चारधाम यात्रा को सफल बनाने के लिए करोड़ों का बजट सरकार द्वारा दिया गया। जिसमें यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं दिलाना था। पर्यटन विभाग ने सुलभ शौचालयों के निर्माण में लेकिन भारी अनियमितता बरती। पीपलकोटी का सुलभ शौचालय इसका उदाहरण है। जिसे स्थानीय लोगों के विरोध के बाद भी हाइवे के मलबे पर ही निर्मित कर दिया गया। 30 लाख रुपए की लागत से बने इस शौचालय की स्थिति यह है कि वह कभी भी गिर सकता है
उत्तराखण्ड के विकास में जहां हर वर्ष आने वाली प्राकृतिक आपदा रोड़ा बन रही है वहीं अधिकारियों के नकारेपन व लापरवाही से भी प्रदेश को करोड़ों रुपए का चूना लग रहा है।
बावजूद अधिकारी इससे सबक लेने को तैयार नहीं हैं। इसका उदाहरण है पर्यटन विभाग। चमोली जनपद के पीपलकोटी में पर्यटन विभाग के सौजन्य से बना सुलभ शौचालय महज 6 माह में ही गिरने की स्थिति में है।
चारधाम यात्रा पड़ावों पर तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों की सुविधा के लिए पर्यटन विभाग द्वारा आधुनिक शौचालयों का निर्माण तो किया जा रहा है, लेकिन शौचालय को बनाने से पहले सही भूमि को चिन्हित करना विभाग व प्रशासन उचित नहीं समझ रहा है, जिसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ रहा है। चारधाम यात्रा का मुख्य पड़ाव नगर पंचायत पीपलकोटी में यात्रा सीजन में हर दिन हजारों तीर्थयात्री ठहरते हैं, जिससे यात्रा सीजन में नगर पंचायत पीपलकोटी में रौनक बनी रहती है। जहां पर 60 से अधिक होटल तीर्थयात्रियों व पर्यटकों के ठहरने के लिए बने हुए हैं। चारधाम यात्रा में ऋषिकेश से बदरीनाथ के बीच श्रद्धालुओं के लिए सबसे सुविधाजनक व सुरक्षित स्थान नगरपंचायत पीपलकोटी ही लगता है। जिससे यहां पर जून-जुलाई माह में पांच हजार से दस हजार तीर्थयात्री प्रतिदिन ठहरते हैं। जिससे होटल व रेस्टोरेंट व्यवसायियों के साथ ही नगर पंचायत से जुड़े आस-पास के गांवों के सैकड़ों लोगों का दुग्ध व सब्जी उत्पादन व्यवसाय भी अच्छा चलता है।
इससे सैकड़ों लोगों को रोजगार भी मिलता है। लेकिन नगर पंचायत पीपलकोटी में वाहन पार्किंग व पैदल बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब यात्रा पर चलने वाले तीर्थयात्रियों को सबसे अधिक शौचालय व पेयजल की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। भले नगर पंचायत पीपलकोटी ने कुछ जगहों पर अस्थाई शौचालय की व्यवस्था की है लेकिन बढ़ती तीर्थयात्रियों की संख्या के चलते वो भी नाकाफी साबित हो रही हैं।
पर्यटन विभाग द्वारा बदरीनाथ यात्रा का मुख्य पड़ाव नगर पंचायत पीपलकोटी के गडोरा में हाईवे पर आधुनिक शौचालय का भूमि परीक्षण के ही बदरीनाथ हाईवे चौड़ीकरण में निकले मकिंग डंपिंग जोन में स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद जबरदस्ती निर्माण कर दिया गया है। लाखों की लागत से बना यह सुलभ शौचालय कॉम्पलेक्स उद्घाटन से पहले ही जमींदोज होने के कगार पर है, जिसकी नींव पहली बारिश में ही पूरी तरह हिल गई है। अब अधिकारी एक दूसरे के ऊपर मामला डालकर अपनी जवाबदेही से बच रहे हैं। सवाल ये है कि आखिर स्थानीय लोगों और नगरपंचायत पीपलकोटी के मना करने के बावजूद तहसील प्रशासन द्वारा इसे बनाने की अनुमति क्यों दी गई?
पर्यटन विभाग के माध्यम से सुलभ शौचालय कॉम्पलेक्स द्वारा लगभग 25-30 लाख रुपए की लागत से यह इसी वर्ष जनवरी-फरवरी माह में बदरीनाथ हाईवे के पास बनाया गया था, जिसका स्थानीय लोगों द्वारा ये कह कर विरोध किया गया कि जिस जगह पर शौचालय का निर्माण किया जा रहा है वह बदरीनाथ हाईवे चौड़ीकरण से निकले मलवे का डंपिंग है जहां पर बनाना उचित नहीं है। लेकिन प्रशासन पर आरोप है कि उसके द्वारा उल्टे स्थानीय लोगों को डराया-धमकाया गया।
जिससे स्थानीय लोग पीछे हट गए। इतना ही नहीं नगर पंचायत पीपलकोटी द्वारा भी यहां पर शौचालय नहीं बनाने का सुझाव दिया गया। लेकिन तहसील प्रशासन की यहीं पर निर्माण करने की हठधर्मिता सरकार को लाखों का चूना लगा सकता है। सुलभ शौचालय कॉम्पलेक्स जहां पहली बारिश भी नहीं झेल पाई वहीं बनने के छह माह में ही कच्ची डंपिंग मिट्टी धंसने से शौचालय की नींव हिल चुकी है। जिसका अब कोई उपचार नहीं है।
बात अपनी-अपनी
हमने यह कार्य सुलभ कॉम्पलेक्स को दिया था, इसके बारे में ज्यादा जानकारी वही दे पाएंगे सोबत सिंह राणा, जिला पर्यटन अधिकारी चमोली गडोर में जिस जगह सुलभ शौचालय कॉम्पलेक्स का निर्माण किया गया, वहां पर नगर पंचायत के अस्थाई शौचालय बने थे। हमने प्रशासन को यहां पर स्थाई शौचालय नहीं बनाने का सुझाव दिया था, लेकिन प्रशासन ने हमारी नहीं सुनी।
बीना देवी, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत पीपलकोटी
पर्यटन विभाग व तहसील प्रशासन द्वारा जिस जगह पर सुलभ शौचालय कॉम्पलेक्स बनाया गया है, इसका स्थीनाय लोगों ने ये कह कर पहले ही विरोध कर दिया था कि यह स्थान हाईवे चौड़ीकरण में निकले मिट्टी का टीला है जो सुरक्षित नहीं है। बावजूद तहसील प्रशासन ने जबरन यहां पर बनाने की अनुमति दे दी। जिसका परिणाम है कि पहली बारिश व छह माह में ही शौचालय की नींव धंस चुकी है। जिससे सरकार को लाखों का नुकसान हुआ है।
अयोध्या हटवाल, समाजसेवी गडोरा

