बिहार में राज्यसभा की पांच सीटे खाली होने वाली हैं जिसे लेकर बिहार महागठबंधन में घमासान शुरू हो गया है। अब कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच तकरार शुरू हो गई है। इस बीच मंगलवार को रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की।
इस मुलाकात के बाद से अब कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्यसभा सीट के मसले पर रालोसपा कांग्रेस का साथ देगी। मुलाकात के बात रालोसपा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि राजद को अपना वादा पूरा करना चाहिए। कांग्रेस की राज्यसभा सीट की मांग जायज है।
राजद को Commitment पूरा करना चाहिये।कांग्रेस का कहना (राज्यसभा सीट की मांग) जाएज़ है। महागठबंधन के संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा हुई थी। :@UpendraRLSP
— Rashtriya Lok Morcha (@RLMofIndia) March 9, 2020
महागठबंधन की सयुंक्त कांफ्रेंस में इस बात की घोषणा की गई थी। कांग्रेस का कहना है कि राजद ने उसे बिहार की एक राज्यसभा सीट देने का वादा किया था। जबकि राजद ने ऐसे किसी भी वादे से इनकार कर दिया है।
बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्तिसिन्ह गोहिल की ओर से विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को राज्यसभा की एक सीट देने के वादे को पत्र लिखकर याद दिलाया गया।
रविवार को गोहिल का यह पत्र में मीडिया में रिलीज हो गया। पार्टी का कहना है कि हमें उम्मीद है कि राजद अपना वचन निभाएगी और उसे अपने कोटे की एक सीट देगी।
पत्र में गोहिल ने लिखा है कि यादव ने लोकसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में राजद ने अपने कोटे की एक सीट कांग्रेस को देने की बात कही थी। आशा है कि राजद अपने वादे को निभाएगी।
दूसरी तरफ राजद के उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने अपनी पार्टी द्वारा किए गए ऐसे किसी भी वादे से इनकार कर दिया है। तिवारी ने कहा, “राजद के राज्य अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने भी इसे स्पष्ट कर दिया है। हालांकि राजद अध्यक्ष लालूजी को इस मामले पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया है।”
अपनी राज्यसभा उम्मीदवारी को लेकर जारी कयासों पर गोहिल ने विराम लगाते हुए कहा, “यदि कांग्रेस को वादे के अनुसार एक राज्यसभा सीट मिलती है तो उसका उम्मीदवार केवल बिहार का कोई नेता होगा। मेरे जैसा कोई नेता जो बिहार का मतदाता नहीं है वह कांग्रेस का उम्मीदवार नहीं हो सकता।”
गौरतलब है कि बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं। विधानसभा की वर्तमान स्थिति के मुताबिक जदयू और राजद दो सीटें और भाजपा एक सीट आसानी से जीत सकते हैं। राजद की ओर से लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को कम सीटें दी गई थी। इस बात को लेकर उस वक्त भी कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल में तकरार पैदा हो गई थी।
लेकिन राजद ने राजयसभा की एक सीट अपने कोटे से देने का वादा किया तब जाकर मामला शांत हो गया था। लेकिन अब जब राज्यसभा की सीटों के नामांकन किया जा रहा है तो राजद ने अपने कोटे से सीट देने के फैसले से इंकार कर दिया है।

