‘‘राज्य का एक बड़ा वर्ग लालू के डर से भाजपा को वोट करता है और भाजपा के डर से लालू को वोट देता आ रहा है। बिहार के लोग अब लालू यादव, नीतीश कुमार, भाजपा और कांग्रेस से बाहर निकल कुछ नया चाहते हैं। मैंने पार्टी नहीं बनाई है, बल्कि उन लोगों ने ये पार्टी बनाई है जो पिछले 30-35 सालों से विकल्प का अभाव महसूस कर रहे थे। मेरी भूमिका सिर्फ उस कुम्हार जैसी रही है जो मिट्टी और चाक इकट्ठा करता है। हमारा दल किसी भी एक व्यक्ति, परिवार, जाति, वर्ग से सम्बंधित न होकर सबका होगा। इस दल का मकसद नए बिहार का निर्माण करना है। पार्टी का नेतृत्व बारी-बारी से सभी जाति-समुदाय जैसे पिछड़ा-अति पिछड़ा, अनुसूचित जाति,अल्पसंख्यक व सवर्ण के हाथों में होगा। पार्टी का गठन बिहार को जाति-धर्म की राजनीति से मुक्ति दिलाने के लिए किया गया है ’’
बिहार विधानसभा चुनाव में लगभग एक साल का समय शेष है लेकिन सभी पार्टियों ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी जन सुराज पार्टी के नाम से अपना राजनीतिक दल गठित करने का ऐलान कर दिया है। पटना के वेटरनरी कॉलेज मैदान से उन्होंने यह घोषणा की है। इस मौके पर प्रशांत किशोर ने बिहार की जनता से कई बड़े वायदों के साथ ही राज्य की दुर्दशा को लेकर लालू यादव, नीतीश कुमार और बीजेपी को भी जमकर कोसा।
बिहार में प्रशांत किशोर द्वारा करीब दो साल से जन सुराज अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से राज्य में बदलाव की आकांक्षा रखते हुए पांच हजार किलोमीटर की पदयात्रा की गई। प्रशांत किशोर के जन सुराज अभियान ने 17 जिलों के पांच हजार पांच सौ गांवों में राजनीति को जिम्मेदार बनाने का संदेश दिया। प्रशांत किशोर के अनुसार राजनीतिक दलों की रीति-नीति ही राज्य की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार है। रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने पदयात्रा के जरिए प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने का काम किया और 2 अक्टूबर को नए राजनीतिक दल के गठन की घोषणा कर दी।
बकौल प्रशांत किशोर अगले दस सालों में बिहार को विकसित राज्य बनाने के संकल्प के साथ जन सुराज पार्टी की स्थापना की गई है। इस दल का कार्यवाहक अध्यक्ष मनोज भारती को बनाया गया है जो कि रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी हैं और अनुसूचित जाति से हैं। प्रशांत किशोर ने भले ही मनोज भारती का नाम कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर घोषित करते हुए उन्हें खुद से ज्यादा काबिल बताया हो लेकिन मनोज भारती राजनीतिक गलियारों में एक नया नाम है।
पटना में पार्टी की स्थापना के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि ‘पार्टी पिछले दो सालों से सक्रिय है और हाल ही में उनकी पार्टी को भारत निर्वाचन आयोग से स्वीकृति प्राप्त हुई है। निर्वाचन आयोग की स्वीकृति के साथ जन सुराज पार्टी अब आगामी बिहार विधानसभा चुनावों में सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पार्टी ने बिहार में अशिक्षा, रोजगार, पलायन, शराब बंदी, परिवारवाद, आर्थिक विकास, जातिवाद की राजनीति से छुटकारा जैसे विषयों को मुद्दा बनाया है।’
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रशांत किशोर द्वारा उठाए जा रहे मुद्दे वाजिब हैं। लेकिन लोगों ने उन पर कितना भरोसा किया है इसकी पहली झलक अगले महीने नवंबर में होने वाले रामगढ़, बेलागंज, इमामगंज और तरारी विधानसभा सीट के उपचुनाव में देखने को मिल सकती है। जुलाई में प्रशांत किशोर द्वारा जब इस पार्टी को बनाने का फैसला लिया गया था तो उस दौरान घोषणा की गई थी कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में बिहार की सभी 243 सीटों पर उनकी पार्टी चुनाव लड़ेगी।
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर 2025 में कराए जा सकते हैं। जन सुराज पार्टी का मुख्य एजेंडा बिहार में व्यापक सुधार और विकास पर केंद्रित है जिसमें शिक्षा, आर्थिक नीतियां और सामाजिक मुद्दे प्रमुख हैं। शिक्षा में सुधार को लेकर पार्टी का सबसे बड़ा एजेंडा बिहार की शिक्षा प्रणाली को विश्वस्तरीय बनाना है। प्रशांत ने राज्य की शिक्षा में सुधार के लिए अगले दशक में 5 लाख करोड़ रुपए निवेश की बात कही है। इसके अलावा जन सुराज पार्टी के एजेंडे में शराबबंदी का मुद्दा भी प्रमुख है। प्रशांत ने बिहार में शराबबंदी से होने वाले राजस्व नुकसान (सालाना करीब 20,000 करोड़ रुपए) की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका प्रस्ताव है कि जब शराबबंदी हटाई जाएगी तो इस पैसे को शिक्षा सुधार के लिए उपयोग किया जाएगा। वहीं अपने एजेंडे के तहत पार्टी बिहार की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए योजनाएं बनाएगी जो राजस्व बढ़ाने और विकास परियोजनाओं को वित्तपोषित करने पर केंद्रित होंगी। हालांकि सत्तारूढ जद (यू) का कहना है कि बिहार में शराबबंदी से लाखों लोगों की खुशियां लौटी हैं। जनसुराज पार्टी यह भी दावा कर रही है कि वह गवर्नेंस में सुधार और पारदर्शिता भी लाएगी। कहा यह भी जा रहा है कि जातिवाद की राजनीति को तोड़ते हुए प्रशांत किशोर द्वारा एक दलित को नेतृत्व थमाने का समाजिक मंथन होगा। जिसका दूरगामी असर हो सकता है। जन सुराज द्वारा बिहार में राजनीतिक माहौल बदलने के प्रयासों के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय पासवान प्रशांत किशोर और जन सुराज पार्टी के मुरीद हो गए हैं। उनके कहने अनुसार जीतन राम मांझी को छोड़ दें तो बिहार में पिछले 35 साल पिछड़ी जाति से ही मुख्यमंत्री बन रहे हैं। बिहार में 19 फीसदी आबादी दलित की है। अब दलित या महादलित से मुख्यमंत्री बनाने का समय आ गया है। पिछले महीने भी संजय पसावन ने दलित मुख्यमंत्री का मुद्दा उठाया था और कहा था कि बीच की जातियों को काफी समय और मौका मिल चुका है।
प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि हर युवा को राज्य में रोजगार दिया जाएगा। बुजुर्गों को प्रति माह 2,000 रुपए की पेंशन दी जाएगी। इसके अलावा महिलाओं को व्यवसाय करने के लिए 4 प्रतिशत ब्याज पर पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। पार्टी ने बिहार के किसानों को पेट भरने वाली खेती से कमाऊ खेती की तरफ ले जाने का दावा किया है। प्रशांत किशोर के कहने अनुसार जनसुराज देश का पहला ऐसा दल है जो राइट टू रिकॉल लागू करेगा और उनके दल में जनता ही अपने उम्मीदवारों का चयन करेगी।
जनसुराज अभियान को एक राजनीतिक दल घोषित करने के मौके पर प्रशांत किशोर ने ‘जय बिहार’ से अपनी बात की शुरुआत करते हुए बिहारियत का स्वाभिमान जगाने की कोशिश की और व्यवस्था परिवर्तन का संकल्प लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रशांत किशोर के रूप में विकल्प मिलने के बाद लोग बदलाव चाहेंगे। जैसा कि जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर का कहना है कि ‘राज्य का एक बड़ा वर्ग लालू के डर से भाजपा को वोट करता है और भाजपा के डर से लालू को वोट देता आ रहा है। बिहार के लोग अब लालू यादव, नीतीश कुमार, भाजपा और कांग्रेस से बाहर निकल कुछ नया चाहते हैं। मैंने पार्टी नहीं बनाई है, बल्कि उन लोगों ने ये पार्टी बनाई है जो पिछले 30-35 सालों से विकल्प का अभाव महसूस कर रहे थे। मेरी भूमिका सिर्फ उस कुम्हार जैसी रही है जो मिट्टी और चाक एकट्ठा करता है।
हमारा दल किसी भी एक व्यक्ति, परिवार, जाति, वर्ग से संबंधित न होकर सबका होगा। इस दल का मकसद नए बिहार का निर्माण करना है। पार्टी का नेतृत्व बारी-बारी से सभी जाति-समुदाय जैसे पिछड़ा-अति पिछड़ा, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक व सवर्ण के हाथों में होगा। पार्टी का गठन बिहार को जाति-धर्म की राजनीति से मुक्ति दिलाने के लिए किया गया है।’ कई मौकों पर प्रशांत किशोर साफ कह चुके हैं कि उनका मकसद पार्टी का अध्यक्ष बनना या इसको अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए प्रयोग करना नहीं है। राजनीतिक दल बनने के बाद भी वह अपनी पदयात्रा करते रहेंगे।
कई दलों के रणनीतिकार रह चुके हैं पीके संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) फंड स्कीम में नौकरी करने से लेकर चुनावी रणनीतिकार तक का सफर तय करने वाले पीके जन सुराज के सूत्रधार हैं। कई दलों के लिए रणनीति बना चुके प्रशांत किशोर अब अपने जन सुराज दल के लिए रणनीति बना रहे हैं। पीके नीतीश कुमार की पार्टी के साथ छोटी ही सही पर सियासी पारी खेल चुके हैं। प्रशांत किशोर का जन्म बिहार के रोहतास जिले के कोनार गांव में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई बक्सर और इंजीनियरिंग उन्होंने हैदराबाद से की। इसके बाद बतौर स्वास्थ्य विशेषज्ञ संयुक्त राष्ट्र संघ की करीब आठ साल लंबी नौकरी के बाद प्रशांत किशोर ने साल 2011 में चुनावी रणनीतिकार के रूप में एक नए सफर की शुरुआत की। साल 2011 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े। नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक के सफर का क्रेडिट प्रशांत किशोर की रणनीति को ही दिया गया। इसके बाद से प्रशांत किशोर की रणनीति भारतीय राजनीति में एक ब्रांड की तरह हो गई।
गौरतलब है कि पीके ने साल 2013 में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी बनाई और साल 2014 में सिटीजन फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस की स्थापना की। साल 2014 के आम चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत से प्रशांत किशोर को चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान मिली। प्रशांत किशोर ने भाजपा के अलावा जेडीयू, आरजेडी गठबंधन से लेकर तृणमूल कांग्रेस तक अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ भी काम किया है। 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में पीके ने आरजेडी-जेडीयू-कांग्रेस के महागठबंधन के लिए चुनावी रणनीतिकार की भूमिका निभाई और उन्हें जीत तक पहुंचाया भी। इसके अलावा उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए काम किया और कांग्रेस जीत के साथ सरकार बनाने में सफल रही। साल 2019 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के लिए रणनीति बनाने का जिम्मा भी प्रशांत किशोर को दिया गया और जगन मोहन रेड्डी सूबे की सत्ता के शीर्ष पर काबिज होने में सफल रहे। पीके को 2021 के पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की जीत का भी शिल्पकार माना गया। पीके ने नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के साथ एक्टिव पॉलिटिक्स में डेब्यू किया था।
पीके 16 सितंबर 2018 को जेडीयू में शामिल हुए थे और अक्टूबर महीने में पार्टी ने उनको राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया था। एक समय नीतीश के उत्तराधिकारी के रूप में भी उनके नाम की चर्चा थी लेकिन 29 जनवरी 2020 को जेडीयू ने पीके को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पीके ने जेडीयू से निकाले जाने के बाद साल 2020 में ही लोगों की राजनीतिक जागृति के लिए जन सुराज अभियान शुरू किया। उन्होंने 2 अक्टूबर 2022 को गांधी आश्रम भितिहरवा से जन सुराज पदयात्रा की शुरुआत की थी। प्रशांत किशोर बतौर चुनावी रणनीतिकार 2020 के दिल्ली चुनाव में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी, 2021 के तमिलनाडु चुनाव में एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके सहित पक्ष-विपक्ष के दलों के साथ काम कर चुके हैं।

