पूरा विश्व कोरोना की वैक्सीन खोजने में जुटा है और इस जानलेवा वायरस के प्रसार को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। ऐसे में कोरोना संकट के बीच एक बेहद राहत भरी खबर आई है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी एंटीबॉडी खोज निकाली है जो कोरोना वायरस को शरीर से शरीर में फैलने से रोक देगी। वैज्ञानिकों को ये भी उम्मीद है कि वो बहुत ही जल्द इलाज के लिए एक बेहतर वैक्सीन भी बना पाएंगे। ये एंटबॉडी कोरोना वायरस से चिपक कर उसकी बाहरी कंटीली परत को नष्ट कर उसे प्रभावहीन कर देती है। इस एंटीबॉडी का नाम 47D11 रखा गया है।
इस एंटीबॉडी की खोज के साथ वैज्ञानिकों में एक नई आशा जगी है कि वो अब कोरोना वायरस को शरीर में ही प्रभावहीन कर सकेंगे। जिससे कोरोना वायरस का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में ना फैले। अभी तक चूहों पर किया गया इसका परीक्षण काफी हद तक सफल रहा हैं। यूरोप के वैज्ञानिकों ने चूहों में पाए जाने वाली 51 सेल लाइंस कोशिकाओं में इस एंटीबॉडी की खोज की है। इसके पश्चात् ही इसे इंसानों के लायक बनाने के लिए जेनेटिकली इंजीनियर किया गया है।
Antibody that prevents the COVID-19 virus from infecting living cells is identified by scientists https://t.co/ZDYhmC1gVv
— Daily Mail Online (@MailOnline) May 4, 2020
चूहे पर परीक्षण शोध
इस एंटीबॉडी का परीक्षण उन्होंने 2003 में फैले सार्स कोरोना वायरस पर किया था। 2003 के सार्स कोरोना वायरस को इस एंटीबॉडी ने विफल कर दिया। अब वैज्ञानिकों का यह दावा है कि कोविड-19 भी सार्स कोरोना वायरस के परिवार का ही वायरस है। इसलिए अब यह एंटीबॉडी कोरोना वायरस को भी कमजोर कर खत्म करने में सफल होगी। वैज्ञानिकों की टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं यूट्रेच यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बेरेंड-जेन बॉश के अनुसार इस एंटीबॉडी में ऐसा सामर्थ्य है कि यह कोरोना वायरस को खत्म कर सकती है। यह एंटीबॉडी वायरस के लेयर पर अपना हमला करती है जिसका इस्तेमाल वायरस कोशिकाओं पर चिपकने के लिए करता है।
बॉश ने ये भी बताया है कि इस एंटीबॉडी की वजह से यदि इंसानी शरीर में कोरोना वायरस का फैलना रुकता नहीं भी है तब भी अच्छी बात तो ये है कि इस एंटीबॉडी से कोरोना वायरस को इंसानी शरीर में फैलने में अधिक समय लगेगा। मतलब कोरोना वायरस शरीर में ही कमजोर हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में चूहे को कोरोना वायरस से संक्रमित किया।
तभी वैज्ञानिकों ने देखा कि वायरस ने जैसे ही चूहे के शरीर में पहुंचा तब चूहे के शरीर के अंदर से 51 तरह की एंटीबॉडी निकलनी शुरू हो गई। इसी में मौजूद थी ये 47D11 एंटीबॉडी। जो कोरोना वायरस की बाहरी परत को नष्ट कर देती है। बस यहाँ पर ही वैज्ञानिकों ने इस एंटीबॉडी की पहचान कर ली। कोरोना वायरस का आकार गोल होता है। उसके चारों ओर ऐस-2 नामक प्रोटीन की कंटीली लेयर होती है। ये कंटीली लेयरस इंसानी शरीर की कोशिकाओं से चिपक जाती है।
एंटी बॉडी से होगा कोरोना कमजोर
इसके उपरांत इंसानी शरीर की कोशिकाओं की बाहरी लेयर को गलाकर उसके अंदर अपने जींस को छोड़ देती है। कोशिकाओं में अपना जींस छोड़ने के बाद वायरस कोशिकाओं को खाकर अपनी संख्या को बढ़ाना शुरू कर देते है। इसीलिए वैज्ञानिकों ने ऐसी एंटीबॉडी की खोज की है जो कोरोना वायरस की बाहरी कंटीली लेयर से चिपक कर उसे नष्ट कर देगी। मतलब की कोरोना वायरस की जड़ कमजोर हो जाएगी।
रीडिंग यूनिवर्सिटी के सेल्यूलर माइक्रोबॉयोलॉजी की प्रोफेसर डॉ. सिमोन क्लार्क कहती है कि जब कोरोना वायरस का इंसानी शरीर में प्रवेश रोक दिया जाएगा तब उसके आगे के सारे काम रुक जाएंगे मतलब कि वह इंसान के शरीर में कुछ नहीं कर पाएगा। प्रो. सिमोन ने यह भी बताया कि एंटीबॉडी वायरस के ऊपर हमला करके उनसे चिपक जाती हैं।
इससे वायरस मर जाता है या फिर शरीर की कोशिकाओं पर अपनी पूरी ताकत से हमला नहीं कर पाता जितनी ताकत से उसे हमला करना चाहिए। जबकि अभी इस एंटीबॉडी का क्लीनिकल ट्रायल होना बाकी है। उसके बाद ही कुछ कहना सही होगा। परन्तु अभी तक के परीक्षण तो सफल है और नतीजे भी सकारात्मक रहे हैं।

