाकी को क्यों छोड़ा? आपने छह धर्मों को ही क्यों चुना? सिर्फ ईसाई को क्यों शामिल किया भूटान के ईसाई, श्रीलंका के हिंदुओं को क्यों बाहर रखा?’जिसके जवाब में गृह मंत्री ने कहा कि संसद को मत डराइए  कि इसके दायरे में कोई कोर्ट घुस जाएगा । हमारा काम अपनी विवेक, बुद्धि से कानून बनाना है और जो हमने किया है और मुझे यकीन है कि यह कानून अदालत में भी सही पाया जाएगा।’ उन्होंने विरोधियों को बंद कमरे में आत्मा से सवाल पूछने की नसीहत दी।

नागरिकता संशोधन बिल में संशोधन का प्रस्ताव भी गिरा

राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल में विपक्ष के संशोधन किए जाने के प्रस्ताव को भी सदन में बहुमत नहीं मिल पाया है। इस प्रस्ताव के खिलाफ 116 वोट पड़े जबकि समर्थन में सिर्फ 96 वोट ही पड़े। टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने इस बिल में संशोधन का प्रस्ताव रखा था।

नागरिकता संशोधन बिल पर वोटिंग से शिवसेना का वॉक आउट

 शिवसेना ने राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजे जाने के प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया शिवसेना ने इस दौरान सदन से वॉक आउट किया और इस बिल को सदन से पारित कराने में होने वाली वोटिंग से भी शिवसेना ने वॉक आउट किया।

नागरिकता संशोधन बिल सेलेक्ट कमिटी को नहीं भेजा जाएगा 

नागरिकता संशोधन बिल को सेलेक्ट कमिटी को भेजे जाने के खिलाफ राज्यसभामें कुल 124 वोट पड़ेण जबकि समर्थन में सिर्फ 99 वोट ही पड़े यानी कि यह बिल सेलेक्ट कमिटी को नहीं भेजा जाएगा। विपक्षी सदस्यों ने इस बिल को सेलेक्ट पैनल को भेजे जाने की मांग की थी।

 नागरिकता संशोधन बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजे जाने के लिए वोटिंग

राज्यसभा में विपक्ष ने नागरिकता संशोधन बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजे जाने की मांग की राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इसपर वोटिंग का निर्णय लिया इस बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजे जाने के लिए वोटिंग कराई गई जो सरकार के पक्ष में रहा।

अमित शाह ने नागरिकता संशोधन बिल पर राज्यसभा में भाषण के दौरान कहा कि शिवसेना ने लोकसभा में इस बिल का समर्थन किया था अब ऐसा क्या हुआ कि शिवसेना ने एक रात में अपना स्टैंड बदल दिया महाराष्ट्र की जनता इसका जवाब जानना चाहती है। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि पूरे देश को पता है कि बंटवारे के पीछे जिन्ना का हाथ था। जिन्ना की टू नेशन थ्योरी का कांग्रेस ने समर्थन किया था। आजादी के दौरान धर्म के आधार पर देश का बंटवारा क्यों किया गया।  भारत में रहने वाले मुस्लिमों को डरने की जरूरत नहीं है।  क्योंकि इस बिल में किसी की भी नागरिकता छीनने की बात नहीं की है इस बिल में सिर्फ बाहर से आए प्रताड़ित विभिन्न धर्म के लोगों को नागरिकता देने की बात की जा रही है।

गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि आर्टिकल 14 में धर्म के आधार पर उचित वर्गीकरण मान्य है।  उन्होंने  सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के कुछ फैसलों का हवाला देते हुए यह बात कही  कि पाकिस्तान ,अफगानिस्तान और बांग्लादेश के गैर.मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने का फैसला धर्म के आधार पर उचित वर्गीकरण का उदाहरण है इसलिए कहीं से भी यह बिल संविधान के आर्टिकल 14 के खिलाफ नहीं है।

अदालत जाने की तैयारी में कांग्रेस: कांग्रेस इस विधेयक के विरोध में अदालत जाने की तैयारी कर रही है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा में विधेयक का भारी विरोध करने वाले कपिल सिब्बल ने  इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही है। वही सोनिया गांधी ने इसे  काला दिन बताया।

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