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संकट में आम आदमी पार्टी

अन्ना आंदोलन के गर्भ से निकली आम आदमी पार्टी इन दिनों गहरे संकट का सामना कर रही है। पार्टी के शीर्ष नेता अरविंद केजरीवाल और उनके डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भ्रष्टाचार के आरोप चलते जेल में हैं। केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद पार्टी लड़खड़ाने लगी है। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर भी भारी बेचैनी है कि केजरीवाल अपनी अनुपस्थिति में पार्टी के स्थापित चेहरों के बजाय पत्नी सुनीता को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में राज्यसभा सांसद संजय सिंह का जमानत पर बाहर आना पार्टी के एक बड़े वर्ग को आश्वस्त करने का कारण बना है कि अब पार्टी सही दिशा में आगे बढ़ेगी। सवाल लेकिन यह कि क्या केजरीवाल संजय सिंह को पार्टी और सरकार की कमान सौंपेंगे? या फिर भारतीय राजनीति की स्थापित वंशवादी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपनी पत्नी पर भरोसा जताएंगे

देश में इन दिनों एक ओर जहां आम चुनाव का शोर है, वहीं दूसरी तरफ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के गर्भ से जन्मी आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार के दाग लगते जा रहे हैं। आलम यह है कि कथित शराब घोटाले के मामले में पार्टी के कई मंत्रियों के बाद अब खुद पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी लगभग एक महीने से जेल में बंद हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि पार्टी का नेतृत्व कौन करेगा? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जिस तरह से हाल ही में संजय सिंह को मिली जमानत के बाद वे चुनाव प्रचार की कमान संभाले हुए हैं ठीक ऐसे ही क्या उन्हें पार्टी की कमान भी सौंपी जाएगी? क्या इस संकट में संजय संकटमोचक की भूमिका अदा कर पाएंगे?

दूसरी तरफ इस बात की भी चर्चा जोरों पर है कि केजरीवाल की पत्नी सुनीता जिस अंदाज में सुर्खियों में है उसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें पार्टी का प्रमुख बनाया जा सकता है। सुनीता हाल तक राजनीति से दूर रहती थीं, लेकिन उन्होंने बीते दिनों अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से दो वीडियो मैसेज भेजने के साथ ही इंडिया गठबंधन की रैली में शामिल होकर जेल में बंद आप मुखिया की तरफ से भेजे गए संदेश को जिस गर्मजोशी के साथ सुनाया इसके बाद से अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगर अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री की गद्दी छोड़ते हैं, तो सुनीता उनकी जगह ले सकती हैं।

हालांकि कि अब संजय सिंह ही केजरीवाल के संदेशों को जनता के बीच पहुंचा रहे हैं। इस बीच संजय सिंह ने एक प्रेस कांफ्रेंस की जिसमें उन्होंने तिहाड़ जेल से सीएम अरविंद केजरीवाल की चिट्ठी पढ़कर सुनाई, जो उन्होंने जनता के नाम लिखी है। संजय सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल जी ने दिल्ली की जनता के लिए एक संदेश भेजा है और उन्होंने लिखा है कि मेरा नाम अरविंद केजरीवाल है और मैं कोई आतंकवादी नहीं हूं। अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर सीधा हमला किया और लिखा कि उनकी दुर्भावना इतनी बढ़ चुकी है कि केजरीवाल को अपने परिवार से मुलाकात शीशे की दीवार से करनी पड़ती है। केजरीवाल ने लिखा है कि भगवंत मान जिन्हें जेड प्लस सिक्योरिटी मिली हुई है, उन्हें केजरीवाल से शीशे के पीछे से मिलना पड़ता है। ये सब केजरीवाल का मनोबल तोड़ने की कोशिश करने के लिए किया जा रहा है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आम आदमी पार्टी के लिए संजय सिंह को मिली जमानत किसी संजीवनी से कम नहीं है। मौजूदा समय में संजय ही एक ऐसे नेता बचे हैं जो पार्टी की कमान संभाल सकते हैं। हालांकि पिछले कुछ दिनों रामलीला मैदान में जब विपक्षी नेताओं का मंच सजा तो पहली पंक्ति में बड़े नेताओं के साथ सुनीता नजर आईं। सोनिया गांधी के बगल की सीट पर बैठीं सुनीता ने अपनी धमक से लोगों को रूबरू कराया। इस दौरान पहली बार इतने बड़े मंच पर पहुंचीं सुनीता सधे हुए नेता की तरह राजनीति में एंट्री लेते हुए दिखीं। इस रैली में उनकी मौजूदगी के कई मायने हैं। वे पूर्व नौकरशाह रहीं हैं। उन्हें आम चुनाव में स्टार प्रचारक की भी जिम्मेदारी दे दी गई है। इसके पूर्व भी वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर उनके संदेश पढ़कर अपनी धमक दिखा चुकी हैं।

विपक्ष के बड़े नेताओं ने भी जिस तरीके से सुनीता का उल्लेख किया और सोनिया गांधी से बातचीत हुई उससे भी उनका कद दिल्ली की राजनीति में काफी ऊंचा होता नजर आ रहा है। जिस गर्मजोशी के साथ महारैली में उन्होंने भाजपा की केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला ठीक इसी तरह 2011 के अन्ना आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल ने भी इसी मैदान से अपनी पहचान बनाई थी। एक तरह से कहा जाय तो वे केजरीवाल की भूमिका निभा सकती हैं।

पार्टी सूत्रों की मानें तो अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद सीएम की रेस में केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल, राज्यसभा सांसद संजय सिंह, वित्त मंत्री आतिशी मार्लेना और गोपाल राय का नाम लिया जा रहा है। इन नामों के अलावा पार्टी की पार्लियामेंट्री कमेटी किसी किसी अन्य नाम पर फैसला कर सकती है। हालांकि, अभी तक पार्टी ने कोई खुलासा नहीं किया है। दिलचस्प बात यह है कि इस संकट की घड़ी में पार्टी को अपने सांसदों का ही साथ नहीं मिल रहा है। वहीं दूसरी तरह अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद पार्टी की ओर से बीजेपी पर लगातार सरकार गिराने की
साजिश रचने के आरोप लगाए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि भाजपा ‘आप’ विधायकों को तोड़ने में जुटी हुई है। आप नेताओं का ये भी आरोप है कि उसके विट्टाायकों को खरीदने की कोशिश हो रही है। इस मुद्दे पर विट्टाानसभा में भी कई विधायकों ने चर्चा में अपनी बात रखी है।

पार्टी के नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन सब बातों को दोहराते रहे हैं, तो वहीं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एक पुराना वीडियो संदेश जारी कर कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश भी की जा रही है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि बीते एक दशक में ऐसी कोशिश पहले भी हुई हैं और पार्टी जिस तरह संकट से निकली है इस बार भी निकल जाएगी। लेकिन इसी बीच दिल्ली सरकार के मंत्री व आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य रह चुके राजकुमार आनंद ने अचानक पद से इस्तीफा देने का जो ऐलान किया उससे पार्टी में खलबली मच गई है। अंदर खाने चर्चा है कि आम आदमी पार्टी के कई विट्टाायक पार्टी छोड़कर जा सकते हैं। इतना ही नहीं बल्कि पार्टी के राज्यसभा में 10 सांसदों में से 7 सांसद दिल्ली के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में किए गए विरोध-प्रदर्शन के दौरान गायब रहे। लोकसभा में इकलौते सांसद सुशील कुमार रिंकू ने तो हाल ही में भाजपा का दामन थाम लिया है। ऐसे में जमानत पर रिहा होने के बाद संजय सिंह आप का चेहरा बनते जा रहे हैं। उनके अलावा, आप के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) संदीप पाठक और एनडी गुप्ता ही विरोध प्रदर्शन के दौरान सक्रिय रूप से दिख रहे हैं। अन्य सांसद मौन धारण किए हुए हैं या फिर सक्रिय राजनीति से परहेज कर रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा सवाल पार्टी के युवा सांसद राघव चड्डा को लेकर किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि अपनी पार्टी के लिए मुखर रहने वाले पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्डा क्यों शांत हैं ? पार्टी सूत्रों की मानें तो वे पिछले महीने आंख की सर्जरी के लिए लंदन गए थे। उनका मार्च के अंत में लौटने का कार्यक्रम था लेकिन राघव अभी भी लंदन में ही हैं।

सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
अरविंद केजरीवाल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव का हवाला देते हुए 15 अप्रैल को सुनवाई की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि इतनी जल्दी सुनवाई संभव नहीं है। साथ ही कोर्ट ने ईडी से 24 अप्रैल तक जवाब देने के लिए कहा है और केंद्रीय जांच एजेंसी के जवाब पर केजरीवाल 27 अप्रैल तक जवाब दाखिल करेंगे। इस मामले में अब अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति से जुड़े धनशोधन मामले में ईडी के केजरीवाल को गिरफ्तार किए जाने और हिरासत में रखने के फैसले को सही ठहराया है। इसके खिलाफ केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

गौरतलब है कि 2012 में जब से आम आदमी पार्टी का गठन हुआ है, तब से अब तक अरविंद केजरीवाल ही पार्टी के संयोजक बने हुए हैं। जबकि पार्टी के गठन के समय जो संविधान पार्टी ने बनाया था, उसके मुताबिक दो बार से ज्यादा बार एक व्यक्ति पार्टी का संयोजक नहीं बन सकता था। लेकिन साल 2021 में पार्टी का संविधान बदला गया। उसके बाद अरविंद केजरीवाल के संयोजक पद पर बने रहने का रास्ता साफ हो गया था। पहले उनका कार्यकाल तीन साल का था, जिसे बढ़ाकर पांच साल का कर दिया गया। हालांकि पार्टी के भीतर इस बात को लेकर फिलहाल कोई बगावती सुर नहीं उठ रहे हैं, लेकिन ऐसा भी नहीं कि सब इस फैसले से खुश हों।

शराब घोटाला में फंस गई ‘आप’
दिल्ली शराब घोटाला केस में एक और बड़ा एक्शन हुआ है। पार्टी को गोवा चुनाव के दौरान फंड पहुंचाने वाले आरोपी को सीबीआई के बाद अब दिल्ली आबकारी नीति घोटाला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने एक्शन लेते हुए चनप्रीत सिंह को गिरफ्तार किया है। चनप्रीत सिंह वही शख्स है जिस पर गोवा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी को फंड पहुंचाने का आरोप है। दिल्ली शराब घोटाला मामले में यह 17वीं गिरफ्तारी है। जांच एजेंसी का आरोप है कि चनप्रीत सिंह ने जून 2021 से लेकर मार्च 2022 तक आम आदमी पार्टी के गोवा चुनाव कैंपेन में हिस्सा लिया था। इतना ही नहीं, ईडी का कहना है कि उसे फरवरी 2022 में आम आदमी पार्टी से सैलरी भी मिली थी। उसको दिल्ली सरकार में पीआर का काम करने के लिए 55 हजार रुपए मिले थे। यह कंपनी दिल्ली सरकार के सूचना और प्रसारण विभाग से जुड़ी हुई है।

इन पर लटक रही गिरफ्तारी की तलवार!
शराब घोटाला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आम आदमी पार्टी के कई नेताओं को ईडी अब तक गिरफ्तार कर चुकी हैं। कइयों से पूछताछ जारी है। वहीं, इसके इतर पार्टी के कुछ नेता ऐसे हैं, जो अलग-अलग मामलों जांच एजेंसी की रडार पर है। गौरतलब है कि शराब घोटाला मामले में ईडी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत चार लोगों की गिरफ्तारी कर चुकी है। इनमें से सजंय सिंह की हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद जेल से रिहाई हुई है। बाकी के तीन नेता सत्येंद्र जैन, मनीष सिसोदिया और सीएम केजरीवाल अभी तिहाड़ में कैद हैं। वहीं दिल्ली कैबिनेट और आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने वाले राजकुमार आनंद भी जांच एजेंसी ईडी के रडार पर हैं। 2 नवंबर 2023, जिस दिन अरविंद केजरीवाल को ईडी का पूछताछ के लिए पहला समन आया था, उसी दिन राजकुमार आनंद के ठिकानों पर ईडी की रेड पड़ी थी।

इनके अलावा अब ओखला से विट्टाायक अमानतुल्लाह खान भी ईडी के रडार पर थे और अब उन्हें ईडी द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है। एमसीडी चुनाव में पार्टी के लिए चाणक्य की भूमिका निभा चुके दुर्गेश पाठक भी ईडी के निशाने पर हैं। इसी तरह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव विभव कुमार भी एजेंसी की जांच के दायरे में हैं। पार्टी से राज्यसभा सांसद और पार्टी के कोषाट्टयक्ष एनडी गुप्ता के ठिकानों पर भी ईडी रेड डाल चुकी है और उनसे घंटों की पूछताछ कर चुकी है। वहीं दिल्ली सरकार में मंत्री कैलाश गहलोत भी रडार पर हैं। 30 मार्च को आबकारी मामले में ईडी ने कैलाश गहलोत से पूछताछ की थी।

इनसे भी ईडी कर सकती है पूछताछ!
दिल्ली सरकार में दो बड़े मंत्री आतिशी और सौरभ भारद्वाज से भी जांच एजेंसियां पूछताछ कर सकती है। ईडी ने 28 मार्च को राउज एवेन्यू कोर्ट में अरविंद केजरीवाल को पेश कर दावा किया था कि मुख्यमंत्री ने विजय नायर के बारे में पूछने पर कहा था कि उनकी नायर से बहुत कम बातचीत होती थी। विजय नायर पार्टी का कम्युनिकेशन इंचार्ज होने के नाते सौरभ भारद्वाज और आतिशी को रिपोर्ट करता था। ऐसे में हो सकता है कि जांच एजेंसी इन दोनों मंत्रियों से भी पूछताछ कर सकती हैं।

कब गिरफ्तार हुए थे केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को ईडी ने 21 मार्च को गिरफ्तार किया। ईडी का आरोप है कि केजरीवाल ने शराब व्यापारियों से लाभ के बदले में रिश्वत मांगी थी इसके अलावा, केजरीवाल पर आप नेताओं, मंत्रियों और अन्य लोगों की मिलीभगत से अब रद्द की गई नीति में मुख्य साजिशकर्ता और सरगना होने का आरोप लगाया गया है। वहीं केजरीवाल ने ईडी के इन आरोपों से साफ इनकार किया है। केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी ने बीजेपी और केंद्र पर जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।

 

क्यों हैं ये नेता खामोश?

स्वाति मालीवाल
दिल्ली से पहली बार सांसद बनीं स्वाति मालीवाल इन दिनों अमेरिका में हैं। उन्होंने पार्टी से कहा है कि उन्हें वहां रहने की जरूरत है क्योंकि उनकी बहन बीमारी से उबर रही हैं। हालांकि मालीवाल सोशल मीडिया पर पार्टी के लिए लगातार पोस्ट कर रही हैं लेकिन बीजेपी का कहना है कि आप के कई नेता केजरीवाल के समर्थन में सामने नहीं आ रहे हैं।
हरभजन सिंह भी चुप

पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने पंजाब से राज्यसभा सांसद बनने के बाद से आप की गतिविधियों में शायद ही कभी भाग लिया हो। केजरीवाल की गिरफ्तारी पर भी वह चुप हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर हाल में कई पोस्ट किए हैं, लेकिन लगभग सभी आईपीएल के बारे में हैं। 24 मार्च को उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री नेता भगवंत मान को उनकी बेटी के जन्म पर बधाई दी थी। लेकिन वह पार्टी द्वारा आयोजित विरोध-प्रदर्शन में नहीं पहुंचे और न ही कभी पार्टी हित में कोई पोस्ट लिखा।

अशोक कुमार मित्तल

पंजाब स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक और आप सांसद मित्तल भी पार्टी गतिविधियों से काफी हद तक अनुपस्थित रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह दावा किया कि उन्हें पार्टी द्वारा हाल ही में आयोजित विरोध-प्रदर्शन में आमंत्रित नहीं किया गया था।

संजीव अरोड़ा

पंजाब से एक और सांसद संजीव अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद 24 मार्च को उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल से मुलाकात की थी। लेकिन इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन में वे शामिल नहीं हुए। अरोड़ा ने कहा कि वह इसलिए शामिल नहीं हो सके क्योंकि वह लुधियाना में पार्टी द्वारा दिए गए काम में व्यस्त थे।

बलबीर सिंह सीचेवाल
पंजाब से आप के राज्यसभा सांसद बलवीर सिंह सीचेवाल को भी अधिकांश पार्टी विरोध प्रदर्शनों में नहीं देखा गया है। जब उनसे उनकी अनुपस्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा ‘मैं एक धर्मनिष्ठ व्यक्ति हूं और अपने कर्तव्यों का पालन कर रहा हूं। अगर कोई योजना है तो हम उसे साझा करेंगे।’

विक्रमजीत सिंह साहनी
साहनी भी दूसरे सांसदों की तरह ‘आप’ की गतिविधियों से काफी हद तक अनुपस्थित हैं। वह भी केजरीवाल की गिरफ्तारी पर चुप हैं।

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