कभी-कभी अपरिपक्वता बहुत महंगी पड़ जाती है। खासकर राजनीतिक परिदृश्य में यह कभी कभी आत्मघाती साबित होता है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के कुनबे में देखा जाए तो राजनीतिक परिपक्वता का घनघोर अभाव है। लालू प्रसाद यादव के बड़े सुपुत्र तेजस्वी यादव ने जब एक सप्ताह पूर्व आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह को लेकर टिप्पणी की तो उसको राजनीतिक गलियारों में बड़ी गंभीरतापूर्वक गलती माना गया था। तेजस्वी यादव की इस गंभीरतापूर्वक गलती को सबसे पहले आरजेडी के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने ताड लिया। उन्होंने तेजस्वी के इस अविवेकपूर्ण बयान पर उसकी क्लास लगा दी।
तब लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी को बिहार से रांची बुलाया। लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव से कहा कि वह जिस वरिष्ठ नेता के बारे में कह रहे हैं कि ” एक लोटा पानी निकल जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता ” वह उनके संकटमोचक रहे है । साथ ही लालू ने कहा कि वह रघुवंश प्रसाद सिंह से इस बयान पर माफी मांगे। हालांकि बाद में तेजस्वी यादव ने डैमेज कंट्रोल करते हुए रघुवंश प्रसाद सिंह से अपने विवादास्पद बयान पर माफी मांगी । लेकिन तब तक तीर कमान से निकल चुका था।

आज वही हुआ जिसका डर था। यानी कि आरजेडी के प्रमुख नेताओं में शुमार रहे और लालू प्रसाद यादव के संकटमोचक कहे जाने वाले वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रताप सिंह ने पार्टी को अलविदा कह दिया। रघुवंश प्रताप सिंह उन नेताओं में शुमार थे जो कभी कपूरी ठाकुर के साथ मिलकर देश में समाजवादी राजनीति की नई परिपाटी शुरू करना चाहते थे। इस परिपाटी को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने लालू प्रसाद यादव का हाथ थाम लिया ।
लालू और रघुवंश प्रताप सिंह मिलकर बिहार में आरजेडी को मजबूती देते रहे। संभावनाएं व्यक्त की जा रही थी कि लालू प्रसाद यादव जेल में होने के चलते वरिष्ठता के क्रम में सबसे ऊपर रघुवंश प्रताप सिंह आरजेडी को आने वाले विधानसभा चुनाव में दिशा देने का काम करतें। निश्चित तौर पर उनका मार्गदर्शक आरजेडी के लिए मील का पत्थर साबित होता।

लेकिन शायद लालू के परिवार को यह पसंद नहीं था । इसके चलते ही लालू के बड़े बेटे तेजस्वी यादव ने रघुवंश प्रताप सिंह के सबसे बड़े विरोधी रामा सिंह को पार्टी में शामिल करने की बात तक कह डाली। इससे नाराज होकर रघुवंश प्रताप सिंह ने आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष से इस्तीफा दे दिया। हालांकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने उनका यह इस्तीफा स्वीकार नहीं किया । तब राजनीतिक अपरिपक्वता का परिचय देते हुए लालू प्रसाद यादव के सुपुत्र तेजस्वी यादव ने यह कह डाला कि रघुवंश प्रताप सिंह के जाने से पार्टी में कोई फर्क नहीं पड़ेगा ।
यहां तक तो ठीक था। लेकिन इससे भी आगे बढ़ते हुए जब तेजस्वी यादव ने अहंकारवश यह बात कही कि ‘एक लोटा पानी निकलने से समुद्र पर कोई फर्क नहीं पड़ता ‘ । तो यह बात रघुवंश प्रताप सिंह को गहरे तक सदमा दे गई। शायद इसी सदमे से वह बाहर नहीं निकल पाए । एक तो राजनीति के नए पौधे तेजस्वी यादव द्वारा एक लोटा पानी का तंज और दूसरा कोरोना बीमारी का बोझ रघुवंश प्रताप सिंह सहन नहीं कर पाए। शायद यही वजह है कि रघुवंश प्रताप सिंह ने हॉस्पिटल से ही पत्र लिखकर आरजेडी को अलविदा कह दिया।

रघुवंश प्रताप सिंह का आरजेडी से जाना लालू प्रसाद यादव के लिए राजनीतिक तौर पर बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब नवंबर – दिसंबर में बिहार विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी की नींव की पहली ईट की तरह रहे रघुवंश प्रताप सिंह का निकलना पार्टी और खासकर लालू प्रसाद यादव के लिए बेहद कमजोर करने वाला साबित हो सकता है।