उत्तराखण्ड को देवभूमि यूं ही नहीं कहा जाता है, बल्कि इसके पीछे देश-दुनिया के लाखों श्रद्धालुओं की वो आस्था है जिसके चलते वे हर वर्ष यहां आध्यात्मिक मनोकामनाएं पूर्ण करने आते हैं। तीर्थ यात्रा के दौरान अव्यवस्थाओं से निपटने और तीर्थ स्थलों के संचालन के लिए ही यहां संयुक्त प्रांत उत्तर प्रदेश के समय में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अधिनियम लाया गया था। बीकेटीसी, बदरीनाथ व केदारनाथ सहित प्रदेश के कुल 45 मंदिरों की व्यवस्थाएं देखती आ रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देवस्थानम बोर्ड की स्थापना की लेकिन वे स्थानीय तीर्थ पुरोहितों को इससे होने वाले फायदे गिनाने में सफल नहीं हो पाए। तीर्थ पुरोहितों के विरोध फलस्वरूप त्रिवेंद्र सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा। फिलहाल श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और यात्राओं में हो रही समस्याओं ने सरकार को चिंता में डाल दिया है। इसके मद्देनजर धामी सरकार अब यात्रा के सुचारू प्रबंधन और प्रदेश भर के मंदिरों के संचालन में पारदर्शिता लाने की योजना के तहत धार्मिक यात्रा प्राधिकरण बनाने जा रही है
उत्तराखण्ड में ज्यों-ज्यों चारधाम यात्रा आगे बढ़ रही है त्यों-त्यों श्रद्धालुओं की लगातार मौत, सड़कों पर लगता जाम और रोजाना लाखों की तादात में उत्तराखण्ड आ रहे श्रद्धालुओं की भीड़ चलते उनके समस्याएं आ रही हैं। हर वर्ष राज्य सरकार को यात्रा के दौरान भारी आलोचना का सामना करना पड़ता है। इसका स्थाई समाधान ढूंढ़ने की नीयत से अब धामी सरकार उत्तराखण्ड की तमाम धार्मिक यात्राओं के लिए एक नया प्राधिकरण बनाने की योजना पर काम कर रही है। त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के दौरान भी कुछ ऐसा ही प्रयास किया गया था।
तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देवस्थानम बोर्ड बनाकर इस समस्या के समाधान की तरफ कदम बढ़ाए। लेकिन अपने कदम वापस लेने पड़े जब तीर्थ पुरोहित देवस्थानम बोर्ड की स्थापना से नाराज हो गए। फिलहाल प्रदेश में बढ़ती तीर्थयात्रियों की संख्या और अव्यवस्थाओं ने धामी सरकार को इस दिशा में काम करने को मजबूर कर दिया है। उत्तराखण्ड में लगने वाले मेले और यात्रा जिसमें प्रमुख चारधाम यात्रा, हरिद्वार में लगने वाला कावड़ मेला, अर्ध कुंभ मेला , कुंभ मेला, नंदा देवी राजजात यात्रा और कैंची धाम में जुटने वाली लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ से लगने वाला जाम आदि से निपटने और बिना समस्या के सुलभ दर्शन और यात्रा कर सके, इसको लेकर एक नया प्राधिकरण बनाने की योजना शुरू हो चुकी है। ऐसा माना जा रहा है कि धार्मिक यात्रा प्राधिकरण उत्तराखण्ड में होने वाले हर धार्मिक आयोजन जैसे- चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा, कुंभ और नंदा देवी राजजात यात्रा के साथ ही पर्व, त्योहारों पर होने वाले स्नान आदि को व्यवस्थित ढंग से संचालित करेगा साथ ही इसके लिए हर उस विभाग को जो इन यात्राओं से जुड़ा होता है, उसके कर्मचारियों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, यात्रा को व्यवस्थित रखने और इसकी नियमित समीक्षा के लिए कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी यात्रा की नियमित गतिविधियों पर नजर रखेगी। प्रदेश में धार्मिक यात्रा प्राधिकरण की बाबत मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने अपर मुख्य सचिव (वित्त) आनंद बर्धन की अध्यक्षता में गठित कमेटी से यात्रा प्राधिकरण को लेकर एक माह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। चारधाम यात्रा संचालन के लिए गठित हाई लेवल कमिटी में संयोजक सदस्य पर्यटन सचिव बनाए गए हैं। साथ ही, सदस्य के रूप में इसमें गृह सचिव, अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था, गढ़वाल कमिश्नर और गढ़वाल के पुलिस महानिरीक्षक को रखा गया है। कमेटी को प्रदेश भर में होने वाली धार्मिक यात्राओं को लेकर महत्वपूर्ण रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया गया है। इस बाबत गत दिनों एक बैठक भी हो चुकी है।
अपर मुख्य सचिव ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों से उनके विभागों से संबंधित बिंदुओं पर रिपोर्ट भी मांगी। उन्होंने गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडे को सभी संबंधित विभागों से आवश्यक सूचनाएं एकत्रित करने के लिए प्रश्नावली तैयार करने के निर्देश भी दिए। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सुरक्षित, सुचारू और व्यवस्थित चारधाम यात्रा के लिए एक स्थायी तंत्र बनाना जरूरी है और इसके लिए यात्रा प्राधिकरण के गठन की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। अपर मुख्य सचिव (वित्त) आनंद वर्धन ने प्राधिकरण के गठन के बाद यात्रा को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी, डेटा विश्लेषण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अधिक से अधिक उपयोग पर जोर दिया। इससे डेटा विश्लेषण के जरिए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कितने श्रद्धालु आएंगे और किस तिथि को अधिक भीड़ उमड़ सकती है। इन अनुमानों के आधार पर सरकार और प्रशासन समय रहते अपनी तैयारियां कर सकते हैं। आनंद वर्धन के अनुसार यह पहली बैठक है, इसलिए चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं को समझने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ दिनों बाद पुनः बैठक होगी, जिसमें वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारियों को भी जोड़ा जाएगा।
गौरतलब है कि गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के बाद से ही राज्य की चारधाम यात्रा देश में चर्चा का विषय बन गई है। यात्रा शुरू होते ही जिस तरह लाखों यात्री उत्तराखण्ड पहुंचे उससे यात्रा व्यवस्था चरमरा गई। रही सही कसर केदारनाथ और बद्रीनाथ में पहुंचे तीर्थयात्रियों के अपने-अपने ढोल और रील बनाने के विवाद ने पूरी कर दी। यात्रा शुरू होने के एक पखवाड़े में ही 64 यात्रियों की मौत हो चुकी है। उधर, विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा कि पूरी की पूरी सरकार चुनावी कार्यक्रम में व्यस्त है और लाखों श्रद्धालु प्रदेश में परेशान हो रहे हैं। विपक्ष द्वारा इसको मुद्दा बना दिया गया। हालात यह हो गए कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जो पूरे देश में भाजपा के स्टार प्रचारक बन चुनावी रैलियां कर रहे थे उन्हें अपने चुनावी कार्यक्रम को बीच में ही रोककर उत्तराखण्ड में आकर तमाम व्यवस्थाओं का जायजा लेना पड़ा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीते दिनों उत्तरकाशी पहुंच चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। तभी से मुख्यमंत्री धामी लगातार चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हैं और हर दूसरे-तीसरे दिन बैठक कर यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं।
27 मई को सीएम धामी चारधाम यात्रा तैयारियों का जायजा लेने ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप भी गए थे जहां उन्होंने कहा कि ‘यात्रा सुविधाजनक ढंग से संचालित की जा रही है। मैं यह सुनिश्चित करने के लिए यहां आया हूं कि यात्रा आरामदायक और सुविधाजनक ढंग से संचालित होती रहे। देखा जाए तो पिछले साल की अपेक्षा इस साल भी प्रदेश में चारधाम यात्रा नए रिकॉर्ड बना रही है। अब तक 10 लाख से अधिक श्रद्धालु चार धाम के दर्शन कर चुके हैं। तीर्थयात्रियों की मानें तो चारधाम की सुगम यात्रा के लिए शासन-प्रशासन की कोशिशें रंग नहीं ला पा रही हैं। हालात यह हो गए हैं कि तीर्थयात्रा को आए हजारों श्रद्धालु धामों के दर्शन किए बिना ही घरों को लौट रहे हैं। इस बाबत प्रशासन द्वारा अस्थायी पंजीकरण व्यवस्था भी शुरू की गई है लेकिन अब तक करीब चार हजार तीर्थयात्री ऋषिकेश और हरिद्वार से ही घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं। घर लौटने वाले तीर्थयात्रियों का कहना है कि उत्तराखण्ड पहुंचने के बाद भी धामों के दर्शन न कर पाना उनका सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। यह उनके जीवन का कड़वा अनुभव रहा है। लोगों की मानें तो व्यवस्था इतनी बिगड़ चुकी थी कि सरकार को तीर्थयात्रियों के रजिस्ट्रेशन पर 31 मई तक रोक लगानी पड़ी।
हालांकि शासन प्रशासन चार धाम यात्रा के लिए बिना रजिस्ट्रेशन हरिद्वार और ऋषिकेश पहुंचे श्रद्धालुओं को चरणबद्ध तरीके से तीर्थयात्रा पर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है जिससे उनका आक्रोश कम होता दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार प्रत्येक दिन करीब 1000 श्रद्धालुओं को धामों के दर्शन के लिए भेजा जा रहा है। गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे के अनुसार केवल उन्हीं श्रद्धालुओं को भेजा जा रहा है, जिन्हें हरिद्वार और ऋषिकेश में रुके हुए लंबा वक्त हो गया है। हरिद्वार और ऋषिकेश में करीब 7500 श्रद्धालु रुके हुए हैं। एक सप्ताह से अधिक समय से रुके श्रद्धालुओं को प्राथमिकता के आधार पर तीर्थयात्रा के लिए भेजा जा रहा है। पुराने रुके यात्रियों का ही ट्रिप कार्ड बनाकर यात्रा के लिए भेजा जा रहा है। गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे का दावा है कि अब धीरे-धीरे चारधाम यात्रा की तमाम व्यवस्थाएं पटरी पर आ गई है।
बात अपनी-अपनी
उत्तराखण्ड में बन रहा प्राधिकरण सिर्फ चारधाम यात्रा के लिए ही नहीं होगा, बल्कि इसमें 50 से भी अधिक मंदिरों को शामिल किया जाएगा। उत्तराखण्ड में साल भर अलग-अलग धर्मों, अलग-अलग
मंदिरों, गंगा किनारों पर धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। ऐसे में हम यह चाहते हैं कि एक पूरा का पूरा अलग सिस्टम इन यात्राओं का बनाया जाए, ताकि आगे से ऐसी समस्या फिर दोबारा से पैदा ना हो। इस प्राधिकरण के तहत बहुत से ऐसे काम किए जाएंगे, जो अब तक राज्य में नहीं हुए हैं। इतना जरूर है कि यह प्राधिकरण ना तो देवस्थानम बोर्ड की तरह होगा और ना ही इसमें किसी भी मंदिर का संचालन कर रहे वहां के तीर्थ पुरोहितों से जुड़े फैसले यह प्राधिकरण ले पाएगा।
विनय शंकर पांडे, कमिश्नर गढ़वाल
देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड चारधाम के मंदिरों के लिए था लेकिन यात्रा प्राधिकरण, चारधाम यात्रा की व्यवस्था के लिए होगा। यात्रा प्राधिकरण के व्यवस्थाओं का प्रबंधन हरिद्वार-ऋषिकेश से ही शुरू हो जाएगा। देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड मुख्य रूप से बदरी-केदार मंदिर और उसके अधीन अन्य मंदिरों के लिए बनाया गया था। हालांकि उस दौरान गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितों ने भी देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को लागू करने के लिए हामी भर दी थी, लेकिन विपरीत परिस्थितियों और जनभावनाओं के अनुरूप सरकार को देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को वापस लेना पड़ा था।
केदार सिंह रावत, पूर्व विधायक यमुनोत्री
सरकार अगर ऐसा कुछ करने पर विचार कर रही है तो उसे सभी लोगों से बात करनी चाहिए। मंदिर समिति, तीर्थ पुरोहित और अन्य सभी संगठनों से बात की जाए ताकि फिर से किसी तरह का कोई विरोध ना हो और सरकार की मंशा साफ होनी चाहिए। व्यवस्था बनाने के लिए सरकार को अब तक और भी कुछ कदम उठाने चाहिए थे क्योंकि इस बार की यात्रा बेहद चरमरा गई है। सरकार चार धाम यात्रा सुचारु करने में पूरी तरह फेल साबित हो रही है।
गणेश गोदियाल, मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष
इस सीजन की शुरुआत में रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालुओं के देवभूमि पहुंचने को भी हमारी सरकार ने चुनौती के रूप में लिया है। सरकार की यह गंभीरता एवं संवेदनशीलता सफल और सुरक्षित यात्रा प्रबंधन की कोशिशों में स्पष्ट दिखाई दे रही है। यात्रा शुरुआती दबाव के बाद अब सुचारू और नियोजित तरीके से आगे बढ़ रही है। जिस तरह यात्रा साल दर साल नित नए आयाम छू रही है, उसे देखते हुए नई रणनीति तैयार करने की जरूरत सभी महसूस कर रहे हैं। सदियों से चारधाम यात्रा देवभूमि की धरोहर है, लिहाजा इसको सफल व सुरक्षित बनाने के साथ इसकी भव्यता को लेकर भी अब काम करने की जरूरत है। एक ही संस्था के अधीन आने से यात्रा की व्यवस्थाएं काफी बेहतर होंगी और भविष्य में आने वाली चुनौतियों के लिए भी तैयारी किया जाना संभव होगा। हालांकि इस तरह की व्यवस्थाएं निर्मित करने के लिए सभी उत्तराखण्डवासियों का सहयोग जरूरी है। लिहाजा सभी पक्षों से बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुसार ही यात्रा प्राधिकरण को बनाया जाएगा।
मनवीर चौहान, प्रवक्ता भाजपा

