हिंद महासागर में स्थित छोटा सा दीप राष्ट्र मालदीव संग भारत के बेहद प्रगाढ़ ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक सम्बंध रहे हैं। 2018 में जब इब्राहिम मोहम्मद सोलिह यहां के राष्ट्रपति बने तो दोनों देशों के सम्बंधों में प्रगाढ़ता बढ़ी थी। मोदी सरकार की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत दोनों देशों के मध्य आपसी सहयोग इस दौरान परवान चढ़ा लेकिन जैसे ही गत् वर्ष घोर भारत विरोधी मोहम्मद मुइज्जू सत्ता में आए, दोनों देशों के रिश्ते खटाई में पड़ गए। चीन परस्त मुइज्जू अब लेकिन अपने देश की खराब होती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए भारत संग सम्बंध सुधारने की पहल कर रहे हैं। गत् सप्ताह उनका चार दिवसीय भारत दौरा इस दृष्टि से खासा सफल रहा है
भारत और मालदीव के रिश्ते बीते एक वर्ष से तनावपूर्ण चल रहे हैं जिसके चलते दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई। लेकिन भारत विरोधी रुख अपनाकर सत्ता में आए मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू हाल के महीनों में भारत से रिश्ते सुधारने के प्रयासों में लगे हैं। चीनी समर्थक माने जाने वाले मुइज्जू ने चार महीनों में दूसरा भारतीय दौरा किया है। हालांकि यह उनका पहला आधिकारिक चार दिवसीय दौरा है। 6 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक भारतीय दौरे पर आए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने कहा कि यह भारत की मेरी पहली आधिकारिक यात्रा है और मैं बहुत खुश हूं कि अपने कार्यकाल के पहले साल में ही मैं भारत आ सका, मालदीव और भारत के बीच संबंध हमेशा से मजबूत रहे हैं और मुझे विश्वास है कि यह यात्रा इसे और मजबूत करेगी।
इस यात्रा के दौरान उन्होंने मालदीव के हनीमाधू अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के न्यू रनवे का उद्घाटन किया गया। इसके अलावा दोनों देशों के मुखिया मालदीव में रुपए कार्ड से भुगतान की व्यवस्था के लांच के साक्षी भी बने रुपए कार्ड पेमेंट्स की पहली लेन-देन के गवाह भारतीय प्रधानमंत्री मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू बने। आने वाले समय में भारत और मालदीव यूपीआई के जरिए जुड़ जाएंगे। रुपए कार्ड भारत का स्वदेशी पेमेंट नेटवर्क है। इसका इस्तेमाल क्रेडिट, डेबिट और प्रीपेड कार्ड के जरिए ऑफलाइन और ऑनलाइन लेन-देन के लिए किया जाता है। दोनों देशों के बीच मुद्रा विनिमय से लेकर खेल क्षेत्र में सहयोग तक करार किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘मालदीव के थिलाफुशी में एक नए वाणिज्यिक बंदरगाह के विकास में भी भारत सहायता प्रदान करेगा।’
भारत आए मालदीव राष्ट्रपति के चार दिवसीय दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच मुद्रा विनिमय समझौते के अलावा भारत के राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय और मालदीव के राष्ट्रीय पुलिस और कानून प्रवर्तन कॉलेज के बीच समझौता ज्ञापन किया गया। भ्रष्टाचार रोकथाम और उससे निपटने में द्विपक्षीय सहयोग करने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और मालदीव के भ्रष्टाचार निरोधक आयोग के बीच समझौता ज्ञापन हुआ। मालदीव के न्यायिक अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को लेकर भारतीय राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (एनजेएआई) और मालदीव के न्यायिक सेवा आयोग (जेएससी) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया है। इसके अतिरिक्त भारत और मालदीव के बीच खेल और युवा मामलों में सहयोग को लेकर भी करार किया गया है।
मालदीव ने भारत के साथ अपने दीर्घकालिक भरोसेमंद संबंधों को प्राथमिकता देने का दावा किया है। अंग्रेजी दैनिक ‘दि टाइम्स ऑफ इंडिया’ को मुइज्जू द्वारा दिए गए साक्षात्कार के अनुसार चीन के साथ मालदीव के बढ़ते रिश्तों और उस पर भारत की चिंता को लेकर मालदीव के राष्ट्रपति ने कहा कि ‘अन्य देशों के साथ हमारे संबंध भारत के सुरक्षा हितों को कमजोर नहीं करेंगे। मालदीव भारत के साथ मजबूत और रणनीतिक संबंध बनाए रखेगा। दोनों देश अब एक-दूसरे की चिंताओं को बेहतर ढंग से समझते हैं और उनके बीच रक्षा सहयोग हमेशा पहले स्थान पर रहेगा।’ दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करते हुए मुद्रा अदला-बदली समझौते पर सहमति जताई है। इसके तहत भारत ने मालदीव को 40 करोड़ डॉलर की सहायता देने का फैसला किया है। साथ ही मालदीव को 3,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी । मुइज्जू ने कहा, ‘मैं 40 करोड़ डॉलर के द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली समझौते के अलावा 3,000 करोड़ रुपए के सहायता प्रदान करने के लिए भारत सरकार का आभारी हूं,यह विदेशी मुद्रा से जुड़े मुद्दों का हल करने में सहायक होगा।
मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू का यह दूसरा भारतीय दौरा है। ऐसे में सवाल उठा है कि आखिर क्यों मालदीव न केवल भारत के साथ अपने संबंध सुधार रहा है, बल्कि उन्हें दृढ़ करने के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा है। विदेशी मामलों के जानकार इसके पीछे मालदीव की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को बता रहे हैं। मालदीव का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 40 करोड़ डॉलर का ही रह गया है। जिससे सिर्फ डेढ़ महीने का ही खर्च चलाया जा सकता है। दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले मालदीव का पर्यटन क्षेत्र भी बेहद घाटे में चल रहा है। मुइज्जू के भारत विरोधी बयानों के चलते मालदीव का टूरिज्म सेक्टर पर बड़ा असर पड़ा है। ऐसे में पहले से ही कर्ज की मार झेल रहे मालदीव पर दबाव और बढ़ गया है। यही वजह है कि मुइज्जू ने भारत के लिए रवाना होने से पहले कहा था कि मालदीव आर्थिक संकट से जूझ रहा है ,भारत से उम्मीद लगाते हुए मुइजू ने कहा था कि हम आर्थिक संकट से निपटने के लिए भारत की मदद चाहते हैं और उम्मीद है कि भारत इसमें हमारी मदद करेगा।
चीन का मालदीव से रिश्ता भारत और मालदीव के आर्थिक, व्यापारिक और सुरक्षा संबंधों को प्रभावित करता रहा है। लेकिन इस बार मालदीव का झुकाव भारत की ओर अधिक देखने को मिला है। मुइज्जू ने अपने चार दिवसीय दौरे के दौरान चीन के संदर्भ में भारत-मालदीव रिश्तों को लेकर कहा कि मालदीव कभी कुछ ऐसा नहीं करेगा जिससे भारत की सुरक्षा को नुकसान पहुंचे। मुइज्जू ने कहा कि मालदीव अलग-अलग देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन वह इस चीज के लिए भी प्रतिबद्ध है कि उसकी गतिविधियों से क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता से किसी तरह का समझौता न हो। अपने चुनावी कैम्पों में इंडिया आउट का नारा देने वाले मालदीव के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत मालदीव का एक मूल्यवान साझेदार और दोस्त है और ये संबंध आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित है। मालदीव भारत के साथ मजबूत और रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाना जारी रखेगा और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेगा।
भारत मालदीव के मधुर रिश्तों के बीच कब आई खटास
भारत हर मुश्किल वक्त में मालदीव के साथ खड़ा रहा है। पड़ोसी प्रथम नीति में मालदीव का एक विशेष स्थान है। भारत और मालदीव के बीच 1965 में ही राजनयिक सम्बंध स्थापित हो गए थे। भारत ने 1988 में मालदीव में तख्तापलट को नाकाम किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2004 की सुनामी के समय भी भारत ने मालदीव की बड़ी मदद की थी। इसके अलावा साल 2014 में मालदीव में जल संकट के वक्त भी भारत सबसे बड़े मददगारों में से एक था। साल 2020 में भारत द्वारा खसरा वैक्सीन की 30 हजार डोज मालदीव को भेजी गई थी। जिससे पड़ोसी देश महामारी से निपट सका। कोविड के वक्त भी भारत ने मालदीव की मदद की थी। लेकिन दोनों देशों के रिश्तों में खटास तब आई जब पिछले साल नवंबर में सत्ता में आते ही मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव में मानवीय कार्यों के लिए लगे लगभग 90 भारतीय सैनिकों को वापस भारत भेजने की घोषणा कर दी थी। उन्होंने भारत से इस साल मई तक वहां तैनात अपने सैन्य कर्मियों को वापस लेने के लिए कहा था जिसके बाद भारतीय सैनिक वापस आ गए थे। चार दिवसीय दौरे पर आये मुइज्जू ने अपने इस फैसले को उचित बताते हुए कहा कि मालदीव के लोगों की इच्छा पर यह फैसला लिया गया था।
इसके बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को झटका तब और लगा जब मालदीव के तीन उप-मंत्रियों ने सोशल मीडिया पर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में विवादित टिप्पणी की। मालदीव की मंत्री मरियम शिउना समेत तीन नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थी। जिसके बाद भारत में आम लोगों और कई सेलिब्रिटी द्वारा मालदीव के प्रति नाराजगी जाहिर की गई। भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रुठलबवजजडंसकपअमे ट्रेंड चलाया गया। जिसके बाद मुइज्जू ने उन मंत्रियों को बर्खास्त करते हुए अपने भारत विरोधी रुख को कुछ नरम किया।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन समय में लक्षद्वीप का दौरा किया था। इस दौरे की तस्वीरें प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर डाली थीं। तस्वीरों को शेयर करते हुए मोदी ने लिखा था कि जो लोग रोमांच पसंद करते हैं उन्हें लक्षद्वीप जरूर आना चाहिए। इन टिप्पणियों के बाद मालदीव में भारतीय पर्यटक कम हो गए। खबरों के अनुसार इन तस्वीरों को देखने के बाद कई लाख लोगों ने गूगल पर अचानक से लक्षद्वीप को सर्च किया और सोशल मीडिया पर एक चर्चा यह छिड़ी कि अब लोगों को अपनी छुट्टी मालदीव की बजाय लक्षद्वीप में मनानी चाहिए। भारत से करीब दो लाख से ज्यादा लोग हर साल मालदीव की यात्रा करते रहे हैं। मालदीव में मौजूद भारतीय हाई कमीशन के मुताबिक साल 2022 में 2 लाख 41 हजार और 2023 में करीब 2 लाख लोगों ने मालदीव की यात्रा की। जब मालदीव की बजाय लक्षद्वीप जाने की चर्चाएं सोशल मीडिया पर तेज हुईं तो मालदीव की ओर से भी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हुईं। जिसमें में एक टिप्पणी मालदीव सरकार में मंत्री मरियम शिउना की भी थी। बाद में उन्होंने अपना एक ट्वीट डिलीट कर दिया। जानकारों का मानना है कि लक्षद्वीप और मालदीव विवाद के बाद मालदीव के पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका लगा था। मालदीव में भारतीय पर्यटकों की संख्या में बड़ी कमी आई थी। उसके बाद से ही मालदीव पर दबाव रहा कि वो भारत के साथ अपने संबंध सही करे।

