देहरादून में एक तरफ जहां ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 का भव्य आयोजन हो रहा था। देश-विदेश के उद्योगपति उत्तराखण्ड में भविष्य की तस्वीर बना रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ भारत जोड़ो अभियान के तहत 30 सामाजिक संगठन और राजनीतिक दलों के लोग ‘जीतेगा इंडिया – बनेगा भारत’ का सपना साकार करने का मंथन कर रहे थे। जनसभा में मीडिया, सोशल मीडिया पर झूठ के जरिए दुष्प्रचार करने वालों को जवाब देने के लिए ट्रूथ आर्मी के साथ ही ‘जनता का घोषणा पत्र’ का ऐलान किया गया
देहरादून में जब देश-दुनिया के निवेशकों का मेला लगा हुआ था उसी समय नगर निगम के ऑडीटोरियम में भारत जोड़ो अभियान के तहत ‘जीतेगा इंडिया-बनेगा भारत’ का राज्य स्तरीय सम्मलेन का आयोजन भी किया गया जिसमें दो दर्जन से अधिक संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा कई राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया। सम्मलेन की शुरुआत सतीश धौलाखण्डी, त्रिलोचन भट्ट, हिमांशु चौहान, नितिन मलहेठा के जनगीत के साथ हुई। इससे पूर्व समाजसेविका कमला पंत ने सम्मेलन के उद्देश्यों को स्पष्ट किया। सम्मलेन में मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रीम कोर्ट के सुप्रसिद्ध अधिवक्ता और एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण के साथ ही प्रसिद्ध पर्यावरणविद रवि चोपड़ा शामिल हुए। योगेंद्र यादव, राजमोहन गांधी और प्रोफेसर आनंद कुमार कार्यक्रम में पहुंच नहीं पाए तो उनके वीडियो संदेश जनसभा में मौजूद लोगों को सुनाए गए। प्रसिद्ध कवि गिर्दा की कविताओं के वीडियो भी सम्मलेन में आकर्षण का केंद्र बने रहे।
इस सम्मेलन में नफरत भरी राजनीति और स्थानीय जन मुद्दों के साथ लोकतंत्र की सुरक्षा पर सार्थक विचार-विमर्श किया गया। जिसमें निर्णय लिया गया कि अगर सभी संगठन एक हो जाए तो सत्ता परिवर्तन में अपनी भूमिका को तय कर सकते हैं। इसके लिए एक स्वर में संगठित होने की आवश्यकता है। इस दौरान जन संगठनों की ओर से ‘जनता का घोषणा पत्र’ भी जारी किया गया। साथ ही यह भी घोषणा की गई कि हम उसी पार्टी का समर्थन करेंगे जो जनता का घोषणा पत्र लागू करेंगे। सम्मलेन में कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा महरा दसौनी के अलावा समाजवादी पार्टी के डॉ एसएन सचान, सीपीआई के समर भंडारी, सीपीएम के सुरेंद्र सिंह सजवाण, सीपीआई (एमएल) इंद्रेश मैखुरी ने जनता के घोषणा पत्र पर सहमति दी।
इस सम्मलेन में सभी ने एकजुट होकर एक ट्रूथ आर्मी के गठन बनाने का ऐलान किया जो मीडिया और सोशल मीडिया पर परोसे जा रहे झूठ के खिलाफ ट्रोल आर्मी का मुकाबला करेंगे। सम्मलेन में वक्ताओं के केंद्र में भाजपा रही। भाजपा के प्रति चिंता का भाव देखा गया। प्रसिद्ध पर्यावरणविद रवि चोपड़ा के अनुसार अगर फिर से केंद्र में भाजपा सरकार आती है तो संविधान का बदलना तय है। भाजपा के पास वैकल्पिक संविधान तैयार है। तीसरी बार सत्ता में आते ही वह विरोध की आवाजों की चिंता किए बिना संविधान को बदल देंगे। प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाया जा रहा है। विरोध की आवाज आंदोलनों की तरफ से आए या विपक्ष से, पत्रकारों की तरफ से आए या स्वतंत्र चिंतकों की ओर से, उसे दबाया जाना गलत है। प्रशांत भूषण ने आगे कहा कि न्यायपालिका पर सबसे ज्यादा उम्मीद होती है लेकिन हाल के वर्षों में न्यायपालिका द्वारा भी तथ्यों को नजरअंदाज कर कई महत्वपूर्ण फैसले सरकार के पक्ष में दिए जाते रहे हैं।
सम्मेलन में अधिकतर ने मौजूदा समय में जारी तानाशाही और स्थानीय जन मुद्दों की तरफ ध्यान आकर्षित किया और एक स्वर में कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में जन आक्रोश को भाजपा के खिलाफ वोट में तब्दील करना होगा। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की शानदार सफलता को याद करते हुए उसके पीछे के जन आंदोलन और बूथ स्तर तक के मैनेजमेंट की सराहना की गई। वक्ताओं ने उत्साहित स्वर में कहा कि उत्तराखण्ड में भी भाजपा को हराया जा सकता है इसके लिए सामाजिक सौहार्द और एकता की जरूरत है। भाजपा ने देश में सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचाया है। इसे देशभर में हो रही सांप्रदायिक घटनाओं से समझा जा सकता है।
इस सम्मलेन के जरिए प्रदेश में रोजगार कम होने, भ्रष्टाचार चरम पर होने के साथ ही नशे के कारोबार के बढ़ने पर चिंता व्यक्त की गई। बुद्धिजीवियों ने इसपर भी चिंतन किया कि किस तरह सरकार स्वतंत्र और वैकल्पिक मीडिया के पीछे हाथ धोकर पड़ी है। देश में धार्मिक उन्माद बढ़ रहा है जो आने वाले भविष्य के लिए भयावह है। उत्तराखण्ड के मद्देनजर यह भी कहा कि यहां जमीनी मुद्दों की हालत भी ठीक नहीं है। जल, जंगल और जमीन पर कंपनी राज कायम हो रहा है, सरकारी संस्थाओं का निजीकरण किया जा रहा है, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की हालत बद से बदतर हो रही है। ऐसे में उदारवादी संगठनों को एक साथ आना होगा। मजदूर, किसान, अल्पसंख्यक, बेरोजगार, महिलाएं सभी को संयुक्त होकर लड़ना होगा।

