कोरोना वायरस का संक्रमण का दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। संक्रमण को रोकने के लिए भारत सरकार की ओर से देश में 21 दिनों का लॉकडाउन जारी है।
लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर इस वायरस के बारे में झूठी बाते और वीडियो वायरल किए जा रहे हैं। मैसेज और वीडियो के जरिए कोरोना के बारे में गलत जानकारियां फैलाई जा रही हैं।
ऐसे ही एक मामला कानपुर से सामने आया है। यहां एक व्यक्ति को मिर्गी की बीमारी थी लेकिन लोगों ने उसका वीडियो बना कोरोना का मरीज बता कर वायरल कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
वीडियो कानपूर के अस्पताल में कोरोना वार्ड के सामने का है। मरीज को मिर्गी का अटैक आया था जिसकी वजह से वह तड़प रहा था। ऐसे में लोगों ने इसको कोरोना मरीज समझकर वीडियो बनाना शुरू किया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
कानपुर के हैलेट अस्पताल का ये वायरल वीडियो बताया जा रहा, मरीज को मिर्गी की बीमारी है, कृपया इस वीडियो को लेकर कोई अफवाह ना फैलाएं। डॉक्टरों और पुलिस पर कोई दोष न मढ़ें। @Uppolice pic.twitter.com/N9B3nC8riS
— Sudhir Kumar (@SudhirKumarLKO) March 31, 2020
जब वायरल हुआ तो उसे देखकर स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के होश उड़ गए। वीडियो को इस मैसेज के साथ वायरल किया गया, “कोरोना मरीज को परिजन अस्पताल में भर्ती कराने लाए थे। लेकिन डॉक्टरों के इलाज नहीं करने की वजह से वो तड़पने लगा।” पूरी जांच पड़ताल के बाद इस वीडियो की सच्चाई सामने आई।
दरअसल, वीडियो में जो व्यक्ति है उसे मिर्गी का दौरा आया था। मरीज कानपुर देहात के अकबरपुर का रहने वाला है। उसे सोमवार को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। परिजनों को जानकारी नहीं होने की वजह से वो सीधे कोरोना वार्ड में चले पहुंच गए। जहां उन्हें डॉक्टरों ने इमरजेंसी वार्ड में ले जाने को कहा। उसी दौरान गेट के पास राजू को मिर्गी का दौरा आ गया जिसका किसी ने वीडियो बना लिया और उसे वायरल कर दिया।
उक्त मरीज जो जमीन में लोट रहा है उसे मिर्गी का दौरा पड़ा था। जिसे कोरोना संक्रमित बताकर गलत वीडियो वायरल किया गया है। इस सम्बन्ध में प्रिन्सिपल जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर नगर द्वारा दी गई बाईट। @Uppolice @UPPViralCheck pic.twitter.com/ZYluLuyVm7
— POLICE COMMISSIONERATE KANPUR NAGAR (@kanpurnagarpol) March 31, 2020
इस मामले को लेकर मेडिकल कॉलेज की प्रिंसीपल आरती लाल चांदनी ने कहा, “कोरोना वायरस के संक्रमण के भय से कोरोना वार्ड के किसी डाक्टर ने उसे नहीं देखा था। क्योंकि वह मिर्गी का मरीज था। उसे बाद में स्ट्रेचर पर ले जाकर इंजेक्शन लगाया गया। जिसके बाद वो ठीक होकर घर चला गया। इससे अस्पताल की बदनामी हुई है। अब हम एफआईआर दर्ज कराने वाले है।” अभी पूरे देश में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन किया गया है। अभी तक संक्रमण के मामले 1611 सामने आए है। वहीं 47 लोगों की मौत हुई है।

