पड़ताल
उत्तराखण्ड को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन का गठन प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों को बिचौलियों से बचाना, उनको उनके उत्पाद की सही कीमत दिलाना, ग्राहकों को उच्च श्रेणी का दूध पिलाना तथा अन्य डेयरी से जुड़ी वस्तुओं को उपलब्ध कराने के पवित्र उद्देश्य से किया जरूर गया था लेकिन बीते 22 वर्षों के दौरान ये उद्देश्य कहीं हवा हो गए हैं। इस फेडरेशन में भारी भ्रष्टाचार पनप चुका है। हालात इतने गंभीर हैं कि राज्य की जनता को ‘आंचल’ ब्रांड के तहत बेचे जा रहे दूध में बड़ी मात्रा में मिलावट किए जाने चलते दूध की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। हैरानी की बात यह कि राज्य सरकार सभी तथ्यों से भलीभांति परिचित होने के बावजूद फेडरेशन के भ्रष्ट कर्ता-धर्ताओं पर कोई कार्रवाई करने से बच रही है। इस कहानी के दो पहलू हैं। पहला दूध की गुणवत्ता का है जिसको लेकर उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें मय प्रमाण डेयरी फेडरेशन द्वारा खरीदे जा रहे और विक्रय किए जा रहे दूध को स्वास्थ के लिए हानिकारक बताया गया है। इस याचिका में फेडरेशन के प्रशासक और नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड के निवर्तमान अध्यक्ष मुकेश बोरा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बोरा सत्तारूढ़ भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता और नेता भी हैं। फेडरेशन में हो रहे आर्थिक भ्रष्टाचार को उजागर करने का काम भाजपा के ही एक नेता ने किया है जिनकी शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कुमाऊं कमिश्नर को जांच के आदेश मई 2023 में दिए थे। जांच रिपोर्ट में फेडरेशन से जुड़े नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड, लालकुआं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को सही पाया गया है लेकिन कई माह बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार द्वारा इस पर कार्रवाई न किया जाना डेयरी विकास मंत्रालय की कार्यशैली और सत्यनिष्ठा को संदेह के घेरे में ला रहा है
पटकथा
यह कहानी है उत्तराखण्ड को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड की। इस को-ऑपरेटिव संस्था के जरिए प्रदेश के 13 में से 11 जिलों में दूध उत्पादकों से दूध खरीदा जाता है और इसे संस्था के पंजीकृत ब्रांड ‘आंचल’ के नाम से प्रदेश भर में बेचा जाता है। राज्य गठन के बाद, वर्ष 2001 में, संस्था का गठन इस पवित्र उद्देश्य से किया गया था कि दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध का उचित मूल्य मिल सके और उच्च गुणवत्ता का दूध तथा अन्य डेयरी की वस्तुएं आमजन को उपलब्ध कराई जा सकें। संस्था के अंतर्गत राज्य के 11 जिलों में दुग्ध उत्पादक को-ऑपरेटिव संस्थाएं कार्य करती हैं जिनके जरिए लगभग 1 ़85 लाख लीटर दूध प्रति दिन खरीदा जाता है और 1 ़48 लाख लीटर दूध की बिक्री होती है। इस को-ऑपरेटिव फेडरेशन का गठन उत्तराखण्ड के दुग्ध उत्पादकों को बिचौलियों से बचाना, उनको उनके उत्पाद की सही कीमत दिलाना तथा ग्राहकों को उच्च श्रेणी का दूध तथा अन्य डेयरी से जुड़ी वस्तुओं को उपलब्ध कराने के पवित्र उद्देश्य से किया जरूर गया था लेकिन बीते 22 वर्षों के दौरान ये उद्देश्य कहीं हवा हो गए हैं और इस फेडरेशन में भारी भ्रष्टाचार पनप चुका है। हालात इतने गंभीर हैं कि राज्य की जनता को ‘आंचल’ ब्रांड के तहत बेचे जा रहे दूध में बड़ी मात्रा में मिलावट किए जाने चलते दूध की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। हैरानी की बात यह कि राज्य सरकार सभी तथ्यों से भलीभांति परिचित होने के बावजूद फेडरेशन के भ्रष्ट कर्ता-धर्ताओं पर कोई कार्यवाई करने से बच रही है। इस कहानी के दो पहलू हैं। पहला दूध की गुणवत्ता का है जिसको लेकर बिंदुखत्ता, लालकुआं के निवासी नरेंद्र सिंह कार्की ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की है जिसमें मय प्रमाण डेयरी फेडरेशन द्वारा खरीदे जा रहे और विक्रय किए जा रहे दूध को स्वास्थ के लिए हानिकारक बताया गया है। इस याचिका में इस फेडरेशन के वर्तमान प्रशासक मुकेश बोरा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दूसरा पहलू फेडरेशन में हो रहे आर्थिक भ्रष्टाचार की बाबत है। इस भ्रष्टाचार को उजागर करने का काम हल्द्वानी निवासी हरीश चन्द्र आर्या ने किया है जिनकी शिकायत पर राज्य के मुख्यमंत्री ने कुमाऊं कमीशनर को जांच के आदेश मई 2023 में दिए थे।
‘दि संडे पोस्ट’ के पास उपलब्ध जानकारी अनुसार अक्टूबर, 2023 में कुमाऊं कमीशनर दीपक रावत ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को भेजी थी। रिपोर्ट में फेडरेशन से जुड़े नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड, लालकुआं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को सही पाया गया है लेकिन कई माह बीतने के बाद भी राज्य सरकार द्वारा इस पर कार्रवाई न किया जाना राज्य सरकार, विशेषकर डेयरी विकास मंत्रालय, की कार्यशैली और सत्य निष्ठा को संदेह के घेरे में ला रहा है। यहां यह उल्लेखनीय है कि राज्य में दुग्ध उत्पादकों की शीर्ष संस्था उत्तराखण्ड को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के प्रशासक तथा नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड के निवर्तमान अध्यक्ष एक ही महानुभाव मुकेश बोरा हैं जो सत्तारूढ़ भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता और नेता हैं।
‘आंचल’ दूध की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
नरेंद्र सिंह कार्की द्वारा दायर जनहित याचिका अनुसार नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड द्वारा 23 अक्टूबर, 2020 से 17 जनवरी, 2022 तक बदायूं उत्तर प्रदेश की नीलकंठ डेयरी से कई लाख लीटर दूध की खरीद की गई थी। इस दूध के सैंपल की जांच सेंट्रल डेयरी लैब द्वारा किए जाने पर यह भयावह सच सामने आया कि इस लाखों लीटर दूध की गुणवत्ता बेहद खराब थी। उत्तराखण्ड को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन की मंगल पड़ाव, हल्द्वानी स्थित इस प्रयोगशाला की रिपोर्ट में यह दूध मेथिलीन ब्लू डाइड रिडक्शन टेस्ट (एमबीडीआरटी) के मानकों में खरा नहीं उतरा। इस टेस्ट के जरिए कच्चे दूध की सूक्ष्मजीव विज्ञानी गुणवत्ता (माइक्रो बायोलॉजिकल क्वालिटी) का पता लगाया जाता है। यह परीक्षण इस तथ्य पर आधारित है कि जब दूध में मौजूद ऑक्सीजन माइक्रोबायोलॉजिकल गतिविधियों के चलते समाप्त हो जाती है तो दूध में मिलाया गया नीला रंग फीका पड़ जाता है। जितनी जल्दी नीला रंग फीका पड़ने लगेगा, दूध की गुणवत्ता उतनी ही खराब मानी जाएगी। उत्तराखण्ड को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के मानकों अनुसार एक ठीक क्वालिटी के दूध में मिलाया गया नीला रंग कम से कम 30 मिनट तक फीका नहीं पड़ना चाहिए। नीलकंठ डेयरी से खरीदे गए दूध में लेकिन यह रंग मात्र 4 से 16 मिनट के बीच ही फीका पड़ गया था। इस दूध पर नियमानुसार दो अन्य टेस्ट भी किए गए थे।
‘अल्कोहल टेस्ट’ के जरिए यह पता लगाया गया था कि क्या यह दूध पाउडर बनाने इत्यादि के योग्य है या नहीं। इस टेस्ट में भी दूध खरा नहीं उतरा था। एक अन्य टेस्ट ‘क्लाट ऑन बायलिंग’ के जरिए पता लगाया जाता है कि क्या इस दूध को उबालने के दौरान थक्के तो नहीं बनते हैं। यदि ऐसा होता है तो दूध गुणवत्ता के मानकोंनुसार नहीं माना जाता है। नीलकंठ डेयरी का दूध इस टेस्ट में भी खरा नहीं उतरा था। हैरानी की बात है कि इस डेयरी के खिलाफ नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ ने कोई भी कार्रवाई नहीं की।

मुकेश बोरा पर फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप
नीलकंठ डेयरी, बदायूं, उत्तर प्रदेश से घटिया गुणवत्ता वाला दूध खरीदने का काम नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ द्वारा किया गया था। 2018 में भाजपा नेता मुकेश बोरा इस संघ के अध्यक्ष चुने गए थे। वर्तमान में बोरा इस संघ के साथ-साथ राज्य की शीर्ष दुग्ध फेडरेशन उत्तराखण्ड को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के भी प्रशासक हैं। 2018 में नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के चुनावों में बोरा ने खुद को दुग्ध उत्पादक बताया था। गौरतलब है कि दुग्ध संघ के चुनाव नियमानुसार केवल दुग्ध उत्पादक ही लड़ सकते हैं। बोरा ने खुद को नैनीताल के धारी तहसील के गांव च्यूरीगाड़ की दुग्ध उत्पादक संस्था का स्वयं को सदस्य बताते हुए यह चुनाव लड़ा और निर्विरोध जीता था। ‘दि संडे पोस्ट’ के पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार मुकेश बोरा न तो दुग्ध उत्पादक थे और न ही उन्होंने कभी च्यूरीगाड़ दुग्ध उत्पादक संस्था को दूध बेचा था। नियमानुसार किसी भी डॉयरेक्टर या चैयरमेन को दुग्ध समिति का सदस्य होना जरूरी है। इसके लिए यह भी जरूरी है कि साल में कम से कम 180 दिन उनका दूध डेयरी में गया हो। इसी के साथ यह भी शर्त है कि कम से कम 320 लीटर दूध उनके द्वारा डेयरी में दिया गया हो। इन दोनों शर्तों को पूरा करने के बाद ही वह व्यक्ति डेयरी का सदस्य अर्थात दुग्ध उत्पादक माना जाएगा। इसके बाद ही वह डेयरी का प्रतिनिधि डॉयरेक्टर और चैयरमेन तक बन सकता है। आरोप है कि दुग्ध संघ का चुनाव लड़ने के लिए मुकेश बोरा ने दुग्ध संघ के कर्मचारियों संग मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए थे। अक्टूबर, 2020 में एक शिकायती पत्र के आधार पर मुख्यमंत्री कार्यालय से इस विषयक जांच कराए जाने के निर्देश नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड को दिए गए थे। संघ ने तीन अधिकारियों की एक जांच कमेटी को यह जिम्मा सौंपा। जांच कमेटी ने मुकेश बोरा पर फर्जीवाड़ा कर खुद को दुग्ध उत्पादक बताने और च्यूरीगाड़ दुग्ध उत्पादक समिति को दूध बेचने के नकली दस्तावेज बनाने का आरोप सही पाया। इस जांच कमेटी की रिपोर्ट अनुसार मुकेश बोरा ने दुग्ध समिति च्यूरीगाड़ के क्षेत्र पर्यवेक्षक उमेश यादव के साथ मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। उमेश यादव ने इस दुग्ध समिति की सदस्य श्रीमति दीपा देवी द्वारा समिति को बेचे गए दूध की एंट्री मुकेश सिंह बोरा के नाम से दर्शा मुकेश को दुग्ध उत्पादक बना डाला था।
जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि ‘‘दुग्ध समिति च्यूरीगाड़ के क्षेत्र पर्यवेक्षक श्री उमेश यादव द्वारा लिखित रूप में अवगत कराया गया है कि वर्ष 2018-19-20 में समिति सचिव श्री इंदल सिंह द्वारा समिति सदस्या श्रीमती दीपा देवी जो श्री इंदल सिंह की पत्नी है। उनका दूध समिति अभिलेखों में श्री मुकेश सिंह बोरा पुत्र श्री कुशल सिंह के नाम अंकित किया गया है तथा भुगतान बैंक खातों में स्वयं श्रीमती दीपा देवी पत्नी श्री इंदल सिंह के नाम पर ही लिया गया है। उक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री मुकेश सिंह बोरा को दुग्ध मूल्य, दुग्ध प्रोत्साहन राशि, दुग्ध मूल्य अंतर व बोनस की धनराशि का भुगतान होने का उल्लेख अभिलेखों में प्राप्त नहीं होने के कारण उनके द्वारा वर्ष 2018-19 व वर्ष 2019-20 में दुग्ध समिति च्यूरीगाड़ में दुग्ध आपूर्ति किया जाना संदिग्ध है।’’
इस जांच कमेटी के समक्ष उमेश यादव ने लिखित में अपनी गलती स्वीकारी है। इतनी स्पष्ट जांच रिपोर्ट के बावजूद मुकेश बोरा के खिलाफ कोई कार्रवाई न होना प्रदेश सरकार पर, विशेषकर डेयरी विकास मंत्रालय पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
उपसंहार
देवभूमि में बीते सात बरसों से डबल इंजन की सरकार है जिसका दावा है कि राज्य को भ्रष्टाचार से मुक्त कर वर्ष 2025 तक देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। जमीनी हकीकत

लेकिन इस दावे की पुष्टि करती नजर नहीं आ रही है। राज्य की शीर्ष दुग्ध उत्पादक संस्था के अध्यक्ष पद पर एक गैर दुग्ध व्यवसायी का काबिज होना इस सहकारी संस्था की नियमावली के खिलाफ तो है ही, फर्जीवाड़े के आरोपों की पुष्टि के बावजूद इस व्यक्ति का नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ का अध्यक्ष बन जाना और वर्ष 2022 में राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक संस्था उत्तराखण्ड को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन का प्रशासक बन जाना समूची व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करता है।
भ्रष्टाचारियों पर कराउंगा मुकदमा दर्ज
नैनीताल दुग्ध संघ लालकुआं में वित्तीय अनियमितताओं का भ्रष्टाचार सिद्ध हो चुका है। मैलामाइन एल्कोहल मिलाकर दुध को आम जनता को पिलाया गया। मानव जीवन से खिलवाड़ किया गया। कुमाऊं कमिश्नर की जांच रिपोर्ट मैलामाइन एल्कोहल की पुष्टि अभिलेखों सहित मा. उच्च न्यायालय में सप्लीमेंट्री अरजेंसी दाखिल कर जल्द रिट संख्या 186, में ठोस पैरवी कर भ्रष्ट अधिकारियों, विभागीय मंत्री, दुग्ध संघ, तत्कालीन अध्यक्ष (यूसीडीएफ) और चेयरमैन के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाऊंगा। जब तक घोटालों की रिकवरी न हो और भ्रष्ट अधिकारी निलंबित न हो तब तक चैन से नहीं बैठूंगा।
भुवन चन्द्र पोखरियाल, याचिकाकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता
अनसुलझे सवाल
1. अगर मुकेश बोरा ने दुग्ध उत्पादन नहीं किया तो वह दुग्ध उत्पादक कैसे बने? और दुग्ध उत्पादक नहीं थे तो नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के अध्यक्ष कैसे बन गए?
2. कागजों में दूध मुकेश बोरा ने बेचा और बैंक खातों में उसी दूध का भुगतान दीपा देवी पत्नी इंदल सिंह के नाम कैसे चढ़ गया?
3. जांच कमेटी के समक्ष दुग्ध समिति च्यूरीगाड़ के पर्यवेक्षक उमेश यादव ने लिखित में अपनी गलती स्वीकारी है जिसमें उन्होंने दीपा देवी के स्थान पर मुकेश बोरा की एंट्री की पुष्टि की है। दीपा देवी के दुग्ध बिक्री की एंट्री मुकेश बोरा के नाम दिखाकर मुकेश बोरा को फर्जी तरीके से दुग्ध उत्पादक बना डाला तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
4. जांच कमेटी में संविदाकर्मी होने के चलते जांच कमेटी की रिपोर्ट रद्द की गई और दूसरी जांच रिपोर्ट में मुकेश बोरा को क्लीनचिट दे दी गई लेकिन दुग्ध समिति च्यूरीगाड़ के पर्यवेक्षक उमेश यादव ने जो सच उजागर किया उसे क्यों दबा दिया गया?
5. उत्तर प्रदेश के बदायूं की नीलकंठ डेयरी का अक्टूबर 2020 से जनवरी 2022 तक लाखों लीटर गुणवत्ताविहीन दुग्ध खरीदा गया। इस दूध के सैंपल भी फेल हुए। प्रयोगशाला की रिपोर्ट में यह दूध मेथिलीन ब्लू डाईड रिडक्शन टेस्ट (एमबीडीआरटी) और क्लाट ऑन बायलिंग के मानकों पर खरा नहीं उतरा। अल्कोहल टेस्ट में भी आंचल का दूध पाउडर बनाने लायक नहीं पाया गया था। बावजूद इसके खराब क्वालिटी का दूध क्यों खरीदा जाता रहा? लाखों लीटर दूध के सैंपल फेल हो जाने के बाद भी उक्त डेयरी पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
6. जांच रिपोर्ट में दूध की गुणवत्ता खराब पाए जाने के बाद भी लाखों लोगों के स्वास्थ के साथ खिलवाड़ क्यों किया जाता रहा, इस डेयरी के संचालकों को किसका संरक्षण मिलता रहा?
7. गुणवत्ताविहीन दूध पीने से लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर कितना हानिकारक प्रभाव पड़ा, इस दूध के पीने से उनको कोई गंभीर बीमारी तो नहीं हुई है। इसकी जांच क्यों नहीं कराई गई?
8. नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड लालकुआं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर उत्तराखण्ड को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
बात अपनी-अपनी
आप जिस मामले की बात कर रहे हैं उसकी जांच तत्कालीन विभागीय मंत्री धन सिंह रावत जी के कार्यकाल में हुई थी। तब जांच करने वाले अधिकारी संविदा कर्मी थे। बायलाज के अनुसार संविदा कर्मी एक चैयरमेन की जांच नहीं कर सकता है। इसी के साथ यह भी हुआ था कि जांच सक्षम अधिकारी के पास पहुंचने से पहले ही वह आरटीआई में दे दी गई थी। इसके बाद उस जांच को निरस्त करते हुए विभागीय डॉयरेक्टर से एक और जांच कराई गई थी जिसमें मुकेश बोरा को क्लीन चिट दे दी गई। आप कमिश्नर दीपक रावत जी की जिस जांच रिपोर्ट की बात कर रहे हैं वह मुख्यमंत्री जी के द्वारा ही कराई गई है वह जांच रिपोर्ट मेरे पास नहीं पहुंची है। क्योंकि सीएम साहब ने जांच कराई है तो वह उनके पास ही उसकी रिपोर्ट भी होगी। इसी से संबंधित एक केस माननीय न्यायालय में भी चल रहा है इसलिए मैं ज्यादा कोई टिप्पणी नहीं कर पाऊंगा।
सौरभ बहुगुणा, दुग्ध डेयरी विकास मंत्री
कुछ ब्लैकमेलर हैं जो मेरे पीछे पड़े हैं यह उनकी साजिश है क्योंकि मेरा चुनाव चल रहा है तो वह मेरी छवि को खराब करने का षड्यंत्र कर रहे हैं। मैं आज से नहीं 1994 से दुग्ध संघ का सदस्य रहा हूं। मुझे केंद्र सरकार द्वारा दुग्ध संघ में डेवन्पमेंट के लिए स्टेट का पुरस्कार भी मिल चुका है। अगर आपने मेरी छवि खराब करने की कोशिश की तो मैं आपके खिलाफ कोर्ट में जाऊंगा। आपको नोटिस भेजूंगा और आप पर मानहानि का केस करूंगा।
मुकेश बोरा, निवर्तमान अध्यक्ष दुग्ध संघ एवं प्रशासक, उत्तराखण्ड को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, कमिश्नर दीपक रावत की रिपोर्ट हमारे पास नहीं पहुंची है।
डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, डेयरी सचिव
मैं इस मामले में कुछ भी कह पाने में सक्षम नहीं हूं।
जयदीप अरोड़ा, प्रबंध निदेशक, उत्तराखण्ड को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन
इस प्रकरण में हमारे द्वारा कोई कार्यवाही वर्तमान में प्रचलित नहीं है।
संजय खेतवाल, डॉयरेक्टर दुग्ध संघ नैनीताल
पढ़िए अगले अंक में नैनीताल दुग्ध उत्पादक संघ में व्याप्त भ्रष्टाचार की कहानी और कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत की जांच में इन आरोपों की पुष्टि होने के बावजूद राज्य सरकार की हैरतनाक चुप्पी का सच।

