राजनीति में एक अच्छा रणनीतिकार होना अच्छी बात है, लेकिन जरूरी नहीं कि अच्छा रणनीतिकार पार्टी आलाकमान के भरोसे पर कायम रह ही जाए। राजनीति में बहुत से उदाहरण ऐसे भरे पड़े हैं जब नेताओं ने अपने निजी हित के लिए अचानक पाला बदलकर ऐसे फैसले लिए जिनसे आम जनता ही नहीं, बल्कि उनके पार्टी आलाकमान भी चकित रह गए। ऐसे में वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल का जाना कांग्रेस के लिए वाकई बहुत बड़ी क्षति है। अहमद पार्टी के लिए न सिर्फ अच्छे रणनीतिकार थे, बल्कि सच तो यह है कि उन्होंने आलाकमान का भरोसा अंत तक नहीं तोड़ा। जो जिम्मेदारियां या दायित्व पार्टी ने उन्हें दिए उन्हे निभाने में वे सफल रहे। यही वजह है कि आज उनकी कूबत और काबिलियत की तारीफ न सिर्फ कांग्रेसी, बल्कि विपक्षी भी कर रहे हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल का निधन हो गया है। 71 वर्षीय अहमद पटेल पिछले 1 माह से कोरोना वायरस से संक्रमित थे। उनका गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उनको बचाया नहीं जा सका।
अहमद के बेटे फैजल पटेल ने ट्वीट कर जानकारी दी कि उनके पिता अहमद पटेल का निधन प्रातः 3ः30 बजे हो गया है। वे पिछले एक महीने से कोरोना से संक्रमित थे। शरीर के कई अंग काम न करने की वजह से उनकी हालत बिगड़ रही थी। खुदा उन्हें जन्नत दे। आप सभी से अनुरोध है कि कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए भीड़ इकट्ठा न करें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।
अहमद पटेल को गुजरात के भरूच स्थित उनके पैतृक गांव पीरामन में गुरुवार को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। उनके बेटे फैजल का कहना है कि पापा की आखिरी इच्छा थी कि उन्हें उनके माता-पिता के पास ही दफन किया जाए।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत
अहमद पटेल ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत नगर पालिका के चुनाव से की थी। इसके बाद वे पंचायत के सभापित भी बने और कुछ ही दिनों में उन्होंने कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली थी। आपातकाल के बाद 1977 में आम चुनाव हुए तो उसमें कांग्रेस बुरी तरह हार गई थी। उत्तर भारत में पार्टी का सूपड़ा ही साफ हो गया था। यहां तक कि यूपी के रायबरेली से खुद इंदिरा गांधी भी हार गई थीं। लेकिन अहमद पटेल भरूच लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सबसे युवा सांसद बने थे। तब उनकी उम्र महज 26 साल की थी।
इसके बाद 1980 में फिर उन्होंने से भरूच लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। इस बार वे 82844 वोटों से चुनाव जीते। उस समय इंदिरा ने उनको कैबिनेट में शामिल करना चाहा लेकिन उन्होंने संगठन में काम करने को प्राथमिकता दी। 1984 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने 1,23,069 वोटों से जीत दर्ज की थी। 1977 से 1982 तक पटेल गुजरात यूथ कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। 1983-84 तक वे ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के ज्वाइंट सेक्रेटरी रहे। वे 1985 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी के संसदीय सचिव भी रहे। जनवरी 1985-86 तक वे ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटरी रहे। इसके बाद 1986 में गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष बने। 1991 में पटेल को कांग्रेस वर्किंग कमेटी का सदस्य बनाया गया जो इस पद पर अभी तक बने हुए थे।

वर्ष 1993 से अहमद पटेल को राज्यसभा भेजा गया। तब से वे अभी तक पांच बार राज्यसभा के सदस्य रहे। 2001 में वे सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार भी रहे। इसके अलावा वे संगठन में इन पदों के अलावा सिविल एविएशन मिनिस्ट्री, मानव संसाधन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय की मदद के लिए बनाई गई कमेटी के सदस्य भी रह चुके हैं। 2006 से वे वक्फ संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य रहे। 2018 में उन्हें कांग्रेस पार्टी का कोषाध्यक्ष भी नियुक्त किया गया।
राजनीतिज्ञों का मानना है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हर छोटे-बड़े फैसले उनके सलाहकार पटेल से होकर गुजरते और वे उन्हें हर चीज के लिए एडवाइज देते थे। उनका यह भी कहना है कि पटेल सोनिया गांधी के एजेंडे पर पूरी तरह से कार्य करते थे। 2005-09 में यूपीए की जीत में पटेल का अहदम योगदान माना जाता है। अहमद पटेल वे इंसान थे जिन्हें कभी कभी अपने विरोधियों से भी शिकायत नहीं रही। भले ही पटेल मीडिया से दूरी बनाए रखते थे। वे कांग्रेस के न सिर्फ किंगमेकर थे, बल्कि पार्टी के पावरफुल लीडर भी रहे।
राजनेताओं ने दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्विट कर कहा ‘अहमद पटेल जी के निधन से दुखी हूं। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कई साल समाज सेवा में बिताए। अपने तेज दिमाग के लिए जाने जाने वाले पटेल को पार्टी को मजबूत करने में उनकी भूमिका को हमेशा याद किया जाएगा। मोदी ने उनके बेटे फैजल से फोन पर बात कर संवेदना व्यक्त की। अहमद भाई की आत्मा को शांति मिले।’
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विट कर कहा यह एक दुखद दिन है। अहमद पटेल कांग्रेस पार्ट के मजबूत स्तम्भ थे। वे कठिन से कठिन समय में पार्टी के साथ खड़े रहे। हम हमेशा उन्हें याद करेंगे। फैजल, मुमताज और परिवार को मेरा प्यार और संवेदना।
कांग्रेस पार्टी की उपाध्यक्ष प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्विट में लिखा ‘अहमद जी न केवल बुद्धिमान और अनुभवी सलाहकार थे, जिनसे मैंने लगातार सलाह ली, बल्कि वे एक ऐसे दोस्त भी थे जो हम सभी के साथ खड़े रहे। निष्ठावान और अंत तक भरोसेमंद रहे। उनका निधन एक विशाल शून्य छोड़ देता है। परमात्मा उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

